ये ख़ामोशी चूभती हैं..!
रविन्दरसिंघ मोदी
सभी खामोश हैं. सबके जज़्बात धीरे-धीरे शांत हो गए हैं. सब एक-दूसरे पर निर्भर हैं कि कोई कुछ करेंगा. कुछ दिन ख़ामोशी का वातावरण रहेगा. कुछ दिनों बाद आयेगा चुनावों का माहौल और सब उसमे डूब जाएंगे. किसी को याद भी नहीं रहेगा कि गुरुद्वारा सचखंड श्री हजूर अबचलनगर साहिब बोर्ड के कानून में जबरन संशोधन भी किया गया है.
स्थानीय सिख समाज का ये बर्ताव, ये बेलगाव संवेदनाहीन है. समाज के एक बड़े वर्ग की ख़ामोशी चूभ रही है. ये समाज कब तक खामोश रहेगा? कब तक अन्याय और परतंत्र को बर्दाश्त करता रहेगा? हमें नुमाइंदगी कब मिलेगी? हम कब एक दूसरे पर विश्वाश करने लगेंगे? युवा पीढ़ी कब तक दिशाहीन भटकेगी? यदि यही हाल रहा समाज का तो कोई भी आंदोलन जीता नहीं जा सकता. कोई भी सामाजिक ध्येय पूर्ण नहीं हो सकता ये अनुभव से कह रहा हूँ.
मैं सभी साध संगत जी और नौजवानों से खुला संवाद करना चाह रहा हूँ कि हमारे वर्तमान पर कितना बड़ा खतरा मंडरा रहा है. हमारा सिख समाज और समाज की धरोहर गुरुद्वारा तखत सचखंड श्री हजूर अबचल नगर साहिब ये पवित्र पवन स्थल और गुरुद्वारा बोर्ड अब षड्यंत्रकारियों के सीधे निशाने पर है. हमारी विरासत और आश्रयस्थल गुरुद्वारा तखत सचखंड हजूर साहिब बोर्ड पर बुरी नज़र पड़ गई है. हर कोई इस पर कब्ज़ा करने को उतावला हैं. सरकार उन्ही मिलकर अपने मनसूबे पूर्ण कर करने की देहलीज पर है. क्या कर लोगें जो बोर्ड (मैनेजमेंट) पर कब्ज़ा हो जायेगा. इन शातिरों के सामने आपकी कुछ न चलेगी. आपकी नुमाइंदगी कोई काम नहीं आएगी. नुमाइंदे का भी कद खो जायेगा. कुछ भी साबूत नहीं बचेगा यहाँ सिवाय चमचागिरी और लाचारी के. हजूर साहिब का हर सिख (पुरुष या स्त्री) तय कर लें कि वें कब तक खामोश रहेंगे?

कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें