सिख कहीं भी सुरक्षित नहीं!!
रविंदर सिंघ मोदी
अफगानिस्तान के जलालाबाद क्षेत्र में हुए आतंकी हमलें में १३ सिख और ८ हिन्दू भाई शहीद हो गए. इस हमले की जिम्मेदारी कुख्यात आतंकवादी संगठन आईएसआईएस द्वारा ली गई है. हमला निंदनीय भी है और चिंताजनक भी. इस हमले में मुस्लिम-सिख-हिन्दू भाईचारे के लिए विगत २० वर्षों से जूझ रहे सिख नेता अवतारसिंघ खालसा और ऐतहासिक गुरुद्वारा नानक दरबार के प्रधान सरदार रवेल सिंघ को मुख्य निशाना बनाया गया. आतंकियों को जानकारी थी कि सिखों का प्रतिनिधिमंडल अफगानिस्तान के राष्ट्रपति अशरफ गनी से मुलाकात के लिए जानेवाले है. जिस स्थान पर राष्ट्रपति से भेट होनी थी उस स्थान से एक हजार मीटर की दूरी पर हमले को अंजाम दिया गया.जानकारी है कि सरदार अवतार सिंघ खालसा अफगानिस्तान में अल्पसंख्यांक के बड़े नेता थे और अक्टूबर २०१८ में होने वाले संसद चुनावों में उनका सांसद बनना लगभग तय लग रहा था. अफगानिस्तान के कट्टरवादी नेताओं को ये बात खटक रही थी. सिख नेतृत्व उभरने से रोकने के लिए इस हमले को अंजाम दिया गया. सिख नेतृत्व सभी को खटकता है. उसमें सच्चा, प्रामाणिक और सकारात्मक नेतृत्व हो तो अन्य लोगों के लिए चिंताएं बढ़ जाती हैं. सिख सत्ता में रहे लेकिन बोले नहीं, कोई बात नहीं करे ऐसी व्यवस्था बिछाई जाती है. अक्सर कमजोर और चापलूस मनोवृति के लोग हमारा नेतृत्व करते हैं और चुप्पी या स्वार्थ के कारण समुदाय का नुकसान कर देते हैं. अवतारसिंह खालसा बोलनेवाले और जान हथेली पर लेकर चलनेवाले नेता थे यह बात बार-बार साबित हुई है. उपर्युक्त घटना दुःखद हैं और संकेत कर रही है कि सिखों के प्रति किस तरह के व्यवहार की मंशा पाली जा रही है.
अगानिस्तान में मारे गए सिख धर्म के सच्चे अनुपालक थे. वो सिख उस मार्ग में बरसों से अपना निवास बनाकर बैठें थे जिस राह से श्री गुरु नानक देव जी महाराज की मक्का-मदीना और अरब राष्ट्रों के लिए उदासी हुई थी. सभी शहीद सिखों और हिन्दू भाइयों की शाहदत ने हमें दुःखी कर दिया हैं. हमारी संवेदना ये अहसास करवा रही हैं कि विश्व में सिख कहीं भी सुरक्षित नहीं है. बाहर देशों में तो क्या हम अपने देश में भी सुरक्षित महसूस नहीं कर रहें हैं. सन १९८४ के सिख विरोधी दंगे हो, ऑपरेशन ब्लू स्टार के बाद निर्दोष सिखों का कत्लेआम हो, छत्तिसिंघपुरा का हत्याकांड हो, सब घटनाएं सिखों की असुरक्षा पर सवाल खड़ा करती हैं.
अमरीका, ऑस्ट्रेलिया, इंग्लैंड, अरब राष्ट्रों में सिखों को लगातार निशाना बनाया जा रहा हैं. पंजाब में गुरुद्वारें भी सुरक्षित नहीं हैं. सिखों के लिए देश में सचमुच दुविधा की स्थिति दिखाई दे रही है. सिखों को अल्पसंख्यक होने का सही स्तर भी प्राप्त नहीं है. ऐसा लग रहा है कि सिख कहीं भी सुरक्षित नहीं है.


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