संतबाबा कुलवंतसिंघजी और संतबाबा बलविंदरसिंघजी ने कर्मचारियों को सेवा में कायम करने हेतु प्रधान साहब से की चर्चा
बोर्ड पदाधिकारी भी दिल बड़ा करें !
| (जत्थेदार संतबाबा कुलवंतसिंघजी और संतबाबा बलविंदरसिंघजी कारसेवा वाले कर्मचारियों के शिष्टमंडल को आश्वस्त करते हुए) |
गुरुद्वारा सचखंड बोर्ड में कार्यरत डेलीवेजस और बील मुक्ता कर्मचारियों को सेवा में कायम करने का विषय अब फरवरी माह के पहले सप्ताह में निर्णय तक पहुंचेगा ऐसी आस बंध गईं हैं. तखत साहब के सम्मानीय जत्थेदार जी संतबाबा कुलवंतसिंघजी और आदरणीय संतबाबा बलविंदरसिंघजी कारसेवावाले बाबाजी के संयुक्त प्रयासों के चलते बोर्ड के प्रधान स. भूपिंदरसिंघ मिनहास ने आज दोनों संतों के साथ फोन पर हुईं बातचीत में आश्वासन दिया कि बोर्ड कर्मचारियों को सेवा में कायम करने के विषय में, फरवरी के पहले सप्ताह में वें हजूर साहब आकर निर्णय लेंगे. मंगलवार तारीख 18 जनवरी, 2022 की शाम हुए इस घटनाक्रम के बाद कर्मचारी शिष्टमंडल ने संतों के अगले कदम (आदेश) तक संयम बरतने का निर्णय लिया हैं. कर्मचारी भाई - बहनों का यह निर्णय आदरणीय संतों के लिए एक आदर और विश्वास का प्रतीक भी है. दोनों संतों द्वारा समय निकालकर कर्मचारियों की समस्याओं पर सराहनीय पहल की गई हैं. अब गुरुद्वारा सचखंड बोर्ड के आदरणीय प्रधान साहब, पदाधिकारीगण और मेंबर साहिबान पर निर्भर करता हैं कि वें संतों की भावनाओं का सम्मान किस तरह से रखते हैं.
| (बड़ी हसरत लेकर सभी कर्मचारी संतों के दर पर बैठें हैं !) |
यह समय है कि बोर्ड के पदाधिकारी और मेंबर साहिबान बोर्ड कर्मचारियों के साथ एकजूट होकर खड़ा रहें. पिछले छह - सात सालों से डेलीवेजस के अल्पवेतन में गुजर-बसर कर रहें कर्मचारी वर्ग की समस्याओं के लिए सभी अपना दिल बड़ा करें. प्रत्यक्ष में कर्मचारियों से जुड़े यह प्रलंबित विषय जिद्द, अहम और राजनीति के लिए नहीं हैं. चुनाव आते और जाते हैं. सत्ता, आती और जाती हैं. स्थिर रहता हैं तो केवल स्थानीय समाज ! यह समाज ही कर्मचारी भी हैं, मतदाता भी हैं और रिश्तेदार भी. इन्हीं की सहायता और आशीर्वाद से मेम्बरशिप भी मिलती हैं. यदि इनके आशीर्वाद को ठेंगा दिखाया गया तो भविष्य में किसी तरह की चतुराई के लिए स्थान नहीं मिल सकता.
| (इन विवश और मजबूर कर्मचारियों की दुआएं आपको बड़ा बनाएंगी!) |
| (संतों का आशीर्वाद कर्मचारियों के सिर मत्थे लगें ) |
मुझे अहसास हैं कि, कुछ राजनीतिक लोग मुझे (स. रविंदरसिंघ मोदी) बिलकुल भी पसंद नहीं करते, क्योंकि मेरे द्वारा किये गए सवाल उन्हें उनकी राजनीतिक गतिशीलता में कुछ दिक्कतें खड़ी करते हैं. मेरा आशय व्यक्तिगत रूप से किसी का दिल दुखाना नहीं होता हैं. बल्कि आप लोगों से समाज का या गरीब वर्ग का काम करवाना मात्र होता हैं. जब मैं पाता हूँ कि समाज से कोई व्यक्ति कुछ कहने के लिए आगे नहीं बढ़ते हैं तब मुझे अखबार में अथवा ब्लॉग पर भाष्य करना पड़ जाता हैं. यदि समाज में कोई नेता सक्षम प्रतीत हो तब समाज को मेरे जैसे सामान्य व्यक्ति की जरुरत ही नहीं पड़ेगी. मैं भी स्वालंबी नेताओं के उभरने की बाट जो रहा हूँ. आज जब मैं इन कर्मचारी वर्ग के साथ खड़ा हूँ तो मेरा कोई निजी स्वार्थ नहीं हैं. इस साल (वर्ष 2022) के गुरुद्वारा बोर्ड अथवा महानगर पालिका चुनावों को लेकर भी मै खासा उत्साहित नहीं हूँ. मेरा विश्वास पत्रकारिता में ही है, नेतागिरी में नहीं हैं. इसलिए सम्मानित गुरुद्वारा बोर्ड से आग्रह करना चाह रहा हूँ कि कर्मचारियों के प्रलंबित समस्याओं के निराकरण के लिए अपना दिल बड़ा करें. धन्यवाद !
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