एक और षड़यंत्र उजागर !!
११ जुलाई, २०१८ को एक और बात उजागर हुई कि महाराष्ट्र सरकार ने गुरुद्वारा तखत सचखंड श्री हजूर अपचल नगर साहिब बोर्ड (मंडल) में छह सीटें बढ़ाने का जो निर्णय लिया है उसमें एक निर्णय यह है कि सरकार द्वारा नियुक्त मनोनीत आठ सदस्यों में एक सदस्य सरकारी अधिकारी या कर्मचारी होगा जो गैर सिख होगा ! यानी गैर सिख को भर्ती करवाना मतलब हमारी संस्था को कब्जे में लेना है.
है कि नहीं सिखों पर सीधा अत्याचार. अल्पसंख्यांक सिखों पर देवेंद्र फडणवीस सरकार का अन्याय देख लीजिये. इस तरह का निर्णय लेकर महाराष्ट्र सरकार ने सिखों की संस्था का सरकारीकरण करने की योजना पूर्ण कर ली है. कुछ दिनों बाद तो हमारी तीन सीटें (जिस पर चुनकर आते हैं.) और हजूरी खालसा दीवान भी कानून में संशोधन कर ख़ारिज कर दिए जाते शायद. भारतीय जनता पार्टी से सिख कभी इस तरह की उम्मीद नहीं रख सकते कि वो इतना ओछा कदम उठाएगी.
सरकार ने बेशर्मी की सभी हद्दें लाँघ दी है. और इसके लिए तारासिंह ने मुख्य खलनायक की भूमिका निभाई है. ता. १२ जुलाई, २०१८ को नागपुर में चल रहे विधान सभा के अधिवेशन सरकार ये निर्णय कर लें. एक धार्मिक सिख संस्था के साथ किया जा रहा यह सलूक बर्दाश्त से बहार हैं. मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस, राजस्वमंत्री चंद्रकांत पाटिल और तारासिंह का निषेध, निषेध, निषेध और निषेध.
