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मंगलवार, 10 जुलाई 2018

अब संतों ने भी गुहार लगाई 
मुख्यमंत्री जी संशोधन पीछे लें 
रविंदर सिंघ मोदी 
हजूर साहिब नांदेड़ में विगत दो सप्ताह से साध संगत में गुरुद्वारा बोर्ड कानून १९५६ में बदलाव किये जाने से असंतोष व्याप्त हैं. साधसंगत ने तो संशोधन को विरोध जताया ही है साथ ही आदरणीय पंजप्यारे साहिबान ने भी उस विषय में संज्ञान लेकर मुख्यमंत्री से कानून संशोधन पीछे लेने की अपील की है.  वहीं गुरुद्वारा लंगर साहिब के मुखी संत बाबा नरिंदरसिंघजी कारसेवा वाले और संत बाबा बलविंदरसिंघजी कारसेववाले द्वारा तारीख १० जुलाई, २०१८ को महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री श्री देवेंद्र फडणवीस को पत्र लिखकर कानून में हुए संशोधन को पीछे लेने की अपील की है. उन्होंने आदरणीय पंजप्यारे साहिबान के पत्र का हवाला लेकर निवेदन में कहा है कि नांदेड़ की शांति कायम रखीं जाए. बेवजह कानून संशोधन करना योग्य नहीं है. निवेदन पत्र की प्रतियां महाराष्ट्र के राजस्व मंत्री चंद्रकांत पाटिल, राजस्व विभाग के प्रधान सचिव, नांदेड़ के जिलाधीश और गुरुद्वारा बोर्ड के प्रधान को भेजी गई हैं. संतों ने भी एक तरह से प्रधान तारासिंह द्वारा किये गए जबरन संशोधन और बाहर के छह सदस्य बढ़ाने के निर्णय का विरोध जताया है. यदि यह देखकर भी तारासिंह संशोधन पीछे लेने की घोषणा जाहिर रूप से नहीं करता है तो उसके जैसा खुरापति और दखनी विरोधी प्रधान कोई और नहीं हुआ है. इतने विरोध के बाद भी तारासिंह का जमीर नहीं जागा और उसने संशोधन पीछे लेने की घोषणा सार्वजनिक नहीं की. पंजप्यारे साहिबान के पत्र और अपील के बाद भी उसने कोई स्पष्टीकरण नहीं दिया और ना प्रेस रिलीज ही जारी करवाया हैं. अब जब हजूर साहिब के दो सेवाभावी संतों ने इस विषय में मांग की है तो क्या तारासिंह का जमीर जागेगा?  क्या तारासिंह समीकरणों से बाहर निकलकर ये घोषणा करेंगा कि वो संतों की अपील की परवाह करता है? यदि तारासिंह द्वारा अगले ४८ घंटों में हजूर साहिब की संगत से माफ़ी मांगकर संशोधन पीछे लेने की स्वयं घोषणा नहीं करता है तो गुरुद्वारा बोर्ड के कार्यालय के सामने मजबूरन आंदोलन शुरू करना पड़ जायेगा. 

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