मेरी ब्लॉग सूची

शुक्रवार, 11 मार्च 2022

अभिनन्दन और शुक्रिया

कर्मचारी भाई - बहन और उनके परिवारों के चेहरों पर खिल गईं मुस्कान!

रविंदरसिंघ मोदी 

श्री हजूरसाहिब बोर्ड के इतिहास में 10 मार्च, 2022 की तिथि संस्मरणीय रूप से अंकित हो गईं है. गुरुद्वारा सचखंड बोर्ड संस्था में कार्यरत 369 डेलीवेजस कर्मचारियों को सेवा में स्थाई करने के निर्णय के तहत उन्हें "सेवा कायम अनुबंध" पत्र सौंपें गए. इन अनुबंध पत्रों का वितरण 10 मार्च, 2022 की शाम गहमागहमी के वातावरण में संपन्न हुआ. जिसके साथ ही अस्थाईत्व से स्थाईत्व सेवा के संभाव्य लाभ को पाने की मंशा से कर्मचारी और उनके परिवारों के चेहरें खुशियों से दमक उठें. कर्मचारियों के चेहरों पर खिलीं उन मुस्कानों का वर्णन बहुत सुखद था. पिछले कुछ वर्षों से बोर्ड अंतर्गत राजनीति से कुद हो चलें कर्मचारी भाई और बहन एक अवसाद के आलम में घिरे हुए थे. कोविड संक्रमण काल की त्रासदी और अन्य स्वास्थ्य समस्याओं से निराशा और असुरक्षा के भाव से कुंठित हुए जा रहें थे वहीं उनके सामने आर्थिक किल्लत की समस्या विकट रूप लें रहीं थीं. बोर्ड में कार्यरत 369 इन कर्मचारियों में बड़ी संख्या में कर्मचारी सेवादार पद के ओहदे पर सेवाएं दें रहें हैं. पश्च्यात में बॉडीगार्ड, क्लार्क, टीचर, टेक्निकल और अन्य पद आते हैं. जिन्हें सेवा करते दो वर्ष पूर्ण हो रहें थे उन्हें गुरुद्वारा बोर्ड के पिछले नियमों के तहत सेवा में कायम करने का निर्णय लिया गया. बल्कि निर्णय के साथ ही तुरंत सेवाकायम अनुबंध पत्र भी सौंप दिए गए. इस तरह का निर्णय अब तक के बोर्ड इतिहास में सर्वथा अनूठा रहा है. 

इस आंदोलन को संतों के आशीर्वाद और समर्थन का स्पर्श भी प्राप्त हुआ. दो से तीन महीनों का संघर्ष संस्मरणीय रहा. अंततः जद्दोजहद और राजनीतिक खींचतान के बीच गुरुद्वारा बोर्ड के तीनों इलेक्टेड सदस्यों और हजूरी खालसा दीवान के नुमाइंदों (सदस्यों) के सामूहिक प्रयासों के चलते कर्मचारियों को सेवा में कायम करने हेतु साहसी निर्णय लिया गया जिसका स्वतंत्र मूल्यांकन करना योग्य ही होगा. इस विशेष कार्य के लिए बोर्ड के प्रधान साहब स. भूपिंदरसिंघ मिनहास को धन्यवाद. साथ ही बोर्ड के तीनों इलेक्टेड सदस्य स. रविंदरसिंघ बुंगाई (सचिव), स. गुरमीतसिंघ महाजन और स. मनप्रीतसिंघ कुंजीवाले तथा सचखंड हजूरी खालसा दीवान के सन्दर्भ से जुड़े (सदस्य) स. गुरचरनसिंघ घडीसाज, स. शेरसिंघ फौजी, स. सुरिंदरसिंघ मेंबर और स. सुरजीतसिंघ फौजी के सामूहिक प्रयत्नों की भरपूर सराहना होनी चाहिए. जिन्होंने इस निर्णय के कार्यान्वयन में भूमिका निभाई. बोर्ड सदस्यों के अलावा भी समाज के कुछ सक्रिय व्यक्तित्व हैं जिन्होंने नियमित रूप से इस विषय का प्रस्तुतीकरण बोर्ड के समक्ष किया. गुरुद्वारा बोर्ड के अधीक्षक स. गुरविंदरसिंघ वाधवा विशेष रूप से बधाई के पात्र हैं. 

साध संगत और गुरुद्वारा के डैलीवेजस एवं बिलमुक्ता कर्मचारी बार-बार सेवा में पक्का करने की मांग कर रहें थे. गुरुद्वारा बोर्ड गठन से ही प्रधान साहब और मेंबर साहिबान से मांग की जा रहीं थीं. सामाजिक कार्यकर्ता स. लखनसिंघ लांगरी पिछले दो वर्षों से इस मांग का पीछा कर रहें थे. उनके तीन से चार निवेदन तो मेरे साथ चर्चा करने के उपरांत तैयार किये और समय समय पर सौपें भी गए. इस समय आक्रमक तेवर लेकर सक्रिय दिखाई दें रहें स. रणजीतसिंघ गिल भी विषय के साथ अंत तक तटस्थ रहें. आंदोलन के अंतिम सोपान में बोर्ड के माजी सचिव स. रणजीतसिंघ कामठेकर, स. लड्डूसिंघ काटगर, स. गुरमीतसिंघ टमाना, युवा कार्यकर्ता "तेजू बादशाह', माजी सदस्य स. राजेंद्रसिंघ पुजारी, स. जसबीरसिंघ बुंगाई, स. मनबीरसिंघ ग्रंथी, स. सरताजसिंघ सुखमनी और नवयुवकों की भरपूर सक्रियता दिखाई पड़ीं. कर्मचारियों में स. संजू सिंघ सिलेदार की सराहना की जानी चाहिए जिसने कर्मचारियों की मांग लेकर संघर्ष किया. कर्मचारियों और मेंबर साहिबान में समन्वय बढ़ाया. मुझसे मिलने के लिए और भी बड़ी संख्या में कर्मचारी भाई आते रहें हैं उनका नाम यहाँ इसलिए अंकित नहीं कर रहा हूँ कि कहीं वें अनिष्ठों की नजरों में खटकने ना लगें. खैर! एक व्यापक सामाजिक मुहीम को शीर्ष पर लें जाने के लिए जिन लोगों ने प्रयास किये हैं उन सभी का बहुत बहुत धन्यवाद. यह सामूहिक प्रयत्न था और सभी का सहयोग और सहभागिता सामान रहीं. मेरे द्वारा कर्मचारियों को न्याय दिलवाने के प्रयास के चलते हजुरसाहिब टुडे ब्लॉग पर कुछ पोस्ट लिखें गए थे, जिनका आशय किसी को व्यक्तिगत रूप से टारगेट करना नहीं था. मेरा लेखन मात्र जागरूकता और न्याय - अधिकार से संबंधित एक संप्रेषण था. यदि उसे पढ़कर किसी की भावनाएं व्यथित हुईं हो तो मैं विनम्रतापूर्वक माफी मांगता हूँ. समाज का एक सामान्य घटक जानकर मुझे माफ कर दें. अंत में एक बार गुरुद्वारा सचखंड बोर्ड के प्रधान साहब, सभी पदाधिकारी, सभी सदस्यों का आभार और धन्यवाद. जो वर्ग, व्यक्ति विशेष इस मांग के समर्थन में नहीं उतरे लेकिन उनकी मौन स्वीकृति रहीं उनका भी धन्यवाद. जो लोग निर्णय के खिलाफ रहें और हैं उनसे निवेदन है कि वें अपना मत परिवर्तन कर सहकार्य करें. सभी कर्मचारियों भाइयों से हाथ जोड़कर निवेदन हैं कि अब तन मन धन से श्री गुरु गोबिंदसिंघ जी महाराज जी के दरबार की सेवा करें. आपके व्यवहार, सेवाभाव और आठ घंटों की सेवा समर्पण से गुरु घर की गुल्लक में इजाफा होना चाहिए. सभी नौजवान कर्मचारी हैं, निश्चित ही दिनरात अच्छी सेवाएं देकर गुरु महाराज जी से ईमानदारी बरतेंगे इसमें कोई दो राय नहीं होनी चाहिए. भूलचूक के लिए दोनों हाथ जोड़कर माफी मांगता हूँ. धन्यवाद !





.....







मंगलवार, 8 मार्च 2022

गुरुद्वारा बोर्ड बजट में पर्मनन्ट विषय में करें आर्थिक प्रावधान !

रविंदरसिंघ मोदी 

एक एप्रिल की तिथि का प्रसंगावधान बड़ा विचित्र माना जाता हैं. संपूर्ण विश्व में यह तारीख कहीं हास्यास्पद तो कहीं सांसत में चर्चित रहती हैं. इस दिवस को महामूर्ख दिवस के रूप में भी मनाने का प्रचलन है. लेकिन क्या कीजिएगा कि हमारा आर्थिक वर्ष इसी तिथि से प्रारंभ करने की एक प्रथा कार्यरत है. एक एप्रिल तारीख से बजट (आर्थिक प्रावधान प्रकिया) प्रारंभ की जाती है. इसलिए आर्थिक प्रावधान पर सभी की निगाहें टिकी हुईं होती है कि हमें क्या मिलेगा ! निश्चित ही गुरुद्वारा सचखंड बोर्ड कर्मचारियों की निगाहें भी उनके हितों के निर्णय पर टिकी हुईं होगी इसमें कोई दो राय नहीं हैं. 

( फाइल फोटो )

अब कहीं से अंदरूनी रूप इस ख़बर का सूत्रपात हो रहा है कि गुरुद्वारा सचखंड बोर्ड संस्था में कार्यरत डेलीवेजस कर्मचारियों को सेवा में पक्का (परमानेंट) करने के विषय में बोर्ड पदाधिकारियों और सदस्यों में समन्वय प्रस्थापित हो रहा हैं. खबर सकारात्मक हैं. पचास प्रतिशत मेंबर साहिबान परमानेंट के विषय में सकारात्मक हैं. पिछले एक डेढ़ माह से हजुरसाहिब ब्लॉग पर मेरे द्वारा जो भाव व्यक्त हो रहें हैं, उनको लेकर मुझे सैकड़ों लोगों की प्रतिक्रियाएं प्राप्त हो रहीं हैं. कर्मचारी ही नहीं आपितु कर्मचारियों के परिवार और साधसंगत में भी डेलीवेजस कर्मचारियों को सेवा में पक्का करने के विषय में चर्चा जारी हैं. कुछ लोग साल भर से यह मांग लेकर बोर्ड से गुहार लगा रहें हैं. कुछ लोग आनेवाले चुनाव पर निगाहें टीकाकार अब कर्मचारियों की बगल में स्थान बनाना चाह रहें हैं. ठीक हैं चुनाव के लिए सब जायज हैं! बेबस कर्मचारियों को सहयोग करना बेहद जरुरी हैं, इसलिए पिछले कुछ समय से इस विषय में मैं, स्पष्ट मत व्यक्त कर रहा हूँ कि डेलीवेजस कर्मचारियों को पक्का कर राहत दी जानी चाहिए. जिन्हें चाहिए वें श्रेय रख लें, पर गरीब कर्मचारी वर्ग का नुकसान ना करें. यदि कुछ करना हो तो तीन से चार दिनों के समय में कीजिये. कलम ग्यारह का विषय अब नतीजे पर आने वाला हैं. अधिवेशन में कानून संशोधन का विषय रंग ला सकता हैं. उससे पूर्व सन्मानीय बोर्ड सदस्यगण आपस में समन्वय प्रस्थापित कर मा. प्रधान साहब को इस विषय पर राजी करें तो बात बन जाएगी. 

( फाइल फोटो )

इसलिए मैं, हमारे तीनों इलेक्टेड मेंबर साहिबान और सचखंड हजूरी खालसा दीवान के मेंबर साहिबान से हाथ जोड़ कर विनम्र प्रार्थना कर रहा हूँ कि आपकी दस्तखतयुक्त एक "कॉमन नोट" बनाकर कर्मचारियों को सेवा में पक्का करने के विषय में आनेवाले आर्थिक वर्ष 2022 - 2023 के आर्थिक प्रारूप बजट में रखकर संभाव्य राशि का प्रावधान करवाएं. निकट भविष्य में बोर्ड की बजट मीटिंग का होना संभव नहीं लग रहा हैं. बोर्ड के प्रधान साहब द्वारा बजट मीटिंग के आयोजन को लेकर कोई पहल नहीं की जा रहीं है. इसलिए हो सकता है कि बोर्ड का बजट इस बार या तो जिलाधीश साहब की अनुमति से पास किया जाए अथवा नया बोर्ड या कमेटी द्वारा ही मान्यता दीं जाए ! बोर्ड के आर्थिक प्रावधान का भविष्यकालीन प्रभाव देखते हुए, समझते हुए और चिंतन करते हुए कर्मचारियों के विषय में प्रलंबित विषय भी नियमानुसार "विशेष कॉमन नोट" की सहायता से प्रधान साहब अथवा कलेक्टर साहब के पास प्रस्तुत किया जाए. यह खुशखबरी होली से पहले कर्मचारियों को मिल जाए तो निश्चित ही बोर्ड के पदाधिकारी और मेंबर साहिबान सत्कार के पात्र होंगे. अन्यथा एक एप्रिल वाली "प्रथा" की बात लागु हो जायेगी. 


बुधवार, 2 मार्च 2022

 क्या होगा 8 मार्च को?

क्यों मची हैं भागदौड़!

रविंदरसिंघ मोदी 

नांदेड़ से लेकर मुंबई और मुंबई से लेकर अमृतसर तक हलचल मचीं हुईं हैं. कोई उत्सुक हैं तो कोई संदेहास्पद! सबकी निगाहें आनेवाली एक विशिष्ट तारीख को लेकर प्रश्न कर रहीं है. क्या होगा? गुरुद्वारा बोर्ड के प्रधान साहब अस्वस्थ और अनभिज्ञ! मीत प्रधान साहब व्यूहरचना में मशगूल! सेक्रेटरी साहब हैरान - हैरान! समन्वयक साहब जुगाड़ और भागदौड़ में व्यस्त! बोर्ड मेंबर साहिबान इधर - उधर की उधेड़बून में! मैनेजिंग मेंबर साहब की निगाहें कोर्ट कचहरी के अगले इम्तिहान का तोड़ तलाशने में समर्पित! "जो होने वाला हैं" वो "ना हो" इसलिए प्रचंड शक्ति से प्रयास जारी हैं! सबके चेहरे और ऑंखें संभाव्य मामले की गंभीरता को दर्शा रहें हैं. मुंबई और अमृतसर के बीच फोन कॉल्स और कॉल पर कॉल का सिलसिला! सबके दिलों में हलचल तेज कि "सरकार  का अगला कदम क्या हो सकता है गुरुद्वारा बोर्ड के विषय में?"

आने वाली 8 मार्च, 2022 की तारीख गुरुद्वारा सचखंड बोर्ड संस्था के विषय में पता नहीं क्या नया संदेश लेकर आए. गुरुद्वारा सचखंड बोर्ड के पिछले गठन की घटना (ता. 8 मार्च, 2019) को तीन वर्ष पूर्ण हो रहें हैं. नांदेड़ की साधसंगत में उपर्युक्त विषय को लेकर यह उत्सुकता छाईं हुईं हैं आनेवाली ता. 8 मार्च को क्या घटित होने वाला हैं? क्या गुरुद्वारा सचखंड बोर्ड बर्खास्त कर दिया जायेगा? क्या गुरुद्वारा बोर्ड पर नये प्रधान की नियुक्ति की जायेगी? अथवा नया ऐडमिनिस्ट्रेटर बिठाकर "नई समिति" घोषित कर दीं जायेगी? इस ख्याल और सवाल से चेहरों पर हवाइयां उड़ी हुईं.

जैसे कि "बोर्ड कार्यकाल की पूर्ति" पूर्ण हो रहीं है, इसलिए महाराष्ट्र सरकार सीधे - सीधे इच्छित निर्णय ले सकती हैं. बोर्ड पर सरकारी नियंत्रण होने से अब यह बोर्ड कभी भी बर्खास्त किया जाना संभव है. यदि मध्य कार्यकाल में बोर्ड बर्खास्त अथवा सस्पेंड किया जाना हो सरकार को चाहिए कि एक माह पहले औपचारिक सूचना जारी करें. जैसे कि स. भूपिंदरसिंघ मिनहास सरकार द्वारा नियुक्त प्रधान है, इस कारण सरकार को अधिकार प्राप्त है कि प्रधान अथवा प्रधान के अंतर्गत संचालित बोर्ड को बर्खास्त करें. वैसे भी कार्यकाल समाप्त होने के बाद नैतिक रूप से "बोर्ड" बर्खास्त होना ही चाहिए. क्योंकि एक्ट का प्रभाव यहीं कहता है. कानून माननेवालों के लिए यह स्वीकार्य तत्वं भी है. लेकिन बोर्ड की सत्ता में बैठें लोग चाह रहें हैं कि अभी बोर्ड बर्खास्त ना किया जाए. बोर्ड का कोई सदस्य यह नहीं चाहेगा कि बोर्ड बर्खास्त हो, क्योंकि उनका कार्यकाल समाप्त जो हो रहा हैं! 

एक तरफ, बोर्ड में बैठें कुछ लोग यह भी कोशिशें कर रहें हैं कि सरकार उन्हें बोर्ड का "प्रधान" नियुक्त करें! यह भी कोशिश कर रहे हैं कि नये बोर्ड अथवा समिति में उन्हें स्थान मिल जाए. मिनहास बोर्ड को सहयोग करने वाले लोग (नांदेड़ के महारती) बड़ी संख्या में मा. मंत्री महोदय और मंत्रालय के चक्कर काट रहें हैं! खैर! ता. 3 मार्च से महाराष्ट्र विधानसभा का अधिवेशन शुरू हो रहा हैं. चर्चा हैं कि गुरुद्वारा बोर्ड की सत्ता काबिज रखने के लिए मुंबई में जोरशोर से प्रयास जारी हैं कि गुरुद्वारा बोर्ड एक्ट कलम ग्यारह संशोधन रद्द का विषय अधिवेशन में ना प्रस्तुत होने पाए. संशोधन के विषय में राजस्व विभाग की एक्ट संशोधन कमेटी का ड्राफ्ट तैयार हैं लेकिन संदेह है कि वह "ड्राफ्ट" अधिवेशन में पहूंच पायेगा कि नहीं! यदि आगामी अधिवेशन में सरकार द्वारा किया गया पिछला, वर्ष 2015 का संशोधन रद्द करने का निर्णय हो जाता हैं तब बोर्ड में प्रधान को चुनने का अधिकार हमारे सदस्यों को प्राप्त हो जायेगा. शायद हजूरी प्रधान बनाने का सपना साकार हो जाए! एक्ट संशोधन विषय के साथ संभव हैं कि बोर्ड बर्खास्त हो जाए अथवा नई कमेटी की नियुक्ति हो जाए! यह भी संभव है कि इस बोर्ड को एक माह का समय मिल जाए. सरकार चाहे तो इस दौरान जिल्हाधारी साहब का अभिप्राय भी मंगवा सकती है. 

अब उपर्युक्त विषय को लेकर नांदेड़, मुंबई और अमृतसर में तरह - तरह के आशावाद उभरते चलें जा रहें हैं. बोर्ड बचाने के लिए भागदौड़ मची हुईं हैं. 60 पार के लोगों के ब्रेन तेजी से काम कर रहें हैं. यह चर्चा भी जोर पकड़े हुए हैं कि इस समय बोर्ड के कुछ लोगों द्वारा की जा रहीं जद्दोजहद के विषय में बोर्ड के प्रधान साहब को कोई जानकारी तक नहीं हैं! स. भूपिंदरसिंघ मिनहास अस्वस्थ हैं और उपचाराधीन हैं. दूसरी ओर, मुंबई में बैठें एसजीपीसी के लोग गुरुद्वारा बोर्ड को बर्खास्ती से बचाने के लिए पंजाब और दिल्ली से एसजीपीसी और शिरोमणि अकाली दल के नेता मुंबई कूच कराने की तैयारी में जुटें हुए हैं. पहले भी शिरोमणि अकाली दल के नेता बोर्ड बचाने के लिए और कलम ग्यारह को राजनीतिक पेच में फंसने के लिए मुंबई आते रहें हैं. देखें इस बार कौन नया चेहरा अपनी चलाखी दिखाने मुंबई का रुख करता हैं! मुंबईया साहब लोग! इतना सब किसलिए? हजुरसाहिब को लेकर इतनी राजनीतिक जदोजहद और तिकड़मबाजी! कार्यकाल समाप्त होने का सच स्वीकार करना ही चाहिए ना! क्या नये लोगों के अवसर भी खा जाने की सोंच हैं आपकी? 

........


  होली हल्ला महल्ला यात्रा मार्ग की दुरुस्ती करें : मनबीरसिंघ ग्रंथी राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरद पवार समूह) के युथ प्रदेश सचिव स. मनबीर...