मेरी ब्लॉग सूची

रविवार, 13 दिसंबर 2020

 महाराष्ट्र सरकार का दो दिवसीय शीतकालीन अधिवेशन सोमवार से 

गुरुद्वारा कानून संशोधन पर सस्पेंस!

रविंदरसिंह मोदी 


महाराष्ट्र सरकार विधानमंडल का दो दिवसीय शीतकालीन अधिवेशन सोमवार, ता. 14-12-20 से प्रारंभ हो रहा है. यह अधिवेशन मुंबई में ही होगा. अधिवेशन को लेकर सरकार पक्ष उत्साह में दिखाई पड़ रहा है. दूसरी ओर विपक्ष अधिवेशन की अवधि को लेकर नाराजी प्रकट कर रहीं है. अपनी नाराजी प्रकट करने के लिए विपक्ष द्वारा सरकार द्वारा आयोजित चायपान कार्यक्रम का आज बहिष्कार किया गया. यह अधिवेशन मात्र दो दिनों का होने के कारण इसमें राजस्व मंत्रालय द्वारा प्रस्तुत होनेवाले ता. 14-12-20 के दिन प्रस्तुत होनेवाले प्रस्तावों की सूची में कहीं भी "दी सिख गुरुद्वारा तखत सचखंड श्री अबचलनगर साहिब बोर्ड" कानून 1956 के संशोधन का विषय दिखाई नहीं पड़ रहा है. इसलिए इस बात का संदेह उत्पन्न हो रहा है कि कहीं गुरुद्वारा बोर्ड कानून 1956 के अंतर्गत कलम ग्यारह के पिछले संशोधन रद्द करने का विषय प्रस्तुत होगा अथवा नहीं. या सरकार की पूर्व मंशा के मुताबिक कानून में आवश्यक ऐसा संशोधन होगा कि नहीं? यह भी सुनने में आ रहा है कि शायद गुरुद्वारा बोर्ड कानून संशोधन का विषय अगले अधिवेशन तक प्रलंबित रखा जायेगा. अभी हाल ही में शिरोमणि अकाली दल के नेता स. प्रेमसिंघ चंदूमाजरा ने महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री श्री उद्धव ठाकरे से भेट कर गुरुद्वारा कानून में बदलाव नहीं किया जाए ऐसी मांग की थी. जिससे यह संदेह और बढ़ गया है. हजूर साहिब के स्थानीय नेता या विशेष कर स्थानीय सिख नेताओं का आलस्य भी साफ नजर आ रहा है. कहना ना होगा कि मुंबईया फील्डिंग बढ़िया जमाई गई थी. महाराष्ट्र सरकार के दो नॉमिनेशन में से एक सीट पर भूपिंदरसिंह मनहास प्रधान के रूप में कार्यरत है वहीं दूसरी सीट खाली है. पूर्व विधायक सरदार तारासिंह के निधन से यह सीट रिक्त हुईं है. इसके अतिरिक्त सिख सांसद के दो स्थान रिक्त हैं. इस तरह से इन तीनों सीटों पर सदस्य के तौर पर नियुक्ति पाने के लिए फिलहाल घमासान मचा हुआ है. मुंबई से नौ लोग प्रयत्नशील है. जबकि नांदेड़ से उन्नीस, पुणे से तीन, औरंगाबाद से पांच, परभणी से दो, नागपुर से दो, अमरावती से एक ऐसे चालीस से ज्यादा इच्छुक अपना जोरआजमाइश कर रहें हैं. शिवसेना, कांग्रेस, राष्ट्रवादी कॉंग्रेस सहित अन्य छोटी पार्टियां भी अपने कार्यकर्ताओं को नियुक्त करने के लिए प्रयत्नशील है. आगामी 31 दिसंबर तक रिक्त पदों पर नियुक्तिया संभव लग रहीं है. यदि कलम ग्यारह का पिछला संशोधन रद्द होता है तो तीन रिक्त पदों और एक मध्यप्रदेश की सीट पर चार नियुक्तियां संभव है. एसजीपीसी के अन्य तीन सदस्यों में से एक सीट पर परिवर्तन होने के आसार है. यदि कानून संशोधन होता हो तो निश्चित ही सब कुछ परिवर्तन हो जायेगा. सचखंड हजूरी खालसा दीवान की चार नियुक्तियां भी इसी अंतर्गत प्रस्तुत हो जायेगी. अगले दो सप्ताह में स्थिति स्पष्ट हो जायेगी. 


 बीबी जगीरकौर की सोंच कितनी सही, कितनी गलत! 

रविंदरसिंह मोदी 

(तखत श्री केशगढ़ साहिब, आनंदपुर साहिब में बयान जारी करते हुए बीबी जगीरकौर और एसजीपीसी के पदाधिकारी)

दैनिक दी ट्रिब्यून (अंग्रेजी) की एक ख़बर यदि सही है तो निश्चित ही सिख जगत की छवि को दाँव पर धरने वाली वो ख़बर साबित होगी. ट्रिब्यून ऑनलाइन समाचार में कहा गया है कि श्री आनंदपुर साहिब में शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी की नई प्रधान बीबी जगीरकौर ने पत्रकारों के सामने यह स्पष्ट किया कि, एसजीपीसी द्वारा आगामी अप्रैल माह में आयोजित होनेवाले गुरु श्री तेगबहादुर जी प्रकाशपर्व चार सौ सालाना शताब्दि कार्यक्रम का न्यौता प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी को नहीं भेजा जायेगा ! 

यह समाचार पढ़कर और सुनकर हर कोई आवाक हुए बगैर नहीं रह सकता. बीबी जगीर कौर का यह वक्तव्य भले ही वर्तमान में चल रहें किसान आंदोलन में प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी की भूमिका को लेकर जारी किया गया होगा. लेकिन उनका यह वक्तव्य सिख जगत की छवि पर प्रतिकूल असर डाल सकता है. बीबी जागीर कौर के इस वक्तव्य पर पंजाब में कोई हंगामा नहीं बरपा बल्कि स्तब्धता छा गई. उक्त विषय पर शिरोमणि अकाली दल के नेतागण भी चुप्पी साधे दिखाई दे रहें हैं. यानि बीबी जगीरकौर द्वारा की गई जल्दबाजी का शिरोमणि अकाली दल द्वारा समर्थन नहीं किया गया. लेकिन यह विषय इसलिए भी गंभीर लग रहा है कि बीबी जगीरकौर शिरोमणि अकाली दल कोर कमेटी की सदस्या भी है. उनका वक्तव्य भारतीय जनता पार्टी द्वारा गंभीरता से लिया जायेगा इसमें कोई संदेह नहीं रह जाता. कहना ना होगा कि यह विषय 2022 में पंजाब में होनेवाले विधानसभा चुनावों के समय भी गहरा असर कर सकता है. 

बीबी जागीरकौर सिखों की सर्वोच्च धार्मिक संस्था का नेतृत्व कर रहीं है. उन्हें चाहिए कि, सिख पंथ की छवि को नुकसान पहुंचाएं, ऐसे वक्तव्य जारी ना करें. गुरु श्री तेगबहादुर जी का चार सौ सालाना प्रकाशपर्व केवल शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी का निजी कार्यक्रम नहीं हैं बल्कि समस्त सिख जगत का कार्यक्रम हैं. गुरु तेगबहादुर जी का बलिदान "तिलक, जंझू राखा" यानि हिन्दू धर्म रक्षार्थ हुआ था. गुरूजी का आगामी प्रकाशपर्व सिख धर्म और अन्य धर्मों को एकत्र लाने का बढ़िया अवसर साबित होगा. यदि ऐसे महत्वपूर्ण कार्यक्रम को लेकर अभी से नकारात्मक वक्तव्य जारी करना उस चतुर्थ शताब्दि को प्रभावित करना होगा. निश्चित ही अन्य राजनीतिक दल बीबी जागीरकौर के वक्तव्य को सिख पंत की राजनीतिक भूमिका मानकर चलेंगे. 

जैसे कि देश में इस समय वातावरण गर्म हैं. राजधानी दिल्ली को किसान आंदोलनकारियों ने चारों छोरों से घेरा हुआ है. किसान आंदोलन में पंजाब के भी कृषक बड़ी संख्या में सक्रिय भूमिका निभा रहें हैं. इन किसानों में सिख भी बड़ी संख्या में शामिल हैं. बीबी जागीरकौर द्वारा उन सिखों और किसानों को आकर्षित करने की दृष्टि से यह वक्तव्य जारी किया हो लेकिन इस समय तो यह गलत प्रतीत हो रहा हैं. देश के प्रधानमंत्री को कार्यक्रम का न्यौता नहीं दिया जाना एक गलत कदम साबित हो सकता हैं. इस महत्वपूर्ण कार्यक्रम में तो सभी राजनीतिक नेताओं और पार्टियों को न्यौता दिया जाना चाहिए. यह कार्यक्रम सिख पंत और समाज संघठन की दिशा में महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल कर सकता है. यदि शिरोमणि अकाली दल द्वारा बीबी जगीरकौर की इस सोंच का समर्थन किया जाता है तो सिख पंथ का इससे बड़ा दुर्भाग्य कोई और नहीं होगा. 

(आप भी अपनी राय भेज सकते हैं. )


  होली हल्ला महल्ला यात्रा मार्ग की दुरुस्ती करें : मनबीरसिंघ ग्रंथी राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरद पवार समूह) के युथ प्रदेश सचिव स. मनबीर...