"मनमर्जियां " के बहाने दिमागी विकृति
सिखों की भावनाओं को आहत करने की साजिश
रविंदर सिंह मोदी
फ़िल्म उड़ान , गैंग ऑफ़ वसेपुर और क्वीन जैसी फिल्मों के लिए फ़िल्म फेयर अवार्ड जीतनेवाले फ़िल्म और टी.वी. सीरियलों के निर्माता निर्देशक अनुराग कश्यप कमाल के षडयंत्रकारी व्यक्ति प्रतीत हो रहे हैं. उत्तरप्रदेश के गोरखपुर की इस पैदाइश ने सिख धर्म के नीतिमूल्यों का खुलकर मजाक उड़ाने में कहीं कोई कसर नहीं छोड़ी है. सिख धर्म में धूम्रपान वर्जित है यह सभी हिन्दू और अन्य जातियों के लोग भलीभाँति परिचित हैं. लेकिन अनुराग कश्यप ने अपनी नयी फिल्म "मनमर्जियाँ " में एक दस्तार (पगड़ी) पहने हुए व्यक्ति से स्मोकिंग (धूम्रपान) करवाने के कुछ सीन फिल्मों में जानबूझकर डाल दिए हैं. साथ ही सिख परिवार से संबंधित एक लड़की तापसी पन्नू को धूम्रपान करते दिखाना यानी धार्मिक मूल्यों का अवमूल्यन उसकी के सर मढ़ने वाली बात हो गई हैं. जरूर अनुराग कश्यप ने सिख धर्म को साजिश के तहत बदनाम करने और सिख अनुयायियों में फिल्मों का ग्लैमर जगाने का प्रयत्न किया है. ये बात निषेधार्य है.
निषेध और निषेध :
दिल्ली, अमृतसर, नांदेड़ साथ साथ देश में जगह जगह से सिखों ने फिल्म का विरोध किया. बाद में फिल्म से कुछ दृश्य हटाने के लिए पहल की गई. लेकिन तब तक अनुराग कश्यप की फिल्म ने २० से २२ करोड़ की अच्छी कमाई कर ली थी. फ़िल्म बनाते समाज अनुराग कश्यप के दिमाग में सभी फार्मूलें एक साथ चल रहे थे. भारतीय लड़कियों को विदेशी लड़कियों के तुलना में खड़ा करने की पूर्ण सहूलियत इस फिल्म में परोसी गई है. लड़कियों की आज़ादी हर सीमा लाँघने के पूर्ण अधिकार ये फ़िल्म प्रदान करती है. सोशल मीडिया का कहा तक दुरूपयोग किया जाना चाहिए यह तो उस व्यक्ति का जातिगत स्वतंत्र हो गया है, जो इसका इस्तेमाल कर रहा हैं. कश्यप ने उन्हें बढ़ावा देने में कहीं कोई कसार नहीं छोड़ी है. कहीं यह संस्कारी को बेशर्म बनाने की कश्यप की राष्ट्रीय साजिश तो नहीं?
आये दिन फिल्मों में सिखों के चरित्र को कमजोर दिखाने प्रयास हो रहे हैं. किसी फिल्म में सिख का चरित्र नामर्द का दिखाया जा रहा हैं, तो किसी फिल्म में उसे जोकर से कम नहीं दिखाया जा रहा हैं. बहुत बार तो सिखों को खलनायक दिखाया जा रहा हैं. बहुत बार नायिका का पत्र सिख का होता है जिसका अफेयर किसी अन्य धर्म के पात्र के साथ दिखाया जाता हैं. टी.वी. पर विज्ञापनों में सरदार के पीछे बैठी उसकी लड़की को सिर मुण्डे लड़के के छेड़ने जैसे दृश्य दिखाएं जा रहे हैं. ऐसा सिख धर्म के साथ ही क्यों किया जा रहा हैं.
अनुराग कश्यप किस तरह के हिन्दू है?
उल्लेखनीय है मनमर्जियाँ की शूटिंग के दौरान अनुराग कश्यप, अभिषेक बच्चन, तापसी पन्नू और टीम के कुछ सदस्यों ने श्री दरबार साहिब, हरिमंदर साहिब, अमृतसर के दर्शन भी किये थे. उस समय क्या उन्हें सिख धर्म और सिख संस्कृति के दर्शन नहीं हुए थे? क्या उस समय सिख धर्म के नीतिमूल्यों की उन्हें जानकारी नहीं मिली थी. तापसी पन्नू तो एक सिख (पंजाबी) परिवार से है, क्या उसे भी सिख धर्म के सम्बन्ध में कोई जानकारी नहीं हैं ? अनुराग कश्यप को लेकर सवाल उठ रहे हैं कि, वे किस तरह के हिन्दू है ? गोरखपुर में पैदा होकर भी होने न खुद का धर्म ज्ञात है और न किसी और धर्म का सम्मान ही वे करते हैं. हिन्दू धर्म किसी अन्य धर्म का अनादर नहीं कर सकता. अनुराग को पहले हिन्दू धर्म सिखने की जरुरत है. सिखों के चरित्र इस तरह से पेश कर वे सिख धर्म का अप्रत्यक्ष रूप से मजाक उड़ा रहे हैं.
संसार बोर्ड लापरहवाह क्यों ?
मीडिया में सिखों के साथ आये दिन साजिश जारी हैं. मीडिया और फिल्म जगत ने मनमर्जी चला रखीं हैं सिखों को अपमानित करने की. क्या सिख देश के सेन्सॉर बोर्ड को सिख धर्म के नीति मूल्यों के संबंध कोई जानकारी नहीं. सिखों के बलिदान और उनके साहस के सम्बन्ध में सेन्सॉर बोर्ड को कोई तथ्य ज्ञात नहीं. कितने गैर जिम्मेदाराना लोग सेन्सॉर बोर्ड में बैठे हैं ? क्या सेंसर बोर्ड भी सिखों की उपेक्षा को आसानी से ले रहा हैं ? सिखों की भावनाएं आहत करनेवाली एक वर्ष में दस से पंद्रह फिल्में अथवा टी.वी. सीरियल दिखाएं जा रहे हैं. सेंसर बोर्ड खामोश है. जो हो रहा हैं उसे होने दिया जा रहा हैं. सेंसर बोर्ड पर सबसे पहले धार्मिक भावनाओं का सम्मान नहीं करने या सिखों के बारे में जानबूझकर अप्पतिजनक तथ्यों के प्रचार के आरोप में कानून करवाई होने चाहिए.


