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मंगलवार, 15 दिसंबर 2020

 सिखों पर टिप्पणियां करनेवालों पर अपराध दर्ज 

चंद्रपुर में अपराध दर्ज, एक गिरफ्तार !

रविंदरसिंह मोदी

(चंद्रपुर जिले के सिख पुलिस में शिकायत प्रस्तुत करते हुए)

चंद्रपुर निवासी सिखों की शिकायत के आधार पर पुलिस ने व्हाट्सअप ग्रुप में सिखों और किसानों के विरुद्ध अभद्र भाषा में टिप्पणियां कर रहें तत्वों के खिलाफ अपराध दर्ज कर लिया. चंद्रपुर निवासी स. जसबीरसिंघ सैनी और स्थानीय सिख समाज ने ता. 14-12-20 की देर शाम पुलिस थाना में सोशल मीडिया पर अपप्रचार को बढ़ावा दें रहें तत्वों के खिलाफ करवाई की मांग की थीं. पुलिस द्वारा एक व्यक्ति को गिरफ्तार कर लिया गया जबकि एक फरार बताया जा रहा है. पुलिस द्वारा व्हाट्सअप ग्रुप "उजाला" और वी. आई. पी. इन दोनों ग्रूपों को संचालित कर रहें एडमिन बलराम डोडानी के भी करवाई की जा रहीं है. 

शिकायतकर्ता जसबीरसिंघ सैनी ने आरोप लगाया है कि, देश में चल रहें किसान आंदोलन के चलते उपर्युक्त व्हाट्सप्प ग्रुप्स में सिखों के खिलाफ और किसानों के खिलाफ आपत्तिजनक भाषा में दुष्प्रचार किया जा रहा. उनके प्रति अपशब्द और राष्ट्र विरोधी होने का प्रचार चलाया जा रहा है. पप्पू मल्लन, प्रदीप भीमनवाढ, अरविन्द सोनी, बजरंगसिंह और बलराम डोडानी आदि के खिलाफ करवाई करने की मांग की गई हैं. पुलिस द्वारा आई. पी. सी. की धारा 505(2) के तहत धार्मिक उन्माद को बढ़ावा देने आदि आरोपों के तहत मामला दर्ज कर लिया गया. 

(स. जसबीरसिंघ सैनी और चंद्रपुर की साधसंगत)

चंद्रपुर के सिख समाज ने कानूनी करवाई का सराहनीय कदम उठाया हैं. इस समय किसान आंदोलन की आड़ में सिखों को टारगेट किया जा रहा हैं. तरह तरह के वीडियो जारी कर खालिस्तानवाद के मुद्दे को ऊँचा कर देशभर के सिखों को उससे जोड़ने का एक तरह का षड्यंत्र किया जा रहा हैं. कुछ संघटनों से जुड़े कुछ सिख भी इस समय विषय को बगल देने के प्रयास में वीडियो और पोस्ट जारी किये जा रहें हैं. जब तक किसान आंदोलन किसी नतीजे पर नहीं पहुँचता तब तक सिखों को पोस्ट जारी नहीं करने चाहिए. किसी अन्य समाज या पार्टी की भूमिका को लेकर भी अभी से भूमिका तय नहीं होना चाहिए. यह आंदोलन इस समय नाजुक मोड़ पर हैं. बहुत सी बातें शोशल मीडिया पर नहीं होनी चाहिए. आंदोलन को समर्थन देना अलग है बात है और सिखों की बदनामी का विषय अलग है. यह भेद जानकर अगली दिशा तय करने की आवश्यकता है. 

यह भी आश्चर्यकारक चित्र हैं कि, पिछले समय में व्हाट्सप्प ग्रुप्स द्वारा बेकार के मुद्दों पर अपने स्वयं को "शेर" की उपमा देकर प्रसिद्धि प्राप्त कुछ राजनीतिक प्रवृत्ती की आकृतियाँ अब वर्तमान समय की राजनीतिक परिस्थितियों पर दोगली भूमिका में प्रस्तुत करते देखें जा रहें हैं. पार्टी में बनें रहने की मजबूरियों के तहत वें आज एक राजनीतिक पार्टी के लाखों कार्यकर्ताओं द्वारा सिखों पर की जा रहीं देशविरोधी, धर्मविरोधी  टिप्पणियों को देख और सुनकर भी खामोशी अपनाये दिखाई दें रहें हैं. क्या वें अपनी पार्टी के पास इस परिस्थिति के संबंध में शिकायत नहीं करेंगे?  क्या वें इस विषय को लेकर पुलिस के पास मामला प्रस्तुत नहीं करेंगे? सिखों के वोट मांगनेवाले अब सिखों की हो रहीं बदनामी को देखकर भी खामोश हैं. महाराष्ट्र के देशभक्त सिखों की प्रतिमा इस समय उज्वल होने की दृष्टि से कोई प्रयास करता दिखाई नहीं पड़ रहा हैं. महाराष्ट्र के सिख केवल किसान आंदोलन का समर्थन कर रहें हैं यह विषय आज मीडिया और सरकार के सामने स्पष्ट होना चाहिए. यह ऐसा समय है कि सिख नौजवानों को चाहिए कि शोशल मीडिया के पोस्ट से खिन्न होकर जवाब देने की बजाए पुलिस की सहायता लेनी चाहिए. 

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