इंदरजीतसिंघ गल्लीवाले युग का अंत !
भावभीनी श्रद्धांजलि
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| इंदरजीतसिंघ गल्लीवाले पूर्व उपाध्यक्ष गुरुद्वारा सचखंड बोर्ड नांदेड़ |
रविंदरसिंघ मोदी
रविवार, ता. 5 फरवरी, 2023 की सुबह 7.30 बजे हजुरसाहिब नांदेड़ के स्थानीय नेता स. इंदरजीतसिंघजी गल्लीवाले ने अंतिम साँस लीं और दुनिया से विदा हो गए. उनके देहावसान के साथ ही "गल्लीवाले" नाम के सक्रिय राजनीतिक युग का भी अंत हो गया. सिख समाज ने 74 वर्षीय इस नेता को खो दिया जिसकी शोकसंवेदना सामाजिक परिवेश में प्रसारित हो गई है. रविवार की शाम ही उन्हें पंचतत्व में विलीन किया जायेगा.
स्व. इंदरजीतसिंघ पिता स्व. रतनसिंघ गल्लीवाले यह नाम हजुरसाहिब की स्थानीय राजनीति में विगत 50 वर्षों से चिरपरिचित रहा है. उन्होंने गुरुद्वारा सचखंड बोर्ड संस्था के चुनाव में जीत हासिल कर बोर्ड के मीत प्रधान के रूप में लंबे समय तक कार्य किया था. सन 1991 से हजुरसाहिब की राजनीति में परिवर्तन आना प्रारंभ हो गया था. उस समय इंदरजीतसिंघ गल्लीवाले ने गुरुद्वारा सचखंड बोर्ड के पूर्व प्रधान स्व. दलबीरसिंघ जाबिंदा के साथ मिलकर उन्होंने समाज में नया राजनीतिक प्रवाह शुरू किया था. उन्होंने सिख समाज की बेरोजगारी दूर करने में सकारात्मक भूमिका अदा की थी. उनकी एक पहचान यह भी थी कि वें किसी विषय पर अपनी बेबाक राय परचे (पॉम्पलेट) जारी कर बयांन कर देते थे. उनकी यह शैली समाज में काफी चर्चित रहीं थी. वहीं बहुत बार उन्हें आलोचनाओं का भी सामना करना पड़ जाता था.
स्व. इंदरजीतसिंघजी गल्लीवाले युवा आवस्था में पूर्व केंद्रीय गृहमंत्री स्व. शंकरराव चव्हाण के निकटम कार्यकर्ता के रूप में जाने जाते थे. उन्होंने कांग्रेस पार्टी के नांदेड़ शहर अध्यक्ष पद की जिम्मेदारी भी निभाई थी. वहीं उन्होंने महानगर पालिका चुनाव जीतकर पार्षद के रूप में भी कार्य किया था. गोदावरी शुद्धिकरण का विषय उन्होंने लंबे समय तक उठाए रखा था. उनके साथ मुझे भी गोदावरी शुद्धिकरण विषय का अभ्यास करने का अवसर प्राप्त हुआ था.
जिस समय उन्हें महानगर पालिका चुनावों में कांग्रेस पार्टी द्वारा टिकट नहीं दिया गया, उस समय समाज में सक्रिय रहने वाले स. इंदरजीतसिंघ गल्लीवाले कुछ समय तक जनता दल और राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के साथ भी सक्रिय रहे थे. उन्होंने निर्दलीय के रूप में चुनाव लड़ा था. लगभग 50 वर्षों तक राजनीतिक क्षेत्र में उन्होंने अपने आपको व्यस्त रखा था. उनके साथ बहुत से युवकों ने भी राजनीति क्षेत्र में कदम रखा था और उपोषण और मोर्चो में शामिल हुए.
पिछले कुछ समय से उन्हें स्वास्थ्य की समस्या से त्रासदी थी. हैदराबाद और अन्य स्थानों पर भी उन उपचार जारी था. आखिर उन्होंने जग से विदा होने का निर्णय लें लिया. उनके निधन पर अपनी ओर से गहरी शोकसंवेदना व्यक्त करता हूँ.
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