गुरु तेगबहादुरजी का बलिदान प्रेरणास्रोत हैं !
आगामी 400 वां प्रकाशपर्व सुअवसर
सिख पंथ के नवम गुरु, श्री तेगबहादुर जी किन कारणों से हुईं और किन हालातों में हुईं यह एक महान इतिहास हैं. बार - बार यह वर्णन होता आया हैं कि, कश्मीरी पंडितों का हिन्दू धर्म अबाधित रखने हेतु गुरु तेगबहादुर जी ने दिल्ली में शहीदी स्वीकार की थीं. गुरूजी के इस महान बलिदान से कश्मीरी पंडितों का धर्म अबाधित रहा और देश में यह उदाहरण प्रसिद्ध हो गया कि सिख धर्म गुरु द्वारा हिन्दू धर्म बचाने की खातिर अपने आपको कुर्बान कर दिया. बावजूद इसके सिख पंथ की ओर देखने हेतु तत्कालीन हिन्दू समुदाय को सकारात्मक दृष्टि नहीं मिल पाई. क्योंकि तत्काल में मोगल साम्राज्य बहुत प्रभावशाली, ताकतवर और क्रूर भी था. इस कारण कोई अन्य धर्म सिख धर्म की सराहना, सहायता के लिए अग्रसर नहीं हुआ होगा. उस समय हिन्दू धर्म अलग - अलग राज्यों और संस्थानों में बिखरा हुआ था. असंगठित हालातों के चलते भी गुरु तेगबहादुरजी के महान बलिदान की महानता प्रचारित नहीं हो पाई कहा जाए तो गलत नहीं होगा. पश्च्यात में गुरु तेगबहादुर जी के बलिदान की गाथा लिखने के लिए भी देश के इतिहासकार आगे नहीं आये. श्री गुरु गोबिंदसिंघजी महाराज ने इस गाथा को बाणी और साहित्यकारों के माध्यम से प्रचारित किया. खालसा पंथ की स्थापना के समय इस बलिदान गाथा को बहुत बल मिला. गुरु तेगबहादुर जी द्वारा किये गए धर्म संघठन के कार्यों से जुड़े लोग उस समय गुरु गोबिंदसिंघ जी से आकर मिले और अपना सहकार्य अर्पण किया. पश्च्यात लेखक और इतिहासकार भी बलिदान की दिशा में सकारात्मक लिखने लगे. दो से तीन स्क शताब्दियों के प्रचार के बावजूद भी आज देश के अधिकत्तर हिन्दू गुरु तेगबहादुर जी के बलिदान से अनभिज्ञ हैं कहा जाए तो गलत नहीं होगा. आज के दौर में प्रचार प्रसार का सबसे बड़ा तंत्र इंटरनेट और शोशल मीडिया उपलब्ध हैं. जिसकी सहायता से सकारात्मक प्रचार प्रसारित हो सकता हैं. आज विश्व के अनेक देशों में सिख हैं. उनके जरिये भी नवम गुरु के जीवन और बलिदान की गाथा को अमर किया जा सकता हैं. गुरूजी का चतुर्थ शताब्दी प्रकाशपर्व एप्रिल 2021 (ता. 12) को मनाया जायेगा. इस कार्यक्रम को लेकर प्रत्येक सिख की यह जिम्मेदारी बनती हैं कि वो गुरु तेगबहादुर के बलिदान की घटना को प्रचारित करें. यदि एक सिख द्वारा वर्ष भर में अन्य धर्म के दस लोगों तक भी गुरु तेगबहादुर जी की गाथा पहुंचाई गई तो उसका असर सिख धर्म को देखने की दृष्टि पर सकारात्मक छाप छोड़ेगा. इसलिए भी सिख धर्म को चार सौ वें प्रकाशपर्व को लेकर गंभीरता अपनानी होगी. सबसे पहले तो इस गाथा को शोशल मीडिया पर प्रचारित करने के लिए एक सामूहिक नीति को अपनाना होगा. इसलिए आनेवाले समय में इस विषय में को लेकर हमें नीति निर्धारण करना बेहद जरुरी हो जाता है. हमारे सिख धर्म के सामने सबसे बड़ी प्रेरणा के रूप गुरु तेगबहादुर जी का बलिदान है. आने वाले चार सौ सालाना प्रकाशपर्व को लेकर एक सोच और एक राय से कार्य किया जाए यहीं प्रार्थना हैं.
रविंदरसिंघ मोदी
