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गुरुवार, 7 जून 2018



समाचार : 
गुरुद्वारा बोर्ड के प्रधान तारासिंह का राजस्व मंत्री को पत्र

रविंदर सिंह मोदी

                        
महाराष्ट्र के नांदेड़ शहर स्थित गुरुद्वारा तखत सचखंड बोर्ड के सरकार नियुक्त प्रधान श्री तारा सिंह (विधायक, भाजपा) ने ता. ७ जून, २०१८ को महाराष्ट्र के राजस्व मंत्री श्री चंद्रकांत पाटिल को एक पत्र भेजकर मांग की है कि गुरुद्वारा तखत सचखंड बोर्ड संस्था के संगत (मतदाताओं) द्वारा चुनकर भेजे गए तीन सदस्यों का कार्यकाल समाप्त होने के कारण तीन सदस्यों की चयन प्रक्रिया शुरू की जाएं। जिन तीन सदस्यों  कार्यकाल समाप्त होने का जिक्र किया गया है , सदस्य शेर सिंह फौजी, गुरमीत सिंह महाजन और राजेंद्र सिंह पुजारी है. पिछले चुनाव वर्ष २०१२ के दिसंबर माह में संपन्न हुए थे. लेकिन विधायक तारासिंह  महाराष्ट्र सरकार ने फ़रवरी - मार्च २०१५ में सीधे अध्यक्ष के तौर पर नियुक्ति देने के बाद बोर्ड का गठन सरकार द्वारा किया गया था. तारा सिंह की सीधी नियुक्ति और बोर्ड गठन भी तीन साल का समय पूर्ण हो गया है. लेकिन तारासिंह द्वारा बोर्ड बर्खास्त करने की मांग न करते हुए केवल तीन सदस्यों के चुनाव करवाने की सिफारिश की है जो की गुरुद्वारा बोर्ड कानून १९५६ की गरिमा के विपरीत है. 
गुरुद्वारा बोर्ड कानून के तहत मतदाताओं द्वारा निर्वाचित सदस्यों और बोर्ड के अध्यक्ष का कार्यकाल तीन वर्ष है. जिसके कारण तीन सदस्यों  चुनाव करवाने के साथ ही बोर्ड भी बर्खास्त किया जाना न्यायसंगत है. गौरतलब कि भाजपा विधायक तारा सिंह अपनी इच्छा सरकार लादकर मनमुताबिक कार्य महाराष्ट्र सरकार से करवा रहे हैं. सरदार तारासिंह पहले भी प्रधान पद पाने के लिए गुरुद्वारा बोर्ड कानून १९५६ में जबरन संशोधन करवाकर बोर्ड का प्रधान सरकार द्वारा नियुक्त करने का कानून पारित करवा चुके हैं. उन्होंने ऐसा करते हुए बोर्ड सदस्यों को मिले अध्यक्ष चुनने का लोकतांत्रिक अधिकार भी छिन लिया है. पहले मुख्यमंत्री को प्रधान चयन के लोकतान्त्रिक अधिकार को बहाल करना चाहिए ऐसी मांग यहाँ उठ रही है. 
उल्लेखनीय है कि गुरुद्वारा बोर्ड के तीन सदस्यों के चुनाव करवाने की मांग लेकर स्थानीय राजनीती से जुड़े लोग जिलाधीश कार्यालय के सामने अनशन पर है. अनशनकर्ताओं की मांग पर सावधानी बरतते हुए प्रधान तारासिंह द्वारा राजस्व मंत्री को भेजकर चुनाव करवाने की मांग तो की गई पर साथ ही छुपे तौर पर ये भी संकेत डाला कि  "मेरा पद कायम रखते हुए केवल तीन सदस्यों के चुनाव करवाएं जाएं "
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(कृपया आपकी प्रतिक्रियाएं आप निम्नलिखित स्थान पर दे सकते हैं. )

                                                (महाराष्ट्र के नांदेड़ जिले में स्थित पेनगंगा नदी का जलस्तर बारिश के कारण ऊपर चढ़ रहा है.) 

समाचर : 

पेनगंगा नदी  जलस्तर चढ़ा. 
तारीख  ,२०१८ 
नांदेड़ (महाराष्ट्र) में मृग नक्षत्र आरम्भ होने  पूर्व ही बारिश शुरू होने से किसानों के चेहरें खिल उठे हैं.  दो दिनों की मध्यम बरसात से नांदेड़ से यवतमाल (विदर्भा) की ओर बहनेवाली पेनगंगा नदी  जलस्तर ऊपर चढ़ा गया. जिससे  हिमायतनगर तहसील में  एक छोटे पूल का हिस्सा ढह जाने के   समाचार हैं. पूल ढहने के बाद यातायात भी घंटों बाधित रही. पेनगंगा नदी के पानी का लाभ इसापुर बाँध के संग्रहण के लिए होता है. नदी के जलस्तर चढ़ने से नांदेड़ और यवतमाल जिलों को सतर्कता बरतने के निर्देश जारी हुए है. 


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  • सैर के लाभ... 
 रविंदर सिंह मोदी..

मई और जून महीने में भारतीय लोग सैर-सपाटे में समय बिताने की जद्दोजहद में लगे होते हैं. बच्चों के स्कूलों में व्याकेशन होते हैं. अपने घर से चार दिन बाहर बिताकर लोग कुछ समय के लिए काम-धंदे की थकान, कार्यालयीन काम का तनाव भूलने का प्रयास करते हैं. लाखों भारतीय अपना घर छोड़कर कहीं न कहीं की सैर पर हैं. लेकिन यह सब कुछ वर्ष में एक बार व्याकेशन के समय देखने को मिलता हैं. हमारे प्रधान मंत्री भी अक्सर विदेश नीति को मजबूत बनाने के इरादे से विदेशों की सैर कर आते हैं. 
सैर की बात से याद आया कि, सैर करना स्वस्थ्य के लिए भी लाभकारी होता है. इन दिनों हमारे भाजपा अध्यक्ष अमित शाह भी सैर पर है. कल ही उन्होंने मुंबई की राजनीतिक यात्रा के तहत `मातोश्री` पहुंचकर शिवसेना कार्याध्यक्ष उद्धव ठाकरे से मुलाकात की. लता दीदी से उनकी मुलाकात नहीं हो पाई हो लेकिन माधुरी दीक्षित से मिलकर उन्होंने बॉलीवूड पर भी अपनी दृष्टि डाल ही दी. सुना है मुंबई की सैर के तुरंत परिणाम भले ही सामने न आये हो लेकिन उसके दीर्घ परिणाम के लाभ अमित शाह और बहुत हद तक मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के हक़ में आने की उम्मीद है. अमित शाह ने मातोश्री की यात्रा कर शिवसेना के लिए एक तरह से मुसीबतें बढ़ाने का प्रयत्न किया हैं. 
पालघर के चुनावों में शिवसेना को भले जीत ना मिली हो लेकिन उसने भाजपा का वर्ष २०१९ के चुनावों का रास्ता तंग कर दिया है. जाहिर है कि शिवसेना आगे भी भाजपा पर अपना दायरा कसने का लगातार प्रयास करेगी. भाजपा अध्यक्ष अमित शाह हिन्दू मतदाताओं को ये सन्देश देना चाह रहे है कि हिन्दू मत विभाजन से कांग्रेस और अन्य पार्टियां लाभ ले सकती हैं. हिन्दू मतदाताओं की प्रतिक्रियाओं का दबाव शिवसेना पर बढ़ाने की नियत से ही भाजपा अध्यक्ष अमित शाह ने शिवसेना के साथ गठबंधन की पेशकश की है. 
शिवसेना को महाराष्ट्र में अपना अस्तित्व जीवित रखने के लिए स्वयंबल पर चुनाव लड़ना बेहद जरुरी है. अमित शाह की मातोश्री पर भेट एक तरह से शिवसेना पार्टी में गठबंधन को लेकर आंतरिक कलह और विवाद बढ़ा सकती है. अब अमित शाह पंजाब की सैर कर पूर्व मुख्यमंत्री प्रकाश सिंह बादल के साथ भी चर्चा करने जा रहे है. पंजाब को लेकर अमित शाह की नीति वो नहीं है जो महाराष्ट्र में शिवसेना को लेकर है. यहाँ तो भाजपा को एक ही बात खटक रही है और वो है कांग्रेस की सत्ता. देखना है कि पंजाब की सैर के भाजपा को क्या लाभ होते हैं.  
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