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बुधवार, 8 अगस्त 2018

खतरा अभी टला नहीं 
शीतकालीन अधिवेशन में फिर प्रस्तुत हो सकता है संशोधन विधेयक
प्रस्ताव तारा सिंह के गले की हड्डी बना ! 
 रविंदर सिंघ मोदी 
महाराष्ट्र सरकार द्वारा आगामी दिनों में विधानसभा का शीतकालीन अधिवेशन बुलाया जा रहा हैं. चिंता की बात यह हैं कि शीतकालीन अधिवेशन में नांदेड़ गुरुद्वारा सचखंड श्री हजूर अपचलनगर साहिब मंडल (बोर्ड) एक्ट १९५६ में मंत्रिमंडल बैठक में मंजूर और प्रस्तावित संशोधन प्रस्ताव दुबारा चर्चा और अनुमति के लिए प्रस्तुत हो सकता हैं. क्योंकि महाराष्ट्र सरकार द्वारा आगामी अधिवेशन में उन सभी प्रस्तावों पर चर्चा की जा रही हैं जिन पर किसी कारणवश नागपुर अधिवेशन में चर्चा अथवा निर्णय नहीं किया गया हैं. 
नांदेड़ के सिखों के लिए ये विषय चिंताजनक है कि संशोधन विषय के मूल सूचक और निवेदक भाजपा के विधायक तारा सिंह ने आज तिथि तक प्रस्तुत विधेयक वापिस नहीं लिया हैं. कानूनी तौर पर अभी तक प्रस्ताव वापिस लेने संबंध में विधायक तारा सिंह को चाहिए था कि लिखित रूप से कारण दर्शाकर राजस्व विभाग से प्रस्ताव वापिस ले ले. लेकिन तारा सिंह का टाइमपास शुरू है. ऐसे तैसे तीन सीटों की चुनाव अचार संहिता शुरू हो जाये और नांदेड़ सिख इस विषय में उलझकर रह जाये यह उसकी योजना है. 
संशोधन विषय पर मेरी बहुत से लोगों के साथ चर्चा हुई है और उसमे यह तथ्य सामने आया है कि मंत्री मंडल की मंजूरी के बाद प्रस्ताव पीछे लेने में तांत्रिक रूप से बहुत कठिनाई है. उस पर चर्चा के समय ही बहुमत से निर्णय लिया जाता हैं. तारा सिंह की हिम्मत नहीं हो रही है कि प्रस्ताव कैसे पीछे लिया जाए. 
आदरणीय पंजप्यारे साहिबान के पत्र और हजूरी साध संगत की मांग पर तारा सिंह ने ता. २८ जुलाई, २०१८ की बैठक में मात्र कलम ६ के तहत प्रस्तावित छह मेम्बरों की संख्या बढाने के एक विषय संशोधन रद्द करने का प्रस्ताव पास किया है. लेकिन केवल आठ सदस्यों द्वारा चर्चा कर निर्णय लिया गया उक्त प्रस्ताव का ठराव (मीटिंग निर्णय) सरकार के राजस्व विभाग को नहीं भेजा है. जिससे यह विषय अभी भी अधिवेशन के पटल पर है यह मानकर चलना होगा. 
वैसे भी संशोधन के संबंध में मीटिंग में चर्चा करने और उसपर निर्णय लेने के लिए बोर्ड का दो-तिहाई बहुमत आवश्यक हैं. आठ की संख्या से यह निर्णय सर्वमान्य नहीं माना जा सकता और न कानूनी रूप से उसे स्वीकार किया जा सकता है. संशोधन का विषय यानी नया कानून बनाने का विषय हैं उस पर बोर्ड का बहुमत दो-तिहाई यानी १७ सदस्यों में से १२ सदस्यों का समर्थन जरुरी हैं. साधारण निर्णय के लिए सात के बहुमत का अंक कोरम के लिए योग्य माना जायेगा. 
यह संशोधन प्रस्ताव अब तारा सिंह के गले की हड्डी बन गया है. तारा सिंह परेशान हैं और उसे अब कम से कम १२ सदस्यों की दरकार हैं. और चार सदस्यों को अपनी ओर करने के लिए तारा सिंह की नरम नीति शुरू हो गई है. अब उन मेम्बरों को मालिक - मालिक कहना शुरू कर दिया हैं जिनको पदों से हटाने में उसने कोई कसर नहीं छोड़ी. कुछ सीनियर मेम्बरों से भी तारा सिंह का संपर्क जारी हैं ऐसे समाचार रोज प्राप्त हो रहे हैं. 
तारा सिंह द्वारा प्रयास किया जा रहा हैं की किसी तरह १७ सदस्यों की एक बैठक बुलाकर मीटींग का पूर्ण बहुमत सरकार को दिखाए. बाद में मीटिंग के मिन्ट्स तो लिखने के सभी अधिकार तारा सिंह के पास है ही वह सरकार को मीटिंग का ठराव (निर्णय) अपने अनुकूल बनाकर भेज देगा. कलम ११ का विषय भी वह काबिलियत से छुपा लेगा.  

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