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शुक्रवार, 1 नवंबर 2024

 सवा करोड़ के पटाखें फूँक देते हैं हजुर साहब के सिख!

दो सप्ताह तक चलाये जाते हैं पटाखें!

रविंदर सिंघ मोदी 

हजुर साहब के सिख त्योहार पसंद हैं। हजूर साहब में दशहरा,  दिवाली, होली और बैसाखी तथा विविध गुरपुरब, चौकियां और त्योहार श्रद्धा और उत्साह के साथ बनाए जाते हैं। यह कहा जाए तो गलत नहीं होगा कि हजूर साहिब में वर्ष भर त्योहारों की धूम मची रहती है। इन त्योहारों में दिवाली का त्यौहार बहुत ही आकर्षण का केंद्र होता है। दिवाली पर्व के समय एक ही सप्ताह में सिख समाज चार त्यौहार मनाता है। जिसमें दिवाली से एक दिन पूर्व तखत स्नान का भव्य त्यौहार मनाया जाता है। उसके पश्चात दीपमाला और दिवाली का त्यौहार होता है जिसमें तखत साहब अंतर्गत सभी गुरुद्वारा रोशनी से जगमगा उठते हैं। 

अगले दिन दीपमाला दिवाली त्योहार को समर्पित दिवाली हल्ला महला नगर कीर्तन यात्रा निकाली जाती है। दिवाली हल्ला महला के दूसरे दिन सुबह यानी दूज की तिथि पर श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी का गुरुतागद्दी त्यौहार मनाया जाता है। सिखों के लिए इस त्योहार से बड़ा कोई अन्य त्यौहार हो नहीं सकती। इस त्यौहार के दौरान भी नगीनाघाट गुरुद्वारा साहब से तखत साहब तक नगर कीर्तन यात्रा निकाली जाती है। गुरुतागद्दी श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी का त्योहार पंचमी तक मनाया जाता है। गुरुतागद्दी त्यौहार के दौरान भव्य कीर्तन दरबार और अन्य धार्मिक कार्यक्रमों का आयोजन किया जाता है। परलोक गमन को समर्पित एक नगर कीर्तन यात्रा भी निकाली जाती है। 

इस तरह से एक सप्ताह के दरम्यान हल्ला महल्ला सहित तीन नगर कीर्तन यात्राएं निकाली जाती है। जिनमें हजारों लोग श्रद्धा सहित शामिल होते हैं। हल्ला महला और नगर कीर्तन यात्रा में अधिकतर युवा वर्ग शामिल रहता है। इन त्योहारों के दरम्यान युवा वर्ग उत्साह से ओतप्रोत दिखाई पड़ता हैं। तखत स्नान से श्री गुरु नानक देवजी के प्रकाशपुरब तक यानी दो सप्ताह तक युवाओं का उत्साह चरम पर रहता हैं। त्योहारों को मनाते समय युवा वर्ग पटाखेंबाजी में मग्न हो उठते हैं। विशेषकर दीपमाला दिवाली के बाद हजुरसाहिब में बहुत पटाखेंबाजी की जाती हैं। मेरे व्यक्तिगत आकलन के अनुसार दिवाली के एक सप्ताह के दौरान हजुरसाहिब का सिख समाज अंदाजातन सवा करोड़ राशि के पटाखें चला देता हैं। 

गुरुद्वारा सचखंड परिसर में परंपरागत रूप से आतिशबाजी की जाती है लेकिन उससे हटकर सिख परिवार अपने घरों और दुकानों के सामने पटाखेंबाजी करते हैं। हजुरसाहिब में ऐसे भी कुछ संपन्न परिवार हैं जो 50 हजार से एक लाख रूपये मूल्य के पटाखें चलाते हैं। कुछ परिवार गरीबों को पटाखें बाँटते भी हैं। एक तरह से सिख समाज पटाखों का बहुत बड़ा खरीददार हैं। सिख धर्म में लंगर का विशेष महत्व हैं। 

मैं, यह विचार कर रहा था कि यदि स्थानीय सिख पटाखा खरीदी में कुछ कटौती कर बची हुईं राशि को शिक्षा क्षेत्र में निवेश करते हैं तब बहुत बड़ा सामाजिक लाभ होगा। यदि सवा करोड़ में से 50 लाख की राशि एकत्र हो जाती हैं तब जरुरतमंद बच्चों की उच्च शिक्षा की समस्या का निराकरण हो सकता हैं। हम वहीं पैसा बचानें की सोच रहें हैं जो पटाखों से धुआँ बनकर उड़ जाता हैं। यदि सवा करोड़ राशि का दसवंद भी बचाया जाए तब भी साढ़े बारह लाख की राशि बन सकती हैं। इस विषय में युवा वर्ग को निश्चित ही पहल करनी चाहिए ऐसा मेरा आग्रह हैं। समाज के वरिष्ठों को और समाजसेवा में अग्रसर लोगों को इस विषय में गंभीरता से सोचना चाहिए। गुरु महाराज जी का नगरकीर्तन शोभा और वैभव के साथ निकलना चाहिए। दिवाली हल्ला महल्ला और गुरुतागद्दी नगरकीर्तन यात्रा में अस्तव्यस्त और लोगों को दिक्कत पेश करें ऐसी पटाखेंबाजी नहीं होनी चाहिए। गुरुद्वारा बोर्ड द्वारा हल्ला महल्ला और नगरकीर्तन के दौरान पटाखें चलाये जाते थे और बहुत सुरक्षित रूप से उन्हें चलाया जाता हैं। कुछ लोग सावधानी से पटाखेंबाजी करते हैं। लेकिन कुछ शरारती लड़के केवल शरारत करने और हुल्ल्डबाजी के लिए आड़े तिरछे पटाखें, रॉकेट, सिटी जैसे पटाखें चलाते हैं जिससे अन्य लोगों को दिक्कत होती हैं। 

हल्ला महल्ला और नगरकीर्तन में अनियंत्रित पटाखेंबाजी का सिलसिला बीस से पचीस वर्षों से शुरु हैं। नियंत्रित पटाखेंबाजी योग्य हैं। लेकिन जिस पटाखेंबाजी से गलत संदेश प्रसारित होता हैं, प्रदूषण को बढ़ावा मिलता हैं, स्थानीय सिख समाज के बुजुर्गों को तकलीफ पहुँचती हैं, महिला और शिशुओं को परेशानी होती है, उस स्तर की पटाखेंबाजी पर अंकुश लगना चाहिए। माता - पिता भी अपने बच्चों को समझायें और नियंत्रित करें कि वें नगरकीर्तन का उत्साह ना बिगाड़े। केवल पटाखे चलाने मात्र से हम गुरु महाराज जी की खुशियाँ प्राप्त नहीं कर सकते। गुरु महाराज जी की खुशियाँ तब प्राप्त होगी जब गुरूजी के कारज निर्विघन्तापूर्वक संपन्न होगे। हल्ला महल्ला और नगरकीर्तन में धार्मिक सद्भाव, भक्ति और गुरबाणी का प्रचार प्रसार अधिक होना चाहिए। गतकाबाजी और भजनबंदगी को बढ़ावा मिलना चाहिए। 

त्यौहार और गुरुपूरब तो वास्तव में हम तखत साहब और गुरुद्वारों में माना लेते हैं। लेकिन हल्ला महल्ला और नगरकीर्तन यात्रा यह साधसंगत जी का सामूहिक उत्सव होता हैं। स्थानीय सिखों की एकता, भाईचारा और मित्रवृत्ति बढ़नी चाहिए और उसके लिए नगरकीर्तन एक सक्षम माध्यम हैं। हल्ला महल्ला और नगरकीर्तन हमारे यानी दक्खन की साध संगत का मेलजोल के लिए एक उपयुक्त साधन भी हैं। हल्ला महल्ला यह गुरु महाराज जी के समय से संचालित हो रहीं एक पारंपरिक व्यवस्था हैं। इस धार्मिक व्यवस्था का सभी को सम्मान करना चाहिए। आपके पटाखों से कोई आहत ना हो इस बात का ख्याल गुरु के हर सिख को करना चाहिए। यदि पटाखेंबाजी नियंत्रित होगी तब हल्ला महल्ला और नगरकीर्तन का उत्साह कई गुना बढ़ जायेगा। यह मेरे निजी विचार हैं पसंद आये हो तो इसे औरों तक पहुंचाए। अन्यथा पढ़कर भूल जाए।वाहेगुरु जी का खालसा। वाहेगुरु जी की फ़तेह जी। 


बुधवार, 30 अक्टूबर 2024

 तखत स्नान त्यौहार का प्रचार प्रसार जरुरी 

रविंदरसिंघ मोदी 

सिख धर्मियों के देश में पांच 'तखत साहब' विद्यमान हैं। जिनमें से सिर्फ हजुरसाहिब स्थित 'तखत सचखंड श्री हजुर अबचल नगर साहब' स्थान पर सामूहिक रूप से सेवा के माध्यम से 'तखत स्नान' मनाया जाता हैं। दिवाली से पूर्व तखत स्नान की सेवा यह परंपरा से होती आ रहीं है। लेकिन मेरा आकलन है कि तखत स्नान की सेवा सामूहिक रूप से शुरू करने की पहल सन 1840 के बाद ही हुईं होगी। वैसे गोदावरी से जल लाकर अंगीठा साहब को स्नान करवाने की परंपरा तो तीन शताब्दियों से चली आ रहीं हैं।

शेर ए पंजाब महाराजा रणजीतसिंघजी द्वारा तखत साहब की इमारत यानी दरबार साहब का निर्माण शुरू करवाया गया। सन 1838 से 1840 के दरम्यान ही तखत साहब की इमारत बनकर पूर्ण रूप से तैयार हुईं थीं. इमारत निर्माण की सेवा 1831 से 1832 में प्रारंभ होने की बात बताई जाती हैं। यदि तखत स्नान की सामूहिक सेवा सन 1840 के समय शुरू हुईं होगी तब उस घटना को शुरु होकर 184 साल का समय हो रहा हैं। इतने लंबे अरसे तक तखतस्नान सेवा सहभागिता का विस्तारित होता चला जाना अपने आप में एक इतिहास है। तखत साहब की संपूर्ण इमारत को स्वच्छ कर दीपमाला, गुरुतागद्दी श्री गुरु ग्रन्थसाहिब जी और परलोकगमन त्यौहार मनाने का निर्णय क्रान्तिकारी माना जाना चाहिए। उस दौर में जल की बहुत किल्लत भी पेश हुईं होगी।

जल समस्या से निपटने के लिए तखत साहब की इमारत निर्माण से पहले, परिसर में दो से तीन कुएं खुदवाए गए थे। उन्हें बाउली भी कहा जाता हैं। उस समय पानी के लिए वो कुएं प्राकृतिक स्रोत थे। लेकिन कुएं के पानी की क्षमता सीमित होने के कारण तखत स्नान पर्व के लिए साधसंगत जी की सहभागिता सेवा के माध्यम से गोदावरी नदी से पानी लानें का धार्मिक निर्णय अमल में लाया गया। पश्च्यात यह परंपरा बन गईं। जिसकी अनुपालना वर्तमान समय में भी बदस्तूर जारी है।

हजुरसाहिब में मनाये जानेवाले तखत स्नान (इशनान) सेवा का विषय आज तारीख में विश्वभर के सिख श्रद्धांलुओं में चर्चित विषय है। क्योंकि हजुरसाहब के अलावा अन्य किसी तखतसाहब में इस तरह के जोश और उत्साह के साथ इस तरह का कोई पर्व नहीं मनाया जाता। हजुरसाहब में हजारों की संख्या में श्रद्धालु एक साथ सेवा में शामिल होते हैं। तखत साहब से गोदावरी नदी नगीनाघाट आधा किलोमीटर से ज्यादा अंतर पर विद्यमान है। यह ना तो ज्यादा है और ना तो कम है। पैदल चलकर सेवा की जाए उतनी अच्छी दूरी यहाँ उपलब्ध हैं। इस कारण भी इस सेवा में बड़ी संख्या में श्रद्धालु शामिल होते हैं। 

तखत स्नान पर्व एक भिन्न और उत्साहपूर्ण त्यौहार है। यहाँ सेवा करते समय श्रद्धालू, तखत साहब की पवित्रता और गोदावरी माता की पवित्रता से जुड़ जाते हैं। एक तरह से दोनों स्थानों के पुण्य वातावरण की अनुभूति श्रद्धालु प्राप्त करता हैं। इस समय, गुरु महाराज जी के ऐतहासिक शस्त्रों के दर्शन करने का एक दुर्लभ अवसर सभी को प्राप्त होता हैं। इमारत की स्वछता करने का भाग्य प्राप्त होता हैं। इस अनूठे पर्व का प्रचार प्रसार बहुत जरुरी है। कहा जाता है कि गोदावरी नदी का नाभिस्थल नांदेड़ में है। नाभि यह आत्मा का केंद्र होता है। एक तरह से गोदावरी माता की आत्मा यहाँ बसती है। 

ऐसे पवित्र स्थान पर तखत स्नान जैसा त्यौहार भव्य रूप में मनाया जाता है। वैसे गोदावरी नदी पर इतना विशाल त्यौहार किसी अन्य शहर या घाट पर नहीं मनाया जाता है। त्रम्बकेश्वर में गोदावरी की महाआरती का कार्यक्रम होता है लेकिन वो पर्व भव्य नहीं होता है। नांदेड़ में मनाया जानेवाला तखतस्नान पर्व भव्य त्यौहार है। लेकिन इस संबंध में नांदेड़ जिले के निवासियों को भी अधिक जानकारी नहीं है। इसलिए तखत स्नान पर्व का प्रचार प्रसार करना और जनमानस को इस त्यौहार के साथ जोड़ना समय की मांग है। तखत स्नान पर्व का इतिहास और इस परंपरा की जानकारी नांदेड़ जिला गजेट में शामिल की जानी चाहिए। महाराष्ट्र सरकार और नांदेड़ जिला प्रशासन को इस त्यौहार को लेकर सकारात्मक सोच अपनानी होगी। 

(आपकी राय जरूर बताये )


सोमवार, 5 फ़रवरी 2024

बाहरवालों ने खेला कर दिया...!

हजुरसाहिबवालों को ड्रफ्ट भी नहीं पता!

रविंदरसिंघ मोदी


गुरुद्वारा सचखंड बोर्ड कानून 1956 को अधिनियम में परिवर्तित करने की राह पर सरकार अग्रेसर हो गईं है. तारीख 5 फरवरी 2024 को सम्पन्न हुईं महाराष्ट्र सरकार मंत्री मंडल बैठक में निर्णय लिया गया. भाटिया कमेटी की सिफारिशों को लागु कर मुंबई, ठाणे और बाहर शहरों के लोगों के हाथों में बोर्ड का बहुमत बढ़ाने की दिशा में अब कदम उठाए जा रहें हैं. कानून क्या बनाया जा रहा है उसका ड्राफ्ट हजुरसाहिब की साधसंगत के सामने रखना चाहिए था. लेकिन नहीं रखा. मुंबई, दिल्ली और अमृतसर वालों ने खेला कर दिया. नांदेड़ के कुछ लोगों ने अमृतसर, दिल्ली और मुंबई वालों के हाथों में सत्ता सौंपने के लिए भरपूर सहायता की है, यह बात छुपी नहीं है. हजुरसाहिब वाले मेंबर से ज्यादा कुछ नहीं बन पाएंगे यह सबसे बड़ा सत्य है. संभवतः हम हमारी धार्मिक संस्था से हाथ धो बैठेंगे ऐसा प्रतीत हो रहा है. ड्राफ्ट पुरा पढ़ने पर ही शायद हकीकत सामने आए. कल तक की प्रतीक्षा! 



  होली हल्ला महल्ला यात्रा मार्ग की दुरुस्ती करें : मनबीरसिंघ ग्रंथी राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरद पवार समूह) के युथ प्रदेश सचिव स. मनबीर...