हजूरी विकास मंच की नयी पहल....!!
रविन्दरसिंघ मोदी
हजूर साहिब, नांदेड़ के सिखों का सबसे बड़ा दुर्भाग्य उनकी गुटबाजी रहीं है. पिछले ६० से ७० वर्षों में कभी भी समाज एकसंघ नहीं रहा है. विचारधारा का टकराव, आपसी मनमुटाव, व्यक्तिगत स्वार्थ, सत्ता की लालसा, दूसरे के प्रति द्वेष और राजनीतिक हस्ताक्षेप के कारण समाज गुटों - गुटों और खेमों में बँटकर रह गया. आज भी गुटबाजी सहित उपर्युक्त सभी मुद्दे कारणीभूत माने जा रहे हैं. गुरुद्वारा बोर्ड की सत्ता पाने और मेम्बरशिप पर कब्ज़ा करने के लिए सभी हैरान - परेशान हैं. साधसंगत की सेवा करने की प्रामाणिक मंशा किसी की भी लग नहीं रही हैं. सभी को चुनावों की जल्दी है. पर बहुत से ऐसे भी सिख हैं जिन्हे दिल से यह लग रहा हैं कि गुरुद्वारा बोर्ड पर स्वच्छ चरित्र और अभ्यासक वृति के लोग आये. चाहे चुनकर या नियुक्त होकर. वहीँ अधिक संख्या में सिख छह रहें हैं कि हजूर साहिब के लोगों की संस्था पर हजूर साहिब के लोग कायम रहें. ऐसे में हजूरी विकास मंच की रविवार (ता. २४ जून, २०१८) को हुई बैठक से एक नहीं पहल शुरू होने की आशा पल्लवित हुई है. सरदार अवतार सिंह पहरेदार ने समाज की बैठक बुलाकर विविध धड़ों और नेताओं को एकत्रित कर गुरुद्वारा बोर्ड में सुधारों को लेकर आंदोलन करने की नीति पर सभी को एकमत करवाया. उनका प्रयास सराहनीय है और वे बधाई के पात्र भी. जो नेता और कार्यकर्ता बैठक में थे उनमें सरकार के उस निर्णय के प्रति रोष नज़र आया जिसमे सरकार ने गुरुद्वारा बोर्ड अध्यक्ष की नियुक्ति का अधिकार अपने अधीन कर लिया है. सरकार ने मार्च २०१५ में ये निर्णय लिए था लेकिन उससे पूर्व भाजपा विधायक तारा सिंह की मंशा के अनुरूप गुरुद्वारा सचखंड बोर्ड कानून १९५६ की धारा ११ में छेड़छाड़ (संशोधन) कर लिया था. इस तरह महाराष्ट्र सरकार ने हजूर साहिब की संगत के अधिकारों पर वार करते हुए गुरु घर के प्रबंध के सूत्र अपने हाथ ले लिए थे. जिसके बाद ये प्रचलन शुरू हो गया कि सरकार अपनी मर्जी का अध्यक्ष सीधे नियुक्त कर दे भले फिर वो कोई भी क्यों न हो. संस्था नांदेड़ की, गुरुद्वारा नांदेड़ में, लेकिन अध्यक्ष वो, जो सरकार चाहें. ये घातक निर्णय हजूर साहिब के सिखों की स्वतंत्रता छीननेवाला है. गुरुद्वारा बोर्ड के १७ सदस्यों को ये अधिकार जाता हैं कि वें अपना प्रधान, सचिव, उपाध्यक्ष और सभापति स्वय चुनलें, लेकिन ये अधिकार सरकार के अधीन चले गए हैं. हजूरी विकास मंच की बैठक में आंदोलन को लेकर रूपरेखा ठहराई गई. अब ता. २८ जून, २०१८ को जिलाधीश कार्यालय के सामने आंदोलन जायेगा. धरना धरा जायेगा. समाज के सभी घटक एकत्र आने से आंदोलन मजबूत होगा. ये आंदोलन न हो या कमजोर पड़े इसलिए कुछ राजनीतिक लोग अपने मोहरों को काम पर लगा सकते हैं. या कुछ स्वार्थी लोग जिन्हें स्थानीय सिख समाज के भविष्य से कोई लेना देना नहीं है, केवल मेंबर बनने की मंशा है वे विघ्नसंतोषी धर सकते हैं. इन सब बातों की संभावनाओं के चलते एक नयी पहल की शुरुवात हुई है. मैं इस पहल के लिए मुबारकबाद देता हूँ और अपील करता हूँ कि हजूरी साधसंगत एकजुट होकर आंदोलन में शामिल होकर शांतिपूर्वक समाधान तलाश करे.
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