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रजिंदरसिंघ पुजारी तनखैया घोषित
पंज तख्तों पर सेवा लगाई
नांदेड़, हजूर साहिब, २२ फरवरी -
शुक्रवार की शाम गुरुद्वारा तखत सचखंड श्री हजूर अबिचलनगर साहिब बोर्ड के मेंबर राजिंदर सिंघ नरिंदर सिंघ पुजारी को तखत साहब के पंजप्यारे साहिबान ने तनखैया (बहिष्कृत) घोषित करते हुए उन्हें पांचों तखत साहब पर उपस्थित होकर लंगर और जोड़ेघर में पांच पांच दिनों की सेवा सुनाई. यह सजा शुक्रवार की शाम तखत साहब पर रहिरास का पाठ समाप्त होने के बाद मीत जत्थेदार संत बाबा ज्योतिंदर सिंघ द्वारा सुनाई गई. इस समय जत्थेदार संतबाबा कुलवंत सिंघजी, हैडग्रंथि सिंघसाहब भाई कश्मीर सिंघजी, मीत ग्रंथि सिंघसाहब भाई अवतार सिंघजी शीतल, सिंघसाहब भाई राम सिंघजी धूपिया भी उपस्थित थे.
उपर्युक्त संबंध में अधिक जानकारी यह है कि, ता. १९ फरवरी की सुबह ९ बजे के समय तखत सचखंड श्री हजूर साहिब में प्रधान तारसिंघ और मेंबर साहिबान द्वारा पुलवामा में शहीद हुए सी.आर.पी.एफ. के जवानों को श्रद्धांजलि देने हेतु श्री अखंडपाठ साहिब की समाप्ति रखी गई थी. उस कार्यक्रम में तखत साहिब पर बोर्ड के मेंबर साहिबान भी उपस्थित थे. समाप्ति अरदास उपरांत जब कीर्तन शुरू होना था कि मेंबर राजिंदर सिंघ पुजारी ने ऊँची आवाज में पंजप्यारे साहिबान को सम्बोधित करते सवाल पूछा कि तखत साहब पर इस तरह का पाठ रखते समय मर्यादा का ख्याल नहीं रखा गया है. तखत साहब पर कभी भी सन १९८४ में शहीद हुए परिवारों के प्रति श्री अखंडपाठ साहिब नहीं करवाएं गए. उन्होंने एक से डेढ़ मिनिट की बात की जिससे कीर्तन में रुकावट पहुंची ऐसा पंजप्यारे साहिबान को प्रतीत हुआ.
गुरुद्वारा बोर्ड के मेंबर और कांग्रेस के स्थानीय नेता रविंदरसिंघ बुंगई ने उपर्युक्त सम्बन्ध में जत्थेदार साहिब संतबाबा कुलवंत सिंघजी को ज्ञापन देकर राजिंदर सिंघ पुजारी के अभद्र व्यवहार के प्रति शिकायत कर उन्हें तनखैया घोषित करने की मांग की. जिसके बाद २० फरवरी को राजिंदर सिंघ पुजारी से लिखित स्पस्टीकरण माँगा गया. राजिंदर सिंघ पुजारी ने पंजप्यारे साहिबान के पत्र को स्वीकार कर अपनी लिखित सफाई पेश की जिसमे उन्होंने कहा कि , मेरा आशय पंजप्यारे साहिबान का अपमान करना नहीं था और ना मैंने पूजापाठ में कोई खलल डाला है. मैंने सिर्फ मांग की है कि जिस तरह से पुलवामा के शहीदों की आत्मक शांति के लिए पाठ रखकर अरदास की गई वैसे ही सन १९८४ में शहीद हुए सिखों के लिए भी किया जाये.
पुजारी द्वारा दिए गए स्पस्टीकरण पर ता. २२ फरवरी की सुबह ११. ४५ बजे आयोजित पंजप्यारे साहिबान की बैठक में विचार किया गया. बैठक में जत्थेदार संतबाबा कुलवंतसिंघजी, संतबाबा ज्योतिंदर सिंघजी, भाई कश्मीर सिंघजी , भाई अवतारसिंघजी शीतल और भाई रामसिंघजी धूपिया उपस्थित थे. साथ ही सुपरडैंट गुरविंदर सिंघ वाधवा भी उपस्थित थे. बैठक में विचार विमर्श उपरांत पंजप्यारे साहिबान द्वारा एक पत्र भेजकर राजिंदर सिंघ पुजारी को शुक्रवार, २२ फरवरी की शाम ६. ३० बजे तखत साहब पर उपस्थित रहने के आदेश दिए गए.
पत्र प्राप्त होने पर राजिंदर सिंघ पुजारी समय पर तखत साहब पर उपस्थित हुआ. श्री रहिरास साहब के पाठ और अरदास के बाद मीत जत्थेदार ज्योतिंदर सिंघजी ने सजा पढ़कर सुनाई. पंजप्यारे साहिबान ने आदेश में कहा कि राजिंदर सिंघ पुजारी ने जिस ऊँची आवाज में बात की उससे कीर्तन में खलल पेश हुआ. पुलवामा के शहीदों के लिए अरदास रखी गई थी. ऐसे समय ऐतराज जताना योग्य नहीं हैं. आगे से तखत साहब पर कोई इस तरह का व्यव्हार नहीं करे इस बात को दायरे में रखकर राजिंदर सिंघ पुजारी को पांचों तखतसाहिब पर उपस्थित होकर प्रत्येक स्थान पर पांच दिनों की लंगर और जोड़ेघर की सेवा करनी होगी. अंत में तखत साहिब पर श्री अखंडपाठ साहिब रखकर बख्शाने के लिए अरदास करनी होगी.
राजिंदर सिंघ पुजारी ने सजा सुनकर हाथ जोड़े और मत्था टेककर और परिक्रमा कर बाहर निकल गए.
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राजिंदर सिंह पुजारी ने कहा, तखत साहब के प्रति और मर्यादा के प्रति मेरे मन में पूरा सम्मान है. पंजप्यारे साहिबान का आदेश सिर आँखों पर रखा हैं. मैंने किसी को अपमानित करने के लिए कुछ नहीं कहा. मैं अभी जवाब देने की स्थिति में नहीं हूँ.
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राजिंदर सिंघ पुजारी वर्ष २०१२ से गुरुद्वारा सचखंड बोर्ड के मेंबर हैं. भारतीय जनता पार्टी के वे नांदेड़ के जिला उपाध्यक्ष भी हैं. आक्रामक कार्यकर्ता की उनकी छवि रही हैं.
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रविंदर सिंघ मोदी.


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