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मंगलवार, 8 सितंबर 2020

"अर्नब" के बहाने "सामना" पर निशाना !

 "अर्नब" के बहाने "सामना" पर निशाना !

रविंदरसिंघ मोदी 

रिपब्लिकन भारत चैनल के सर्वोसर्वा अर्नब गोस्वामी के तेवर इन दिनों देखने योग्य हैं. उनकी भाषा की दबंगई और स्वर में ललकार हैं. ये किसी आम इंसान के लिए नहीं बल्कि महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री और शिवसेना के सुप्रीमो श्री उद्धव ठाकरे के लिए प्रयोग हो रहीं हैं. ये भाषा, यह दबंगई प्रदेश के गृहमंत्री श्री अनिल देशमुख के खिलाफ उपयोग में लाई जा रहीं हैं. 

पत्रकारिता के शीर्ष पर पहुंचकर अर्नब गोस्वामी का महाराष्ट्र के नेताओं के प्रति यह ढ़ीठ रवैय्या स्पष्ट संकेत कर रहा हैं कि यह बोल किसी ने अर्नब गोस्वामी को उधार में दिए हैं. वहीं महाराष्ट्र विधानसभा अधिवेशन में आज नेता विपक्ष श्री देवेंद्र फडणवीस द्वारा यह कहकर अर्नब गोस्वामी का बचाव करना कि, दैनिक सामना में भी प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के खिलाफ अपमानित भाषा का प्रयोग किया जाता हैं ! यह सुनकर बात स्पष्ट हो जाती है कि "अर्नब' को वहीं से बल मिल रहा है, जहाँ से कंगना को "वाई" सिक्योरिटी मिली हैं. 

माजरा स्पष्ट हैं कि दैनिक सामना पर निशाना साधने के लिए अर्नब गोस्वामी के 'बोल' को हथियार बनाया गया हैं. भाजपा के पास महाराष्ट्र की तिकड़ी सरकार को घेरने के लिए एक हाथ में 'अर्नब' तो दूसरे हाथ में 'कंगना' हैं. ये भी तय लग रहा हैं कि 'अर्नब' और 'कंगना' को कमसे कम राज्यसभा का टिकट तो पक्का हो गया हैं. यह दोनों हथियार महाराष्ट्र की वर्तमान सरकार को जितना "डैमेज" करेंगे, उतना दिल्ली में बैठे मोटा भाई खुश हो जायेंगे. मानना पड़ेगा कि मोटा भाई गजब की राजनीति खेल रहे हैं. 


महाराष्ट्र सरकार ने आज अर्नब के खिलाफ विधानसभा में "हक्कभंग" प्रस्ताव पास किया. वहीं कंगना को रोकने के लिए भी कदम उठाये हैं. कल (9 सितम्बर ) को कंगना मुंबई पहुँच रहीं हैं. यदि कंगना मुंबई यात्रा पर पहुँचती हैं तो राजनीतिक उथल पुथल संभव हैं. कल का दिन सामना के संपादक संजय राउत के लिए बहुत अहम हैं. करो अथवा मरो जैसे हालात उनके सामने हैं. देखना होगा कि अब संजय राउत हालात का मुकाबला करने के लिए किस किस हथियार का प्रयोग करते हैं. 

लेकिन यहाँ महाराष्ट्र सरकार कुछ घिरी हुई नजर आ रहीं हैं. पत्रकारों के खिलाफ सरकारीस्तर से दबावतंत्र का प्रयोग होने के आरोप दिल्ली का मीडिया लगा रहा हैं. देश के अन्य हिस्सों से भी यहीं सवाल उठ रहे हैं. ऐसे में मुख्यमंत्री श्री उद्धव ठाकरे अब क्या तिकड़म भिड़ाते हैं देखना होगा. दिल्ली वालों का दांव तो चल गया है. कल क्या होनेवाला है वो भी विशेष ही होगा !

रविंदरसिंघ मोदी 

फिर एक नई शुरुआत

 फिर एक नई शुरुआत..!


विगत एक वर्ष में मैं, पत्रकारिता कार्य में कुछ अलिप्त सा रहा. कुछ लेख लिखने के अलावा पत्रकारिता क्षेत्र में ज्यादा कुछ योगदान नहीं कर पाया. वजह थीं, सितंबर 2019 से अगस्त 2020 तक मैं गुरुद्वारा सचखंड बोर्ड नांदेड़ (श्री हजूरसाहब) इस धार्मिक संस्था में मानद पद पर 'मीडिया एडवाइजर' की भूमिका निभा रहा था. जिसके चलते पूर्ण एक वर्ष जैसे एक्टिव पत्रकारिता को मैंने विराम सा दे दिया था. अब जबकि मै, मीडिया एडवाइज़र की जिम्मेदारी से मुक्त होकर फिर से पत्रकारिता में प्रवेश कर रहा हूँ, तब सभी के साथ और सहकार्य की पूर्ण अपेक्षा कर रहा हूँ.


दशमेश पिता श्री गुरु गोबिंदसिंघजी महाराज के परम आशीर्वाद से मै अपने आप में एक नई चेतना महसूस कर रहा हूँ. इस पावन भूमि के स्पर्श और संतों के आशीर्वाद से मै, अपने पुराने क्षेत्र में कार्य शुरू कर रहा हूँ. सन 1993 से लेकर आज तक लगभग 27 वर्षों की प्रदीर्घ पत्रकारिता में कायम रहना एक कसौटी मानी जानी चाहिए. यह सब गुरु महाराज के आशीर्वाद और संतों के आशीर्वाद से पूर्ण हुआ हैं. आगे भी मेरा भविष्य उन्हीं के आशीर्वाद पर निर्भर रहेगा इसका मुझे अहसास हैं.

आज के दौर में पत्रकारिता क्षेत्र में कार्य करना जीवन का सबसे बड़ा संघर्ष माना जा रहा हैं. कोरोना कोविड - 19 के संक्रमण से समस्त विश्व त्रस्त हैं. आज नौकरियां नहीं मिल रहीं हैं. प्रदेश में लगभग डेढ़ हजार अख़बार इस कोरोना संघर्ष काल में बंद हो चुके हैं. बड़ी संख्या में पत्रकारों ने अपनी नौकरियां गंवाई हैं. प्रिंट मीडिया के प्रचलन पर भी आंच आई हैं. संक्रमण काल में 'ई - पेपर' समाचार पत्र प्रसार प्रणाली को बढ़ावा मिला हैं. ब्लॉग, बुलेटेन, यूट्यूब चॅनेल्स की चलती हो गई. 

इस दौर में मैं भी आज आम पत्रकारों की तरह संघर्षरत हूँ यह कहने में परहेज नहीं करूँगा. लेकिन संतोष इस बात का हैं कि मेरे पास अभी काम उपलब्ध हैं. मराठी, हिंदी और पंजाबी समाचार पत्रों के लिए कार्य आरंभ कर दिया हैं. साथ ही मेरा अपना यू - ट्यूब चैनल "hazursahib today" को भी संचालित कर दिया हैं. आज से ब्लॉग लेखन भी शुरू कर दिया हैं. इसलिए सभी संपादक साहब, वरिष्ठ पत्रकार, मेरे सभी पत्रकार सहकारी, पत्रकार संगठन के पदाधिकारी और सदस्यों के साथ फिर एक नई शुरुआत करते हुए सभी से सहकार्य की अपील करता हूँ. 

बीते एक वर्ष में कुछ लोगों ने मेरी पत्रकारिता की प्रमाणिकता पर अप्रत्यक्षरूप से सवाल उठाये थे. उन्हें यहीं कहना चाहूंगा कि पिछले  एक वर्ष मैं पत्रकारिता कार्य से अलिप्त था. क्योंकि मै एक धार्मिक संस्था में, एक महत्वपूर्ण पद की जिम्मेदारी निभा रहा था. उस पद पर बैठकर बयानबाजी करना मैंने टाल रखा था. क्योंकि उस पद की गरिमा बनाये रखना एक जिम्मेदार और प्रामाणिक अधिकारी का फ़र्ज था. लेकिन अब पुन्हा पत्रकारिता और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता उपलब्ध हैं. ऐसे में अपने क्षेत्र, अपने प्रदेश और सामाजिक एवं विकासात्मक मुद्दों को लेकर मेरी पत्रकारिता जारी रहेगी. पुन्हा आप सबसे सहकार्य की अपील कर नया लेखन प्रारंभ कर रहा हूँ. 

धन्यवाद !"

स. रविंदरसिंघ मोदी, हजुरसाहब. 

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