भविष्य के लिए निर्णय :
लंगर सेवा की सामग्री जीएसटी से मुक्त करना मानवी सवेंदनाओं को सन्मान देना और सामाजिक सदभाव को बढ़ावा देना है. भारत सरकार के जीएसटी हटाने के निर्णय से भारत जैसे विशाल जनसंख्या वाले देश में भविष्य में एक अनूठी क्रांति का सूत्रपात होगा. आज भले ही लंगर सेवा गुरुद्वारों में संचालित होती है अथवा किसी आपात स्थिति में इसका प्रयोग होता है. लेकिन विशाल जनसंख्यावाले इस देश में भविष्य में भूखमरी, दरिद्रता, गरीबी से लड़ने के लिए भी लंगर सेवा कारगर साबित होगी. भारत देश में सिखों की जनसंख्या डेढ़ प्रतिशत के लगभग है. देश स्वतंत्र होने के बाद ७० वर्षों में सिखों की जनसंख्या पांच से छह करोड़ रहनी चाहिए थी. लेकिन सिखों की संख्या सिमित ही नहीं सिमटकर रह गई. बँटवारे के समय लाखों निर्दोष सिखों की हत्या हुई. स्वतंत्र भारत में भी सिखों की हत्याओं का दौर नहीं थमा. देश की सुरक्षा में अग्रणी सिख स्वंत्रता आंदोलन में भी जान न्यौछावर करते रहें, आज भी सीमा की रक्षा में जान न्यौछावर कर रहे हैं. ऐसे सिख धर्म अथवा जाति में लंगर सेवा की प्रथा महान सिख गुरुओं ने शुरू की और सिख गुरुओं की महान सेवा की विरासत आज भी कर्तव्य परायणता के रूप में निभाई जा रही है. यदि सिख धर्म को उसके इतिहास, बलिदान और सेवाभाव के बदले में लंगर सामग्री खरीदने या खरीदने के बाद चुकाई गई जीएसटी रिफंड करने का निर्णय सरकार ने किया है तो एक तरह से सिखों को न्याय को न्याय मिला है. जीएसटी माफ़ करने के लिए हर जगह से मांग उठ रही थी. सरकार ने मांग पर सकारात्मक विचार किया ऐसा मुझे लगता है.
रविंदर सिंह मोदी....