आंदोलन की धमक अब देशभर
मुख्यमंत्री को सौंपा गया ज्ञापन
गुरुद्वारा बोर्ड कानून के संशोधन जल्द होंगे पूर्ववत
रविन्दरसिंघ मोदी
श्री हजूर साहिब की धरती से उठा आंदोलन अब महाराष्ट्र के सीमाएँ लाँघकर पंजाब और अन्य राज्यों में पहुँच चूका हैं. हर स्थान से कलम ग्यारह के उस संशोधन का विरोध किया जा रहा हैं. महाराष्ट्र सरकार अब दबाव में है और बहुत जल्द हमें यह समाचार सुनने में मिल सकता है कि सरकार द्वारा ता. १८ फरवरी, २०१५ को किये गुरुद्वारा बोर्ड कानून में किये गए बदलाव का संशोधन वापिस लिया जा रहा हैं.
इस बात का पहला श्रेय आदरणीय जत्थेदार संतबाबा कुलवंतसिंघजी और सम्मानीय पंजप्यारे साहिबान को जाता हैं. पंज प्यारेसाहिबान द्वारा गुरुमत्ता पारित करने के बाद हजुरसाहिब ही नहीं महाराष्ट्र, तेलंगाना, दिल्ली, पंजाब, हरियाणा, मध्यप्रदेश और कर्नाटका के सिखों ने जगह-जगह विरोध और प्रदर्शन शुरू कर दिया हैं. आंदोलन का दूसरा श्रेय हमारे पूज्य संत बाबा बलविंदर सिंघजी कारसेवा वाले और शिरोमणि पंथ अकाली बूढ़ा दल ९६ करोड़ी के जत्थेदार संत बाबा प्रेमसिंघजी माता साहेब वालों को जाता हैं. जिन्होंने साधसंगत का नेतृत्व स्वीकार कर ता. २१ जनवरी, २०१९ को एक भव्य आंदोलन को अंजाम दिया.
इस आंदोलन ने नांदेड़ से लेका मुंबई तक हलचल मचा दी. इस आंदोलन से हजुरसाहिब के सभी सामाजिक संघठन जुड़ गए. साधसंगत से चुनकर आए तीनों सदस्यों ने भरपूर परिश्रम किया. हजूर साहिब के अन्य बोर्ड सदस्यों ने भी सकारात्मक भूमिका को अंजाम दिया. हजूर साहिब के नवजवानों ने जोश और उत्साह दिखाकर संघठन का परिचय दिया. यदि आपस में एकता हो तो हर आंदोलन सफल हो जाता हैं. नांदेड़ के साथ-साथ परभणी, परतुर, औरंगाबाद, श्रीरामपुर, अहमदनगर, मुंबई में आंदोलन की तीव्रता पहुंची और जगह-जगह विरोध प्रदर्शन शुरू हो गया.
मुंबई में शिष्ट मंडल
सबसे बड़ा काम ये हुआ कि हजुरसाहिब के एक शिष्ट मंडल ने ता. २२ जनवरी, २०१९ को मुंबई पहूँचकर मंत्रालय में मुख्यमंत्री श्री देवेंद्र फडणवीस से मुलाकात कर उन्हें हजुरसाहिब की साधसंगत की मांग का एक ज्ञापन सौंपा. शिष्ट मंडल में गुरुद्वारा सदस्य गुरमीत सिंघ महाजन, राजेंद्र सिंघ पुजारी, गुरप्रीत सिंघ सोखी थे. वहीं बोर्ड के प्रधान और विधायक तारासिंह को शिष्ट मंडल की अगुवाई करनी पड़ी. बोर्ड के सचिव परमज्योत सिंह चाहल भी शिष्ट मंडल में शामिल हुए. मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने ज्ञापन को सकारात्मक लेकर कानून संशोधन को रद्द करने की अनुकूलता दिखाई. जिससे उन अनैतिक तत्वों की गतिविधियों पर भी ब्रेक लग गया जो कलम ग्यारह का लाभ उठाकर बोर्ड का सीधा प्रधान बनने के लिए प्रयासरत थे.
उधर शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमिटी के प्रधान भाई गोबिंदसिंघ जी लोंगोवाल ने हजूर साहिब की साधसंगत की मांग के बाद व्यक्तिगत रूप से इस आंदोलन को अपना समर्थन जाहिर करते हुए महाराष्ट्र सरकार को ज्ञापन भेजकर मांग करने का निर्णय लिया. लेकिन दूसरी ओर श्रोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमिटी के मुंबई के सदस्यों ने लेकिन कलम ग्यारह को अपना समर्थन जारी रखा हुआ हैं.
केंद्रीय मंत्री श्रीमती हरसिमरत कौर बादल ने आंदोलन को गंभीरता से लेते हुए महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री को ट्वीट कर विषय से अवगत कराया और मांग प्रस्तुत की. जिसके बाद देवेंद्र फडणवीस द्वारा ट्वीट का तुरंत जवाब दिया गया और एक्ट संशोधन के विषय में सकारात्मक जवाब दिया गया. ये ट्वीट भी खासा चर्चा में रहा. मंजिंदरसिंघ सिरसा (दिल्ली) और मंजीत सिंह जी.के. द्वारा भी मांग उठाई गई.
कुलमिलाकर गुरुद्वारा बोर्ड कानून १९५६ की कलम ग्यारह के एक्ट संशोधन को रद्द करने की मांग देशभर पहुँच गई. अब हर स्तर से विरोध उठ रहा हैं. सरकार की मंशा और मुंबई के कुछ लोगों की कारगुजारियां साधसंगत के सामने खुलकर उजागर हो चुकी है. जो अनैतिक तत्त्व बोर्ड का प्रधान पद खरीदने की भाषा कर रहे थे उन्हें भी करारा जवाब मिला है. हजूर साहिब के नौजवानों में उन व्यापारी प्रवृत्ति के लोगों के प्रति खासा रोष व्याप्त हैं. होना भी चाहिए. बहरहाल ख़ुशी इस बात की है कि हजूर साहिब की साधसंगत के आंदोलन के साथ अब देश के सभी घटक जुड़ रहे हैं. आनेवाले दिनों में हजूर साहिब का बोर्ड सरकार के नियंत्रण से मुक्त होने के पुरे आसार दिखाई दे रहे हैं.
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