समझ लीजिए,
दखनी संगत के हाथ से गुरुद्वारा बोर्ड चला गया!
रविंदर सिंह मोदी
बुधवार, २७ जून, २०१८ की तारीख अच्छी तरह से याद रख लीजिये दखनी हजूरी साध सांगत जी, क्योंकि यहीं वो तारीख है जिसने गुरुद्वारा बोर्ड की सत्ता हमेशा हमेशा के लिए हमसे छिन ली है. अब केवल गुरुद्वारा दर्शन कीजिये और घर लौट जाइये. जो कर्मचारी हैं , उन्हें तो सीट पर जो बैठा हो उसी की गुलामी करनी है इसलिए अब आगे क्या कहे.
महाराष्ट्र सरकार ने गुरुद्वारा बोर्ड कानून की धारा ६ (१) में एक बार फिर संशोधन करते हुए अलग - अलग शहरों के प्रतिनिधि बढ़ाने के उद्देश्य से अब मनोनीत संख्या दो से बढाकर आठ कर दी है. हजूरी सिखों के तीन सीटों के चुनाव होंगे.
सरकार ने ये संशोधन किसके कहने पर किया यह खुलासा होने जरुरी है. गुरुद्वारा बोर्ड के प्रधान कुछ भी कहने के लिए तैयार नहीं है. तारासिंह की चुप्पी में ही बहुत कुछ छुपा हुआ है. सरकार ने हमारा बोर्ड अब मुंबई बाहर के शहरों के सिखों के नाम कर दिया है. मुख्यमंत्री को ये अधिकार किसने दिया है कि वर्षों पुरानी इस संस्था पर बाहर के लोग लाद दे. हमारे कुछ अपने लोगों ने जो भूमिका निभाई है वो शर्मसार करनेवाली है. दखनी समाज की सभी कुर्बानियों को आज तिलांजलि मिली हैं. अब आपका गुरुद्वारा आपके हाथ से निकल गया है समझों. अब शौक से लड़िये कोई छुड़ाएगा नहीं. मेंबर बनिए, प्रधान बनिए..... मेरी शुभकामनाएं.
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