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सोमवार, 2 जुलाई 2018

नांदेड़ के सिखों पर 
महाराष्ट्र सरकार की दादागिरी !!
रविंदर सिंघ मोदी
नांदेड़ (हजूर साहिब) सिखों की आस्था भूमि है. यहाँ सिखों के ग्यारहवें गुरु और मानवता के रक्षक श्री गुरु ग्रन्थ साहिब जी का युगोंयुग अटल निवास है. ये भूमि सिखों की प्रथम श्रद्धा भूमि है. विगत तीन सौ सालों से सिख परिवार यहाँ निवास कर रहे हैं. ऐसे पवन भूमि के निवासी सिखों के साथ महाराष्ट्र सरकार सौतेला व्यव्हार कर रही हैं. नांदेड़ बोर्ड पर मुम्बईया राज हमेशा  के लिए स्थापित करने के लिए गुरुद्वारा बोर्ड (मंडल) के प्रधान भारतीय जनता पार्टी के मुलुंड के विधायक तारा सिंघ ने मीटिंग की गणपूर्ति संख्या  (कोरम) मुंबई में पूर्ण हो इस मंशा के साथ केवल एक पत्र मुख्यमंत्री को सौंपा और देवेंद्र फडणवीस नाम के भाजपा मुख्यमंत्री ने बगैर कोई पूछताछ किये, बगैर किसी की राय लिए, बगैर समाचार पत्र में सुचना दिए बोर्ड कानून में संशोधन लादकर सरकार द्वारा मनोनीत सदस्यों की संख्या २ से बढाकर ८ कर दी.
सरकारी सदस्यों संख्या जाने से अब तारासिंह मुंबई में बैठकर कोरम पूर्ण कर पायेगा. उसकी मंशा सरकार ने  पूर्ण कर दी है. मुख्यमंत्री और राजस्वमंत्री ने मिलकर हजुरसाहिब के सिखों सिखों हाथ से उनकी धार्मिक संस्था पूरी तरह से छीनने का काम किया है. तीन साल पहले कानून की धारा ११ में बदलाव कर तारासिंह को बोर्ड का प्रधान बनाया गया. अब बाहर के लोगों को हमारी संस्था में सदस्य बनाने का निर्णय लादा गया. जिसे नागपुर विधानसभा के अधिवेशन में मंजूरी प्रदान करने की नियत से प्रस्तुत किया जा रहा हैं. तारीख ४ जुलाई से नागपुर अधिवेशन शुरू होगा.
महाराष्ट्र सरकार की इस दादागिरी के खिलाफ सिख समुदाय को एकजगह आकर लड़ाई लड़ना जरुरी है. तारासिंह और उसके कुछ समर्थक (चमचे) सरकार से इस तरह के संशोधन करवाकर वे खुश हो रहे है. दूसरी ओर हजुरसाहिब की साधसंगत में गुस्सा और रोष छाया हुआ हैं. हर घटक उस कृति का निषेध कर रहा हैं.
लेकिन तारासिंह इस बात से खुश हो रहा हैं कि दखनी मेम्बरों को उसने हटाकर अपनी खुद की सत्ता स्थापित कर दी है. मुख्यमंत्री को तारासिंह ने गुमराह कर बोर्ड में दो बार संशोधन करवाया है. एक तरह से मुख्यमंत्री से उसने गलत काम करवाया है.
इस काम में जाहिर हैं कि राजस्व (महसूल) विभाग और मुम्बईया चरित्रों की मिलीभगत है. हजूर साहिब की मान मर्यादा और बोर्ड रचना से खिलवाड़ करवाने वाला तारासिंह तनखैया का पत्र है लेकिन क्या करे वो तो अमृतधारी सिख भी नहीं है. इसलिए हजूर साहिब के सभी सिखों को एकजुट होकर तारासिंह की सत्ता हमेशा  हटा देनी चाहिए. साथ ही भाजपा सरकार की दादागिरी का भी प्रतिकार करना चाहिए. कुछ लोग जो तारा सिंह के अहसानों तले दबे हुए है या उसके जरिये आगे पद पाने की लार मुँह से टपकाते घूम रहे हैं उन्हें हजूर साहिब नमक याद करने की जरुरत है.
(इस लेख के नीचे आप अपना निषेध जता सकते हैं.) 

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