कलम ग्यारह की शरण में एसजीपीसी ?
क्या शिवसेना अपमान भुलाने को तैयार है ?
नई खिचड़ी पक रहीं है !
रविंदरसिंघ मोदी
(शिवसेना, कांग्रेस, भाजपा और शिरोमणि अकाली दल एक साथ? नई खिचड़ी हांडी पर चढ़ेगी)
शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी यानी एसजीपीसी भयभीत दिखाई पड़ रहीं हैं. कारण ! एसजीपीसी का अस्तित्व महाराष्ट्र में खतरे में पड़ गया हैं. शिरोमणि दल के शिष्टमंडल अब महाराष्ट्र मंत्रालय के चक्कर काट रहें हैं ! मुख्यमंत्री श्री उद्धव ठाकरे को अब अपमान के बजाये गुलदस्तें भेट कर रहें हैं! ये वहीं शिरोमणि अकाली दल है जो दो माह पूर्व शिवसेना पर शाब्दिक हमले दागकर केंद्र में बैठे भाजपा नेताओं से वफ़ादारी निभा रहा था. कंगना के समर्थन में शोशल मीडिया में ट्वीट पर ट्वीट और वीडियो पर वीडियो जारी हो रहें थे. संजय राउत के पास तो लेखा जोखा होगा ही.
गत दिनों शिरोमणि अकाली दल के नेताओं ने अभिनेता शुशांत सिंह राजपूत की मौत के बाद अभिनेत्री कंगना राणावत के पक्ष में उतर कर जिस तरह महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे, शिवसेना और महाराष्ट्र सरकार पर आरोपों की झड़ें लगा दीं थी उससे महाराष्ट्र सरकार नाराज हो गई. शिरोमणि अकाली दल के विधायक स. मनजिंदर सिंह सिरसा ने "उड़ता बॉलीवुड" कहकर महाराष्ट्र सरकार को आड़े हाथों लिया था. लेकिन अब शिरोमणि अकाली दल और शिवसेना में कोई खिचड़ी पकनी शुरू हो गई हैं.
कहा जा रहा हैं कि केंद्र सरकार के खिलाफ दोनों राजनीतिक दल भविष्य में कोई नई चुनौति प्रस्तुत कर सकते हैं. इसलिए पंजाब से बादल साहब ने "प्रेम" का सन्देश यानी श्री प्रेमसिंघ चंदूमाजरा को दूत बनाकर शिवसेना के भेजा हैं. किसान आंदोलन की आड़ में क्या गुल खिलाने की योजना बन रहीं हैं विचारणीय हैं ! क्या शिवसेना, शिरोमणि अकाली दल द्वारा गत दिनों किया गया अपमान पचाने को तैयार हैं?
वैसे, विधायक सिरसा की बयानबाजी के समय महाराष्ट्र के प्रभावी नेता और कैबिनेट मंत्री श्री अशोकराव चव्हाण भी कुछ नाराज दिखाई दें रहे थे. क्योंकि श्री चव्हाण ने सदैव अभिनय, कला, संगीत और सांस्कृतिक क्षेत्र की तरक्की में योगदान दिया हैं. उन्होंने मुख्यमंत्री रहते बॉलीवुड उद्योग की उन्नति की नीति अपनाई थी. मराठी रंगभूमि, मराठी फिल्मों को अनुदान वृद्धि जैसे कदम उठाये थे. कहीं न कहीं श्री अशोकराव चव्हाण को भी उन तत्वों के प्रति नाराजगी हैं जो महाराष्ट्र के खिलाफ अपनी भूमिका जाहीर रूप से बयां करते हैं. उनमें शिरोमणि अकाली दल भी हैं जो केंद्र सरकार को "गुरु मानकर" वर्तमान महाराष्ट्र सरकार के खिलाफ खुलकर मोर्चा खोले हुए हैं.
श्री चव्हाण को यह भी जानकारी हैं कि शिरोमणि अकाली दल प्रोत्साहित एस.जी.पी.सी. का एक घटक नांदेड़ स्थित गुरुद्वारा तखत सचखंड बोर्ड संस्था पर सत्ता जमाये बैठा हैं. पिछली भाजपा सरकार के समय शिरोमणि अकाली दल को गुरुद्वारा बोर्ड की सरकार स्थापित करने का सुनहरा अवसर उपलब्ध हुआ था. शिरोमणि अकाली दल इस बात पर बहुत इतरा रहा हैं कि श्री अशोकराव चव्हाण के क्षेत्र में उनका राजनीतिक दबदबा कायम हैं. मुंबई के कुछ व्यावसायिक और एसजीपीसी के नेता पिछले दो सालों से अपने सत्ता के अहम में छाती ठोकें जा रहें हैं. वैसे शिरोमणि अकाली दल के इस दावे की पुष्टि नांदेड़ के स्थानीय कांग्रेसी पदाधिकारी ईमानदारी से बयां कर सकते हैं. समय आ गया हैं कि इस सच्चाई से पर्दा उठाया जाए कि आखिर यह संस्था हजूरसाहब वासियों की हैं या एसजीपीसी वालों की.
चर्चा हैं कि महाराष्ट्र में अब गुरुद्वारा तखत सचखंड बोर्ड नांदेड़ संस्था के कानून संशोधन को लेकर एसजीपीसी पर गाज गिरनेवाली हैं ! महाराष्ट्र सरकार द्वारा गुरुद्वारा सचखंड बोर्ड संस्था कानून 1956 में बहुत शीघ्र संशोधन कर बाहर के अनावश्यक सदस्यों की नियुक्तियों को समाप्त करने की दिशा में कदम उठाया जा सकता है. बहुचर्चित गुरुद्वारा बोर्ड की कलम ग्यारह का पिछला संशोधन रद्द करते हुए स्थानीय सिख नेतृत्व को बढ़ावा देने की हजूरी साधसंगत की मांग पूरी होती लग रहीं थीं. लेकिन चंदूमाजरा प्रकट हो गए.
दो से तीन सप्ताह पूर्व नांदेड़ में भी एक शिष्टमंडल द्वारा कांग्रेस के दिग्गज नेता श्री अशोकराव चव्हाण के पास नये से मांग प्रस्तुत हुईं कि गुरुद्वारा सचखंड बोर्ड संस्था के कानून संशोधन अंतर्गत केवल और केवल कलम ग्यारह का संशोधन दुरुस्त किया जाए. बहुचर्चित भाटिया समिति की सिफारिशों को नहीं माना जाए. जिन तत्वों द्वारा पिछले दो सालों से गुरुद्वारा बोर्ड में एसजीपीसी की सत्ता स्थापित करने में "प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष सहायक" भूमिका निभाई जा रहीं हैं, वो तत्व भी अब कलम ग्यारह को रद्द करने या अथवा अन्य मात्र कलम ग्यारह का पिछला संशोधन रद्द करने के लिए अपनी स्वीकृति प्रदान कर रहे हैं. हजूरसाहब के सिखों की कलम ग्यारह का संशोधन रद्द करने मांग जायज थी. इस मांग में कितनी सार्थकता थीं अब यह साबित हो गया हैं. यह हजूर साहब के सिखों की क़ामयाबी की दिशा में सबसे बड़ा कदम हैं. आंदोलन की धारणा और मंशा दोनों ही सही थे. अब गेंद नेताओं के पाले में हैं. शिवसेना और शिरोमणि अकाली दल में क्या खिचड़ी पक रहीं हैं और श्री अशोकराव चव्हाण गुरुद्वारा एक्ट को लेकर क्या भूमिका अदा करेंगे ये वक्त बताएगा. मामला सचमुच सीरियस हैं.
सोचिये, जिस एसजीपीसी और शिरोमणि अकाली दल ने कानून संशोधन के तहत कलम ग्यारह के सरकारी प्रभाव का लाभ उठाकर हजूर साहब के सिखों को समूह - समूह में बाँटने की राजनीति को बढ़ावा दिया था, जिसने हजुरसाहब के सिख प्रतिनिधियों (मेंबर साहिबान) को उनकी अपनी संस्था से बेदखल करने का प्रयास किया, वो एसजीपीसी और शिरोमणि अकाली दल अब कलम ग्यारह से संरक्षण चाह रहे हैं. इस छुपे मनसूबे को पूर्ण करने के लिए भी अब उन्हें हजूरसाहब के लोगों के कंधों की जरुरत पड़ रहीं हैं. मुंबई के एसजीपीसी के नेता (व्यापारी) श्री उद्धव ठाकरे और श्री अशोकराव चव्हाण के सामने याचना का स्वर लेकर प्रस्तुत हो रहें हैं. सुनने में आ रहा हैं कि एसजीपीसी के प्रतिनिधि आए दिन महाराष्ट्र के राजस्व मंत्री श्री बालासाहब थोरात के मंत्रालय के चक्कर काट रहें हैं !



