समय आ गया है अब आवाज बुलंद हो
हजूरी प्रधान के लिए बड़े आंदोलन की जरुरत
रविंदर सिंघ मोदी
मुंबई मंत्रालय में गुरुद्वारा के नए बोर्ड गठन की प्रक्रिया शुरू हो गई है. तीन सदस्यों के चुनाव के बाद अब बाहरवालों का रास्ता साफ़ है. अब बोर्ड की नए से रचना कर, नया अध्यक्ष (प्रधान) नियुक्त करने की पहल जारी है. उधर प्रक्रिया में तेजी है. इधर हजूरी प्रधान के सपने देखनेवाले हम सब सुस्त हैं. हजूर साहिब से कोई बड़ी पहल तो मायने रखती है. केवल निवेदन देने मात्र और अख़बारों में सुर्खियाँ बटोरने से हजूरी प्रधान की नियुक्ति नहीं हो जाती. जरुरत हैं एक नई पहल और एक नए आंदोलन की.
यह अपेक्षा हम साधसंगत में चुनकर आए हमारे तीनों सम्मानीय सदस्यों से कर सकते हैं कि वे संघटित होकर एक बड़ा आंदोलन करें जिसमें बड़ी संख्या में साधसंगत भी जुड़े. चुनकर आएं सदस्यों ने साढ़े तीन हजार से साढ़े चार हजार वोट प्राप्त किये हैं. यह कोई छोटी बात नहीं हैं. इसका अर्थ यही निकलता हैं कि साध संगत ने उन्हें अपना नुमाइंदा मान लिया हैं. अब तीनों सदस्यों की सामूहिक जिम्मेदारी बनती है कि वे गुरुद्वारा बोर्ड कानून १९५६ की कलम ११ में हुए संशोधन को रद्द करवा कर हजूरी प्रधान का चयन करवाने का रास्ता साफ़ करें. यहाँ के व्यवस्थापन में हजूर साहिब का नुमाइंदा प्रधान के रूप में प्रस्तुत करें अथवा करवाएं.
एक बार सरकार द्वारा अध्यक्ष नियुक्त करने के बाद यह लड़ाई बहुत मुश्किल हो जाएगी. क्योंकि बड़े बड़े दिग्गज प्रधान पद पाने के लिए पासे बिछाये हुए हैं. दिल्ली, मुंबई और नागपुर की शक्तियां इस कार्य में जुटी हुई हैं. इस बात को गंभीरता से लेते हुए चुनकर आएं तीनों सदस्य और बोर्ड के में मनोनीत अन्य सदस्य मिलकर बैठक का आयोजन कर आंदोलन की दिशा तय करें. यदि सभी सदस्य हजूरी प्रधान और कलम ११ रद्द करवाने के विषय में एकजुट होते हैं तो निश्चित ही एक बड़ा जनांदोलन खड़ा हो सकता है.
जाहिर हैं कि संभाव्य आंदोलन में स्थानीय साध संगत की पूर्ण शक्ति भी प्राप्त हो सकती हैं. यदि यहाँ मौका चूक गए तो आनेवाले पच्चीस सालों में भी हजूरी प्रधान नहीं बन पायेगा. इसलिए २६ जनवरी से पहले ही यहाँ शांतता पूर्ण आंदोलन कर बोर्ड पर हमारा प्रधान मांगना चाहिए. लोकतंत्र में हमारा प्रधान चुनने का अधिकार हमें होना चाहिए. जिस तरह से बोर्ड का काम चल रहा हैं उसे देखकर ये लग रहा हैं कि सन १९७५ की तर्ज पर गुरुद्वारा बोर्ड में भी आपातकाल लागु कर दिया गया हैं. इस अघोषित आपातकाल के ख़िलाफ़ लड़ने का यही सबसे उपयुक्त समय आ गया हैं. यदि मौका चूक गए तो साधसंगत से किये गए वायदे झूठ का पुलिंदा साबित होंगे इसमें कोई दो राय नहीं हैं.
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रविंदर सिंघ मोदी
