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शुक्रवार, 30 अक्टूबर 2020

नवंबर महीना सिख धर्मियों के त्योहारों का महीना 

लॉकडाउन का सिलसिला समाप्त होने के आसार? 

(तखत स्नान का फाइल फोटो)

रविंदरसिंघ मोदी 

महाराष्ट्र में त्योहारों का अपना एक सांस्कृतिक महत्व हैं. नवंबर का महीना आम तौर पर त्योहारों की दृष्टि से अनेक धर्मियों के लिए व्यस्त महीना साबित होता हैं. सिख धर्मियों के लिए तो यह महीना पूर्णतः धार्मिक आयोजनों का महीना होता हैं. इसलिए यह आशावाद उभर कर सामने आ रहा हैं कि आनेवाले सभी त्योहारों को मनाने के लिए एक स्वतंत्र वातावरण की निर्मिति हो. नागरिक आजादी से लेकिन पूर्ण सावधानीवश अपने त्योहारों का आनंद प्राप्त कर सकें. 

(श्री गुरुग्रंथ साहिब जी गुरुतागद्दी परंपरा की फाइल फोटो)

महाराष्ट्र प्रदेश में गत मार्च - 20 माह से कोविड कोरोना 19 संक्रमण की विभीषिका के कारण लॉकडाउन और अनलॉक का प्रभाव जारी हैं. मुख्यमंत्री के पिछले आदेशानुसार आनेवाली 31 अक्टूबर तक लॉकडाउन की मियाद कार्यान्वित रहेगी. उसके पश्चात लॉकडाउन बढेगा या नहीं इस विषय में उत्सुकता बनीं हुईं है. जिस तरह से पिछले एक सप्ताह से सरकार की गतिविधियां जारी हैं और कोरोना के वर्तमान हालात पैदा हुए हैं. उसको देख कर तो यहीं लग रहा है कि कुछ भी हो सकता है. आने वाले दो सप्ताह तक लॉकडाउन बढ़ाने के विषय में भी विचार चल रहा है. लेकिन अभी कोई ठोस निर्णय नहीं हुआ है और 31 अक्टूबर को ही सरकार का अंतिम निर्णय जारी होगा. 


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जैसे कि आगामी नवंबर (2020) का महीना, त्योहारों का महीना है. इसलिए प्रदेश की अधिकतर जनता त्योहारों में स्वतंत्र वातावरण की अपेक्षा व्यक्त कर रहीं है. दीवाली, भाऊबीज जैसे बड़े त्यौहार मनाये जाने है. वहीं सिख धर्मियों के तखत स्नान, दीपमाला, हल्ला महल्ला, श्री गुरु ग्रन्थ साहिब जी गुरुतागद्दी, परलोकगमन दशमेश पिताजी और श्री गुरु नानक देवजी जयंती पर्व आदि आनेवाले नवम्बर महीने में मनाये जा रहे हैं. कुलमिलाकर नवंबर का महीना सिखों के आध्यातिमक संप्रभुता के प्रचार - प्रसार का माह हैं. इसलिए लॉकडाउन की मियाद समाप्त हो ऐसी प्रार्थना सभी सिख दिल से कर रहे हैं.  

शिवसेना और भाजपा टकराव में नुकसान : 


भारतीय जनता पार्टी द्वारा पिछले दो - तीन माह से शिवसेना की महाआघाडी सरकार के खिलाफ मोर्चा खोला गया हैं. कोरोना संक्रमण के हालात और आपातकाल में सरकार और विपक्ष को एक साथ, एक राय से नागरिकों के हितों के निर्णय लेने चाहिए. लेकिन भाजपा ने मंदिर खोले जाने के विषय में आक्रामकता का रुख अपनाकर अलग तरह की भूमिका का स्वीकार किया. आक्रामकता को बढ़ावा देकर शिवसेना और महाआघाडी सरकार को चुनौति प्रस्तुत की. धार्मिक स्थल खोले जाने के विषय को राजनीतिक मुद्दा बनाकर बिहार के चुनावों में वातावरण निर्मिति का प्रयत्न किया गया.

 

चर्चा हैं कि, विपक्ष नेता श्री देवेंद्र फडणवीस का राजनीतिक कद बिहार में वृद्धिगत हो इसलिए महाराष्ट्र की अधिक से अधिक जनता को धार्मिक स्थल खोले जाने के आंदोलन में शामिल करने का प्रयास किया गया. एक तरह से धार्मिक भावनाओं का उपयोग करने की छुपी नीति पर भाजपा ने कार्य को अंजाम देने में कोई कसर नहीं छोड़ी कहा जाए तो गलत नहीं होगा. भाजपा ने राष्ट्रीय मीडिया में छाए रहने के लिए मंदिर खोलो आंदोलन को हवा दीं ऐसे आरोप होते रहे हैं. कहा जा रहा हैं कि शिवसेना सरकार ने भाजपा की नीतियों को शिकस्त देने के लिए ही दशहरा त्यौहार के दौरान मंदिर और अन्य धार्मिक आयोजन पर लॉकडाउन का प्रभाव जारी रखा. राजनीतिक पार्टियों के आपसी टकराव से आगे सिख धर्म का कोई भी पर्व प्रभावित ना हो यह सभी की नैतिक जिम्मेदारी हैं. इसलिए अब सिख समाज को किसी भी राजनीतिक पार्टी के धार्मिक एजैंडा से प्रभावित होने की आवश्यकता नहीं है. 

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https://youtu.be/_jfnW-Wk0uU

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