तारा सिंह की सराहना होनी चाहिए
रविंदर सिंह मोदी
भारतीय जनता पार्टी के विधायक तारा सिंह की सचमुच सराहना की जानी चाहिए कि वह सही मायने में असली नेता है और दांव - पेच में उसका कोई सानी नहीं हैं. तारा सिंह में किसी को भी झिड़ककर दूर कर देने और जरुरत पड़ी तो उसको बाप बनाकर गोदी में बिठा लेने की महान कला अंतर्भूत हैं. ऐसी कला अनुभव से और उम्र घिसने के बाद अवगत होती है. तारा सिंह अनुभवी है, साठ सालों से वह आरएसएस, जनसंघ और बाद में भाजपा से जुड़ा हुआ हैं. नगर सेवक से विधायक तक पहुंचा हैं. तीन बार चुनकर आया है फिर भी उसने भाजपा सरकार से मंत्रिपद नहीं लिया हैं. उसने बस हजूर साहिब गुरुद्वारा की सत्ता मांगी और उसकी झोली में वो आ गिरी. क्योंकि मुख्यमंत्री से लेकर मंत्रालय के दरबान तक सभी को झुककर सजदा करने की शिद्दत इस नेता में है.
इस हुनरबाज नेता की दबंगाई तो देखों कि संगत और मेंबर साहिबान के विरोध के बावजूद उसने गुरुद्वारा सचखंड हजूर साहिब मंडल (बोर्ड) की मीटिंग मुंबई के खालसा कॉलेज में लेकर हजूर साहिबवालों को बड़ी टक्कर दी है. यही नहीं बोर्ड के सेक्रेटरी पद से भागिन्दर सिंह घड़ीसाज और प्रवक्ता पद से सरजीत सिंह गिल को हटाकर उसने ये जता दिया कि किसी को "यूज़ एंड थ्रो" कैसे करते हैं. अब तारासिंह के हाथ वोही पुरानी सामग्री है देखें कब तक उसका वह "यूज़" करता है. और जिन्होंने उसे सहायता की है वे तारा सिंह का कैसा "यूज़" करते हैं.
तारा सिंह सचमुच मास्टर आदमी है. उसके पास लोगों को पास बुलाने और दूर भगाने का खूब हुनर है. सौदेबाजी और सांठगांठ में वो सचमुच सभी का बाप कहलाता है. उदहारण के लिए, उसने कुछ समय पहले शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमिटी के चार मेंबर साहिबान को बोर्ड के मेंबर पद से बर्खास्त करने की सरकार से सिफारिश की थी. देखिये शिरोमणि के वो मजबूर मेंबर कैसे दौड़े - दौड़े उसकी मीटिंग पूरी करने के लिए पहुँच गए.
सचमुच तारा सिंह बहुत काबिल आदमी हैं. उसकी काबिलियत ऐसी है कि वो कह रहा है कि मैं भाजपा सरकार का विधायक हूँ, सरकार के किसी निर्णय के खिलाफ मैं जा नहीं सकता. इसलिए समय देखकर मुख्यमंत्री से निवेदन करूँगा कि वे एक्ट में संशोधन ना करे. यह संशोधन प्रस्ताव आया कहा से? उस विषय को वो बड़ी काबिलियत से छुपा गया.
महाराष्ट्र सरकार ने हाल ही में विधान सभा के सत्र में गुरुद्वारा तखत सचखंड श्री हजूर अपचलनगर साहिब बोर्ड कानून १९५६ में संशोधन करने का निर्णय लिया था और उसे विधान सभा का नागपुर सत्र में लाया भी था कि निर्णय करे. लेकिन चर्चा हो नहीं पाई. महाराष्ट्र सरकार को शायद ख्याब आया था कि जबरन गुरुद्वारा बोर्ड में बाहर के छह मेंबर बढ़ा दिए जाये. तारा सिंह के नाम से स्पष्ट प्रस्ताव हैं कि कोरम पूरा करने करने लिए उसे छह मेंबर की जरुरत हैं. लेकिन वो बड़ी कुशलता से संगत को यह दर्शाना चाह रहा हैं कि मैंने जत्थेदार साहिब और पंजप्यारे साहिबान के पत्र का सम्मान कर संशोधन ना हो यह कोशिश कर रहा हूँ. हैं न ये काबिल आदमी ? इस काबिल आदमी ने अपनी मीटिंग का कोरम पूर्ण करने के लिए उनको पास बुला लिया जिनको बोर्ड के सेक्रेटरी पद से हटा दिया था। उन्हें दुबारा बुलाकर सेक्रेटरी बनाकर तारा सिंह ने सभी काबिल लोगों को अपने पास एकत्रित कर लिया हैं.
तारा सिंह सचमुच गुणी नेता है. बाहर भले ही वो अपने काम निकलवाने के लिए "साम दाम दंड भेद " अच्छे से उपयोग करता है. लेकिन नांदेड़ में चल रहे आंदोलन को दबाने के लिए शिवसेना के बड़े नेताओं से स्थानिक शिवसेना पदाधिकारियों से फ़ोन करवाता है. तारा सिंह भाजपा का ईमानदार नेता है देखिये गुरुद्वारा बोर्ड में कैसे सिर्फ कांग्रेस की मंडली को लेकर कुशल राजनीति कर रहा है. पता नहीं वो अपनी कुशलता से कब गुरुद्वारा बोर्ड का अधिग्रहण भी करवा दे और हमारे छोटे पदों की लालच में उसका साथ दे दे.
ऐसे होनहार तारा सिंह की आज सराहना करने को मन कर रहा है. हजूर साहिब लोगों को यह बहुत कुछ सिखा सकने का मादा रखता है. जिनको नैतिकता के आधार पर कुछ हासिल नहीं हो रहा हैं वे तारा सिंह से सबकुछ सिख सकते हैं. यदि आपको गुरु घर का सरकारीकरण करवाना है तो उसकी भी कला तारा सिंह को अवगत है. आपके बार जब तारा सिंह मिले तो उससे इन गुणों के बारे में जरूर पूछियेगा. उससे यह भी पूछिएगा कि भाई बगैर अमृत छके भी तू अपनी मूछों को इतने अच्छे से ताव कैसे देता है? तारा सिंह से बहुत कुछ सीखा जा सकता हैं. अब नए स्टूडेंट उससे क्या सिखते हैं यह उनपर निर्भर करेगा.































