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शुक्रवार, 11 मार्च 2022

अभिनन्दन और शुक्रिया

कर्मचारी भाई - बहन और उनके परिवारों के चेहरों पर खिल गईं मुस्कान!

रविंदरसिंघ मोदी 

श्री हजूरसाहिब बोर्ड के इतिहास में 10 मार्च, 2022 की तिथि संस्मरणीय रूप से अंकित हो गईं है. गुरुद्वारा सचखंड बोर्ड संस्था में कार्यरत 369 डेलीवेजस कर्मचारियों को सेवा में स्थाई करने के निर्णय के तहत उन्हें "सेवा कायम अनुबंध" पत्र सौंपें गए. इन अनुबंध पत्रों का वितरण 10 मार्च, 2022 की शाम गहमागहमी के वातावरण में संपन्न हुआ. जिसके साथ ही अस्थाईत्व से स्थाईत्व सेवा के संभाव्य लाभ को पाने की मंशा से कर्मचारी और उनके परिवारों के चेहरें खुशियों से दमक उठें. कर्मचारियों के चेहरों पर खिलीं उन मुस्कानों का वर्णन बहुत सुखद था. पिछले कुछ वर्षों से बोर्ड अंतर्गत राजनीति से कुद हो चलें कर्मचारी भाई और बहन एक अवसाद के आलम में घिरे हुए थे. कोविड संक्रमण काल की त्रासदी और अन्य स्वास्थ्य समस्याओं से निराशा और असुरक्षा के भाव से कुंठित हुए जा रहें थे वहीं उनके सामने आर्थिक किल्लत की समस्या विकट रूप लें रहीं थीं. बोर्ड में कार्यरत 369 इन कर्मचारियों में बड़ी संख्या में कर्मचारी सेवादार पद के ओहदे पर सेवाएं दें रहें हैं. पश्च्यात में बॉडीगार्ड, क्लार्क, टीचर, टेक्निकल और अन्य पद आते हैं. जिन्हें सेवा करते दो वर्ष पूर्ण हो रहें थे उन्हें गुरुद्वारा बोर्ड के पिछले नियमों के तहत सेवा में कायम करने का निर्णय लिया गया. बल्कि निर्णय के साथ ही तुरंत सेवाकायम अनुबंध पत्र भी सौंप दिए गए. इस तरह का निर्णय अब तक के बोर्ड इतिहास में सर्वथा अनूठा रहा है. 

इस आंदोलन को संतों के आशीर्वाद और समर्थन का स्पर्श भी प्राप्त हुआ. दो से तीन महीनों का संघर्ष संस्मरणीय रहा. अंततः जद्दोजहद और राजनीतिक खींचतान के बीच गुरुद्वारा बोर्ड के तीनों इलेक्टेड सदस्यों और हजूरी खालसा दीवान के नुमाइंदों (सदस्यों) के सामूहिक प्रयासों के चलते कर्मचारियों को सेवा में कायम करने हेतु साहसी निर्णय लिया गया जिसका स्वतंत्र मूल्यांकन करना योग्य ही होगा. इस विशेष कार्य के लिए बोर्ड के प्रधान साहब स. भूपिंदरसिंघ मिनहास को धन्यवाद. साथ ही बोर्ड के तीनों इलेक्टेड सदस्य स. रविंदरसिंघ बुंगाई (सचिव), स. गुरमीतसिंघ महाजन और स. मनप्रीतसिंघ कुंजीवाले तथा सचखंड हजूरी खालसा दीवान के सन्दर्भ से जुड़े (सदस्य) स. गुरचरनसिंघ घडीसाज, स. शेरसिंघ फौजी, स. सुरिंदरसिंघ मेंबर और स. सुरजीतसिंघ फौजी के सामूहिक प्रयत्नों की भरपूर सराहना होनी चाहिए. जिन्होंने इस निर्णय के कार्यान्वयन में भूमिका निभाई. बोर्ड सदस्यों के अलावा भी समाज के कुछ सक्रिय व्यक्तित्व हैं जिन्होंने नियमित रूप से इस विषय का प्रस्तुतीकरण बोर्ड के समक्ष किया. गुरुद्वारा बोर्ड के अधीक्षक स. गुरविंदरसिंघ वाधवा विशेष रूप से बधाई के पात्र हैं. 

साध संगत और गुरुद्वारा के डैलीवेजस एवं बिलमुक्ता कर्मचारी बार-बार सेवा में पक्का करने की मांग कर रहें थे. गुरुद्वारा बोर्ड गठन से ही प्रधान साहब और मेंबर साहिबान से मांग की जा रहीं थीं. सामाजिक कार्यकर्ता स. लखनसिंघ लांगरी पिछले दो वर्षों से इस मांग का पीछा कर रहें थे. उनके तीन से चार निवेदन तो मेरे साथ चर्चा करने के उपरांत तैयार किये और समय समय पर सौपें भी गए. इस समय आक्रमक तेवर लेकर सक्रिय दिखाई दें रहें स. रणजीतसिंघ गिल भी विषय के साथ अंत तक तटस्थ रहें. आंदोलन के अंतिम सोपान में बोर्ड के माजी सचिव स. रणजीतसिंघ कामठेकर, स. लड्डूसिंघ काटगर, स. गुरमीतसिंघ टमाना, युवा कार्यकर्ता "तेजू बादशाह', माजी सदस्य स. राजेंद्रसिंघ पुजारी, स. जसबीरसिंघ बुंगाई, स. मनबीरसिंघ ग्रंथी, स. सरताजसिंघ सुखमनी और नवयुवकों की भरपूर सक्रियता दिखाई पड़ीं. कर्मचारियों में स. संजू सिंघ सिलेदार की सराहना की जानी चाहिए जिसने कर्मचारियों की मांग लेकर संघर्ष किया. कर्मचारियों और मेंबर साहिबान में समन्वय बढ़ाया. मुझसे मिलने के लिए और भी बड़ी संख्या में कर्मचारी भाई आते रहें हैं उनका नाम यहाँ इसलिए अंकित नहीं कर रहा हूँ कि कहीं वें अनिष्ठों की नजरों में खटकने ना लगें. खैर! एक व्यापक सामाजिक मुहीम को शीर्ष पर लें जाने के लिए जिन लोगों ने प्रयास किये हैं उन सभी का बहुत बहुत धन्यवाद. यह सामूहिक प्रयत्न था और सभी का सहयोग और सहभागिता सामान रहीं. मेरे द्वारा कर्मचारियों को न्याय दिलवाने के प्रयास के चलते हजुरसाहिब टुडे ब्लॉग पर कुछ पोस्ट लिखें गए थे, जिनका आशय किसी को व्यक्तिगत रूप से टारगेट करना नहीं था. मेरा लेखन मात्र जागरूकता और न्याय - अधिकार से संबंधित एक संप्रेषण था. यदि उसे पढ़कर किसी की भावनाएं व्यथित हुईं हो तो मैं विनम्रतापूर्वक माफी मांगता हूँ. समाज का एक सामान्य घटक जानकर मुझे माफ कर दें. अंत में एक बार गुरुद्वारा सचखंड बोर्ड के प्रधान साहब, सभी पदाधिकारी, सभी सदस्यों का आभार और धन्यवाद. जो वर्ग, व्यक्ति विशेष इस मांग के समर्थन में नहीं उतरे लेकिन उनकी मौन स्वीकृति रहीं उनका भी धन्यवाद. जो लोग निर्णय के खिलाफ रहें और हैं उनसे निवेदन है कि वें अपना मत परिवर्तन कर सहकार्य करें. सभी कर्मचारियों भाइयों से हाथ जोड़कर निवेदन हैं कि अब तन मन धन से श्री गुरु गोबिंदसिंघ जी महाराज जी के दरबार की सेवा करें. आपके व्यवहार, सेवाभाव और आठ घंटों की सेवा समर्पण से गुरु घर की गुल्लक में इजाफा होना चाहिए. सभी नौजवान कर्मचारी हैं, निश्चित ही दिनरात अच्छी सेवाएं देकर गुरु महाराज जी से ईमानदारी बरतेंगे इसमें कोई दो राय नहीं होनी चाहिए. भूलचूक के लिए दोनों हाथ जोड़कर माफी मांगता हूँ. धन्यवाद !





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मंगलवार, 8 मार्च 2022

गुरुद्वारा बोर्ड बजट में पर्मनन्ट विषय में करें आर्थिक प्रावधान !

रविंदरसिंघ मोदी 

एक एप्रिल की तिथि का प्रसंगावधान बड़ा विचित्र माना जाता हैं. संपूर्ण विश्व में यह तारीख कहीं हास्यास्पद तो कहीं सांसत में चर्चित रहती हैं. इस दिवस को महामूर्ख दिवस के रूप में भी मनाने का प्रचलन है. लेकिन क्या कीजिएगा कि हमारा आर्थिक वर्ष इसी तिथि से प्रारंभ करने की एक प्रथा कार्यरत है. एक एप्रिल तारीख से बजट (आर्थिक प्रावधान प्रकिया) प्रारंभ की जाती है. इसलिए आर्थिक प्रावधान पर सभी की निगाहें टिकी हुईं होती है कि हमें क्या मिलेगा ! निश्चित ही गुरुद्वारा सचखंड बोर्ड कर्मचारियों की निगाहें भी उनके हितों के निर्णय पर टिकी हुईं होगी इसमें कोई दो राय नहीं हैं. 

( फाइल फोटो )

अब कहीं से अंदरूनी रूप इस ख़बर का सूत्रपात हो रहा है कि गुरुद्वारा सचखंड बोर्ड संस्था में कार्यरत डेलीवेजस कर्मचारियों को सेवा में पक्का (परमानेंट) करने के विषय में बोर्ड पदाधिकारियों और सदस्यों में समन्वय प्रस्थापित हो रहा हैं. खबर सकारात्मक हैं. पचास प्रतिशत मेंबर साहिबान परमानेंट के विषय में सकारात्मक हैं. पिछले एक डेढ़ माह से हजुरसाहिब ब्लॉग पर मेरे द्वारा जो भाव व्यक्त हो रहें हैं, उनको लेकर मुझे सैकड़ों लोगों की प्रतिक्रियाएं प्राप्त हो रहीं हैं. कर्मचारी ही नहीं आपितु कर्मचारियों के परिवार और साधसंगत में भी डेलीवेजस कर्मचारियों को सेवा में पक्का करने के विषय में चर्चा जारी हैं. कुछ लोग साल भर से यह मांग लेकर बोर्ड से गुहार लगा रहें हैं. कुछ लोग आनेवाले चुनाव पर निगाहें टीकाकार अब कर्मचारियों की बगल में स्थान बनाना चाह रहें हैं. ठीक हैं चुनाव के लिए सब जायज हैं! बेबस कर्मचारियों को सहयोग करना बेहद जरुरी हैं, इसलिए पिछले कुछ समय से इस विषय में मैं, स्पष्ट मत व्यक्त कर रहा हूँ कि डेलीवेजस कर्मचारियों को पक्का कर राहत दी जानी चाहिए. जिन्हें चाहिए वें श्रेय रख लें, पर गरीब कर्मचारी वर्ग का नुकसान ना करें. यदि कुछ करना हो तो तीन से चार दिनों के समय में कीजिये. कलम ग्यारह का विषय अब नतीजे पर आने वाला हैं. अधिवेशन में कानून संशोधन का विषय रंग ला सकता हैं. उससे पूर्व सन्मानीय बोर्ड सदस्यगण आपस में समन्वय प्रस्थापित कर मा. प्रधान साहब को इस विषय पर राजी करें तो बात बन जाएगी. 

( फाइल फोटो )

इसलिए मैं, हमारे तीनों इलेक्टेड मेंबर साहिबान और सचखंड हजूरी खालसा दीवान के मेंबर साहिबान से हाथ जोड़ कर विनम्र प्रार्थना कर रहा हूँ कि आपकी दस्तखतयुक्त एक "कॉमन नोट" बनाकर कर्मचारियों को सेवा में पक्का करने के विषय में आनेवाले आर्थिक वर्ष 2022 - 2023 के आर्थिक प्रारूप बजट में रखकर संभाव्य राशि का प्रावधान करवाएं. निकट भविष्य में बोर्ड की बजट मीटिंग का होना संभव नहीं लग रहा हैं. बोर्ड के प्रधान साहब द्वारा बजट मीटिंग के आयोजन को लेकर कोई पहल नहीं की जा रहीं है. इसलिए हो सकता है कि बोर्ड का बजट इस बार या तो जिलाधीश साहब की अनुमति से पास किया जाए अथवा नया बोर्ड या कमेटी द्वारा ही मान्यता दीं जाए ! बोर्ड के आर्थिक प्रावधान का भविष्यकालीन प्रभाव देखते हुए, समझते हुए और चिंतन करते हुए कर्मचारियों के विषय में प्रलंबित विषय भी नियमानुसार "विशेष कॉमन नोट" की सहायता से प्रधान साहब अथवा कलेक्टर साहब के पास प्रस्तुत किया जाए. यह खुशखबरी होली से पहले कर्मचारियों को मिल जाए तो निश्चित ही बोर्ड के पदाधिकारी और मेंबर साहिबान सत्कार के पात्र होंगे. अन्यथा एक एप्रिल वाली "प्रथा" की बात लागु हो जायेगी. 


बुधवार, 2 मार्च 2022

 क्या होगा 8 मार्च को?

क्यों मची हैं भागदौड़!

रविंदरसिंघ मोदी 

नांदेड़ से लेकर मुंबई और मुंबई से लेकर अमृतसर तक हलचल मचीं हुईं हैं. कोई उत्सुक हैं तो कोई संदेहास्पद! सबकी निगाहें आनेवाली एक विशिष्ट तारीख को लेकर प्रश्न कर रहीं है. क्या होगा? गुरुद्वारा बोर्ड के प्रधान साहब अस्वस्थ और अनभिज्ञ! मीत प्रधान साहब व्यूहरचना में मशगूल! सेक्रेटरी साहब हैरान - हैरान! समन्वयक साहब जुगाड़ और भागदौड़ में व्यस्त! बोर्ड मेंबर साहिबान इधर - उधर की उधेड़बून में! मैनेजिंग मेंबर साहब की निगाहें कोर्ट कचहरी के अगले इम्तिहान का तोड़ तलाशने में समर्पित! "जो होने वाला हैं" वो "ना हो" इसलिए प्रचंड शक्ति से प्रयास जारी हैं! सबके चेहरे और ऑंखें संभाव्य मामले की गंभीरता को दर्शा रहें हैं. मुंबई और अमृतसर के बीच फोन कॉल्स और कॉल पर कॉल का सिलसिला! सबके दिलों में हलचल तेज कि "सरकार  का अगला कदम क्या हो सकता है गुरुद्वारा बोर्ड के विषय में?"

आने वाली 8 मार्च, 2022 की तारीख गुरुद्वारा सचखंड बोर्ड संस्था के विषय में पता नहीं क्या नया संदेश लेकर आए. गुरुद्वारा सचखंड बोर्ड के पिछले गठन की घटना (ता. 8 मार्च, 2019) को तीन वर्ष पूर्ण हो रहें हैं. नांदेड़ की साधसंगत में उपर्युक्त विषय को लेकर यह उत्सुकता छाईं हुईं हैं आनेवाली ता. 8 मार्च को क्या घटित होने वाला हैं? क्या गुरुद्वारा सचखंड बोर्ड बर्खास्त कर दिया जायेगा? क्या गुरुद्वारा बोर्ड पर नये प्रधान की नियुक्ति की जायेगी? अथवा नया ऐडमिनिस्ट्रेटर बिठाकर "नई समिति" घोषित कर दीं जायेगी? इस ख्याल और सवाल से चेहरों पर हवाइयां उड़ी हुईं.

जैसे कि "बोर्ड कार्यकाल की पूर्ति" पूर्ण हो रहीं है, इसलिए महाराष्ट्र सरकार सीधे - सीधे इच्छित निर्णय ले सकती हैं. बोर्ड पर सरकारी नियंत्रण होने से अब यह बोर्ड कभी भी बर्खास्त किया जाना संभव है. यदि मध्य कार्यकाल में बोर्ड बर्खास्त अथवा सस्पेंड किया जाना हो सरकार को चाहिए कि एक माह पहले औपचारिक सूचना जारी करें. जैसे कि स. भूपिंदरसिंघ मिनहास सरकार द्वारा नियुक्त प्रधान है, इस कारण सरकार को अधिकार प्राप्त है कि प्रधान अथवा प्रधान के अंतर्गत संचालित बोर्ड को बर्खास्त करें. वैसे भी कार्यकाल समाप्त होने के बाद नैतिक रूप से "बोर्ड" बर्खास्त होना ही चाहिए. क्योंकि एक्ट का प्रभाव यहीं कहता है. कानून माननेवालों के लिए यह स्वीकार्य तत्वं भी है. लेकिन बोर्ड की सत्ता में बैठें लोग चाह रहें हैं कि अभी बोर्ड बर्खास्त ना किया जाए. बोर्ड का कोई सदस्य यह नहीं चाहेगा कि बोर्ड बर्खास्त हो, क्योंकि उनका कार्यकाल समाप्त जो हो रहा हैं! 

एक तरफ, बोर्ड में बैठें कुछ लोग यह भी कोशिशें कर रहें हैं कि सरकार उन्हें बोर्ड का "प्रधान" नियुक्त करें! यह भी कोशिश कर रहे हैं कि नये बोर्ड अथवा समिति में उन्हें स्थान मिल जाए. मिनहास बोर्ड को सहयोग करने वाले लोग (नांदेड़ के महारती) बड़ी संख्या में मा. मंत्री महोदय और मंत्रालय के चक्कर काट रहें हैं! खैर! ता. 3 मार्च से महाराष्ट्र विधानसभा का अधिवेशन शुरू हो रहा हैं. चर्चा हैं कि गुरुद्वारा बोर्ड की सत्ता काबिज रखने के लिए मुंबई में जोरशोर से प्रयास जारी हैं कि गुरुद्वारा बोर्ड एक्ट कलम ग्यारह संशोधन रद्द का विषय अधिवेशन में ना प्रस्तुत होने पाए. संशोधन के विषय में राजस्व विभाग की एक्ट संशोधन कमेटी का ड्राफ्ट तैयार हैं लेकिन संदेह है कि वह "ड्राफ्ट" अधिवेशन में पहूंच पायेगा कि नहीं! यदि आगामी अधिवेशन में सरकार द्वारा किया गया पिछला, वर्ष 2015 का संशोधन रद्द करने का निर्णय हो जाता हैं तब बोर्ड में प्रधान को चुनने का अधिकार हमारे सदस्यों को प्राप्त हो जायेगा. शायद हजूरी प्रधान बनाने का सपना साकार हो जाए! एक्ट संशोधन विषय के साथ संभव हैं कि बोर्ड बर्खास्त हो जाए अथवा नई कमेटी की नियुक्ति हो जाए! यह भी संभव है कि इस बोर्ड को एक माह का समय मिल जाए. सरकार चाहे तो इस दौरान जिल्हाधारी साहब का अभिप्राय भी मंगवा सकती है. 

अब उपर्युक्त विषय को लेकर नांदेड़, मुंबई और अमृतसर में तरह - तरह के आशावाद उभरते चलें जा रहें हैं. बोर्ड बचाने के लिए भागदौड़ मची हुईं हैं. 60 पार के लोगों के ब्रेन तेजी से काम कर रहें हैं. यह चर्चा भी जोर पकड़े हुए हैं कि इस समय बोर्ड के कुछ लोगों द्वारा की जा रहीं जद्दोजहद के विषय में बोर्ड के प्रधान साहब को कोई जानकारी तक नहीं हैं! स. भूपिंदरसिंघ मिनहास अस्वस्थ हैं और उपचाराधीन हैं. दूसरी ओर, मुंबई में बैठें एसजीपीसी के लोग गुरुद्वारा बोर्ड को बर्खास्ती से बचाने के लिए पंजाब और दिल्ली से एसजीपीसी और शिरोमणि अकाली दल के नेता मुंबई कूच कराने की तैयारी में जुटें हुए हैं. पहले भी शिरोमणि अकाली दल के नेता बोर्ड बचाने के लिए और कलम ग्यारह को राजनीतिक पेच में फंसने के लिए मुंबई आते रहें हैं. देखें इस बार कौन नया चेहरा अपनी चलाखी दिखाने मुंबई का रुख करता हैं! मुंबईया साहब लोग! इतना सब किसलिए? हजुरसाहिब को लेकर इतनी राजनीतिक जदोजहद और तिकड़मबाजी! कार्यकाल समाप्त होने का सच स्वीकार करना ही चाहिए ना! क्या नये लोगों के अवसर भी खा जाने की सोंच हैं आपकी? 

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शनिवार, 19 फ़रवरी 2022

संतों को आश्वासन देकर मुकर गए गुरुद्वारा बोर्ड के प्रधान!

लेटर तैयार हैं तो देते क्यों नहीं?

स. रविंदरसिंघ मोदी 

(तारीख 18 जनवरी, 2022 के दिन कर्मचारियों के शिष्ट को संतबाबा कुलवंतसिंघ जी और संतबाबा बलविंदरसिंघ जी कारसेवा प्रधान साहब से हुईं बातचित का संदेश प्रेषित करते हुए. - स. रविंदरसिंघ मोदी)

तारीखें बहुत बार, खुद गवाह बन जाती हैं. आनेवाले समय में यही तारीखें गुरुद्वारा सचखंड बोर्ड के प्रधान स. भूपिंदरसिंघ मिनहास से जवाब मांगेंगी. डेलीवेजस कर्मचारियों को सेवा में पक्का करने के विषय में बोर्ड के प्रधान मिनहास द्वारा तखत साहब के जत्थेदार साहिब संतबाबा कुलवंतसिंघजी और श्री लंगर साहिब के मुखी संतबाबा बलविंदरसिंघ जी कारसेवावाले द्वारा डेलीवेजस कर्मचारियों को सेवा में कायम करने संबंध में किये गए संयुक्त आग्रह को एक तरीके से ठुकरा दिया गया हैं. बोर्ड का कार्यकाल समाप्त होने में अब एक महीने से भी कम समय रह गया हैं. अब ना 'बोर्ड मीटिंग' होने की कोई संभावना बन रहीं और ना ही "मिनहास बोर्ड" का कार्यकाल बढ़ने की ही कोई गुंजाईश दिखाई दें रहीं हैं. कहा जा रहा है कि रिकविजिशन फंडा भी नाकाम हुआ है. जिसका अर्थ यही हुआ कि गुरुद्वारा बोर्ड के प्रधान स. भूपिंदरसिंघ मिनहास अपनी कूटनीति में पूरी तरह सफल रहे है. संतों के साथ वायदाखिलाफ़ी कर कर्मचारियों की मांगों को हाशिये पर रखने की उनकी "योजना" सफल हो गईं. काश! राजनीतिक सोच त्यागकर इन डेलीवेजस और बील मुक्ता कर्मचारियों की परेशानियां, उनकी समस्याएं ये "सरकारी प्रधान", मीत प्रधान, बोर्ड के सेक्रेटरी और मेंबर साहिबान समझ पाते ! इन कर्मचारियों के परिवार के दुःखों और उनकी आर्थिक परेशानियों को वें ठीक से समझ पाते. केवल सत्ता के दांवपेच, कोर्ट - कचहरी और आपसी झगड़ों में तीन साल व्यर्थ करने वाले इस वीआईपी कल्चर के "मिनहास बोर्ड" का इतिहास किस स्याही से लिखा जाए यह यह प्रश्न उपस्थित हो रहा हैं. लेकिन मिनहास साहब और उनका बोर्ड सनद रखें कि तारीखें अपना काम कर गईं हैं. आप सभी को साबित कर गईं हैं ! 

(फाइल फोटो 18 -01-2022)

वाकिया आज से ठीक एक महीना पहले, तारीख 18 जनवरी 2022 का है. इस तारीख को डेलीवेजस कर्मचारी भाई - बहन एक शिष्टमंडल के रूप में अपनी फरियाद और मुराद लेकर संतबाबा कुलवंतसिंघ जी और संतबाबा बलविंदरसिंघजी के पास पहुँचे थे कि वें गुरुद्वारा बोर्ड के प्रधान स. भूपिंदरसिंघ मिनहास से दरखास्त करें कि उन्हें (कर्मचारियों) सेवा में कायम किया जाए. कर्मचारियों की प्रार्थना पर जत्थेदार साहब और संतबाबा बलविंदरसिंघजी कारसेवा वाले ने उदार मन से "प्रस्तुत विषय" पर गुरुद्वारा सचखंड बोर्ड के प्रधान स. भूपिंदरसिंघ मिनहास को फोन लगाकर कर्मचारियों की मांगों के संबंध में विस्तार से चर्चा की थीं. जिसके जवाब में श्री मिनहास ने दोनों संतों को फोन पर आश्वासन दिया था कि फ़रवरी 2022 के पहले सप्ताह में "वें" स्वयं नांदेड़ पहुंचकर डेलीवेजस कर्मचारियों की यह मांग पूर्ण करेंगे. बातचीत के बाद मानयोग जत्थेदार जी और संतबाबा कुलवंतसिंघजी द्वारा कर्मचारियों के शिष्टमंडल को यह जानकारी सुनाई गईं. जिसके बाद कर्मचारी भाई - बहन खुश होकर घर लौटें थे. संतबाबा बलविंदरसिंघजी ने भी ख़ुश होकर सभी आशावान कर्मचारियों को आशीषें दीं कि सेवा में पक्का होने का कार्य जल्द जल्द पूर्ण हो जाए.  

(फाइल फोटो 18-01-2022)

फरवरी 2022 का वह 'पहला सप्ताह' गुजर गया! लेकिन प्रधान साहब (मिनहास साहब) ने नांदेड़ का रुख नहीं किया. 5 फरवरी, 6 फरवरी और 7 फरवरी की तारीखें एक के बाद एक कर बीत गईं. दौरा टल गया या टाला गया यह चर्चा चल पड़ी. स्वाभाविक हैं कि कर्मचारियों को खुशियों की सौगात लेकर आने वाले प्रधान साहब का दौरा टल जाने से सभी आशावान कर्मचारियों में बेचैनी बढ़ गईं. बीच - बीच में यह भी चर्चा सुनाई पड़ रहीं थीं कि "साहब" इस बात से ही नाराज हो गए कि कर्मचारियों का शिष्टमंडल यह मांगें लेकर जत्थेदार साहब और संतबाबा बलविंदरसिंघजी के पास प्रस्तुत क्यों हुआ? वर्तमान बोर्ड के कुछ मेंबर साहब भी यहीं सोच रहे थे कि यह निर्णय बोर्ड के प्रधान और मेंबर साहब के अधीन हैं और इसमें बाबाजी कर क्या सकते हैं? उनकी यह सोच भी सही हैं. लेकिन जिस बोर्ड का प्रधान (कार्य प्रमुख) साल भर नांदेड़ नहीं पहुंचता हो और ना संस्था के कर्मचारियों की सुध ही लेता हो, जो हजूरसाहब के लोगों के फोन भी स्वीकार नहीं करता हो, उन महाशय से संपर्क करें तो कैसे? बोर्ड का मीत प्रधान दो साल से अधिक समय नांदेड़ नहीं आया हैं फिर किसी से क्या आस रखीं जाए? चर्चा हैं, प्रधान साहब और मीत प्रधान साहब के नुमाइंदे के रूप में बोर्ड में कार्यरत सेक्रेटरी साहब यह दावा करते हैं कि कर्मचारियों को सेवा में पक्का करने के लिए उनके पास "लेटर" बनकर तैयार हैं. यदि ऐसा है तो पता नहीं किस मुहूर्त का इंतजार किया जा रहा हैं? 

पहली बात तो यह हैं कि तीन सालों से जो लोग कर्मचारियों को सेवा में पक्का करने के लिए झांसें दिए जा रहे हैं, उनके प्रति क्या कर्मचारियों को नाराज होने का भी स्वातंत्र्य नहीं हैं? क्या यह लोग गुलामों की श्रेणी में आते हैं कि उन्हें अपने अधिकार और हक के मामले में आवाज़ उठाने की आजादी नहीं हैं. बोर्ड कर्मचारियों में एक मनोवैज्ञानिक डर व्याप्त हैं कि कहीं उन्हें सेवा से निलंबित तो नहीं कर दिया जाएगा? कहीं उन्हें सेवा से बर्खास्त तो नहीं कर दिया जायेगा? इस तरह का असुरक्षित माहौल इस संस्था में पैदा कैसे हो गया? तबादलों की राजनीति क्यों अक्सर चर्चाओं में रहती हैं !

सत्ता में बैठें मूकदर्शक "साहब" लोगों से हमारा सीधा सवाल है कि वें बताएं कि इन बेबस कर्मचारियों को अपनी मांगें लेकर किसके पास जाना चाहिए था? उन्हें क्या कदम उठाना चाहिए था? क्या कर्मचारी,  प्रधान साहब के ठिकाने ढूंढ़ते हुए मुंबई और औरंगाबाद में धरना देने जातें? क्योंकि वें तो नांदेड़ आ नहीं रहे हैं. बताएं कि, क्या यह डेलीवेजस कर्मचारी, अपनी मांगें लेकर सेक्रेटरी साहब और मेंबर साहिबान के पास नहीं गए थे ? यदि साहब लोग, सोशल मीडिया पर फोटो डलवाकर भूल गए तो कर्मचारियों की क्या खता? बोर्ड में बैठें माई - बाप बताएं कि इन कर्मचारियों को अपनी मांगें लेकर हमारे पूज्य संतों के पास नहीं जाकर, क्या स्वामी बाबा रामदेव के पास जाना चाहिए था? 

मिनहास साहब ! आपके बोर्ड कार्यकाल में बोर्ड की बैठकें नहीं हो रहीं उसके लिए कर्मचारी वर्ग जिम्मेदार हैं क्या? आपके बोर्ड में बगैर मीटिंग के बहुत सारे काम हुए हैं और अभी भी हो रहे हैं. बगैर मीटिंग के कर्मचारियों को ग्रेड दिए गए ऐसे भी उदाहरण हैं. प्रमोशन भी? महंगाई भत्ते भी? बगैर मीटिंग के हर महीने किसी न किसी काम या खरीदी के टेंडर भी जारी हो रहे हैं? प्रधान साहब और मीत प्रधान साहब, बोर्ड संचालन कार्य में किस तारीख को क्या हुआ हैं वो तो बोर्ड में ही दर्ज हैं. सुपरिन्टेन्डेन्ट साहब के पास सब लेखा-जोखा तो होगा ही. फिर इन कर्मचारियों को सेवा में पक्का करने के विषय में पिछले तीन सालों से टालमटोल क्यों चल रहा हैं ? आपको सीधा सा उत्तर देना हैं कि इन कर्मचारियों की मांग आप पूर्ण करेंगे या नहीं? ताकि कर्मचारी वर्ग झूठी आस में ना रहें. कर्मचारियों के हिस्से में बार - बार हताशा ना आने पाए, इस विषय की जिम्मेदारी प्रधान साहब की हैं, सिर्फ प्रधान साहब की. जो काम सात मेंबर साहब की दस्तखत से पूर्ण होता हो उसके लिए अतिरिक्त भूमिका की आवश्यकता नहीं रह जातीं. बोर्ड मीटिंग की आस पर फार्मूला के तहत सुपरिन्टेन्डेन्ट साहब कर्मचारियों को पक्का करने का आदेश पत्र जारी कर, विषय को आनेवाले बोर्ड की मीटिंग के लिए प्रस्तावित कर सकते है. मन में करने की इच्छाशक्ति हो तो सब संभव है "साहब", पहल तो कीजिये !

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गुरुवार, 17 फ़रवरी 2022

तेलंगाना में सिख नाबालिगा के साथ हैवानियत !

दुष्कर्मी हत्यारों को फांसी दो !

रविंदरसिंघ मोदी 

(हजूरसाहब, नांदेड़ में हजूरी साधसंगत घटना के प्रति रोषप्रदर्शन करते हुए?!)


हैदराबाद, तेलंगाना स्थित सुभाष नगर में 14 फरवरी की रात एक सतरह वर्षीय लड़की (नाबालिगा) के साथ दुष्कर्म कर उसकी निर्ममता के साथ हत्या कर दी गई. सिख समाज (सिखलीगर) समाज की इस युवती के साथ सामूहिक रूप से बलात्कार की घटना अमानवीय हैं. घटना के 48 घंटे बीत जाने पर भी अपराधी पुलिस गिरफ्त से बाहर हैं. लेकिन इस घटना का संज्ञान अभी तक ना गृह मंत्रालय ने लिया हैं और ना ही महिला आयोग ही जागा हैं. सबसे आश्चर्यकारक बात यह है कि मीडिया में भी यह घटना कहीं सुर्खियों में दिखाई नहीं पड़ रहीं हैं. 

नांदेड़ स्थित जिल्हाधिकारी कार्यालय के सामने रोषप्रदर्शन में शामिल महिला और पुरुष)

उपर्युक्त घटना को लेकर नांदेड़ (महाराष्ट्र) में स्थित सिख समुदाय में रोष का वातावरण बना हुआ हैं. हजूरी सिख संगत के माध्यम से नांदेड़ के जिल्हाधिकारी के नाम ज्ञापन प्रस्तुत कर घटना लिप्त आरोपियों के खिलाफ सख्त करवाई करने की मांग की गई. इस विषय में जिल्हाधिकारी कार्यालय के सामने रोष प्रकट किया गया. इस रोष प्रदर्शन के समय महिला, पुरुष और बच्चें भी शामिल थे. 

जिल्हाधिकारी कार्यालय में निवासी उपजिलाधिकारी को ज्ञापन प्रस्तुत करते हुए साधसंगत)

इस रोष प्रदर्शन का नेतृत्व कर रहे ज्ञानी तेगासिंघजी ने सुभाष नगर निवासी नाबालिगा की मौत से जुड़े कईं पहलुओं पर प्रश्नं उपस्थित किये. उन्होंने कहा कि एक नाबालिगा का अपहरण कर उसके साथ दुष्कर्म किया गया, उसे निर्ममता के साथ मौत के घाट उतारा गया  लेकिन हैदराबाद पुलिस द्वारा मामले की सुध नहीं लीं गईं. इस घटना में शामिल सभी आरोपियों को गिरफ्तार कर उन्हें फांसी की सजा दीं जानी चाहिए. स. सचिंदरसिंघ शाहू ने भी प्रस्तुत ज्ञापन पर संयुक्त रूप से प्रश्न को प्रस्तुत किया. स. करणसिंघ चंदन ने अपनी भावनाएं व्यक्त करते हुए कहा कि, पुलिस चाहे तो एक घंटे में जाँच पूर्ण कर आरोपियों को दबोच सकती हैं. लेकिन एक अल्पसंख्यक समुदाय की बेटी की मौत पर अन्याय किया जा रहा हैं. इसलिए सिखों के रास्तों पर उतरने की प्रतीक्षा ना करें और तुरंत आरोपियों को गिरफ्तार कर न्याय दिया जाए. स. कश्मीरसिंघ भट्टी ने घटना में शामिल आरोपियों को गिरफ्तार कर उन्हें फांसी की सज़ा देने की मांग की. 

तखत सचखंड श्री हजूर साहब गुरुद्वारा के सामने हुए रोष प्रदर्शन के  अवसर पर स. लड्डूसिंघ काटगर, स. कश्मीरसिंघ भट्टी, स. लखनसिंघ लांगरी, जसबीरसिंघ मल्ली, राजासिंघ बावरी, निरंजनसिंघ कलानी, मीराकौर टाक, सतनामकौर बावरी, गुरविंदरसिंघ रंधावा, हरबंस सिंघ मल्ली, सतबीरकौर गाड़ीवाले, बेबीकौर सिद्धू, पुरबकौर सहित बड़ी संख्या में महिला और पुरुष उपस्थित थे. 

सोनू कौर को न्याय मिलना चाहिए : रविंदरसिंघ मोदी


मृतक सोनुकौर जिस दरिंदगी का शिकार हुईं हैं उसे शब्दों में बयान करने में दिक्कत हो रहीं हैं. अल्पसंख्यक सिख सिखलीगर समुदाय की इस नाबालिग बेटी को इंसाफ दिलाने में मीडिया, समाचार पत्र और सामाजिक संघठन अलिप्त रह गए. हैदराबाद, सिकंदराबाद, आर. आर. जिल्हा सहित तेलंगाना में सिखों की आबादी महज 20 हजार के आसपास हैं. जातीय जनसंख्या का आंकड़ा कमजोर दिखाई देने के कारण और जिस स्थान पर यह घटना घटित हुईं हैं उस परिसर में बाहुबलियों के राजनीतिक प्रभाव के आगे सोनूकौर की मौत केवल एक प्रदर्शन बनकर रह गईं हैं. इस विषय को राष्ट्रीयस्तर पर प्रस्तुत करने के लिए व्यापक जनांदोलन की आवश्यकता हैं. देश में वर्ष 2012 में निर्भया कांड हुआ था. उस समय सारा देश एकजुट हुआ था. तेलंगाना में भी एक वर्ष पूर्व एक डॉक्टर युवती के साथ दुष्कर्म की घटना के बाद देश दहल गया था. लेकिन सोनुकौर की मौत की घटना पर कोई नहीं जागा. महिला संघटन, महिला आयोग, गृह मंत्रालय, अल्पसंख्यक आयोग ने भी कोई भाव प्रदर्शित नहीं किये हैं. तेलंगाना की साधसंगत के प्रयास सराहनीय हैं कि वें संघर्ष को उठाये रखें हुए हैं. यह विषय न्याय तक पहुँचे यहीं हमारी सभी की सामूहिक मांग हैं. 

(इस पोस्ट को अधिक से अधिक पोस्ट किया जाए)






शनिवार, 29 जनवरी 2022

 तखत साहब की सुरक्षा को लेकर सवाल !

तखतसाहब की सुरक्षा की जिम्मेदारी किसके अंतर्गत 

रविंदरसिंघ मोदी 

तखत साहब की सुरक्षा की अंतिम जिम्मेदारी सिखों की ही हैं. पुलिस एक मर्यादा तक सीमित है. 

तखत सचखंड श्री हजूर साहब की सुरक्षा का विषय जितना गंभीर हैं उतना पेचीदा भी. यह विषय यदा कदा चर्चा में लाया जाता है और बगैर किसी निष्कर्ष के भुला भी दिया जाता है. पिछले कुछ समय से हम देख रहें हैं कि धार्मिक स्थलों पर असामाजिक तत्वों द्वारा धार्मिक भावनाएं भड़काने हेतु कोई ना कोई अप्रिय घटना को अंजाम दिया जा रहा हैं. गत दिसंबर माह में श्री हरिमंदर साहब, अमृतसर में घटित घटना ने समस्त सिख जगत को सकते में डाल दिया था. इस विषय में हजुर साहब के निवासी स. परवेंद्रसिंघ शाहू (हीरा - मोती) द्वारा हाल ही में गंभीरतापूर्वक विषय उठाया गया हैं. 

परिसर की निगाबानी किसके हाथ? 

सरदार परवेंद्रसिंघ शाहू द्वारा महाराष्ट्र के गृहमंत्री श्रीमान दिलीप वलसे पाटिल और महाराष्ट्र के पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) श्रीमान संजय पांडे को ज्ञापन प्रस्तुत कर गुरुद्वारा तखत सचखंड श्री हजूरसाहिब धार्मिक स्थल की सुरक्षा हेतु पर्याप्त कदम उठाने की गुहार लगाई गईं. जिसके पश्च्यात नांदेड़ परिक्षेत्र पुलिस विभाग ने भी उक्त विषय में संज्ञान लेना आरंभ कर दिया हैं. संभवतः पुलिस विभाग और गुरुद्वारा सचखंड बोर्ड प्रशासन मिलकर उपर्युक्त विषय में संयुक्तरूप से पहल करेंगे. लेकिन यह विषय सार्वजनिक भावनाओं से जुड़ा होने के कारण गुरुद्वारा तखत सचखंड हजुरसाहिब जैसे धार्मिक स्थान के विषय में पहल करना सभी की सामाजिक जिम्मेदारी भी हैं. दूसरे यह कि डेढ़ हजार की कर्मचारी संख्या वाली संस्था सुरक्षा के विषय पर असमर्थ क्यों प्रतीत हो रहीं हैं? इतना मनुष्यबल, तंत्र और साधन होने के बावजूद भी यहाँ की सुरक्षा प्रणाली को लेकर अविश्वास का भाव क्यों बना रहता हैं? 

कौन कहाँ से प्रवेश कर रहा हैं, उसकी स्कैनिंग और जानकारी सेवादारों को होनी चाहिए. 

तखत साहब की सुरक्षा को लेकर पिछले दो दशकों से चिंतन हो रहा हैं. वर्ष 2008 में जिस समय यहाँ श्री गुरु ग्रंथसाहिब जी का त्रिशताब्दी गुरुतागद्दी समागम मनाया था, उस समय भी सुरक्षा को लेकर नांदेड़ पुलिस दल द्वारा परिश्रम किया गया था. तत्कालीन पुलिस अधीक्षक (पुलिस महानिरीक्षक) डॉ रविंद्र सिंघल द्वारा पुलिस सुरक्षा को लेकर सुरक्षा उपायों पर काम किया गया था. पुलिस कर्मचारियों को पंजाबी भाषा की ट्रेनिंग दिलाई गईं थीं. गुरुतागद्दी त्रिशताब्दी समारोह मनाने के बाद फिर सुरक्षा को लेकर ज्यादा चिंतन नहीं किया गया. अभी गुरुद्वारा परिसर के छह प्रवेशद्वारों (गेट) को लेकर कोई ठोस नीति नहीं है. केवल गुरुद्वारा बोर्ड के सिक्योरिटी विभाग के सेवादार उन्हें प्राप्त साधन श्रीसाहब (तलवार) के और बरछे (भाला) के भरोसे करते हैं. आपातस्थिति को लेकर कोई योजना अमल में नहीं हैं. इस समय स. परवेंद्रसिंघ शाहू द्वारा इस मुद्दें पर की गईं पहल सराहनीय प्रतीत हो रहीं हैं. यह विषय तखत साहब की सुरक्षा को लेकर होने के कारण इस विषय में हजुरसाहिब के स्थानीय निवासियों की राय और उनका सहकार्य महत्वपूर्ण माना जायेगा. पुलिस विभाग की सुरक्षा और उनकी कार्यप्रणाली अलग होती हैं. इसलिए पुलिस विभाग के संबंधित अधिकारी और हजूर साहिब के स्थानीय लोगों को आपस में उक्त विषय पर समन्वय विकसित किया जाना आवश्यक होगा. 

कुछ वर्ष पूर्व इस स्थान पर से एक अज्ञात व्यक्ति द्वारा शाम की आरती के समय विघ्न डालने का प्रयत्न किया गया था. 

हमें सामूहिक रूप से दीर्घकाल के लिए तखत साहब की सेवा हेतु सुरक्षा प्रणाली विकसित करनी होगी. आधुनिक यंत्रणा और प्रशिक्षित कर्मचारियों की सहायता से ठोस योजना को अमल में लाया जाना चाहिए. दरबार साहब, अमृतसर और अक्षरधाम मंदिर जैसी सुरक्षा प्रणाली का एक बार अभ्यास किया जाना चाहिए. दरबार साहब अमृतसर में प्रत्येक गेट पर चौकसी बरती जाती हैं. वहां सेवा में लापरवाही को स्थान नहीं हैं. गुरुद्वारा बोर्ड के अधिकारी इस विषय का गंभीरता से संज्ञान लेंगे ऐसी उम्मीद की जा सकती हैं. 

आतंकवाद का बदलता स्वरुप चिंताजनक : परवेंद्रसिंघ शाहू 

विश्व में आतंकवाद का स्वरुप बदल गया हैं. असामाजिक तत्व हिंसा, द्वेष और जातीय उन्माद को बढ़ावा देने हेतु किसी भी हद तक कदम उठा सकते हैं. इसलिए सुरक्षा को लेकर हर पहलु पर विचार किया जाना जरुरी हो जाता हैं. वर्ष 2019 से यह विषय मेरे द्वारा प्रस्तुत किया जा रहा हैं. इस विषय को लेकर गंभीरता जरुरी हैं. गुरुद्वारा बोर्ड प्रशासन सुरक्षा के विषय में मुगालते में हैं. गुरुद्वारा परिसर, छह गेट, मंदर साहब, गुरु का लंगर आदि स्थानों पर सुरक्षा के पर्याप्त साधन जरुरी हैं. पुलिस प्रशासन और सभी राजनीतिक वर्ग भी गुरुद्वारा जैसी संस्था को मदत करेंगे ऐसी आशा हैं. 

स. परवेंद्रसिंघ शाहू का निवेदन : 👇


( इस विषय में साधसंगत के कुछ सुझाव हो तो हजुरसाहिब ब्लॉग के साथ साझा कर सकते हैं )










सोमवार, 24 जनवरी 2022


श्री गुरु ग्रंथसाहिब जी की हजूरी में राजनीतिक द्वंद !

हरमीतसिंह कालका बनें दिल्ली कमेटी के प्रधान

रविंदरसिंघ मोदी 

गुरुद्वारा श्री रकाबगंज साहब में तिथि 23 जनवरी, 2022 के दिन श्री गुरु ग्रंथसाहिब की हजूरी में जो कुछ घटित हुआ उससे सिक्खी प्रतिमा को निश्चित ही आघात पहुँचा हैं. दिल्ली सिख गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी के प्रधान के चुनाव को लेकर तीन गुटों के बीच जमकर राजनीतिक द्वंद देखने को मिला. सबसे दुःख इस बात का हो रहा हैं कि प्रधान पद के चुनाव करवाने हेतु श्री गुरु ग्रन्थ साहिब जी को सुबह 11 बजे के समय प्रकाशमान किया गया था और उनके सुखासन प्रक्रिया के लिए रात के 11 बज गए. गुरु ग्रंथसाहिब जी की इस घोर उपेक्षा के लिए किसको जिम्मेदार माना जाए? 12 घंटों की जद्दोजहद, संघर्ष, आरोप - प्रत्यारोप, पुलिस बल के दबावतंत्र के बीच आखिर शिरोमणि अकाली दल के प्रधान सुखबीरसिंघ बादल समर्थित उम्मीदवार और भारतीय जनता पार्टी के नेता मनजिंदरसिंह सिरसा के दहिने हाथ कार्यकर्ता स. हरमीतसिंह कालका को दिल्ली सिख गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी का प्रधान चुन लिया गया. उन्हें 51 में से 29 वोट प्राप्त हुए. जबकि उनके विपक्षी उम्मीदवार स. परमजीतसिंह सरना को हार का सामना करना पड़ गया. 

बारह घंटों की राजनीतिक सरगर्मियों के चलते श्री गुरु ग्रन्थ साहिब जी का प्रकाश खुला रहा. वहीं झगड़े, फसाद, पुलिस बल प्रदर्शन और राजनीतिक खींच - ताण जारी रहीं. इन घटनाओं के वीडियो और फोटो सोशल मीडिया पर जमकर वायरल हो रहें हैं. जिसमें वो उपेक्षाओं के दृश्य स्पष्ट देखें जा सकते हैं. दिल्ली के सिख नेता फेसबुक लाइव के जरिये भी शिरोमणि अकाली दल और भाजपा की अंदरूनी साँठगाँठ पर आरोप जड़ते देखें जा रहें हैं. क्या चुनावों के लिए श्री गुरु ग्रंथसाहिब जी के स्वरुप को प्रकाशमान करना आज के राजनीतिक युग में सार्थक है? चुनाव और मतदान तो एक्ट और सरकारी नियमों से करवाएं जाते हैं, वहां श्री गुरु ग्रन्थ साहिब जी को ले जाकर प्रकाशमान करने की प्रथा में बदलाव लाना चाहिए. 

 दिल्ली कमेटी के लिए प्रधान चुनने को लेकर रविवार के दिन कड़ाके की सर्दी के बीच राजनीतिक गर्माहट से सिख राजनीतिक पार्टियों ने जमकर अपने राजनीतिक हथकंडे दिखाए. निश्चित ही इन चुनावों की गतिविधियों का रिमोट भाजपा के नेता मनजिंदर सिरसा के हाथ रहा होगा. वह रिमोट भी "मेड इन अकाली दल" का रहा होगा. सिरसा भले ही आज भारतीय जनता पार्टी के नेता और कार्यकर्ता होंगे लेकिन उनकी पहली आस्था शिरोमणि अकाली दल ही हैं. पंजाब चुनाव और अन्य कुछ विषयों को लेकर मनजिंदरसिंह सिरसा भाजपा में गोटिया फीट करने के काम में सहायक की भूमिका अदा कर रहें हैं. इसलिए सरदार सुखबीरसिंह बादल द्वारा दिल्ली प्रबंधक कमेटी के चुनावों में अकाली दल का प्रधान बनाने के लिए सभी अधिकार गुप्त रूप से मनजिंदर सिंह सिरसा को सौंप दिए. सिरसा ने भी अपनी राजनीतिक कुशलता (साम दाम दंड भेद) का उपयोग कर सरदार हरमीतसिंह कालका को प्रधान बनाया हैं. अब शिरोमणि अकाली दल के नेतृत्ववाले प्रबंधन में पांचों तखतों के साथ साथ दिल्ली प्रबंधन समिती का नाम भी शामिल हो गया हैं. 

पंजाब में हो रहें विधानसभा चुनावों से पहले सुखबीर सिंह बादल को दिल्ली में शक्ति प्रदर्शन दिखाना जरुरी था. इस वर्चस्व प्रदर्शन के कदम से शिरोमणि अकाली दल ने कांग्रेस पार्टी और आम आदमी पार्टी पर दबाव कसने का अपना राजनीतिक पैंतरा खेल लिया हैं. लेकिन उसके लिए गुरुद्वारा श्री रकाबगंज साहिब में जो घटनाक्रम घटित हुआ उसको देख कर शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी के गिरते राजनीतिक स्तर अंदाजा लग ही जायेगा. पंजाब विधानसभा सभा में शिरोमणि अकाली दल भाजपा और कांग्रेस के खिलाफ चुनाव लड़ रहीं हैं, लेकिन कहना नहीं होगा कि दिल्ली गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी में शिरोमणि अकाली दल का प्रधान चुनकर लाने हेतु भाजपा पलकें बिछाएं मददगार साबित हुईं. 

विवाद का विषय : रविवार को दिल्ली सिख गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी के तत्वाधान में एक्ट 1971 के आधार से प्रधान चुनाव आयोजित किये गए थे. सुबह करीब 11 बजे चुनाव प्रक्रिया प्रारंभ हुईं और चुनाव प्रक्रिया कक्ष में श्री गुरु ग्रंथसाहिब जी को विधिवत रूप से प्रकाशमान किया गया कि चुनाव प्रक्रिया गुरु महाराज की पावन हजूरी में संपन्न हो. प्रधान पद के लिए शिरोमणि अकाली दल के उम्मीदवार के रूप में सरदार हरमीत सिंह कालका और उनके विपक्ष उम्मीदवार के रूप में सरदार परमजीतसिंह सरना की उम्मीदवारी तय हुईं. शुरुआती दो मतदाताओं ने वोट डाले नहीं कि विवाद शुरू हो गया. यह चुनाव गुरुद्वारा एक्ट अनुसार गुप्त मतदान प्रक्रिया के तहत करवाने का प्रावधान हैं. लेकिन मतदाताओं द्वारा मतपत्रिका पर नाम दर्ज कर उसे सार्वजनिक रूप से प्रदर्शित किये जाने का मामला सामने आया. जिसके बाद सरदार परमजीतसिंह सरना, सरदार मंजीतसिंह जी. के. और उनके साथियों ने आक्षेप दाखिल किया. यहीं से विवाद खड़ा हो गया. बीच बचाव और हस्तक्षेप के लिए पुलिस बल को तैनात करना पड़ गया. जिस कक्ष में श्री गुरु ग्रन्थसाहिब प्रकाशमान थे वहां हाथापाई की नौबत बन गईं. यह विवाद और खींचतान रात के ग्यारह बजने तक चलती रहीं. तब तक ग्रंथीसिंघ गुरु ग्रंथसाहिब जी के स्वरुप को लेकर वहीं झगड़े फसाद के माहोल में बैठें रहें. आखिर रात ग्यारह बजे महाराज के स्वरुप संतोखणे का कदम उठाया गया. चुनाव संपन्न करवाने के लिए गुरु महाराज जी के प्रकाश करवाकर वहाँ सम्मान का पालन नहीं किया. यह संकेत दर्शाते हैं कि किस तरह से सत्ता की लालसा के मारे नेताओं ने गुरु ग्रंथसाहिब जी के अस्तित्व को उपेक्षित रखा !

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 डेली वेजस कर्मचारियों पर टेढ़ी नज़र? 

गुरुद्वारा बोर्ड प्रशासन अब कर्मचारियों पर दुश्मनी निकालने की फिराक में !

जब से गुरुद्वारा सचखंड बोर्ड में कार्यरत डेली वेजस अथवा अस्थाई कर्मचारियों द्वारा सेवा में पक्का (पर्मनंट) करने की मांग उठाई गई हैं. तब से बोर्ड के कर्ताधर्ता बहुत अस्वस्थ दिखाई दे रहें हैं. कर्मचारियों के प्रति अचानक से बोर्ड प्रशासन का रवैया बदल सा गया हैं. कभी यूनिफार्म को लेकर तो कभी अन्य विषय के नोटिस जारी कर कर्मचारियों के साथ एकदम से कार्यालयीन व्यवहार में रुखाई अपनाई जा रहीं हैं. कर्मचारियों के प्रति रोष का साफ चित्रण यहाँ देखने को मिल रहा हैं. कुछ डेली वेजस कर्मचारियों पर बोर्ड प्रशासन की खास नज़र हैं. जी हाँ ! टेढ़ी नज़र !! उन कर्मचारियों को अगाह करना उचित होगा जिन्होंने हाल ही में अस्थाई कर्मचारियों को सेवा में पक्का करने की मांग लेकर पहल शुरू की थीं. पिछले दिनों डेली वेजस कर्मचारियों का एक समूह, कर्मचारियों को "सेवा में पक्का" करने की एक जायज मांग लेकर सम्मानीय जत्थेदार साहब संतबाबा कुलवंतसिंघजी, संतबाबा बलविंदरसिंघजी कारसेवावाले बाबाजी, बोर्ड के सभी मेंबर साहिबान से गुहार लगा चूका हैं. जब से डेली वेजस कर्मचारियों ने इस मांग को लेकर बोर्ड प्रबंधन के सामने मोर्चा खोला है, तब से गुरुद्वारा बोर्ड के सुपरिन्टेन्डेन्ट (समय समय के प्रभारी) द्वारा नोटिस जारी करने का सिलसिला शुरू किया गया हैं. यह किसके इशारों पर हो रहा हैं खुलासे की जरुरत नहीं रह जाती. जाहीर स. भूपिंदर सिंघ मिनहास तो इस तरह का द्वेष भरा निर्णय अचानक लादने की भूमिका नहीं अपना सकते. इस तरह का "समन्वय" लोकल होने का संदेह उठ रहा हैं!

यहाँ जारी चर्चा में ज्ञात हुआ है कि बोर्ड प्रबंधन द्वारा अब अचानक से कर्मचारी ड्यूटी पर उपस्थित हैं कि नहीं, उसकी जाँच (चेकिंग) हेतु पेट्रोलिंग बढ़ा दी गईं हैं. रात के समय जाकर कर्मचारियों को चेक किया जा रहा हैं. छूटिया देने में आनाकानी की जा रहीं हैं ! मेडिकल बैकराउंड के बावजूद भी लीव सेंक्शन नहीं की जा रहीं हैं ! कोशिश यह की जा रहीं हैं कि कोई डेली वेजस कर्मचारी मामूली गलती में फंस जाए और उसका बहाना बना कर उन्हें नोटिस दी जाए, निलंबित किया जाए या सेवा ख़ारिज की जाए....आदि. चलो यह भी ठीक हुआ कि ढिलाई की गर्त में डूबे बोर्ड प्रबंधन को आखिर जाग तो आई ! कर्मचारी वर्दी में आने चाहिए यह यकायक से उनके चाणाक्ष प्रशासन को साक्षात्कार हो ही गया. शुक्र है डेली वेजस कर्मचारियों ने बोर्ड को जगा तो दिया. इस तरह के नोटिस पहले कब जारी हुए थे और उन पर बाद में कितना अमल हुआ अथवा नहीं हुआ इसका मूल्यांकन प्रधान साहब को कर लेना चाहिए. 

यह बात सही हैं कि, कर्मचारियों से आठ घंटे काम लेना यह बोर्ड प्रशासन का अधिकार बनता हैं. लेकिन सभी कर्मचारियों से. ना कि कुछ कर्मचारियों से, जिनसे दुश्मनी की भावना निकालनी हो. बोर्ड की सत्ता के स्वामियों ने अपने गीने - चुने लोगों को इस तरह के नोटिस के नियमों से सुरक्षित रखने व्यवस्था स्वयं लागु की हुईं हैं. पिछले दिनों की बात है, जब गुरुद्वारा सचखंड बोर्ड का सामूहिक विवाह मेलावा संपन्न हुआ था. तब श्री गुरु ग्रन्थसाहिब जी भवन के बाहर जोड़ा घर पर बोर्ड द्वारा एक भी कर्मचारी नियुक्त नहीं किया गया था. जिससे बोर्ड प्रबंधन की जागरुकता खुलकर उजागर हो जाती है. 

कहने का तात्पर्य यह कि डेली वेजस पर कार्यरत बोर्ड कर्मचारियों के प्रति दुर्भावना अपनाना योग्य नहीं होगा. जो कर्मचारी भाई - बहन पांच से छह सालों से अस्थाई कर्मचारी के रूप में सेवा दे रहें हैं, उनका अधिकार बनता हैं कि उन्हें सेवा में पक्का किया जाए. पिछले तीन सालों से कर्मचारियों की मांगों को कुचला जा रहा हैं. कुछ कर्मचारी जो अपनी बढ़ती उम्र में भी पक्का होने के पूर्ण दावेदार थे, उनके साथ कितनी ज्यादती पेश हुईं हैं स्वयं सोचिये. समय और उम्र रुकने वाली तो हैं नहीं ! जिन्हें प्रमोशन मिलना चाहिए था, उन्हें समय पर प्रमोशन दिया नहीं गया हैं. कितनों को हुआ होगा आर्थिक नुकसान!

फिर बोर्ड प्रशासन ने तीन सालों में क्या किया हैं? सिर्फ कर्मचारियों का हक मारा हैं? सिर्फ तबादलों का खेल खेला हैं? सालों से निलंबित कर्मचारियों की फाइलें धूल खा रहीं हैं ! उन फाइलों का करना क्या है सुपरिन्टेन्डेन्ट साहब और अमला विभाग द्वारा मा. प्रधान साहब का लिखित अभिप्राय तो मंगवाते कि क्या किया जाए? बोर्ड के प्रलंबित विषयों का सरोकार बोर्ड के प्रधान साहब और सुपरिन्टेन्डेन्ट पर निर्भर करता हैं. तीन सालों में कुछ नहीं किया तो फिर किया क्या हैं? "साहब लोग" सोच लें कि उनके कार्यकाल में क्या अच्छा हुआ और किन विषयों की लापरवाही हुईं हैं. आने वाले डेढ़ माह में इस बोर्ड की अवधि पूर्ण हो जाएगी. बोर्ड कर्मचारियों को सेवा में पक्का करने की उपलब्धि किसके नाम चढ़ेगी यह देखना हैं. चुनाव के मेनूफेस्टो जिन्होंने बनाकर साधसंगत में बटवाएं थे, वें भी गौर करें इन विषयों पर कभी !  

रविंदरसिंघ मोदी 



शुक्रवार, 21 जनवरी 2022

शेरसिंघ फौजी, गुरचरनसिंघ घड़ीसाज, सुरेंदरसिंघ मेंबर और सुरजीतसिंघ फौजी की बोर्ड में नियुक्ति !

सचखंड हजूरी खालसा दीवान द्वारा मनोनीत

सचखंड हजूरी खालसा दीवान सदस्यों के गुरुद्वारा सचखंड बोर्ड में समावेश का बहुप्रतीक्षित एवं प्रलंबित निर्णय आखिरकार तारीख 20 जनवरी, 2022 को अमल में आया. महाराष्ट्र सरकार के राजस्व विभाग द्वारा जारी गैजेट (आदेश परिपत्रक) अनुसार गुरुद्वारा सचखंड बोर्ड कानून 1956 की बोर्ड संरचना कलम 6 (1)(8) अनुसार सचखंड हजूरी खालसा दीवान के बोर्ड सदस्य के रूप में सरदार गुरचरनसिंघ उत्तमसिंघ घड़ीसाज, स. शेरसिंघ हीरासिंघ फौजी, स. सुरजीतसिंघ शेरसिंघ फौजी और स. सुरेंदरसिंघ अजायबसिंघ फौजी की नियुक्ति की गईं. जिसके पश्च्यात अब बोर्ड सदस्य संख्या 13 पर पहूंच गईं है और अभी चार सदस्यों की नियुक्तियां प्रलंबित है. चारों सदस्यों के सदस्य के रूप में बोर्ड में आगमन करने पर बड़ी संख्या में लोगों ने उन्हें बधाई और शुभकामनायें प्रेषित की हैं. 

गुरुद्वारा तखत सचखंड बोर्ड में अब तीन अनुभवी और एक नये चेहरे का समावेश हुआ है. विगत एक से डेढ़ साल से दीवान सदस्यों की नियुक्ति का विषय प्रलंबित रखा गया था. अब जबकि एसजीपीसी सदस्य और महाराष्ट्र सरकार नियुक्त प्रधान स. भूपिंदर सिंघ मिनहास के सामने बोर्ड को लेकर कई तरह की कानूनी दिक्क़तें प्रस्तुत हुईं तो लगें हाथ राजस्व मंत्रालय द्वारा दीवान के सदस्य बढ़ाकर मिनहास को बड़ी राहत पहुंचाई गई है. वहीं महाराष्ट्र सरकार नियुक्त प्रतिनिधि का एक पद, हैदराबाद (तेलंगाना) के सिखों का एक प्रतिनिधी और दो सिख सांसद अथवा उनके स्थान पर दो लोगों की नियुक्ति का विषय राजस्व मंत्रालय द्वारा फिर से प्रलंबित रखा गया है. इन पदों को रिक्त रखकर राजस्व मंत्रालय द्वारा बोर्ड फार्मेशन प्रक्रिया को पूर्ण नहीं किया जा रहा है. 


बुधवार, 19 जनवरी 2022

एसजीपीसी बनाम बिहार के स्थानीय सिख? 

राजिंदरसिंघजी की मौत से सिहरन !

(दिवंगत : भाई राजिंदर सिंघजी, हेड ग्रंथी, पटना)

श्री गुरु गोबिंदसिंघजी महाराज की जन्मस्थली तखत श्री हरिमंदर साहब, पटना में हेडग्रंथि भाई राजिंदरसिंघजी की मौत की घटना ने सिख जगत में एक सिहरन पैदा कर दी है. इस घटना के बाद एक बार फिर शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी (एसजीपीसी) के प्रबंधन नीति पर सवाल उठने लगें हैं. जहाँ - जहाँ शिरोमणि अकाली दल प्रणीत एसजीपीसी संस्था का प्रबंधन (सत्ता) विद्यमान हैं, वहां - वहां प्रबंधन और कार्यालयीन व्यवस्था को लेकर काफी विवाद की स्थिति बनीं देखीं जा रहीं हैं. एसजीपीसी के प्रबंधन में साम दाम दंड भेद मंत्र भी आम है, ऐसे आरोप होने लगें हैं. एक पवित्र तखत साहब के स्थान पर यूँ हिंसक घटना उजागर होने से उसका एक नकारात्मक संदेश समस्त विश्व में प्रसारित हो रहा हैं.  यहाँ, आत्महत्या और हत्या से आगे जाकर यह यह सवाल सिहरन पैदा कर रहा हैं कि एक पूजास्थली पर ऐसी परिस्थिति क्यों बन गईं कि एक वयोवृद्ध ग्रंथी का जीवन अंतिम दिनों में दुर्गति में तब्दील हो गया.  

पटना साहब जैसे पूजनीय स्थल पर कार्यरत मुख्य ग्रंथी भाई राजिंदरसिंघजी की मौत के बाद पटना शहर में राजनीतिक सरगर्मियां बढ़ गईं हैं और वहां एक बार फिर एसजीपीसी प्रबंधन पर यह आरोप लगने शुरू हो गए हैं कि एसजीपीसी द्वारा पंजाब के लोगों को तखत साहब की नौकरियां देने के उद्देश से बिहार के स्थानीय सिखों को नौकरियों से हटाया जा रहा हैं. प्रबंधन के सभी बड़े पदों पर पंजाब से लोग लाकर बिठाये जा रहें हैं, वहीं पटना के स्थानीय निवासियों को छोटे ओहदो पर नौकरियां दी गईं हैं. स. त्रिलोकी सिंघ जो कि पटना के स्थानीय निवासी हैं, उनका लगातार एसजीपीसी प्रोत्साहित पटना प्रबंधन कमेटी के प्रधान सरदार अवतारसिंघजी हित के साथ संघर्ष जारी हैं. उनके द्वारा किये गए अब तक के इन आरोपों के बाद एसजीपीसी के प्रबंधन को लेकर भी सवाल खड़े हो रहें हैं. पिछले दशहरा के समय पटना कमेटी द्वारा 63 वर्ष उम्र पार किये गए ओहदेदार और सेवादारों को निवृत्त करने का निर्णय लिया गया था. जिसके बाद से स्थानीय बिहारी बनाम एसजीपीसी (पंजाबी) विवाद पैदा हो गया था. राजिंदरसिंघजी की मौत का उस घटना के साथ कहीं ना कहीं संबंध होने का दावा प्रस्तुत हो रहा हैं. 

पांचों के तखतों के प्रबंधन पर एसजीपीसी की सत्ता : 

इस समय शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी (एसजीपीसी) की पांचों तखत पर प्रत्यक्ष व अप्रत्यक्ष सत्ता कायम हैं. पंजाब से दो हजार किलोमीटर दूर स्थित तखत सचखंड श्री हजूर अबचलनगर साहब बोर्ड प्रबंधन समिती पर भी एसजीपीसी का नियंत्रण और प्रभाव स्पष्ट रूप से देखा जा रहा हैं. वर्ष 2018 के मार्च माह में एसजीपीसी के सदस्य व तत्कालीन मीत प्रधान स. भूपिंदरसिंघ मिनहास की हजूर साहब बोर्ड पर "प्रधान" के रूप में नियुक्ति की गईं. यह नियुक्ति तत्कालीन मुख्यमंत्री श्री देवेंद्र फडणवीस (भाजपा) के कार्यकाल में हुईं थी. 

तखत सचखंड हजूर साहब बोर्ड का प्रबंधन भी शिरोमणि अकाली दल की राजनीतिक विचारधारा से प्रभावित और एसजीपीसी के सत्ता प्रभाव से छायांकित प्रतीत होता रहा हैं. हजूर साहब बोर्ड द्वारा भी बोर्ड में ओएसडी पद पर पंजाब से जसविंदर सिंह दिनपुर की नियुक्ति कर हजूर साहब बोर्ड का प्रबंधन उनके निरिक्षण में सौंप दिया गया था. बाद में गुरविंदर सिंह वाधवा को पद से हटाकर जसविंदर सिंघ दिनपुर को बोर्ड का सुपरिन्टेन्डेन्ट भी बनाया गया. पटना साहब में उठाये जा रहें सवालों के बाद यह मामला हजूर साहब के लिए भी सोंच का विषय बन जाता हैं कि हजूर साहब में भी पंजाब से लोग आयात कर स्थानीय सिखों के रोजगार का हक तो नहीं मारा जा रहा हैं? हजूर साहब बोर्ड द्वारा भी स्थानीय शिक्षित युवकों को सेवादार (चतुर्थ श्रेणी) के रूप में नियुक्तियां दें कर "सेवक संख्या" बढ़ाने की नीति अपनाई गई हैं. बोर्ड में उच्च ओहदों पर "साहब" तो पंजाब वाले और बाहर के होने चाहिए! स्थानीय लोग सेवक बनकर ही समाधानी रहें इतियादी आदि... ! 

एसजीपीसी की सत्ता अधीन पांचों तखत साहब की प्रबंधन समितियों के कार्यप्रणाली की समीक्षा होनी चाहिए. बिहार के स्थानीय सिखों को अधिकार मिलना चाहिए कि वहां का पूजा - पाठ, प्रबंधन में स्थानीय लोग ओहदेदार पद पर नियुक्त रहें. वहीं सूत्र हजूर साहब के बारे में उपयोगी होगा. "पटना" और "हजूर साहब" को लेकर एसजीपीसी की सौतेली नीति कई प्रश्नं खड़े कर रहीं हैं. सिखों की सर्वोच्च संस्था होने के नाते संस्था द्वारा पंजाब के बाहर के गुरुधाम और सिखों के प्रति सहानुभूति की नीति होनी चाहिए. लेकिन सबकुछ विपरीत चल रहा हैं. भाई राजिंदरसिंघजी की मौत से व्याप्त सिहरन से यदि एसजीपीसी और शिरोमणि अकाली दल नेता संज्ञान नहीं लेते हैं तब भारतीय सिखों के हितों की रक्षा का दायित्व कौन उठाएगा? 

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मंगलवार, 18 जनवरी 2022

संतबाबा कुलवंतसिंघजी और संतबाबा बलविंदरसिंघजी ने कर्मचारियों को सेवा में कायम करने हेतु प्रधान साहब से की चर्चा 

बोर्ड पदाधिकारी भी दिल बड़ा करें !

(जत्थेदार संतबाबा कुलवंतसिंघजी और संतबाबा बलविंदरसिंघजी कारसेवा वाले कर्मचारियों के शिष्टमंडल को आश्वस्त करते हुए)

गुरुद्वारा सचखंड बोर्ड में कार्यरत डेलीवेजस और बील मुक्ता कर्मचारियों को सेवा में कायम करने का विषय अब फरवरी माह के पहले सप्ताह में निर्णय तक पहुंचेगा ऐसी आस बंध गईं हैं. तखत साहब के सम्मानीय जत्थेदार जी संतबाबा कुलवंतसिंघजी और आदरणीय संतबाबा बलविंदरसिंघजी कारसेवावाले बाबाजी के संयुक्त प्रयासों के चलते बोर्ड के प्रधान स. भूपिंदरसिंघ मिनहास ने आज दोनों संतों के साथ फोन पर हुईं बातचीत में आश्वासन दिया कि बोर्ड कर्मचारियों को सेवा में कायम करने के विषय में, फरवरी के पहले सप्ताह में वें हजूर साहब आकर निर्णय लेंगे. मंगलवार तारीख 18 जनवरी, 2022 की शाम हुए इस घटनाक्रम के बाद कर्मचारी शिष्टमंडल ने संतों के अगले कदम (आदेश) तक संयम बरतने का निर्णय लिया हैं. कर्मचारी भाई - बहनों का यह निर्णय आदरणीय संतों के लिए एक आदर और विश्वास का प्रतीक भी है. दोनों संतों द्वारा समय निकालकर कर्मचारियों की समस्याओं पर सराहनीय पहल की गई हैं. अब गुरुद्वारा सचखंड बोर्ड के आदरणीय प्रधान साहब, पदाधिकारीगण और मेंबर साहिबान पर निर्भर करता हैं कि वें संतों की भावनाओं का सम्मान किस तरह से रखते हैं. 

(बड़ी हसरत लेकर सभी कर्मचारी संतों के दर पर बैठें हैं !)

यह समय है कि बोर्ड के पदाधिकारी और मेंबर साहिबान बोर्ड कर्मचारियों के साथ एकजूट होकर खड़ा रहें. पिछले छह - सात सालों से डेलीवेजस के अल्पवेतन में गुजर-बसर कर रहें कर्मचारी वर्ग की समस्याओं के लिए सभी अपना दिल बड़ा करें. प्रत्यक्ष में कर्मचारियों से जुड़े यह प्रलंबित विषय जिद्द, अहम और राजनीति के लिए नहीं हैं. चुनाव आते और जाते हैं. सत्ता, आती और जाती हैं. स्थिर रहता हैं तो केवल स्थानीय समाज ! यह समाज ही कर्मचारी भी हैं, मतदाता भी हैं और रिश्तेदार भी. इन्हीं की सहायता और आशीर्वाद से मेम्बरशिप भी मिलती हैं. यदि इनके आशीर्वाद को ठेंगा दिखाया गया तो भविष्य में किसी तरह की चतुराई के लिए स्थान नहीं मिल सकता. 

(इन विवश और मजबूर कर्मचारियों की दुआएं आपको बड़ा बनाएंगी!)


पिछले कुछ वर्षों में हमने बराबर यह महसूस किया हैं कि हमारी सामाजिक समस्याओं पर लड़ने या संघर्ष करने के लिए स्थानीय स्तर पर कोई प्रभावी नेता उभर नहीं रहा हैं. समाज की विविध समस्याओं पर लड़ने और आवाज उठाने के लिए ना नेता हैं और ना कोई विकल्प ! गुरुद्वारा सचखंड बोर्ड संस्था ही समाज की नेतृत्व संस्था है. लेकिन दुर्भाग्य कि यह संस्था भी हमारे काम नहीं करती हैं. पराधीन नेतृत्व को आज यथाशक्ति बल प्रोत्साहित करनेवाले सभी चेहरे आनेवाले कल की समस्याओं को लेकर अंजान हैं. छोटी बातों पर, छोटे विषयों पर राजनीति करने से कोई बड़ी उपलब्धि प्राप्त नहीं होती हैं. एक पत्रकार के स्वाभाविक दायित्व के चलते समाज के सामूहिक लाभ को लेकर मैं कुछ अपेक्षाएं व्यक्त कर रहा हूँ इसका अर्थ यह नहीं कि मुझे समाज का नेता बनना हैं. या किसी की राजनीतिक प्रतिमा को कम करके आँकना हैं. मेरी कोशिश यहीं रहती हैं कि समाज से अच्छे नेता उभरकर सामने आए. वें समाज के हितों के लिए राजनीति करें, ना कि समाज के साथ राजनीति करें ! 

(संतों का आशीर्वाद कर्मचारियों के सिर मत्थे लगें )

मुझे अहसास हैं कि, कुछ राजनीतिक लोग मुझे (स. रविंदरसिंघ मोदी) बिलकुल भी पसंद नहीं करते, क्योंकि मेरे द्वारा किये गए सवाल उन्हें उनकी राजनीतिक गतिशीलता में कुछ दिक्कतें खड़ी करते हैं. मेरा आशय व्यक्तिगत रूप से किसी का दिल दुखाना नहीं होता हैं. बल्कि आप लोगों से समाज का या गरीब वर्ग का काम करवाना मात्र होता हैं. जब मैं पाता हूँ कि समाज से कोई व्यक्ति कुछ कहने के लिए आगे नहीं बढ़ते हैं तब मुझे अखबार में अथवा ब्लॉग पर भाष्य करना पड़ जाता हैं. यदि समाज में कोई नेता सक्षम प्रतीत हो तब समाज को मेरे जैसे सामान्य व्यक्ति की जरुरत ही नहीं पड़ेगी. मैं भी स्वालंबी नेताओं के उभरने की बाट जो रहा हूँ. आज जब मैं इन कर्मचारी वर्ग के साथ खड़ा हूँ तो मेरा कोई निजी स्वार्थ नहीं हैं. इस साल (वर्ष 2022) के गुरुद्वारा बोर्ड अथवा महानगर पालिका चुनावों को लेकर भी मै खासा उत्साहित नहीं हूँ. मेरा विश्वास पत्रकारिता में ही है, नेतागिरी में नहीं हैं. इसलिए सम्मानित गुरुद्वारा बोर्ड से आग्रह करना चाह रहा हूँ कि कर्मचारियों के प्रलंबित समस्याओं के निराकरण के लिए अपना दिल बड़ा करें. धन्यवाद !

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सोमवार, 17 जनवरी 2022

 मुख्य ग्रंथी भाई राजिंदरसिंघजी जीवन की जंग हार गए !

आत्महत्या या मौत? 

गुत्थी कायम !

भाई राजिंदर सिंघजी, दिवंगत, हेड ग्रंथी पटना. 

सिखों के पवित्र पावन तखत श्री हरमिंदर साहब, पटना में मुख्य ग्रंथी के रूप में कार्यरत ग्रंथी भाई राजिंदरसिंघ जी आखिर अपने जीवन की जंग हार गए. सोमवार, 17 जनवरी की सुबह 3 बजने के करीब  उनका पटना के श्री गुरु गोबिंदसिंघजी अस्पताल में उपचार के चलते निधन हो गया. उनकी आयु 70 वर्ष थीं और उन्होंने लंबे अरसे तक तखत साहब में सेवा निभाई थीं. उनके परिवार के सूत्रों के मुताबिक पटना के खाजेकलां घाट पर उनके पार्थिव पर अंतिम संस्कार किया जायेगा. 

भाई राजिंदरसिंघजी की मौत ने कईं सवाल खड़े कर दिए हैं. उनकी मौत को लेकर सिखों के एक गुट ने तो हत्या होने की साजिश का आरोप लगाया हैं. जिसके बाद तखत हरिमंदर साहब पटना प्रबंधक कमेटी के प्रधान सरदार अवतारसिंघ हित की परेशानियां बढ़ गईं. उल्लेखनीय हैं कि तारीख 13 जनवरी, 2022 के दिन भाई राजिंदरसिंघजी उनके गुरुद्वारा स्थित निवास में गंभीर रूप से घायल हालात में पाए गए थे. उनकी गर्दन पर कृपाण का बना घाव पाया गया था. प्रथमदृष्टिया यह मामला आत्महत्या होने के संकेत दें रहा था. 

भाई राजिंदरसिंघजी को घायल अवस्था में अस्पताल में उपचार हेतु भर्ती करवाया गया. ता. 16 जनवरी को उनकी तबियत में सुधार होने की चर्चा थीं. लेकिन रात बीतने के बाद अचानक से उनकी मौत हो गईं. उनकी मौत पर पटना स्थित गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी से संबंधित दो गुटों में आरोप - प्रत्यारोप के दौर शुरू हो गए हैं. बहरहाल बुजुर्ग ग्रंथी भाई राजिंदरसिंघ जी को श्रद्धांजलि अर्पित हैं. 

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 सिख श्रद्धालुओं के साथ हुईं मारपीट का निषेध

भोजपुर बिहार में ट्रक पर पत्थराव और तोड़फोड़!


(बिहार के भोजपुर में चंदा उगाही कर रहे युवकों के समूह बिहार के भोजपुर में सिख श्रद्धालुओं के साथ मारपीट और पत्थराव की घटना के बाद पुलिस से चर्चा करते हुए श्रद्धालु.)  


पटना स्थित तखत हरमिंदर साहब के दर्शन कर लौट रहें मोहाली, पंजाब निवासी सिख श्रद्धालुओं का ट्रक रोककर मारपीट और तोड़फोड़ किये जाने की घटना सामने आई है. इस घटना का सर्वप्रथम निषेध किया जाना चाहिए कि श्रद्धालुओं के साथ बीच सड़क पर गुंडागर्दी की घटना को अंजाम दिया जाता हैं. उपर्युक्त घटना को लेकर सभी सिख संस्थाएं निषेध जता रहीं हैं. 

प्राप्त जानकारी के मुताबिक मोहाली, पंजाब निवासी साधसंगत एक ट्रक द्वारा बिहार के पटना शहर स्थित तखत हरमिंदर साहब में दशमेश पिता श्री गुरु गोबिंदसिंघ जी महाराज का प्रकाशपर्व मनाने पहुँचीं थीं. प्रकाशपूरब को मनाकर साधसंगत 15 जनवरी को पंजाब की ओर रवाना हुईं. इस ट्रक में 40 पुरुष, 20 महिलाएं और दस से बारह बच्चें भी थे. यह ट्रक जैसे ही भोजपुर शहर अंतर्गत आरा - सासाराम, चरपोखरी के पास हाईवे पर आगे बढ़ा तो 20 से 25 युवकों के एक समूह ने रास्तें में ट्रक को रोक दिया. युवकों ने यज्ञ आयोजन के लिए चंदा देने की मांग की. चंदा मांगने वाले हिंदुत्व संघटनों के कार्यकर्ता थे ऐसी चर्चा सुनने को मिल रहीं हैं. जब चंदा देने को लेकर सभ्य भाषा का प्रयोग होने लगा तब ट्रक चालक तेजिंदर सिंघ ने चंदा देने से स्पष्ट मना कर दिया. 

इस पर उन युवकों ने ट्रक आगे नहीं बढ़ने दिया जायेगा कहकर ट्रक के सामने बैठ गए. उन्हें उठाकर रास्ता खुला करने के लिए वहां कोशिश शुरू की गईं. जिसके बाद जमकर बहस हो गई. कुछ युवकों द्वारा तेजिंदरसिंघ के साथ मारपीट की गईं. बीच बचाव करने वाले श्रद्धालुओं के साथ भी हाथापाई की गईं. वहां युवकों की भीड़ ने ट्रक की तोड़फोड़ की. कुछ देर पत्थराव किया गया. 

घटना में ट्रक में सवार श्रद्धालु मनप्रीतसिंघ, हरप्रीतसिंघ, बीरेंद्रसिंघ, बलबीरसिंघ, जसबीरसिंघ सहित 15 श्रद्धालुं घायल हो गये. घायलों का अस्पताल में उपचार करवाया गया. उपर्युक्त घटना की शिकायत भोजपुर पुलिस के पास प्रस्तुत की गईं हैं. लेकिन पुलिस द्वारा की गईं करवाई की जानकारी अभी प्राप्त नहीं हो पाई हैं. सिख श्रद्धालुओं पर हुए इस हमलें के बाद बिहार के मुख्यमंत्री श्री नीतीश कुमार से गुहार लगाई जा रहीं हैं कि वें दोषियों के खिलाफ सख्त करवाई करें. हजूर साहिब की साधसंगत द्वारा भी घटना का निषेध किया जा रहा हैं. 

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रविंदरसिंघ मोदी, हजुरसाहिब. 



रविवार, 16 जनवरी 2022

 कोरोना का "सुपर संडे"

24 घंटों में 2 लाख 71, 202 केसेस !

नांदेड़ में 643 पॉजिटिव

कोरोना संक्रमण के मामले तेज रफ़्तार से प्रसारित हो रहे हैं. रविवार (16 जनवरी) का दिन कोरोना संक्रमण के लिए जैसे "सुपर संडे" साबित हुआ. देश में पिछले 24 घंटों के दौरान कोरोना संक्रमण के 2 लाख 71 हजार 202 पॉजिटिव केसेस बढ़ें हैं. जिसके साथ ही संक्रमण दर भी 16.28 % से बढ़कर 16.66 % हो गईं हैं. तेज गति से प्रसारित हो रहा कोरोना और उसके साथ ओमीक्रॉन के मामले आनेवाले बड़े संकट की ओर इशारा कर रहे हैं. यदि कोरोना के मामले यूँ ही बढ़ते रहे तो महामारी की त्रासदी लंबे समय तक चलेगी और देश के नागरिकों के सामने एक बड़ा आर्थिक संकट खड़ा हो जायेगा. 

विगत 24 घंटों में संक्रमण के चलते 314 लोगों ने अपनी जानें भी गँवाई हैं. देश में कोरोना से हताहत होने वालों की संख्या अब 4 लाख 86 हजार 66 पर पहुँच गईं हैं. महाराष्ट्र की बात की जाए तो पिछले 24 घंटों में कोरोना के नये 46205 मामले प्रस्तुत हुए हैं. वहीं 23 लोगों की मौत हो जाने की पुष्टि हुईं हैं. 

नांदेड़ में रविवार को कोरोना केसेस में अचानक से उछाल आ गया. बीते 24 घंटों में जिले में कोरोना के नये 643 पॉजिटिव मामले पेश हुए हैं. एक दिन पूर्व में 421 मामले दर्ज हुए थे. उससे एक दिन पूर्व यानी 13 जनवरी के दिन 400 केसेस पॉजिटिव पाए गए थे. यदि कोरोना के मामले प्रतिदिन सौ से सवा सौ के अंकों से उछाल भरते रहेंगे तब जिले में और कड़े निर्बंध लागु करने पड़ सकते हैं. 

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 सोनू सूद के सम्मान में स्पाइसजेट एयरलाइन्स की पेशकश !

सोनू ने आज की विमान यात्रा 

विमान को रंगाया गया सोनू के चित्र से

स्पाइसजेट ने बोइंग 737 पर सोनू सूद के सेवाओं का चित्रण अंकित किया !

फिल्म अभिनेता सोनू सूद को कौन नहीं जनता. यह देश उनकी उन सेवाओं को कभी नहीं भुला सकता जो उन्होंने कोरोना संक्रमण के आपातकाल में जनमानस के लिए अर्पित की थीं. हजारों लोगों की सहायता कर सोनू सूद ने ऐसा कार्य कर दिखाया कि उन्हें देश का सर्वोच्च गौरव प्रदान किया जाए. वहीं उनकी सेवाएं अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर भी दर्ज करने जैसी हैं. जहाँ सरकारी यंत्रणाएँ नाकाम साबित हुईं, वहां सोनू सूद ने "मानव सेवा ही ईश्वर सेवा है" के महावाक्य को चरितार्थ कर दिखाया. सोनू सूद की उन्हीं सेवाओं को स्पाईसजेट विमान सेवा कंपनी ने याद रख कर उनके गुणगौरव में अपने  बोइंग 737 को सोनू के चित्र से रंग दिया. 

जब इस खबर के संबंध में सोनू सूद को पता चला तो उन्होंने उस बोइंग 737 से यात्रा कर समस्त घटनाक्रम का अवलोकन किया. इस अवसर पर स्पाइसजेट विमान कंपनी के प्रशासन ने सोनू सूद का सम्मान किया. स्टॉफ ने उनके साथ तस्वीरें भी खिंचवाई. विमान यात्रियों ने भी इस मौके पर सोनू सूद की जी भरकर सराहना की. 


देश में छाए कठीण संकट के समय सोनू सूद लोगों की सहायता के लिए आगे आए थे. उन्होंने सोशल मीडिया की सहायता से मदत मांगने वालों को यथा संभव सहायता पहुंचाई थीं. सोनू सूद के सम्मान में स्पाइसजेट की यह पहल सराहनीय हैं. 

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  होली हल्ला महल्ला यात्रा मार्ग की दुरुस्ती करें : मनबीरसिंघ ग्रंथी राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरद पवार समूह) के युथ प्रदेश सचिव स. मनबीर...