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शनिवार, 23 जून 2018

तीन सिख आईपीएस अधिकारीयों ने 
हजुरसाहिब में मत्था टेका 
सिख आईपीएस अधिकारी धनवंत कौर, अमनजीत कौर और जसमीत सिंघ का सत्कार करते हुए सरदार डी.पी. सिंघ, श्री काकड़े और अन्य। 
हजूर साहिब नांदेड़ 
हजूर साहिब के श्री गुरु गोबिंदसिंघजी हवाई अड्डे पर फ्लाइट्स शुरू होने के बहुत से लाभ सामने आ रहे हैं. जिनमें एक लाभ तो ये है कि समय बचाने के लिए यह सेवा उपयोगी साबित हो रही है. शनिवार (तारीख २३ जून, २०१८) को सिख समाज के तीन होनहार आईपीएस अधिकारीयों ने अमृतसर से नान्देड़ फ्लाइट्स से यात्रा कर गुरुद्वारा तखत सचखंड साहिब के दर्शन किये.
जिनमे अमृतसर की मूल निवासी और बैच वर्ष २००६ की धनप्रीत कौर जो केंद्रीय सामाजिक न्याय मंत्री विजय कुमार सापला की सुरक्षा अधिकारी, पंजाब की निवासी लेकिन गुवाहाटी (आसाम) में पुलिस अधीक्षक अमनजीत कौर और दिल्ली के डीसीपी  रूप में कार्यरत जसमीत सिंघ (आईपीएस) का समावेश था.
नांदेड़ के जिला पुलिस अधीक्षक श्री चंद्रशेखर मीणा ने इन तीनों आईपीएस अधिकारीयों का स्वागतकर उन्हें विशेष वाहन भी मुहैया करवाएं। मिली जानकारी के मुताबिक धनवंत कौर और चंद्रशेखर मीणा एक ही बैच के अधिकारी है.
गुरुद्वारा तखत सचखंड हजूर साहिब में तीनों अधिकारीयों को सिरेपाव देकर सत्कार किया गया. बोर्ड  प्रशासकीय अधिकारी सरदार डी.पी. सिंह और अधीक्षक गुरिंदर सिंह वाधवा ने गुरुद्वारा की प्रतिकृति और तलवार प्रदानकर उनका यथोचित सत्कार किया. गुरुद्वारा दर्शन और लंगर प्रसाद ग्रहण करने के बाद फ्लाइट से ये अधिकारी अमृतसर की ओर रवाना हो गए. उन्हें यहाँ वजीराबाद के निरीक्षक काकड़े, गुरमीत सिंह दफेदार, गोबिंदसिंघ और अन्य पुलिस कर्मचारियों ने सहकार्य किया.
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बोर्ड के चुनाव के साथ-साथ
 गुरुद्वारा बोर्ड कानून में संशोधन होने की आशंका !
रविंदर सिंह मोदी 

हजूर साहिब नांदेड़ 
गुरुद्वारा सचखंड बोर्ड संस्था के तीन सीटों के चुनाव करवाने की मांग लेकर सिख समाज का एक घटक पिछले दिनों हड़ताल पर था. पश्च्यात भूख हड़ताल भी की गई. लेकिन उस हड़ताल का कोई सकारात्मक नतीजा नहीं निकला. सभी बातें सरकार और बोर्ड के वर्तमान अध्यक्ष भाजपा के विधायक तारा सिंह के अनुकूल साबित हुई. दक्षिण भारतीय सिखों की ये संस्था अब सभी के निशाने पर है. हर कोई सरकार की चापलूसी कर गुरुद्वारा बोर्ड का मालिक बनने के प्रयास में है. अब ये भी चर्चा है कि बोर्ड के तीन सीटों के चुनावों के साथ साथ बोर्ड एक्ट १९५६ में फिर से संशोधन कर मुंबई, पुणे, नासिक, औरंगाबाद और नागपुर के सिंघसभा गुरुद्वारों को प्रतिनिधित्व देने की पहल की जा रही हैं. 
ता. १ जून २०१८ से १९ जून २०१८ तक सिख समाज के एक समूह द्वारा जिलाधीश कार्यालय के सामने अनशन किया गया था. जिस समय ये अनशन किया जा रहा था उस समय मुंबई में बैठे कुछ स्वार्थी लोग महाराष्ट्र सरकार और विशेष कर मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस को यह अहसास करवाने में प्रयत्नरत थे कि हजूर साहिब के निवासी एक्ट में बदलाव चाहते है. अनशनकर्ताओं के शिष्टमंडल को भी मुंबई में चर्चा के दौरान एक बड़े महसूल अधिकारी ने कानून में संशोधन की प्रक्रिया शुरू किये जाने की जानकारी दी थी. 
दूसरी बात यह है कि, गुरुद्वारा बोर्ड के अध्यक्ष सरदार तारा सिंह को सरकार को पत्र देने की जरुरत ही क्या थी कि तीन सीटों के चुनाव करवाएं जाएं। उनकी मंशा यही है कि मैं प्रधान पद पर कायम रहते हुए अपनी मर्जी के तीन मेंबर चुनकर आये. ताकि आगे किसी तरह का विरोध न झेलना पड़े. सरदार तारासिंह इलेक्टेड मेम्बरों से खासे परेशान बताये जा रहे हैं.  तारासिंह संशोधन के पूर्ण पक्षधर लग रहे है. 
साथ ही तारा सिंह की ये मंशा भी उजागर हो रही हैं कि वे किसी भी हाल में प्रधानगी से हटना नहीं चाह रहे. वे पद पर बने रहकर चुनाव करवाना छह रहे हैं. शेष बोर्ड उसी तरह रखकर केवल तीन सीटों के चुनाव करवाने से सरकारी गैज़ेट प्रक्रिया में छेड़छाड़ करना होगा. क्या ये जायज होगा. 
रही संशोधन करने की बात तो अब हजूर साहिब बचाने की जिम्मेदारी किसकी बनती है ये तय करना चाहिए. यदि कानून में संशोधन किया जायेगा तो हजूर साहिब की सिखो के हाथों में भविष्य में नौकरियां करना भी नहीं रह जायेगा.  
आज जो लोग पद बचाने के लिए खामोश चल रहे हैं कल उनकी मेम्बरी कहाँ तक सुरक्षित रहेगी ये भी देखनेवाली बात होगी. क्योंकि पूर्व न्यायधीश भाटिया द्वारा पेश की गई कानून संशोधन सम्बन्धी रिपोर्ट का पिटारा अब खुलने की प्रतीक्षा में है. रिपोर्ट में बाहर शहरों के सिंघसभा गुरुद्वारों को प्रतिनिधित्व देने की सिफारिश की गई हैं ऐसी चर्चा हैं, जो  हजूर साहिब के सिखों के लिए बहुत ही नुकसानदायी साबित होगी.
 इसलिए सिख समाज के सभी घटकों को एकत्र होकर पहले एक्ट १९५६ की धारा ११ द्वारा सीधे प्रधान नियुक्ति के विषय को लेकर आवाज उठानी होगी. महाराष्ट्र सरकार द्वारा जबरन विधानसभा में धारा ११ में बदलाव कर अध्यक्ष की सीधी नियुक्ति का निर्णय हमपर लादा गया था. अब बाहर के मेंबर भी लादे जा रहे हैं! 
मोनी बाबा जी की सालाना बरसी २६ जून को 
गुरुद्वारा तपोस्थान साहब में कार्यक्रम 
भव्य लंगर प्रसाद 

हजूर साहिब, नांदेड़ 
तखत सचखंड श्री हजूर साहिब गुरुद्वारा के पूर्व (साबका) जत्थेदार संतबाबा जोगिन्दर सिंघजी मोनी बाबाजी के सालाना बरसी का कार्यक्रम हजूर साहिब में ता. २६ जून, २०१८ को मनाया जा रहा है. 
इस उपलक्ष में बाबाजी के तपस्थान नाम से प्रसिद्ध गुरुद्वारा तपोस्थान साहिब में तखत साहिब के जत्थेदार संत बाबा कुलवंत सिंघजी, मीत जत्थेदार संत बाबा ज्योतिंदर सिंघजी पंजप्यारे साहिबान की सरपरस्ती में और संत बाबा बलविंदर सिंघजी कारसेववाले, संतबाबा प्रेमसिंघजी माता साहेबवाले क्र उपस्थिति में श्रद्धा सहित बरसी का कार्यक्रम संपन्न किया जायेगा. ऐसी जानकारी तपोस्थान साहिब के जत्थेदार बक्षीसिंघजी (बाबाजी) और गुरुद्वारा के प्रधान स. जगिंदर सिंघजी किरोसिनवालों द्वारा दी गई है. 
मंगलवार को सुबह ८ बजे से ही धार्मिक कार्योक्रमों की शुरुवात होगी. आसां दी वार के पाठ, श्री सुखमनी साहिब पाठ, कीर्तन और गुरुबाणी पठन जैसे कार्यक्रम संपन्न होंगे. पाठ समापति और हुकुमनामा कार्यक्रम के बाद अरदास होगी उपरांत भव्य लंगर प्रसाद कार्यक्रम होगा. इस अवसर पर धार्मिक क्षेत्र के लोग, गुरुद्वारा बोर्ड साहिबान, बोर्ड के अधिकारी, सभी गणमान्य और हजूरी साध सांगत उपस्थित होगी.  
गुरुद्वारा तपोस्थान साहिब द्वारा अपील की गई है कि इस अवसर सभी साध सांगत जी धार्मिक कार्यक्रमों में उपस्थित रहकर लंगर प्रसाद ग्रहण कर गुरु महाराज जी की खुशियाँ प्राप्त करें। 
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संत बाबा जोगिन्दर सिंघजी मोनी १०८ 

संत बाबा जोगिंदर सिंघजी मोनी लगभग वर्षों तक गुरु घर में विविध पदों पर सेवा में शामिल रहें थे. उन्होंने २५ सालों तक तखतसाहब के मुख्य जत्थेदार पद संभाला था. एक सेवाभावी व्यक्तित्व होने के साथ साथ उन्होंने बहुत से सामाजिक बदलाव भी करने के प्रयास किये थे. बाबाजी को माननेवाला एक बड़ा समूह है. 
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