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शनिवार, 14 जुलाई 2018

आंदोलन ठंडा ना पड़ने पाएं 
रविंदर सिंघ मोदी 

हजूर साहिब नांदेड़ - पांच तखतों में श्री हजूर साहिब तखत की महत्ता सबसे अलग इसलिए है क्योंकि इस पवित्र स्थान पर दशम पिता श्री गुरु गोबिंद सिंघजी महाराज ने युगों युग अटल श्री गुरु ग्रन्थ साहिब जी को गुरता प्रदान कर उन्हें जागता गुरु बनाया. इस जागते गुरु की छत्रछाया में हम सिख स्वयं को भाग्यशाली मानते हैं. यह परम्परावादी तखत है. ऐसे पावन तखत स्थान की गरिमा स्थानीय सिखों ने विगत तीन सौ सालों से बनाएं रखीं हैं. लेकिन कुछ विघातक प्रवृति  के लोग जिन्हें यहाँ का इतिहास अवगत है न मर्यादा, वे केवल यहाँ के सोने की चमक और चढ़ावे पर नजर रखकर तखत का सरकारीकरण करने पर आमदा है. उस तरह का कानून पारित करवा रहें हैं. और इस कार्य में सबसे बड़ा दोखी भाजपा का मुंबई का विधायक है जो कुछ हिंदुत्ववादी शक्तियों की चालों को कामयाब करवाने के लिए कार्य कर रहा हैं. इस तारासिंह ने तीन साल पहले तारीख १२ मार्च, २०१५ को गुरुद्वारा बोर्ड कानून १९५६ में बदलाव कर बोर्ड मंडल बना दिया. खुद अध्यक्ष पद पा लिया. अपने भांजे को भी मेंबर बना दिया. अब ता. २७ जून, २०१८ को मुंबई में बैठकर सदा के लिए गुरुद्वारा बोर्ड की सत्ता चलाने की नियत से मंत्रिमंडल की बैठक में संशोधन करवाकर और छह मेंबर बढ़ाने का निर्णय पारित करवाया. घटिया राजनीति को अंजाम देकर उसने दखनी समाज की संस्था का पूर्ण सरकारीकरण करने में कोई कसर नहीं छोड़ी. मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस और राजस्व मंत्री चद्रकांत पाटिल ने इस लालची और देखनी विरोधी विधायक की तुरंत मंशा पूर्ण कर दी. इस अत्याचार और धोखाधड़ी के खिलाफ दखनी समाज ने आंदोलन शुरू किया. जिसके बाद नागपुर विधानसभा के सत्र में विधेयक भेजा गया. आदरणीय पंजप्यारे साहिबान और कारसेवा के संतों ने भी दक्खनी सिखों की भावनाओं का सम्मान करते हुए सरकार से गुहार लगाई की गुरुद्वारा बोर्ड के कानून में किसी तरह का संशोधन न किया जाये. लेकिन भाजपा में अकेला पगड़ीधारी विधायक होने के कारण मुख्यमंत्री और राजस्व मंत्री तारा सिंह के साथ है. पगड़ी पहनने से कोई सिख नहीं हो जाता. तारासिंह के भी सिख होने के कोई प्रमाण नजर नहीं आते. उसने कभी तखत साहब में गुरु का अमृत नहीं चखा (छका) है. इसी बात के कारण वो तनखैया होने से भी बच गया. क्योंकि तनखैया गुरु के सिखों को ही किया जा सकता हैं. खैर, तारा सिंह अब ता. २८ जुलाई, २०१८ की मीटिंग में कुछ लालच भरे और कुछ विवादित मुद्दे परोसकर दखनी समाज के सामने टुकड़े फेककर ललचाने की कोशिश में जुटा हुआ है. अभी भी उसने घोषणा नहीं की है कि गुरुद्वारा कानून में किया गया संशोधन वो रद्द करवा रहा हैं. जिसका कारण यही है कि यह एक बहुत बड़ी साजिश के तहत कार्य किया जा रहा हैं. तारा सिंह के मंसूबें पूर्ण ना हो इसलिए हजूर साहिब के सिख समुदाय को एकजुट होकर प्रयास करना चाहिए. हमारा आंदोलन ठंडा ना पड़ जाए इस बात की गंभीरता अमल में लाकर आंदोलन को जागता रखना चाहिए.  इस बार हम खामोश रहे, या दूसरों पर निर्भर रहें तो हमारा गुरुद्वारा हमेशा हमेशा के लिए मुंबई और नागपुर के लोगों के हाथ में चला जायेगा. बोर्ड का मुख्य कार्यालय भी मुंबई में बन जायेगा और यहाँ हम तालियां बजाते रह जाएंगे. इसलिए जागते रहो और आंदोलन में शामिल हो जाओ. 
संत बाबा नरिंदर सिंघजी कारसेवा वाले 
और संत बाबा बलविंदर सिंघजी कारसेवा वालों 
ने महाराष्ट्र सरकार से मांग की हैं. 

दैनिक सकाळ के १२ जुलाई, २०१८ में छपी है खबर. 
आज के दैनिक सकाळ न्यूज़ पेपर में न्यूज़ है. 


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