संतबाबा प्रेमसिंघजी का व्यक्तित्व प्रेरणास्त्रोत : संतबाबा कुलवंतसिंघजी
पहली बरसी कार्यक्रम संपन्न !
(गुरुद्वारा माता साहेबदेवाजी बरसी कार्यक्रम)
हजूर साहब 20 अक्टूबर 2020
तखत
सचखंड श्री हजुरसाहब के जत्थेदार संतबाबा कुलवंतसिंघजी ने मंगळवार, ता. 20
अक्टूबर को गुरुद्वारा मातासाहब देवाजी में आयोजित संतबाबा प्रेमसिंघजी की
पहली बरसी कार्यक्रम के दौरान उपस्थित साधसंगत को संबोधित करते हुए कहा
कि, संतबाबा प्रेमसिंघजी एक सामान्य सेवक से गुरुद्वारा मातासाहिब देवाजी
गुरुद्वारा के जत्थेदार बनें और आगे चलकर उन्होंने बूढा दल के जत्थेदार पद
को प्राप्त किया. लगभग चालीस वर्षों के संघर्ष, सेवा और समर्पण के कारण
उनका व्यक्तित्व उभरकर सामने आया. बाबाजी का व्यक्तित्व सही मायने में
प्रेरणास्त्रोत था.
उन्होंने आगे कहा, संतबाबा प्रेमसिंघ जी ने धार्मिक क्षेत्र में अपना मकाम कायम किया. बाबाजी ने नाम सिमरन, बाणी पठन और सेवा को ध्यान में रखा. उन्होंने सदा सभी का आदर सत्कार किया. हजूर साहब में उन्होंने अन्य संतों के साथ अच्छा व्यवहार स्थापित किया था. उनकी तरह ही मातासाहब इस स्थान की सेवा बाबा तेजासिंघजी भी निभाएंगे ऐसी पूरी उम्मीद है.
कार्यक्रम
में संतबाबा बलविंदरसिंघजी कारसेवावाले ने भी संबोधित किया. साधसंगत को
नाम जपाने के बाद बाबाजी ने कहा, सेवा एक जिम्मेदारी होती है. सभी संत अपने
सामर्थ्य के हिसाब से सेवा निभाते है. संतबाबा प्रेमसिंघ जी ने मातासाहब
के लिए पूरा जीवन समर्पित कर दिया. आज उनकी बरसी के मौके पर उनको याद कर हर
कोई धन्यता महसूस कर रहा है.





