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सोमवार, 24 जनवरी 2022

 डेली वेजस कर्मचारियों पर टेढ़ी नज़र? 

गुरुद्वारा बोर्ड प्रशासन अब कर्मचारियों पर दुश्मनी निकालने की फिराक में !

जब से गुरुद्वारा सचखंड बोर्ड में कार्यरत डेली वेजस अथवा अस्थाई कर्मचारियों द्वारा सेवा में पक्का (पर्मनंट) करने की मांग उठाई गई हैं. तब से बोर्ड के कर्ताधर्ता बहुत अस्वस्थ दिखाई दे रहें हैं. कर्मचारियों के प्रति अचानक से बोर्ड प्रशासन का रवैया बदल सा गया हैं. कभी यूनिफार्म को लेकर तो कभी अन्य विषय के नोटिस जारी कर कर्मचारियों के साथ एकदम से कार्यालयीन व्यवहार में रुखाई अपनाई जा रहीं हैं. कर्मचारियों के प्रति रोष का साफ चित्रण यहाँ देखने को मिल रहा हैं. कुछ डेली वेजस कर्मचारियों पर बोर्ड प्रशासन की खास नज़र हैं. जी हाँ ! टेढ़ी नज़र !! उन कर्मचारियों को अगाह करना उचित होगा जिन्होंने हाल ही में अस्थाई कर्मचारियों को सेवा में पक्का करने की मांग लेकर पहल शुरू की थीं. पिछले दिनों डेली वेजस कर्मचारियों का एक समूह, कर्मचारियों को "सेवा में पक्का" करने की एक जायज मांग लेकर सम्मानीय जत्थेदार साहब संतबाबा कुलवंतसिंघजी, संतबाबा बलविंदरसिंघजी कारसेवावाले बाबाजी, बोर्ड के सभी मेंबर साहिबान से गुहार लगा चूका हैं. जब से डेली वेजस कर्मचारियों ने इस मांग को लेकर बोर्ड प्रबंधन के सामने मोर्चा खोला है, तब से गुरुद्वारा बोर्ड के सुपरिन्टेन्डेन्ट (समय समय के प्रभारी) द्वारा नोटिस जारी करने का सिलसिला शुरू किया गया हैं. यह किसके इशारों पर हो रहा हैं खुलासे की जरुरत नहीं रह जाती. जाहीर स. भूपिंदर सिंघ मिनहास तो इस तरह का द्वेष भरा निर्णय अचानक लादने की भूमिका नहीं अपना सकते. इस तरह का "समन्वय" लोकल होने का संदेह उठ रहा हैं!

यहाँ जारी चर्चा में ज्ञात हुआ है कि बोर्ड प्रबंधन द्वारा अब अचानक से कर्मचारी ड्यूटी पर उपस्थित हैं कि नहीं, उसकी जाँच (चेकिंग) हेतु पेट्रोलिंग बढ़ा दी गईं हैं. रात के समय जाकर कर्मचारियों को चेक किया जा रहा हैं. छूटिया देने में आनाकानी की जा रहीं हैं ! मेडिकल बैकराउंड के बावजूद भी लीव सेंक्शन नहीं की जा रहीं हैं ! कोशिश यह की जा रहीं हैं कि कोई डेली वेजस कर्मचारी मामूली गलती में फंस जाए और उसका बहाना बना कर उन्हें नोटिस दी जाए, निलंबित किया जाए या सेवा ख़ारिज की जाए....आदि. चलो यह भी ठीक हुआ कि ढिलाई की गर्त में डूबे बोर्ड प्रबंधन को आखिर जाग तो आई ! कर्मचारी वर्दी में आने चाहिए यह यकायक से उनके चाणाक्ष प्रशासन को साक्षात्कार हो ही गया. शुक्र है डेली वेजस कर्मचारियों ने बोर्ड को जगा तो दिया. इस तरह के नोटिस पहले कब जारी हुए थे और उन पर बाद में कितना अमल हुआ अथवा नहीं हुआ इसका मूल्यांकन प्रधान साहब को कर लेना चाहिए. 

यह बात सही हैं कि, कर्मचारियों से आठ घंटे काम लेना यह बोर्ड प्रशासन का अधिकार बनता हैं. लेकिन सभी कर्मचारियों से. ना कि कुछ कर्मचारियों से, जिनसे दुश्मनी की भावना निकालनी हो. बोर्ड की सत्ता के स्वामियों ने अपने गीने - चुने लोगों को इस तरह के नोटिस के नियमों से सुरक्षित रखने व्यवस्था स्वयं लागु की हुईं हैं. पिछले दिनों की बात है, जब गुरुद्वारा सचखंड बोर्ड का सामूहिक विवाह मेलावा संपन्न हुआ था. तब श्री गुरु ग्रन्थसाहिब जी भवन के बाहर जोड़ा घर पर बोर्ड द्वारा एक भी कर्मचारी नियुक्त नहीं किया गया था. जिससे बोर्ड प्रबंधन की जागरुकता खुलकर उजागर हो जाती है. 

कहने का तात्पर्य यह कि डेली वेजस पर कार्यरत बोर्ड कर्मचारियों के प्रति दुर्भावना अपनाना योग्य नहीं होगा. जो कर्मचारी भाई - बहन पांच से छह सालों से अस्थाई कर्मचारी के रूप में सेवा दे रहें हैं, उनका अधिकार बनता हैं कि उन्हें सेवा में पक्का किया जाए. पिछले तीन सालों से कर्मचारियों की मांगों को कुचला जा रहा हैं. कुछ कर्मचारी जो अपनी बढ़ती उम्र में भी पक्का होने के पूर्ण दावेदार थे, उनके साथ कितनी ज्यादती पेश हुईं हैं स्वयं सोचिये. समय और उम्र रुकने वाली तो हैं नहीं ! जिन्हें प्रमोशन मिलना चाहिए था, उन्हें समय पर प्रमोशन दिया नहीं गया हैं. कितनों को हुआ होगा आर्थिक नुकसान!

फिर बोर्ड प्रशासन ने तीन सालों में क्या किया हैं? सिर्फ कर्मचारियों का हक मारा हैं? सिर्फ तबादलों का खेल खेला हैं? सालों से निलंबित कर्मचारियों की फाइलें धूल खा रहीं हैं ! उन फाइलों का करना क्या है सुपरिन्टेन्डेन्ट साहब और अमला विभाग द्वारा मा. प्रधान साहब का लिखित अभिप्राय तो मंगवाते कि क्या किया जाए? बोर्ड के प्रलंबित विषयों का सरोकार बोर्ड के प्रधान साहब और सुपरिन्टेन्डेन्ट पर निर्भर करता हैं. तीन सालों में कुछ नहीं किया तो फिर किया क्या हैं? "साहब लोग" सोच लें कि उनके कार्यकाल में क्या अच्छा हुआ और किन विषयों की लापरवाही हुईं हैं. आने वाले डेढ़ माह में इस बोर्ड की अवधि पूर्ण हो जाएगी. बोर्ड कर्मचारियों को सेवा में पक्का करने की उपलब्धि किसके नाम चढ़ेगी यह देखना हैं. चुनाव के मेनूफेस्टो जिन्होंने बनाकर साधसंगत में बटवाएं थे, वें भी गौर करें इन विषयों पर कभी !  

रविंदरसिंघ मोदी 



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