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सोमवार, 6 अगस्त 2018

तारा सिंह का वो गुमराह पत्र और कांग्रेस कनेक्शन !
रविंदर सिंह मोदी 
(फाइल फोटो )
कहावत है कि, बन्दर कितना भी बूढ़ा हो जाए कुलाटी मारना नहीं छोड़ता. शातिर व्यक्ति आँखों की रौशनी चली जाने के बाद भी षड़यंत्र रचने में कोई कसर नहीं छोड़ता उसी तरह राजनीतिक व्यक्ति मृत्युशैय्या पर लेटकर भी अंतिम समय तक राजनीति को अंजाम देने में नहीं चूकता. उसी तरह विधायक तारा सिंह गुमराह करने में कोई कसर नहीं रखता. 
उसकी आँख मटकी तो समझ लेना कि कोई नया तिकड़म लड़ाने की वो कोशिश कर रहा है. अब देखिये ना, जैसे ही उस पर गुरुद्वारा बोर्ड कानून में किये गए जबरन संशोधन रद्द करवाने के विषय में संगत ने चुप्पी साधे बैठने का आरोप लगाया तो नांदेड़ के सोशल मीडिया पर उसका एक पत्र वायरल किया गया. मजे की बात तो यह है कि, भाजपा के आमदार तारा सिंह द्वारा मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस को भेजे गए गुरुद्वारा बोर्ड मीटिंग (ता. २८ जुलाई, २०१८) संपन्न होने की जानकारी देने वाला पत्र व्हाट्सएप्प पर नांदेड़ के कुछ कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने वायरल किया. उन्होंने तारा सिंह को बधाई भी दी. तारा सिंह को साथ देनेवाले और बधाई देनेवाले सभी कांग्रेसी पूर्व मुख्यमंत्री श्री अशोक राव चव्हाण के निकटवर्तीय माने जाते हैं. साथ ही कांग्रेस विधायक डी.पी. सावंत के भी वे दहिने - बाये बताये जाते हैं. 
तारा सिंह द्वारा मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस को भेजे गए पत्र की कॉपी सबसे पहले कांग्रेसियों के पास पहुंची कैसे ? क्या तारा सिंह के अंदरूनी रूप से कांग्रेस से तार जुड़े हुए हैं ? क्या साल २०१९ में राज्य में सत्ता परिवर्तन हो जाए तो तारा सिंह को कांग्रेस पार्टी दुबारा गुरुद्वारा का सीधा अध्यक्ष नियुक्त करनेवाली हैं ? क्या तारा सिंह को नांदेड़ के भाजपाइयों से एलर्जी हैं? या यहाँ के भाजपा कार्यकर्ता तारा सिंह की अवैध कार्यों में रुकावट बनें हुए हैं ? खुलासा होना चाहिए. आज कल गुरुद्वारा के टेंडर विषय पर बहुत चर्चा हो रही हैं. 
उधर शिवसेना के एक बड़े नेता (नाम सभी को पता है ) ने तो पिछले दिनों नागपुर अधिवेशन के समय नांदेड़ के एक शिवसेना पदाधिकारी के साथ बातचीत में यह तक संभावना व्यक्त कर दी कि तारा सिंह शिवसेना के संपर्क में है! 
इस विचित्र नेता तारा सिंह ने मुख्यमंत्री को भेजे गए पत्र में सबसे पहले यह सन्देश देने का प्रयास किया हैं कि ''नांदेड़ के सभी सदस्य" बैठक में अनुपस्थित थे. जैसे कि उसने गुरुद्वारा सचखंड श्री हजूर अपचल नगर साहिब मंडल कानून (एक्ट - १९५६) की धारा ६, ७, और १५ में संशोधन करने के प्रस्ताव में लिखा है कि नांदेड़ के मेंबर मेरा कोरम पूरा नहीं होने दे रहे हैं इसलिए मुझे छह मेंबर बढाकर दिए जाएं। अपनी महत्वाकांक्षा भरी बात उसने पत्र में सबसे पहले लिख दी कि, "इस बार भी नांदेड़ के सदस्य मेरी बुलाई मीटिंग में नहीं पहुंचे" इसलिए मेरा संशोधन की मांग का प्रस्ताव एकदम सही है. लेकिन करें क्या ? हमारे पंजप्यारे साहिबान द्वारा और हजूर साहिब संगत द्वारा विरोध किये जाने के बाद सिर्फ १७ सदस्यों का बोर्ड चल जायेगा ऐसी हामी उसे भरनी पड़ी. तारा सिंह और ता. २८ जुलाई, २०१८ की मीटिंग में मेंबर साहिबान ने साध संगत की वो मांग क्यों ठुकरा दी जिसमें सरकार द्वारा "अध्यक्ष की सीधी नियुक्ति" करनेवाली धारा (कलम) ११ का वर्ष २०१५ में किया गया संशोधन रद्द करने की स्पष्ट मांग की गई थी. 
आदरणीय पंजप्यारे साहिबान का पत्र भी ठीक से पढ़ लेना चाहिए था. मीटिंग में सभी पढ़े-लिखे और दिग्गज मेंबर साहिबान थे. पत्र में क्या मांग है उस विषय में क्या पत्र व्यवहार किया गया, भाषा की चालखी आदि को लेकर तारा सिंह साध संगत से खुली चर्चा करे ऐसी हमारी मांग हैं. तारा सिंह की यह चालाखी विधानसभा में चल जाएगी लेकिन संगत की सभा में नहीं चलेगी ये ध्यान रखना. 
चलो आज तारा सिंह की महत्वाकांक्षा में बहुत से लोगों की भी ख्वाइशें जुडी हुई हैं इसलिए उसके खिलाफ आंदोलन करनेवालों को टारगेट किया जा रहा हैं. आंदोलन में सक्रीय बहुत से लोगों को विधायक तारा सिंह से सीधा खतरा हैं. वो साम दाम दंड भेद के अमल में माहिर है. उसके कुछ कट्टर समर्थक जिन पर तारा सिंह की रहमोकरम ज्यादा हैं वो आंदोलन शामिल कुछ नेताओं को बुरी निय्यत से देख रहे हैं. 
आनेवाले दिनों में गुरुद्वारा मंडल के तीन सीटों के चुनाव भी होने वाले हैं. नांदेड़ का वातावरण ये तारा सिंह और उसके समर्थक बिगाड़ सकते हैं, इसलिए तारा सिंह को बोर्ड के अध्यक्ष पद से तुरंत बर्खास्त करना ही सबसे योग्य रहेगा. उसके द्वारा गुरुद्वारा बोर्ड की सत्ता का दूरोपयोग करने की पूर्ण सम्भावना है. तारा सिंह के नजदीक के लोग तो बात बात पर तलवार से हमला कर देते हैं. हजूर साहिब के दो लोग तलवार हमले में बुरी तरह से घायल हुए हैं. ऐसी बिगड़ी परिस्थिति में तारा सिंह को तुरंत हटाना बेहद जरुरी हो गया है. नांदेड़  भारतीय जनता पार्टी के सभी स्थानीय नेता और पदाधिकारी भी इन घटनाओं से चिंतित हैं. उन्हें यहाँ की असलियत आलाकमान को तुरंत बतानी चाहिए. साथ ही इस भोले-भाले, नटखट और उत्पाती नेता की कांग्रेस के जाल में मारी गई ने कुलाटी का भी जिक्र विस्तार से करना चाहिए. तारा सिंह के इस कनेक्शन के कारण सिख मतदाता सम्भ्रमित हैं. इस बात का चिंतन भाजपा  करेगी ऐसी उम्मीद है.  

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