मुख्यमंत्री जी,
भाजपा की दो विधानसभा सीटों को हार का खतरा !
(नांदेड़ - फ़ाइल फोटो )
रविंदर सिंह मोदी
नांदेड़ - गुरुद्वारा तखत सचखंड श्री हजूर साहिब मंडल (बोर्ड) के प्रधान और विधायक तारा सिंह की धार्मिक संस्था में कारगुजारियों से स्थानिक सिख इतने रोष में हैं कि उसका सीधा असर आगामी विधानसभा चुनावों पर होने की पूर्ण सम्भावना हैं. वर्ष २०१९ के चुनावों में नांदेड़ के सिख मतदाता दो सीटों पर सीधा प्रभाव डाल सकते हैं. विगत माह के सामाजिक अवलोकन से ये ज्ञात हुआ हैं कि भारतीय जनता पार्टी ने नांदेड़ के सिखों के दिलों से स्थान खो दिया हैं. केवल भाजपा के कुछ निष्ठावान और आशावान सिख कार्यकर्ताओं में ही भाजपा की रट जारी है. जबकि सिखों का रोष आगामी चुनावों के समीकरण बदल सकता है.
आपको ज्ञात होगा कि वर्ष २०१४ के विधान सभा चुनावों में सिख समाज के सबसे ज्यादा वोट भाजपा के नांदेड़ दक्षिण उमीदवार दिलीप कंदकुर्ते को मिले थे. नांदेड़ दक्षिण चुनाव क्षेत्र में सिख समाज के लगभग तरह हजार मतदाता हैं. यदि सिख समाज एक गट्ठा मतदान करता हैं तो किसी भी बड़ी पार्टी के नतीजों पर आसानी से प्रभाव डाला जा सकता है.
साथ ही नांदेड़ उत्तर विधान सभा क्षेत्र में सिखों के साढ़े चार हजार मतदाता हैं. पिछले चुनावों में उत्तर सीट का नतीजा बहुत कम अंतर से पाया गया था और भाजपा को शिकस्त खानी पड़ी थी. नांदेड़ दक्षिण और उत्तर विधान सभा सीटों के नतीजों पर सिख मतदाताओं की नाराजी गहरा असर कर सकती है. जिसके लिए भाजपा के विधायक तारा सिंह स्वयं कारणीभूत माने जा रहे हैं.
वर्ष २०१४ में भाजपा सरकार सत्ता में आने के बाद मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने तारा सिंह की मांग पर नांदेड़ के गुरुद्वारा तखत सचखंड श्री हजूर साहिब मंडल (बोर्ड) कानून १९५६ में संशोधन कर कानून को तारा सिंह के अनुकूल बनाकर नांदेड़ के सिखों पर अन्याय किया. तारा सिंह को बोर्ड का शासन नियुक्त अध्यक्ष बनाकर भाजपा सरकार ने नांदेड़ के सिखों के अध्यक्ष चुनने का स्वतंत्रय छिन लिया. तीन से चार सालों से तारा सिंह के विरोध यहाँ आक्रोश का वातावरण चल रहा है लेकिन देवेंद्र फडणवीस सरकार ने नांदेड़ कोई सुध नहीं ली.
तारा सिंह ने बोर्ड का स्टेटस घटाकर उसे मंडल में परिवर्तित कर दिया. अपने रिश्तेदारों को मोटी तनखाह देकर यहाँ ऐश करवाने के लिए नौकरी दी. कांग्रेस के लोगों को हमेशा साथ रखकर इसने भाजपा का नारा "सबका साथ, सबका विकास" का अर्थ ही बदल दिया. तारा सिंह ने नया नारा यहाँ शुरू किया हुआ है, "कांग्रेस का साथ, तारासिंह का विकास". इतनी शिकायतों बावजूद, इतने उलटे सीधे कारनामों के बावजूद भी भाजपा इस तारा सिंह का यहाँ पोषण कर रही है. और तारा सिंह नांदेड़ के सिखों का शोषण कर रहा है.
नांदेड़ के सिखों को इस तारा सिंह ने सरकार के जोर और प्रभाव की धमकियां देकर विवश कर रखा है. मुख्यमंत्री जी आप क्यों इस क़ाइय्याँ व्यक्ति को बार बार बचा रहे हैं. आप इस आमदार को जितना ईमानदार समझते हैं ना वो उतना ईमानदार हैं नहीं. नांदेड़ के लोगों का पास खासकर गुरुद्वारा बोर्ड के अन्य सदस्यों के पास उसकी धांधलियों के बहुत से प्रमाण है, समय निकालकर सच्चाई तो परख लीजिए. फडणवीस साहब आप इस तारा सिंह को शरण देकर श्री गुरु गोबिंद सिंघजी का श्राप मत लीजिये. जिन्होंने भी गुरु महाराज जी का श्राप पाया है उनका क्या नुक्सान हुआ हैं ये आपको नांदेड़ के भाजपा नेतागण उदाहरण के साथ समझा सकते हैं.
ठीक हैं, आप इस तारा सिंह का लाड और लालन - पोषण जारी रखिये, हम फिलहाल संयम रखेंगे और इसका जवाब भाजपा २०१९ के चुनावों में देंगे. हम समर्थ है. आपके नांदेड़ के दो से तीन सौ भाजपा कार्यकर्ता नांदेड़ दक्षिण और उत्तर आपको जीत नहीं दिला सकते ये बात आपके हृदयपटल पर में सजा लीजिये. इसलिए नांदेड़ की धार्मिक संस्था सिखों के हवाले कीजिये आपकी साख रह रह जाएगी. अच्छे प्रशासन और अच्छे ईमानदार नेताओं के हम दिल से कायल है लेकिन ये तारा सिंह जो कर रहा है उससे आपके प्रति नांदेड़ के सिखों के दिलों में व्याप्त सम्मान की भावनाएं इस समय दांव पर लगी हुई हैं.
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