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गुरुवार, 19 जुलाई 2018

क्या उस सरकारी हॉस्पिटल से 
"श्री गुरु गोबिंदसिंघजी" 
का नाम वापस ले लेना चाहिए ?
रविंदर सिंघ मोदी 



- हजूर साहिब नांदेड़ - 
जब जब सिख समाज सरकारी हॉस्पिटल की जमीन वापस मांगता है अथवा आवाज उठाने लगता है तब-तब कोई न कोई राजनीतिक पार्टी मांग करती है कि, "श्री गुरु गोबिंदसिंघजी रुग्णालय (हॉस्पिटल) शुरू किया जाए. अबके भारतीय जनता पार्टी सामने आई है. गुरुद्वारा सचखंड बोर्ड की जमीन जब सिख समाज वापस मांग रहा है तब इस तरह की मांग कर सरकार और कोर्ट को भ्रमित करना ये मात्रा उद्देश्य है. यह काम पहले भी कुछ राजनीतिक पार्टियां और कुछ सामाजिक संघटन कर चुके है. जब-जब इस तरह की मानसिकता लेकर वे लोग काम करते हैं तब-तब सिख समाज का काम ख़राब हो जाता हैं. यही नहीं बार-बार गुरु महाराज के नाम की अव्हेलना और अनादर भी होता है. सिख समाज  के लिए यह विषय गले की हड्डी बन चूका है. हम गुरूजी का नाम है इसलिए हर बार सहानुभूति में खामोश हो जाते हैं. गुरुद्वारा बोर्ड ने हॉस्पिटल के लिए और बाद में मेडिकल कॉलेज के लिए जमीनें दी. सरकार ने सरकारी अस्पताल और मेडिकल कॉलेज हमारे मित्र संतुक राव हंबर्डे के गाँव विष्णुपुरी में स्थानांतरित कर दिया है. अब उद्देश्य समाप्त हो गया है तो गुरुद्वारा बोर्ड की जमीनें भी वापिस हो जानी चाहिए. दूसरे यह कि किसी भी लिहाज से जिला अस्पताल को श्री गुरु गोबिंदसिंघजी का नाम अब जँचता नहीं है. क्योंकि ये जिला अस्पताल श्री शंकरराव चव्हाण शासकीय महाविद्यालय के अंतर्गत आता है जहां गुरु महाराज के नाम का अस्तित्व छोटा प्रतीत होने लगता हैं. उदाहरण के तौर पर अस्पताल की रसीद पर सबसे ऊपर नाम वैद्यकीय महाविद्यालय का छपेगा और उसके नीचे लिखा जायेगा गुरु जी के नाम पर अस्पताल का नाम! क्या यह जायज होगा कि किसी राजनेता के नाम के नीचे गुरूजी का नाम सार्वजनिक रूप से लिखा जाए ? यह गुरु गोबिंदसिंघजी जैसे संत और व्यक्तित्व के साथ घोर अन्याय होगा. उसके लिए यही ठीक रहेगा कि राजनीतिक जमीन गुरुद्वारा बोर्ड को सम्मान सहित वापस कर दें और सिख समाज सम्मान सहित श्री गुरु गोबिंदसिंघजी का नाम वापस ले ले. बार-बार गुरूजी का नाम उछलना योग्य नहीं है. भाजपा चाहे तो चार साल में यह हॉस्पिटल शुरू कर सकती थी लेकिन भाजपा ने अन्य राजनीतिक पार्टी के खिलाफ चुनावी मुद्दा बनाने के उद्देश्य हॉस्पिटल का काम शुरू नहीं करवाया है. हम हर राजनीतिक पार्टी को आजमा चुके हैं और उनका राजनितिक स्वार्थ भी देख चुके हैं. क्या राजनीति चल रहीं हैं यह भी समझ आ रहा है. भाजपा के सभी साथियों  नसीहत है कि सिख समाज के साथ राजनीति न करें, और ना हमारा ध्यान भटकाने का प्रयास करे.  विषय को ना छेड़ा जाए और भ्रम का बाज़ार ना लगाया जाए. उसी तरह से सिख समाज ने भी हॉस्पिटल से गुरूजी का नाम वापस ले लेना चाहिए ऐसी मेरी व्यक्तिगत सलाह है. क्यों बार-बार गुरु जी के नाम से राजनीति ? यदि शहर में सरकारी अस्पताल जरुरी है तो जिरायत (कृषि अनुसन्धान ) देगलूरनाका रोड सबसे बेहतर स्थान है वहां बनाए. या गोवेर्धन घाट कौठा स्थान पर बहुत सी जमीनें है वहां बनाया जाए. मेरी तो सलाह है कि नांदेड़ उत्तर क्षेत्र में एक और दक्षिण क्षेत्र में एक ऐसे दो सरकारी अस्पताल बनाये जाएं. दक्षिण के लिए कौठा या जिरायत स्थान पर और उत्तर में तरोड़ा या सांगवी क्षेत्र ठीक रहेगा. भाजपा की सरकार है कुछ भी संभव है. 

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