मोदी - राज में महाराष्ट्र सरकार कर रहीं हैं सिखों पर अत्याचार
नांदेड़ गुरुद्वारा पर फिर लादा गया सरकारी अध्यक्ष
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प्रधानमंत्री मोदी भी प्रश्न करे कि सिखों की संस्था का लोकतंत्र क्यों छिन लिया गया
रविंदर सिंघ मोदी
देश में सभी तरफ मोदी के कार्यों की प्रशंसा करने के लिए लोग प्रतियोगिता कर रहे हैं. सोशल मीडिया पर मोदी के प्रसंशक उनकी तारीफ का कोई मौका नहीं चूकते. लेकिन दूसरी ओर मोदी सरकार के राज में महाराष्ट्र की देवेंद्र फडणवीस सरकार का सिखों पर अत्याचार जारी हैं. ता. ९ मार्च, २०१९ के दिन महाराष्ट्र सरकार ने नांदेड़ के गुरुद्वारा तखत सचखंड बोर्ड संस्था पर दुबारा से सरकारी अध्यक्ष नियुक्त कर दिया. जबकि विगत चार सालों से नांदेड़ के सिख बराबर से गुरुद्वारा बोर्ड संस्था पर सरकार द्वारा किये जा रहे अध्यक्ष नियुक्ति का विरोध उठाकर रखा हुआ हैं. मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने स्वयं आठ से दस बार सिख समाज को आश्वासन दिया था कि गुरुद्वारा तखत सचखंड बोर्ड संस्था कानून १९५६ की धारा ग्यारह में किया गया संशोधन रद्द कर दिया जायेगा. लेकिन मुख्यमंत्री ने सभी आश्वासनों से मुकरते हुए अपने करीबी, व्यवसायी भूपिंदर सिंघ मिन्हास को गुरुद्वारा बोर्ड का प्रधान नियुक्त कर दिया.
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| फाइल फोटो |
मुख्यमंत्री ने इस समय अल्पसंख्यक सिखों पर रौब कसने और "हम करें सो कायदा" का उदाहरण प्रस्तुत किया जो लोकतंत्र की प्रतिमा मलिन करता हैं. साथ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के राज में ये स्पष्ट संकेत भी देता हैं कि नांदेड़ के सिखों पर सरकार इतने सालों से कैसे अत्याचार कर रही हैं. देवेंद्र फडणवीस ने एकतरफा निर्णय लेते हुए साबित कर दिया की वे जनमानस का नहीं सुनते बल्कि बिज़नेस मन ही उन्हें प्रिय हैं.
देवेंद्र फडणवीस द्वारा कलम ग्यारह का दुबारा से प्रयोग नांदेड़ के सिखों के गले नहीं उतर रहा हैं. देश में प्रजातंत्र रहते हुए भी देवेंद्र फडणवीस ने क्यों नांदेड़ स्थित सिखों के पवित्र पावन तखत साहब श्री गुरुद्वारा तखत सचखंड हजूर साहिब संस्था को सरकार के नियंत्रण में कर लिया. मुख्यमंत्री बनने के बाद उन्होंने ता. १८ फरवरी, २०१५ के दिन गुरुद्वारा तखत सचखंड बोर्ड कानून १९५६ की धारा ग्यारह में बदलाव करते हुए संस्था पर अध्यक्ष नियुक्त करने का निर्णय अपने अधीन कर लिया. जबकि १९५६ से बोर्ड के सत्रह सदस्य मिलकर अपना प्रधान चुनते थे. इस बात की गंभीरता देखते हुए जनमानस (साधसंगत) की मांग पर तखत साहब के आदरणीय पंजप्यारे साहिबान ने संस्था को सरकारी अधिपत्य निकालकर लोकतंत्र बहाल करने के लिए धार्मिक गुरुमत्ता भी पारित किया. उस गुरुमत्ता के तहत संतबाबा बलविंदर सिंघजी कारसेवा वाले और संत बाबा प्रेमसिंघजी माता साहेब वाले इस आंदोलन के नेतृत्व कर रहे हैं. लेकिन इतने आंदोलन होने के बावजूद भी सरकार ने सिखों की नहीं सुनी.
उल्लेखीनय हैं कि, मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने वयोवृद्ध विधायक तारासिंह को संस्था का प्रधान बनाने के लिए जबरन ये कानून पास करवाया था. यह कानून पारित होने के बाद से जनमानस द्वारा लगातार सरकारी निर्णय और कानून संशोधन का विरोध किया जाता रहा. लेकिन राजनीतिक क्षमता का उपयोग कर मुख्यमंत्री और भाजपा द्वारा हमेशा सिखों की मांगों को दरकिनार कर दिया गया. अब जबकि कलम ग्यारह का संशोधन रद्द करने का समय था तो मुख्यमंत्री ने आश्वासन देकर भी फिर से अपने निकटवर्तीय को प्रधान बनाया और नांदेड़ ही नहीं मराठवाड़ा के सक\सिखों पर अत्याचार कर दिया. आखिर मुख्यमंत्री यह संस्था अपने अधीन क्यों रखना चाहते हैं? नांदेड़ के सिख तो पूछ ही रहे हैं. लोकप्रिय प्रधान मंत्री श्री नरेंद्र मोदी भी श्री देवेंद्र फडणवीस से पूछे कि सिखों के प्रति लोकतंत्र क्यों समाप्त कर दिया गया हैं. महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री ने क्यों ये संस्था अपने कब्जे कर रखी हैं? अल्पसंख्यंकों के साथ सौतेला व्यव्हार क्यों हो रहा हैं? सरकार होने का अर्थ क्या किसी एक जातिसमूह पर दादागिरी होता है? महाराष्ट्र की भाजपा सरकार ने गुरुघर के साथ और नांदेड़ के सिखों के साथ आक्रांताओं जैसा व्यवहार शुरू किया हुआ हैं. मोदी जी क्या आप कुछ नहीं कर सकतें?

