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रविवार, 13 सितंबर 2020

मेरी ख़ामोशी को मेरी कमजोरी ना समझें - उद्धव ठाकरे

 मेरी ख़ामोशी को, मेरी कमजोरी ना समझें - उद्धव ठाकरे

कोविड की दूसरी लहर !

(श्री उद्धव ठाकरे, मुख्यमंत्री)

रविंदरसिंघ मोदी 

महाराष्ट्र में बढ़ती जा रहीं राजनीतिक गतिविधियों और विपक्ष के तेज होते हमलों को जवाब देते हुए मुख्यमंत्री श्री उद्धव ठाकरे ने चुप्पी तोड़ते हुए कहा कि कुछ लोग राजनीति की हद पार कर महाराष्ट्र सरकार और महाराष्ट्र प्रदेश को बदनाम कर रहें हैं. उन्हें अपनी राजनीति से बाज़ आ जाना चाहिए. ये सब बर्दाश्त नहीं किया जायेगा. मेरी ख़ामोशी को कोई मेरी कमजोरी कह कर ना आंके. उद्धव ठाकरे रविवार की दोपहर टेलीविजन मीडिया पर सभी नागरिकों को संबोधित कर रहें थे. उद्धव ठाकरे ने मराठा आरक्षण को लेकर अपनी भूमिका भी स्पष्ट की. बहुत दिनों बाद उद्धव ने आज महाराष्ट्र की जनता और मीडिया का सामना किया. उनका स्वागत है. 

जाहिर हैं कि उद्धव ने अपनी बात रखते हुए इशारों इशारों में दिल्ली में शतरंज की बाजी सजाये बैठें राजनीति के पासेबाजो को भी सीधी चेतावनी दे डाली. दूसरी ओर महाराष्ट्र में राजनीति कर रहें स्थानीय नेताओं को भी अपनी भूमिका से अवगत करवा दिया. विगत दो - तीन माह से महाराष्ट्र राजनीतिक पटल पर अशांत हैं. अभिनेता सुशांतसिंह राजपूत की आत्महत्या मामला, अभिनेत्री रेहा चक्रवर्ती की सी. बी. आई. जाँच का मामला, फिल्म अभिनेत्री कंगना राणावत द्वारा प्रस्तुत की जा रहीं राजनीतिक चुनौतियों का ताजा मामला, विपक्ष की आक्रामकता, अधिवेशन के संसदीय कामकाज का तनाव, सरकार में शामिल मित्र दलों का रवैय्या और मीडिया पर उछाली जा रहीं शिवसेना की छवि जैसे मुद्दों से मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे चिंता में हैं. 

ऐसे में अभी मुंबई में शिवसैनिकों द्वारा एक पूर्व नेवी अधिकार की गई पिटाई का मामला भी शिवसेना को क्षति पहुंचा गया. मराठा आरक्षण भी विषय सरकार के खिलाफ माहौल दिखाई दे रहा हैं.  गली से लेकर दिल्ली तक शिवसेना को आहत करने का प्रयास हो रहा हैं. ऐसे हालातों में शिवसेना प्रवक्ता संजय राउत अकेले ही बोले जा रहे हैं. उद्धव ठाकरे उपर्युक्त विषयों पर चुप्पी साधे बैठें थे. 

आज उद्धव ठाकरे को अपनी उपस्थिति दर्ज करानी पड़ गई कि, है, मैं भी हूँ राजनीति में. मैं भी सवालों का जवाब दे सकता हूँ. सही समय पर उद्धव ठाकरे ने अपनी बात कही. जिसका एक असर तो राज्यपाल महामहिम से मिलने पहुंची कंगना राणावत के व्यवहार में भी देखने को मिला. राज्यपाल से मिलने के कंगना राणावत ने यह कहा कि, मैं एक नागरिक की हैसियत से महामहिम राज्यपाल से मिलने आई थी. उनसे मिलकर मैंने अपने घर पर हुईं बी.एम. सी. की करवाई की शिकायत की हैं. कंगना द्वारा कोई अन्य राजनीतिक बयान नहीं दिया गया. उद्धव के मीडिया में सक्रिय होने का इसे परिणाम कहा जा सकता हैं. 

श्री ठाकरे ने आज महाराष्ट्र में व्याप्त कोरोना संक्रमण के हालातों पर चिंता जताई. उन्होंने कहा कि कोरोना की यह दूसरी लहर लौट आई है और नागरिक इससे सुरक्षित रहे. उन्होंने अस्पतालों में साहित्य सामग्री उपलब्ध करवाने और कोविड संक्रमण का डटकर सामना करने का आश्वासन दिया. महाराष्ट्र में हालात चिंताजनक होने की बात उन्होंने स्वीकार की. प्रदेश के इन हालातों में कुछ लोग सत्ता का खेल, खेलकर महाराष्ट्र में सत्ता परिवर्तन का दांव लगा रहे हैं. इसके लिए बाहर से मोहरे आयात किये जा रहे हैं. 

सुशांतसिंह राजपूत की मौत महाराष्ट्र की सरकार पर प्रहार करने और बिहार के चुनाव अपने पक्ष में प्रभावित करने का अच्छा खेल शुरू हैं. विपक्ष के नेता अपने राज्य से अधिक दिल्ली से अधिक लगाव रखते हैं यह अलग से कहने की बात तो नहीं हैं. लेकिन मुख्यमंत्री और शिवसेना प्रमुख के रूप में उद्धव ठाकरे की मीडिया में वापसी जरुरी हो गई थी. यदि उद्धव ठाकरे इस बात का अहसास नहीं करवाएंगे कि शिवसेना एक आक्रामक राजनीतिक पार्टी है, तो विपक्ष प्रति पल शिवसेना को नोचता रहेगा इसमें संदेह नहीं है. ख़ामोशी में अक्सर बहुत से सवालों के जवाब दबकर रह जाते हैं. फब्तियां कसने वाले ऐसे समय राजनीतिक भड़ास निकाल लेते हैं. उद्धव ठाकरे को अपनी "पुरानी शिवसेना छवि" जागृत करनी होगी. अन्यथा पार्टी का राजनीतिक आधार घट जायेगा. इसलिए इस वापसी का संज्ञान उन लोगों को भी लेना चाहिए जो अपने घर बैठकर शल मीडिया को हथियार बनाने में लगे हुए हैं. शिवसेना पार्टी को पिछले 60 वर्षों का इतिहास हैं. पार्टी का कार्य महाराष्ट्र की बुनियादी मुद्दों से सलग्न हैं. विचलन, संकट और विरोधाभास में भी स्वर्गीय बालासाहब ठाकरे ने शिवसेना की आक्रामकता कम नहीं होने दी थीं यह इतिहास अलग से अवगत करवाने की आवश्यकता नहीं हैं. 


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