मुंबइया लोगों को भर्ती कर ४० हजार वेतन दिया जायेगा !!
बोर्ड मीटिंग में चर्चा नहीं, लेकिन प्रोसेडिंग में मुद्दा शामिल कैसे हुआ?
रविंदर सिंह मोदी
हजूरसाहिब - गुरुद्वारा सचखंड बोर्ड के प्रधान तारासिंह कितने दखनी विरोधी विचारधारा से ओतप्रेत हैं उसका जीता-जागता सबूत यह है कि उन्होंने अपने मुंबइया रिश्तेदारों को गुरुद्वारा बोर्ड में सीधी नौकरियां देकर ४० से ६० हजार का वेतन देना तय भी कर लिया है. मार्च २०१८ में मुंबई में हुई गुरुद्वारा बोर्ड की मीटिंग में कोई जिक्र नहीं किया गया लेकिन सिक्योरिटी ऑफिसर और पीआरओ को भर्ती करने का मुद्दा मीटिंग की प्रोसेडिंग में शामिल कर लिया गया. दो लोगों को ४० हजार वेतन पर लेने का निर्णय बाद में शामिल कर लिया गया. इससे पहले सोलह देशों की सैर कर आये करोड़पति रिश्तेदार लाम्बा को सभी सुविधाओं के अतिरिक्त ६० हजार महीना वेतन दिया जा रहा है, ताकि वो अच्छे से म्यूजियम का बजट बढ़ा सके. समाज में तारासिंह की इस नीति का खुला विरोध हो रहा है. हजूर साहिब में इतने बेरोजगार और काबिल लोग रहते हुए भी मुंबई से यहाँ कर्मचारियों की भर्ती के क्या मायने है? क्या मुंबई में बैठकर नौकरियों का भी कारोबार चल रहा है? यदि ऐसा है तो आपके तीन सालों के कामकाज की इन्क्वायरी (चौकशी) होनी चाहिए. तीन सालों में क्या-क्या खर्च किया गया और कर्मचारियों को योग्यतानुसार प्रमोशन नहीं देने के पीछे क्या कारण रहे हैं उन बातों का भी खुलासा होना जरुरी हैं. और भी ऐसी बातें हो सकती है कि मीटिंग में चर्चा नहीं हुई हो मगर दिल लगाकर खर्चा हुआ हो?
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