हजूर साहिब के सभी आठ बोर्ड सदस्यों का धन्यवाद !
रविंदर सिंह मोदी
- हजूर साहिब नांदेड़ -
गुरुद्वारा तखत सचखंड श्री हजूर अपचलनगर साहिब मंडल (बोर्ड ) का सरकार नियुक्त प्रधान और भाजपा का विधायक तारा सिंह अजीब हेकड़वृत्ती का मनुष्य है. उसने ठान ली है कि वो साधसंगत और जनमानस की मांग बिलकुल नहीं सुनेगा. उसने हजूर साहिब के पांच बोर्ड सदस्यों की हजूर साहिब नान्देड़ में रेक्वीजिशन की बैठक लेने की मांग पूर्णतः नजरअंदाज करते हुए मुंबई में ही ता. २८ जुलाई, २०१८ को आठ सदस्यों की मौजूदगी में बैठक संपन्न कर ली.
इस हेकड़बाज प्रधान ने पंजप्यारे साहिबान द्वारा भेजे गए पत्र का उल्लेख कर बैठक में पहला प्रस्ताव मंजूर करवाया कि गुरुद्वारा कानून १९५६ में अंतर्भूत कलम ६ का संशोधन रद्द करवाने के लिए मुख्यमंत्री से चर्चा करूँगा. इसने प्रस्ताव में कहा हैं कि भाजपा का विधायक हूँ इसलिए सरकार के निर्णय के खिलाफ बात नहीं कर सकता. इस समय तारा सिंह ने चालाखी बरतते हुए कलम ११ के विषय को छुहा तक नहीं. यानी वो हमेशा सरकारी नियुक्त अध्यक्ष बना रहना चाहता है. या फिर उसकी यही इच्छा है कि गुरुद्वारा बोर्ड पर हमेशा सरकार अपना अध्यक्ष नियुक्त करती रहे.
इसी मनुष्य ने वर्ष २०१५ में कलम ११ में संशोधन करवाकर गुरुद्वारा बोर्ड का अध्यक्ष पद सरकारी करने की अहम् भूमिका निभाई थी. तीन साल गुरुद्वारा बोर्ड को इसने सत्त्ता के केंद्र जैसा चलाया. अपनी मर्जी से इसने बोर्ड पर सत्ता हाँकते हुए मुंबई के मेम्बरों के इच्छाएं पूरी की. नांदेड़ के आठ मेम्बरों में हमेशा वो दरार डालकर दो गुटों की राजनीति को बढ़ावा देकर कई तरह की धांधलियों पर पर्दा डाला और धांधलियों को छुपा बढ़ावा भी दिया. तीन सालों में इसने कभी कलम ११ के विषय में बोर्ड मीटिंग में बात नहीं की. जबकि पहली मीटिंग के फेल होने पर उसने प्रेस और मीडिया के सामने कहा था कि वह कलम ११ का संशोधन वापस करवाएगा. बोर्ड का कार्यकाल समाप्त होते होते इसने स्वयं सरकार को पत्र देकर मांग की कि मेरा मुंबई में कोरम पूर्ण हो इसलिए छह मेंबर बढाकर दे.
मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने आव देखा न ताव बस सीधा मंत्री मंडल मीटिंग में छह मेंबर बढाकर यानी सरकार नियुक्त मेंबर बढ़ाने की जल्दबाजी छह मेंबर बढ़ाने का यह विषय और भी तीन लोगों को पता था समय आने पर उनके नाम उजागर किये जायेगे. संशोधन हो गया एक माह बीत गया. इस तारा सिंह ने संशोधन के विषय में कोई पहल नहीं की. एक महीने में नागपुर अधिवेशन में उसकी उपस्थिति थी. अधिवेशन समाप्त होने के बाद भी वह तीन बार मंत्रालय गया लेकिन उसने कलम ११ या कलम ६, ७ या १५ के संशोधन रोकने के विषय में कोई पहल नहीं की. मुंबई रहकर भी उसने इस विषय पर मुख्यमंत्री से चर्चा के लिए समय नहीं मांगा. उसके दिल में ही नहीं हैं कि संशोधन हो.
नई दुकानदारी मिली नहीं कि उसे वह कैसे बंद करवाएगा. जैसे कलम ११ के लिए तीन सालों में कुछ नहीं किया वैसे ही हमें चुनावों के चक्करों में फांसकर कलम ६, ७, और १५ के विषय में टाइमपास करवाएगा. जो मेंबर तारा सिंह की मीटिंग में गए थे उनको भी धन्यवाद की उन्होंने बेबाक कदम उठाया. हम साध संगत को नहीं गिनेंगे. जो हुआ अच्छा हुआ, वैसे भी सांठगांठ करने और भीख मांगने का कोई अवसर नहीं होता. कभी कभी भिखारी जनाजे में चलनेवालों से भी भीख मांग लेते हैं. वैसे ही हजूरी सभ्यता का जनाजा निकालने पर उतारू तारा सिंह से पद मांग लिए गए होंगे तो उसका क्या अफ़सोस किया जाये. इसके अलावा भी कुछ माँगा होगा तो मैं, उसकी तपशील में नहीं जाना चाहूँगा. क्योंकि .....
उधर एसजीपीसी के मेम्बरों का तो कहना है कि पानी में रहकर हम मगरमछ से कैसे बैर करें. हमें हजूर साहिब के लोगों का साथ देकर हासिल क्या होगा? मुंबई में तारा सिंह ही हमारे मदतगार हैं. हजूर साहिब के लोग बहुत लड़ते हैं. हम साल में एक या दो बार आते हैं, दर्शन कर चले जाएंगे. भाड़ में जाये हजूरी!
खैर, हम आते हैं और एक महत्वपूर्ण मुद्दे पर. वह हैं हमारे हजूर साहिब के उन आठ मेंबर साहिबान के उस कदम का जो उन्होंने उठाया हैं. हजूर साहिब नांदेड़ के निवासी मेंबर भागिन्दर सिंघ घड़ीसाज, स. अमरीकसिंह वासरीकर, स. सरजीत सिंघ गिल, स. शेरसिंघ फौजी, सुरिंदर सिंघ मेंबर, रणजीत सिंघ कामठेकर, राजिंदर सिंघ पुजारी और गुरमीत सिंघ महाजन ने हजूरी साध संगत की मांग पर मुंबई में होने वाली बैठक में नहीं जाने का सामूहिक फैसला किया. उस फैसले को निभाया भी. हुजूर साहिब के सिखों की भावनाओं को उन्होंने अपने व्यक्तिगत बातों से सर्वोपरि रखा. सभी मेंबर साहिबान ने खुद्दारी भरा निर्णय लिया. हमें राहत दी. भले तारासिंह ने तुरंत दुश्मनी निभाते हुए, उनके पद निकाल लिए. आगे देख लेने की भी धमकियां दी गई ऐसी चर्चा हैं. लेकिन हम हजूर साहिब के सभी मेंबर साहिबान के साथ हैं.
हजूरी नवजवानों का भी शुक्रिया कि उन्होंने अपना जमीर श्री गुरु गोबिंदसिंघजी महाराज को समर्पित कर आनेवाली पीढ़ी की भलाई की दृष्टि से गुरुद्वारा कानून के संशोधन के विरोध में आंदोलन किया. कुछ लोग चाहकर भी आंदोलन में नहीं आ पाए क्योंकि उनके परिवार से कोई न कोई एक सदस्य गुरुद्वारा बोर्ड, खालसा हाईस्कूल, श्री हजूर साहिब आई.टी.आई. या स्कूलों में नौकरियों पर हैं. ये तारा सिंह उनके साथ भी दुश्मनी निकाल सकता है ये डर सभी के मन में था. हमने भी उन्हें कहा ठीक है आप अरदास कर हमारे साथ जुड़े रहें और वो जुड़े हुए ही हैं. आज जो लोग आंदोलन का हिस्सा नहीं हैं, उनसे कोई शिकायत नहीं हैं. हो सकता है कल आप हमारे साथ होंगे. आखिर गुरु के लिए भी तो कुछ करना है. यदि अबकी बार तारा सिंह तो अगली बार हमारा सच्चे पातशाह.
