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मंगलवार, 24 नवंबर 2020

 जत्थेदार जी का वक्तव्य स्वागतार्ह है !

मेडिकल कॉलेज खुलना चाहिए 

रविंदरसिंघ मोदी 

तखत सचखंड श्री हजूर साहब के आदरणीय जत्थेदार साहिब संत बाबा कुलवंतसिंघजी द्वारा किया गया हालिया वक्तव्य स्वागतार्ह माना जाना चाहिए. संत बाबा कुलवंतसिंघ जी ने तखत सचखंड श्री हजूर साहब द्वारा आयोजित श्री गुरु ग्रंथसाहिब जी के गुरुतागद्दी समागम अंतर्गत परलोकगमन दिवस के दिन साधसंगत को संबोधित करते हुए कहा कि, समाज में उच्च शिक्षा के केंद्र शुरू होने चाहिए जैसे इंजिनियरींग कॉलेज, मेडिकल कॉलेज आदि. जत्थेदार साहिब द्वारा व्यक्त मंशा आज के समय की सबसे बड़ी सार्थकता का बोधमात्र हैं. सिख समाज के पास आज मेडिकल कॉलेज अथवा इंजीनियरिंग कॉलेज, एमबीए कॉलेज या फॉर्मेसी कॉलेज जैसी संस्थाएं नहीं होने के कारण हमारी सम्पन्नता में कहीं न कहीं कमी सी प्रतीत हो रहीं हैं. इसलिए जत्थेदार जी के वक्तव्य के मायने हैं. 

हम सभी लोग विगत नौ माह से कोरोना संक्रमण जैसी त्रासदी का सामना कर रहें हैं. सिख समाज के बहुत से नागरिकों ने इस संक्रमण के साथ जीवित संघर्ष किया हैं. कुछ सिख भाई, बहन और वरिष्ठ सिख नागरिक दुर्भाग्यशाली भी रहें जिन्हें जान गंवानी पड़ीं. हमने जहाँ संक्रमण काल में लॉकडाउन, कर्फ्यू और उपेक्षाओं का सामना किया वहीं अस्वस्थ लोगों ने उपचार पाने के लिए कठिन संघर्ष भी किया. लोग अस्पतालों में बेड प्राप्त करने के लिए भागदौड़ करते रहें. उपचार के लिए सिफारिशें करवातें रहें. उपचार के लिए पैसों का जुगाड़ करते रहें. उपेक्षा बर्दाश्त कर ऐसे तैसे कुछ लोगों को उपचार मिल पाया. कोविड केंद्रों में बहुत से लोगों को अच्छा बर्ताव नहीं मिला. यह सब हमें बीतें समय ने बताया हैं. बीतें दिनों में यदि दशमेश पिता श्री गुरु गोबिंदसिंघ जी महाराज की अनुकंपा प्राप्त नहीं हुईं होती तो शायद समाज की ऐसी दुर्गति होती कि उसे बयान करना भी मुश्किल हो जाता. मैंने यह अनुभव साक्षात् जिया हैं. वो गुरु महाराज ही थे जिन्होंने आपातकाल में मुझे आज तक सुरक्षित रखा हैं. इसलिए जैसे ही जत्थेदार साहब के मुख से यह विचार बिखरें मेरे भीतर के छुपे यह जज़्बात बाहर निकलने शुरू हो गए हैं. जत्थेदार साहब द्वारा संतों, गुणी, ज्ञानी और प्रतिष्ठित सज्जनों की उपस्थिति में अपने विचार रखें गये. जिसे लाइव टीवी के माध्यम से विश्व भर में सिख श्रद्धालु भी सुन रहें थे. श्री गुरु ग्रंथसाहिब जी की हाजरी में सोना और पुराने शस्त्र भी सजें हुए थे. पंजप्यारे साहिबान और संत बाबा बलविंदरसिंघजी कारसेवा वाले बाबाजी भी शांतचित से जत्थेदार के वक्तव्य का श्रवण कर रहें थे. यह दृश्य समस्त सिख विश्व देख रहा था. ऐसे समय में तखत साहिब के मंच से सकारात्मक और शुभ विचारों का व्यक्त होना मात्र संयोग नहीं हो सकता वरन गुरु महाराज जी का ही कोई संकेत हो सकता हैं. 


हमारे पंथ के पास सौ करोड़ की धार्मिक संस्था हैं. गुरुद्वारा सचखंड बोर्ड संस्था का एक महत्व है और यह संस्था दक्षिण भारतीय सिखों का नेतृत्व कर रहीं हैं. जब यह संस्था सरकार के पास गठित नहीं थी उस समय यहाँ के सिखों ने खालसा स्कूल उपक्रम शुरू करवाया था. लगभग सवा सौ वर्ष शायद 1896 में हजूर साहब में प्राथमिक शिक्षा के लिए स्कूल शुरू किया गया था ऐसा मेरी जानकारी में आया हैं. बोर्ड रजिस्ट्रेशन के बाद खालसा हाईस्कूल, आई. टी. आई. आदि उपक्रम शुरू किये गए. बोर्ड द्वारा पिछले तीस वर्षों में दो से तीन बार मेडिकल कॉलेज के लिए प्रयास किये गए थे. लेकिन अंतर्गत मतभेद के चलते और इच्छाशक्ति के आभाव में यह कार्य सिद्धि को प्राप्त नहीं हो पाया. लेकिन आज के समय की मांग है कि सिखों के पास उनका स्वयं का मेडिकल कॉलेज और एक मल्टी स्पेशिलिस्ट सुविधायुक्त अस्पताल होना जरुरी हैं. यदि आने वाले समय में कोई आपदा आती हैं तो सिखों के पास उनका कोई सुरक्षित स्थान होना चाहिए जहाँ वें विश्वास के साथ उपचार करवा सकें. वहीं उपचार करने वाले डॉक्टर, नर्सिंग स्टॉफ भी अपना हो तो और भी बेहतर उपचार उपलब्ध हो सकता हैं. इसलिए आज के समय में हजूर साहिब में एक अच्छा मल्टीस्पेशिलिस्ट हॉस्पिटल या कॉलेज खोला जाना एक सार्थक कदम साबित होगा. हजूर साहब में गुरुद्वारा सचखंड बोर्ड के साथ साथ गुरुद्वारा श्री लंगर साहिब और गुरुद्वारा माता साहब देवाजी जैसी धार्मिक संस्थाएं भी कार्यरत हैं. सभी संस्थाओं के पास जमीनें भी उपलब्ध हैं. सिख पंथ में हर वर्ष,  दस से बीस डॉक्टर्स बनाने की जिम्मेदारी यदि यह उपर्युक्त संस्थाएं स्वीकार करती हैं तो भविष्य में हजूर साहब का सिख समाज समृद्ध, संपन्न, जागरूक और स्वस्थ समाज होगा इसमें कोई दोराय नहीं हैं. वहीं हमारे संतों का आशीर्वाद प्राप्त हो जाएं तो नामी स्वस्थ केंद्र शुरू हो सकता है. 

जत्थेदार साहब का वक्तव्य स्वागतार्ह हैं. समाज के सकारात्मक प्रवृत्तिवाले लोगों द्वारा भी इस वक्तव्य का संज्ञान लिया जाना चाहिए. साथ समाज में रजिस्टर्ड सामाजिक और शिक्षा संस्थाओं द्वारा भी उच्च शिक्षा केंद्र शुरू करने के लिए प्रयासरत होना चाहिए. एमबीए, लॉ, जर्नलिज्म, स्कील डेवलपमेंट जैसी विद्या के केंद्र स्थापित होना समय की बड़ी मांग हैं. आनेवाले दस वर्षों में सामाजिक चित्र बदलना हो तो आज ही शिक्षा क्षेत्र में विकास कार्य शुरू किया जाना चाहिए ऐसा बार बार आभास हो रहा हैं. इस विषय में पिछला सब कुछ भुलाकर मानयोग जत्थेदार साहब की बात पर नए से चिंतन किया जाना चाहिए. धन्यवाद सहित. 

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