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मंगलवार, 26 जून 2018

२८ जून को धरना आंदोलन 
क्या चाहते हैं हजुरसाहिब के लोग? 
रविंदर सिंह मोदी 
अजब लोग हैं जिन्हें सामाजिक और सामूहिक लाभ नज़र नहीं आ रहा हैं. समाज से अधिक व्यक्तिगत लाभ पाने की अधिकतर लोगों की मंशा है. वहीं कुछ देखनी भाई गुरुद्वारा बोर्ड के प्रधान तारासिंह के "मिशन अमेंडमेंट" को लाभ पहुंचाने के सारे उद्योग करते दिखाई दे रहे हैं. ऐसे में ता. २८ जून, २०१८ को नांदेड़ के जिलाधीश कार्यालय के सामने हजूरी विकास मंच के धरना कार्यक्रम को प्रभावित करने प्रयास हो सकते हैं. कुछ लोगों ने नासमझी और गैरों के प्रति वफ़ादारी का परिचय देने के लिए तिकड़म लड़ाना शुरू कर दिया है. यदि गुरुद्वारा तखत सचखंड बोर्ड संस्था के कानून में भारतीय जनता पार्टी और शिवसेना की मिली जुली सरकार मिलकर संशोधन करती है, और मुंबई, पुणे, नासिक, नागपुर और औरंगाबाद के सिंघसभा गुरुद्वारों से सदस्य नियुक्ति का निर्णय लिया जाता है तो उसके लिए सीधे तौरपर वही लोग जिम्मेदार होंगे जो तारासिंह के संकेतों पर यहाँ काम कर रहे हैं. कहना न होगा कि, उनकी वफ़ादारी श्री गुरु गोबिंदसिंघजी की नगरी और यहाँ के सिखों के लिए नहीं बल्कि बोर्ड का सरकारीकारण करनेवालों के साथ है. जो लोग आज गुरुद्वारा बोर्ड कानून में सम्भाव्य संशोधन को लेकर गंभीर नहीं है उनके लिए यही कहा जा सकता हैं कि वे संशोधन के पक्षधर है. वो लोग स्वयं चाह रहे हैं कि गुरुद्वारा बोर्ड संस्था पर बाहर के लोग आकर प्रशासन करें. कुछ लोग अभी भी एक नहीं होना चाह रहे हैं. यदि ऐसा नहीं है तो २८ जून को ११. बजे जिलाधीश कार्यालय के सामने जुटकर एक्ट अमेंडमेंट का विरोध दर्ज करें.   

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