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शनिवार, 14 नवंबर 2020

 सोमवार को खुल जायेंगे सभी धार्मिक स्थल 

मुख्यमंत्री ने कहा "त्रासदी से बचना स्वयं की जिम्मेदारी"

महाराष्ट्र में आगामी सोमवार (ता. 16-11-20) से सभी धार्मिक स्थल शुरू हो जायेंगे. मुख्यमंत्री श्री उद्धव ठाकरे ने आज यह घोषणा करते हुए सतर्क भी किया कि, किसी भी संक्रमण या त्रासदी से बचने के लिए लोगों को स्वयं सावधानी बरतनी होंगी. उल्लेखनीय हैं कि गत ता. 23 मार्च 20 से महाराष्ट्र में लॉकडाउन लागु किया गया था. जिसके बाद धार्मिक स्थलों को भी बंद रखने के आदेश जारी हुए थे. आठ से नौ माह बाद अब धार्मिक स्थल पूर्णरूप से खोले जायेंगे. मुख्यमंत्री ने साथ ही आगाह भी किया कि, धार्मिक स्थलों में मास्क का उपयोग अनिवार्य रूप से किया जाए. 

(मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे ने निर्धार किया था)

इस समाचार के बाद महाराष्ट्र की जनता में उत्साह का वातावरण बन गया हैं. सोमवार को पाड़वा मनाया जा रहा हैं. इस शुभ मुहूर्त पर धार्मिक स्थल खोले जा रहें हैं. एक ओर मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे की घोषणा का दीपावली पर्व पर स्वागत हो रहा हैं. दूसरी ओर विपक्ष ka कहना है कि मंदिर खोलने के विषय में बहुत देरी की गईं हैं. सभी त्यौहार समाप्त होने के बाद मंदिर शुरू हो रहें हैं. सरकार पक्ष का कहना हैं कि कोरोना जैसी महामारी की रोकथाम और जनता की सुरक्षा सरकार के लिए सर्वपरि थीं. सरकार ने अपना फ़र्ज अदा किया हैं. 






 खुशियों का प्रदीपन

निराशा के अंधकार का नाश हो !

रविंदरसिंह मोदी 

शुभ दीपावली पर्व 

भारतीय संस्कृति में दीपावली को प्रकाशपर्व के रूप में मनाया जाता हैं. अमावस्या की रात की कालिमा को हर्ष और उत्साह के प्रकाश से हराने की हमारी परंपरा रहीं हैं. दीपावली (दिवाली) के समय लक्ष्मी माताजी का पूजन होता हैं. श्रम घटकों की पूजा अर्चना होती हैं. परिवार के सामूहिक खुशियों का यह पर्व माना जाता हैं. 

दीपावली का ऐतिहासिक और धार्मिक पक्ष भी है कि इस दिन प्रभु रामचंद्र जी रावण जैसी दुष्प्रवृत्ति पर मात कर अपने घर अयोध्या लौट आये थे. उनके स्वागत में संपूर्ण अयोध्या नगरी में प्रदीपन हुआ था. घर - घर में दीए प्रज्जवलित किये गए थे. अयोध्या नगरी का वो भव्य प्राकृतिक प्रकाशपुंज देवता भी गगन मार्ग से देखकर प्रसन्नचित हो रहें थे. लोग एक दूसरे को मिलकर खुशियाँ बाँट रहें थे. इस कारण दीपावली पर्व को प्रकाशपर्व की स्मृति मानकर भी प्रोत्साहित किया गया. यह एक परम्परागत पर्व बन गया. आज भी त्यौहार की सार्थकता बनीं हुईं हैं. 

भारत देश में इस वर्ष कोरोना संक्रमण की विभीषिका के चलते करोड़ों लोगों के जीवन प्रभावित हुए हैं. लाखों लोगों ने जीवन और मौत से संघर्ष किया हैं. इस दौर में त्योहारों को लेकर कहीं न कहीं निराशा का दौर भी व्याप्त हो रहा हैं. यदि भारतीय जनमानस चाहे तो निराशाग्रस्त लोगों को निराशा और हताशा के दायरे से बाहर निकाला जाना कठिन नहीं हैं. यह दीपावली अपने स्वयं के लिए और औरों के जीवन में प्रकाश का प्रदीपन करने का एक स्फूर्त अवसर हैं. यह समय विपरीत परिस्थितियों से सामना करने का अवसर हैं. इसलिये जीवन में केवल दीपावली के लिए ही नहीं वरन निराशा के अंधकार के छंटने तक खुशियों के प्रदीपन की आवश्यकता हैं.

इस अवसर पर कला गुणों का विकास हो ऐसी भी भावनाएं व्यक्त करता हूँ. साथ साथ साहित्य और लेखन कार्य समृद्धि से लबालब हो. कर्म और निष्ठां की संपदा सौगुणित हो यह भी मंगल कामनायें करता हूँ. यह प्रदीपन जीवन पथ पर विकास की विस्तीर्णता को अग्रसर करें और देश था हमारा प्रांत शांति और सद्भावना को आत्मसात करें यह प्रार्थना करता हूँ. 

आप सभी को दीपावली पर्व, दिवाली, दिवाली हल्ला महल्ला, दाता बंदीछोड़ दिवस, सिमरन दिवस की हार्दिक शुभकामनायें और बधाई. 






  होली हल्ला महल्ला यात्रा मार्ग की दुरुस्ती करें : मनबीरसिंघ ग्रंथी राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरद पवार समूह) के युथ प्रदेश सचिव स. मनबीर...