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शुक्रवार, 22 फ़रवरी 2019

राजिंदरसिंघ पुजारी तनखैया घोषित !

समाचार 

रजिंदरसिंघ पुजारी तनखैया घोषित 
पंज तख्तों पर सेवा लगाई 
 
नांदेड़, हजूर साहिब, २२ फरवरी - 
शुक्रवार की शाम गुरुद्वारा तखत सचखंड श्री हजूर अबिचलनगर साहिब बोर्ड के मेंबर राजिंदर सिंघ नरिंदर सिंघ पुजारी को तखत साहब के पंजप्यारे साहिबान ने तनखैया (बहिष्कृत) घोषित करते हुए उन्हें पांचों तखत साहब पर उपस्थित होकर लंगर और जोड़ेघर में पांच पांच दिनों की सेवा सुनाई. यह सजा शुक्रवार की शाम तखत साहब पर रहिरास का पाठ समाप्त  होने के बाद मीत जत्थेदार संत बाबा ज्योतिंदर सिंघ द्वारा सुनाई गई. इस समय जत्थेदार संतबाबा कुलवंत सिंघजी, हैडग्रंथि सिंघसाहब भाई कश्मीर सिंघजी, मीत ग्रंथि सिंघसाहब भाई अवतार सिंघजी शीतल, सिंघसाहब भाई राम सिंघजी धूपिया भी उपस्थित थे. 
उपर्युक्त संबंध में अधिक जानकारी यह है कि, ता. १९ फरवरी की सुबह ९ बजे के समय तखत सचखंड श्री हजूर साहिब में प्रधान तारसिंघ और मेंबर साहिबान द्वारा पुलवामा में शहीद हुए सी.आर.पी.एफ. के जवानों को श्रद्धांजलि देने हेतु श्री अखंडपाठ साहिब की समाप्ति रखी गई थी. उस कार्यक्रम में तखत साहिब पर बोर्ड के मेंबर साहिबान भी उपस्थित थे. समाप्ति अरदास उपरांत जब कीर्तन शुरू होना था कि मेंबर राजिंदर सिंघ पुजारी ने ऊँची आवाज में पंजप्यारे साहिबान को सम्बोधित करते सवाल पूछा कि तखत साहब पर इस तरह का पाठ रखते समय मर्यादा का ख्याल नहीं रखा गया है. तखत साहब पर कभी भी सन १९८४ में शहीद हुए परिवारों के प्रति श्री अखंडपाठ साहिब नहीं करवाएं गए. उन्होंने एक से डेढ़ मिनिट की बात की जिससे कीर्तन में रुकावट पहुंची ऐसा पंजप्यारे साहिबान को प्रतीत हुआ. 
गुरुद्वारा बोर्ड के मेंबर और कांग्रेस के स्थानीय नेता रविंदरसिंघ बुंगई ने उपर्युक्त सम्बन्ध में जत्थेदार साहिब संतबाबा कुलवंत सिंघजी को ज्ञापन देकर राजिंदर सिंघ पुजारी के अभद्र व्यवहार के प्रति शिकायत कर उन्हें तनखैया घोषित करने की मांग की. जिसके बाद २० फरवरी को राजिंदर सिंघ पुजारी से लिखित स्पस्टीकरण माँगा गया. राजिंदर सिंघ पुजारी ने पंजप्यारे साहिबान के पत्र को स्वीकार कर अपनी लिखित सफाई पेश की जिसमे उन्होंने कहा कि , मेरा आशय पंजप्यारे साहिबान का अपमान करना नहीं था और ना मैंने पूजापाठ में कोई खलल डाला है. मैंने सिर्फ मांग की है कि जिस तरह से पुलवामा के शहीदों की आत्मक शांति के लिए पाठ रखकर अरदास की गई वैसे ही सन १९८४ में शहीद हुए सिखों के लिए भी किया जाये. 
पुजारी द्वारा दिए गए स्पस्टीकरण पर ता. २२ फरवरी की सुबह ११. ४५ बजे आयोजित पंजप्यारे साहिबान की बैठक में विचार किया गया. बैठक में जत्थेदार संतबाबा कुलवंतसिंघजी, संतबाबा ज्योतिंदर सिंघजी, भाई कश्मीर सिंघजी , भाई अवतारसिंघजी शीतल और भाई रामसिंघजी धूपिया उपस्थित थे. साथ ही सुपरडैंट गुरविंदर सिंघ वाधवा भी उपस्थित थे. बैठक में विचार विमर्श उपरांत पंजप्यारे साहिबान द्वारा एक पत्र भेजकर राजिंदर सिंघ पुजारी को शुक्रवार, २२ फरवरी की शाम ६. ३० बजे तखत साहब पर उपस्थित रहने के आदेश दिए गए. 
पत्र प्राप्त होने पर राजिंदर सिंघ पुजारी समय पर तखत साहब पर उपस्थित हुआ. श्री रहिरास साहब के पाठ और अरदास के बाद मीत जत्थेदार ज्योतिंदर सिंघजी ने सजा पढ़कर सुनाई. पंजप्यारे साहिबान ने आदेश में कहा कि राजिंदर सिंघ पुजारी ने जिस ऊँची आवाज में बात की उससे कीर्तन में खलल पेश हुआ. पुलवामा के शहीदों के लिए अरदास रखी गई थी. ऐसे समय ऐतराज जताना योग्य नहीं हैं. आगे से तखत साहब पर कोई इस तरह का व्यव्हार नहीं करे इस बात को दायरे में रखकर राजिंदर सिंघ पुजारी को पांचों तखतसाहिब पर उपस्थित होकर प्रत्येक स्थान पर पांच दिनों की लंगर और जोड़ेघर की सेवा करनी होगी. अंत में तखत साहिब पर श्री अखंडपाठ साहिब रखकर बख्शाने के लिए अरदास करनी होगी. 
राजिंदर सिंघ पुजारी ने सजा सुनकर हाथ जोड़े और मत्था टेककर और परिक्रमा कर बाहर निकल गए. 
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राजिंदर सिंह पुजारी ने कहा, तखत साहब के प्रति और मर्यादा के प्रति मेरे मन में पूरा सम्मान है. पंजप्यारे साहिबान का आदेश सिर आँखों पर रखा हैं. मैंने किसी को अपमानित करने के लिए कुछ नहीं कहा. मैं अभी जवाब देने की स्थिति में नहीं हूँ. 
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राजिंदर सिंघ पुजारी वर्ष २०१२ से गुरुद्वारा सचखंड बोर्ड के मेंबर हैं. भारतीय जनता पार्टी के वे नांदेड़ के जिला उपाध्यक्ष भी हैं. आक्रामक कार्यकर्ता की उनकी छवि रही हैं. 
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रविंदर सिंघ मोदी. 

मंगलवार, 19 फ़रवरी 2019

गुरुद्वारा कानून संशोधन रद्द करो आंदोलन को मिल रहा हैं समर्थन  
सर्वपक्षीय समर्थन की जरुरत
नांदेड़ के नेतागण हैं खामोश !!
  रविंदर सिंघ मोदी 
श्री हजूरसाहिब की पवित्र भूमि में गुरुद्वारा तखत सचखंड बोर्ड कानून १९५६ (दी सिख गुरुद्वारा तखत सचखंड श्री हजूर अपचल नगर साहिब) की धारा ११ में हुए सरकारी संशोधन के खिलाफ शुरू आंदोलन महाराष्ट्र सरकार के लिए गले में फंसी हड्डी की तरह हो गया है. महाराष्ट्र सरकार पर दिन पर दिन सर्वपक्षीय दबाव तो बन ही रहा हैं साथ भारतीय जनता पार्टी अंतर्गत भी शीर्ष नेताओं द्वारा महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस से उक्त मामले में सवाल पूछे जा रहे हैं. 
दिल्ली और पंजाब से लगातार गुरुद्वारा बोर्ड कानून में हुए संशोधन रद्द करने के लिए मांग उठ रही हैं. इलेक्ट्रॉनिक्स मीडिया और प्रिंट मीडिया में नांदेड़ गुरुद्वारा बोर्ड का विषय खासा चर्चा में प्रस्तुत हुआ हैं. जिससे महाराष्ट्र सरकार को अपनी गलती पर पछतावा भी हो रहा है. वहीं सिखों को नीतिगत रूप से पीछे धकेलने का मनसूबा पाले हुए कुछ जातिवादी षडयंत्रकारी संगठन गुरुद्वारा बोर्ड कानून की धारा ११ में हुए संशोधन को योग्य बताकर अल्पसंख्यंक सिखों की संस्था में अपने मनसूबे पूर्ण करने की राजनीति कर रहे हैं.
संस्था नांदेड़ की होने के कारण यहाँ पहला अधिकार नांदेड़ के सिखों को मिलना चाहिए ये मेरा मत है. संस्था पर सरकारी नियंत्रण नहीं होना चाहिए. यही मत हजारों की संख्या में हजूरसाहिब के सिखों द्वारा व्यक्त किया जा रहा हैं. अपने हक़ और अधिकारों के लिए हजूर साहिब सिख संघर्ष के मैदान में सक्रीय है, ऐसे में किसी बाहर के संघटन को तखत सचखंड श्री हजूर साहिब के विषय में बयानबाजी में नहीं पड़ना चाहिए. 
आंदोलन अब चरम पर  हैं. महाराष्ट्र सरकार ने भी संज्ञान लिया है. जिसे देखकर लग रहा हैं कि निकट समय में कलम ११ का संशोधन रद्द हो जायेगा. साथ ही नया बोर्ड भी घोषित कर दिया जायेगा. 

इस आंदोलन को अभी तक महाराष्ट्र के किसी भी राजनीतिक पार्टी या संघटन ने अपना समर्थन घोषित नहीं किया हैं. देशभर में जहां आंदोलन को लेकर सिख संस्थाएं अपना समर्थन दे रही हैं वही महाराष्ट्र के विशेष कर नांदेड़ के राजनितिक संघटनों की चुप्पी दुखद हैं. यहाँ के राजनितिक संघटन और पार्टियां केवल गुरुतागद्दी विकास का मुद्दा अपने मैनुफेस्टो में शामिल कर विकास का प्रचार करने के लिए है ऐसा लग रहा हैं. नांदेड़ जिले के सांसद, विधायक और राजनीतिक दलों के पदाधिकारी केवल सिखों का तमाशा देख रहे हैं. ऐसा प्रतीत हो रहा हैं की गुरुद्वारा बोर्ड संस्था सरकार के अधीन रहे ऐसी इच्छा सभी राजनीतिक पार्टियों की हैं. गुरुद्वारा बोर्ड की जमीनों पर बूरी नजर रखनेवाले कुछ तथ्य भला कैसे सिखों की संस्था को स्वतंत्र करने का विचार रख सकते हैं ? जब तक नांदेड़ के सभी नेता इस आंदोलन को अपना समर्थन घोषित नहीं करते तब तक आंदोलन को बल नहीं मिल सकता. इस बात की गंभीरता के मद्दे नजर विविध राजनितिक पार्टियों में कार्यरत सभी सिख पदाधिकारी और कार्यकर्ता भी अपनी पार्टियों पर दबाव डालने का प्रयास करें. यदि नहीं मानते हैं तो ऐसी राजनीतिक पार्टियों के लिए वे प्रचार में भी शामिल ना हो ऐसी प्रार्थना हैं. 
 

शुक्रवार, 1 फ़रवरी 2019

Railway news 1 st feb 2019

समाचार : 


"सचखंड" और "श्रीगंगानगर" को एक नंबर प्लेटफार्म पर उतारा जाएं 

रेलवे प्रशासन को ज्ञापन प्रस्तुत 


हजुरसाहिब, नांदेड़। १ फरवरी
तखत सचखंड श्री हजूर साहिब के दर्शनों के लिए नांदेड़ से अमृतसर साहिब के बीच विशेष रूप से चलाई जा रही "सचखंड एक्सप्रेस" रेलवे गाड़ी और हजूर साहिब से श्रीगंगानगर के बीच दौड़ रही "श्रीगंगानगर एक्सप्रेस" को नांदेड़ रेलवे स्टेशन पर प्लेटफार्म नंबर एक पर स्थान देने की मांग लेकर शुक्रवार (ता. १ फरवरी) की दोपहर स्थानीय हजूरी साधसंगत और गुरुद्वारा सचखंड बोर्ड प्रशासन द्वारा दक्षिण मध्य रेल विभाग के अतिरिक्त प्रबंधक विश्वनाथ एरा को ज्ञापन प्रस्तुत किया गया. 

प्रस्तुत ज्ञापन में कहा गया हैं, गुरु की नगरी अमृतसर से हजुरसाहिब नांदेड़ रेलवे स्टेशन तक सचखंड एक्स्प्रेस की ३६ से ४० घंटों की लम्बी यात्रा कर श्रद्धालुगण दर्शानों के लिए पहुँचते हैं. यात्रियों में छोटे बच्चों से लेकर महिलाएं, वृद्ध भी होते हैं. नांदेड़ स्टेशन पर प्रशासन द्वारा तकनीकी कारण दिखाकर प्लेटफार्म नंबर चार पर स्थान दिया जाता हैं. जबकि तखत सचखंड श्री हजूर साहिब पहुँचने के लिए प्लेटफार्म नंबर एक अधिक अनुकूल है. यात्रियों को अपने भरी लगेज लेकर प्लेटफार्म नंबर चार से एक तक पहुंचकर स्टेशन के बाहर निकलना पड़ता हैं. 

दूसरी ओर प्लेटफार्म नंबर चार की दिशा में उतरने पर लंबा चक्कर काटकर गुरुद्वारा साहिब तक पहुंचना पड रहा है. क्षेत्र में आपराधिक गतिविधियां अधिक हैं. साथ ही ऑटो रिक्शा चालक, टैक्सी चालक यात्रियों से अधिक भाड़ा वसूलते हैं. इसलिए यात्रियों की सुविधा हेतु सचखंड एक्सप्रेस रेलगाड़ी को प्लेटफार्म नंबर एक पर जगह देना उचित होगा ऐसा ज्ञापन में कहा गया हैं. साथ ही मांग पूर्ण नहीं होने पर नांदेड़ से लेकर अमृतसर तक हर जगह सिख समुदाय रेलवे प्रशासन के खिलाफ तीव्र आंदोलन करेंगा ऐसी चेतावनी भी दी गई हैं.
इस अवसर पर गुरुद्वारा बोर्ड के मेंबर गुरमीत सिंघ महाजन, मानप्रीतसिंघ कुँजीवाले,  राजिंदर सिंह पुजारी, अधीक्षक गुरविंदर सिंघ वाधवा, रवींदर सिंघ मोदी, जसपाल सिंघ लांगरी, रविंदर सिंघ पुजारी, परमजीत सिंघ पेशकर, रणजीत सिंघ गिल, बीरेंदरसिंघ बेदी, सतनामसिंघ गिल, जरनेलसिंघ गाड़ीवाले, ठाकुर सिंघ परभणी, मान सिंघ, मनप्रीत सिंघ कारागीर, करणसिंघ खालसा, बलजीत सिंघ शाह, नरेंदर सिंघ खालसा, सुरजीत सिंघ टाक सहित बड़ी संख्या में कार्यकर्ता उपस्थित थे. 
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सभी साधसंगत हजुरसाहिब से लेकर पंजाब तक यह मांग प्रस्तुत करें. 

  होली हल्ला महल्ला यात्रा मार्ग की दुरुस्ती करें : मनबीरसिंघ ग्रंथी राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरद पवार समूह) के युथ प्रदेश सचिव स. मनबीर...