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शुक्रवार, 20 जुलाई 2018

रविवार को सब मिलकर "अत्याचार दिवस" मनाएं 
रविंदर सिंघ मोदी 

हजूर साहिब, नांदेड़ - श्री हजूरसाहिब के सिखों के साथ महाराष्ट्र सरकार ने सौतेला बर्ताव किया है. दी सिख गुरुद्वारा तखत सचखंड बोर्ड नांदेड़ मंडल (बोर्ड) संस्था के कानून में जबरन संशोधन लादकर सिखों पर एक तरह से अत्याचार किया है. सरकार द्वारा किये गए संशोधन और सरकारी मंसूबों के निषेध में हजूरी साध संगत जी द्वारा रविवार (ता. २२ जुलाई, २०१८) के दिन नांदेड़ के जिलाधीश कार्यालय के सामने अत्याचार दिवस और धरना आंदोलन का आयोजन किया गया हैं. उपर्युक्त कार्यक्रम में सभी सिख अपने परिवार साहिब पहुंचे ऐसी सभी से अपील हैं. सभी सिख युवक विषय की गंभीरता देखते हुए इस विषय के प्रचार-प्रसार के लिए प्रयत्न करें, अपना योगदान दें. सभी सिख इस दिन अत्याचार दिवस मनाए और सरकार  सन्देश दे कि सिखों के साथ  गलत घटित हो रहा है. जिस तरह से सरकार ने ता. २० जुलाई, २०१८ को महाराष्ट्र के एक सुप्रसिद्ध देवस्थान "शिंगणापुर" संस्था का सरकारीकरण कर उसे कब्जे में ले लिया. उसी तर्ज पर कल नांदेड़ का हमारा तखत साहिब का बोर्ड भी न कब्ज़ा कर ले. कृपया सभी सिख जो श्री गुरु गोबिंदसिंघजी महाराज के वफादार है, धरना आंदोलन के जगह पहुंचकर शांतिपूर्ण तरीके से आंदोलन में शामिल होकर स्वयं को अत्याचार पीड़ित दिखाएं.  इस स्थान पर भाषण नहीं होगा सिर्फ अत्याचार का प्रदर्शन होगा. 
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भावभीनी श्रद्धांजलि
हिंदी फिल्मों के नागमाकर, गीतकार और साहित्यिक आदरणीय गोपालदास नीरज साहब ने विचारों और सोंच के माध्यम से बहुत कुछ दिया हैं. उनके नगमें तो हम गुनगुनातें ही हैं लेकिन उनमें छुपे सन्देश का अहसास भी करते हैं. भले ही नीरज हमें छोड़कर चले गए हैं लेकिन उनका साहित्य और हिंदी गीत सदैव उनके होने का अहसास करते रहेंगे. मेरी भावमय श्रद्धांजलि अर्पित है. - रविंदर सिंह मोदी

गुरुवार, 19 जुलाई 2018

क्या उस सरकारी हॉस्पिटल से 
"श्री गुरु गोबिंदसिंघजी" 
का नाम वापस ले लेना चाहिए ?
रविंदर सिंघ मोदी 



- हजूर साहिब नांदेड़ - 
जब जब सिख समाज सरकारी हॉस्पिटल की जमीन वापस मांगता है अथवा आवाज उठाने लगता है तब-तब कोई न कोई राजनीतिक पार्टी मांग करती है कि, "श्री गुरु गोबिंदसिंघजी रुग्णालय (हॉस्पिटल) शुरू किया जाए. अबके भारतीय जनता पार्टी सामने आई है. गुरुद्वारा सचखंड बोर्ड की जमीन जब सिख समाज वापस मांग रहा है तब इस तरह की मांग कर सरकार और कोर्ट को भ्रमित करना ये मात्रा उद्देश्य है. यह काम पहले भी कुछ राजनीतिक पार्टियां और कुछ सामाजिक संघटन कर चुके है. जब-जब इस तरह की मानसिकता लेकर वे लोग काम करते हैं तब-तब सिख समाज का काम ख़राब हो जाता हैं. यही नहीं बार-बार गुरु महाराज के नाम की अव्हेलना और अनादर भी होता है. सिख समाज  के लिए यह विषय गले की हड्डी बन चूका है. हम गुरूजी का नाम है इसलिए हर बार सहानुभूति में खामोश हो जाते हैं. गुरुद्वारा बोर्ड ने हॉस्पिटल के लिए और बाद में मेडिकल कॉलेज के लिए जमीनें दी. सरकार ने सरकारी अस्पताल और मेडिकल कॉलेज हमारे मित्र संतुक राव हंबर्डे के गाँव विष्णुपुरी में स्थानांतरित कर दिया है. अब उद्देश्य समाप्त हो गया है तो गुरुद्वारा बोर्ड की जमीनें भी वापिस हो जानी चाहिए. दूसरे यह कि किसी भी लिहाज से जिला अस्पताल को श्री गुरु गोबिंदसिंघजी का नाम अब जँचता नहीं है. क्योंकि ये जिला अस्पताल श्री शंकरराव चव्हाण शासकीय महाविद्यालय के अंतर्गत आता है जहां गुरु महाराज के नाम का अस्तित्व छोटा प्रतीत होने लगता हैं. उदाहरण के तौर पर अस्पताल की रसीद पर सबसे ऊपर नाम वैद्यकीय महाविद्यालय का छपेगा और उसके नीचे लिखा जायेगा गुरु जी के नाम पर अस्पताल का नाम! क्या यह जायज होगा कि किसी राजनेता के नाम के नीचे गुरूजी का नाम सार्वजनिक रूप से लिखा जाए ? यह गुरु गोबिंदसिंघजी जैसे संत और व्यक्तित्व के साथ घोर अन्याय होगा. उसके लिए यही ठीक रहेगा कि राजनीतिक जमीन गुरुद्वारा बोर्ड को सम्मान सहित वापस कर दें और सिख समाज सम्मान सहित श्री गुरु गोबिंदसिंघजी का नाम वापस ले ले. बार-बार गुरूजी का नाम उछलना योग्य नहीं है. भाजपा चाहे तो चार साल में यह हॉस्पिटल शुरू कर सकती थी लेकिन भाजपा ने अन्य राजनीतिक पार्टी के खिलाफ चुनावी मुद्दा बनाने के उद्देश्य हॉस्पिटल का काम शुरू नहीं करवाया है. हम हर राजनीतिक पार्टी को आजमा चुके हैं और उनका राजनितिक स्वार्थ भी देख चुके हैं. क्या राजनीति चल रहीं हैं यह भी समझ आ रहा है. भाजपा के सभी साथियों  नसीहत है कि सिख समाज के साथ राजनीति न करें, और ना हमारा ध्यान भटकाने का प्रयास करे.  विषय को ना छेड़ा जाए और भ्रम का बाज़ार ना लगाया जाए. उसी तरह से सिख समाज ने भी हॉस्पिटल से गुरूजी का नाम वापस ले लेना चाहिए ऐसी मेरी व्यक्तिगत सलाह है. क्यों बार-बार गुरु जी के नाम से राजनीति ? यदि शहर में सरकारी अस्पताल जरुरी है तो जिरायत (कृषि अनुसन्धान ) देगलूरनाका रोड सबसे बेहतर स्थान है वहां बनाए. या गोवेर्धन घाट कौठा स्थान पर बहुत सी जमीनें है वहां बनाया जाए. मेरी तो सलाह है कि नांदेड़ उत्तर क्षेत्र में एक और दक्षिण क्षेत्र में एक ऐसे दो सरकारी अस्पताल बनाये जाएं. दक्षिण के लिए कौठा या जिरायत स्थान पर और उत्तर में तरोड़ा या सांगवी क्षेत्र ठीक रहेगा. भाजपा की सरकार है कुछ भी संभव है. 

बुधवार, 18 जुलाई 2018

ये ख़ामोशी चूभती हैं..!
रविन्दरसिंघ मोदी 

सभी खामोश हैं. सबके जज़्बात धीरे-धीरे शांत हो गए हैं. सब एक-दूसरे पर निर्भर हैं कि कोई कुछ करेंगा. कुछ दिन ख़ामोशी का वातावरण रहेगा. कुछ दिनों बाद आयेगा चुनावों का माहौल और सब उसमे डूब जाएंगे. किसी को याद भी नहीं रहेगा कि गुरुद्वारा सचखंड श्री हजूर अबचलनगर साहिब बोर्ड के कानून में जबरन संशोधन भी किया गया है. 
स्थानीय सिख समाज का ये बर्ताव, ये बेलगाव संवेदनाहीन है. समाज के एक बड़े वर्ग की ख़ामोशी चूभ रही है. ये समाज कब तक खामोश रहेगा? कब तक अन्याय और परतंत्र को बर्दाश्त करता रहेगा? हमें नुमाइंदगी कब मिलेगी? हम कब एक दूसरे पर विश्वाश करने लगेंगे? युवा पीढ़ी कब तक दिशाहीन भटकेगी? यदि यही हाल रहा समाज का तो कोई भी आंदोलन जीता नहीं जा सकता. कोई भी सामाजिक ध्येय पूर्ण नहीं हो सकता ये अनुभव से कह रहा हूँ. 
मैं सभी साध संगत जी और नौजवानों से खुला संवाद करना चाह रहा हूँ कि हमारे वर्तमान पर कितना बड़ा खतरा मंडरा रहा है. हमारा सिख समाज और समाज की धरोहर गुरुद्वारा तखत सचखंड श्री हजूर अबचल नगर साहिब ये पवित्र पवन स्थल और गुरुद्वारा बोर्ड अब षड्यंत्रकारियों के सीधे निशाने पर है. हमारी विरासत और आश्रयस्थल गुरुद्वारा तखत सचखंड हजूर साहिब बोर्ड पर बुरी नज़र पड़ गई है. हर कोई इस पर कब्ज़ा करने को उतावला हैं. सरकार उन्ही मिलकर अपने मनसूबे पूर्ण कर करने की देहलीज पर है. क्या कर लोगें जो बोर्ड (मैनेजमेंट) पर कब्ज़ा हो जायेगा.  इन शातिरों के सामने आपकी कुछ न चलेगी. आपकी नुमाइंदगी कोई काम नहीं आएगी. नुमाइंदे का भी कद खो जायेगा. कुछ भी साबूत नहीं बचेगा यहाँ सिवाय चमचागिरी और लाचारी के. हजूर साहिब का हर सिख (पुरुष या स्त्री) तय कर लें कि वें कब तक खामोश रहेंगे?

शनिवार, 14 जुलाई 2018

आंदोलन ठंडा ना पड़ने पाएं 
रविंदर सिंघ मोदी 

हजूर साहिब नांदेड़ - पांच तखतों में श्री हजूर साहिब तखत की महत्ता सबसे अलग इसलिए है क्योंकि इस पवित्र स्थान पर दशम पिता श्री गुरु गोबिंद सिंघजी महाराज ने युगों युग अटल श्री गुरु ग्रन्थ साहिब जी को गुरता प्रदान कर उन्हें जागता गुरु बनाया. इस जागते गुरु की छत्रछाया में हम सिख स्वयं को भाग्यशाली मानते हैं. यह परम्परावादी तखत है. ऐसे पावन तखत स्थान की गरिमा स्थानीय सिखों ने विगत तीन सौ सालों से बनाएं रखीं हैं. लेकिन कुछ विघातक प्रवृति  के लोग जिन्हें यहाँ का इतिहास अवगत है न मर्यादा, वे केवल यहाँ के सोने की चमक और चढ़ावे पर नजर रखकर तखत का सरकारीकरण करने पर आमदा है. उस तरह का कानून पारित करवा रहें हैं. और इस कार्य में सबसे बड़ा दोखी भाजपा का मुंबई का विधायक है जो कुछ हिंदुत्ववादी शक्तियों की चालों को कामयाब करवाने के लिए कार्य कर रहा हैं. इस तारासिंह ने तीन साल पहले तारीख १२ मार्च, २०१५ को गुरुद्वारा बोर्ड कानून १९५६ में बदलाव कर बोर्ड मंडल बना दिया. खुद अध्यक्ष पद पा लिया. अपने भांजे को भी मेंबर बना दिया. अब ता. २७ जून, २०१८ को मुंबई में बैठकर सदा के लिए गुरुद्वारा बोर्ड की सत्ता चलाने की नियत से मंत्रिमंडल की बैठक में संशोधन करवाकर और छह मेंबर बढ़ाने का निर्णय पारित करवाया. घटिया राजनीति को अंजाम देकर उसने दखनी समाज की संस्था का पूर्ण सरकारीकरण करने में कोई कसर नहीं छोड़ी. मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस और राजस्व मंत्री चद्रकांत पाटिल ने इस लालची और देखनी विरोधी विधायक की तुरंत मंशा पूर्ण कर दी. इस अत्याचार और धोखाधड़ी के खिलाफ दखनी समाज ने आंदोलन शुरू किया. जिसके बाद नागपुर विधानसभा के सत्र में विधेयक भेजा गया. आदरणीय पंजप्यारे साहिबान और कारसेवा के संतों ने भी दक्खनी सिखों की भावनाओं का सम्मान करते हुए सरकार से गुहार लगाई की गुरुद्वारा बोर्ड के कानून में किसी तरह का संशोधन न किया जाये. लेकिन भाजपा में अकेला पगड़ीधारी विधायक होने के कारण मुख्यमंत्री और राजस्व मंत्री तारा सिंह के साथ है. पगड़ी पहनने से कोई सिख नहीं हो जाता. तारासिंह के भी सिख होने के कोई प्रमाण नजर नहीं आते. उसने कभी तखत साहब में गुरु का अमृत नहीं चखा (छका) है. इसी बात के कारण वो तनखैया होने से भी बच गया. क्योंकि तनखैया गुरु के सिखों को ही किया जा सकता हैं. खैर, तारा सिंह अब ता. २८ जुलाई, २०१८ की मीटिंग में कुछ लालच भरे और कुछ विवादित मुद्दे परोसकर दखनी समाज के सामने टुकड़े फेककर ललचाने की कोशिश में जुटा हुआ है. अभी भी उसने घोषणा नहीं की है कि गुरुद्वारा कानून में किया गया संशोधन वो रद्द करवा रहा हैं. जिसका कारण यही है कि यह एक बहुत बड़ी साजिश के तहत कार्य किया जा रहा हैं. तारा सिंह के मंसूबें पूर्ण ना हो इसलिए हजूर साहिब के सिख समुदाय को एकजुट होकर प्रयास करना चाहिए. हमारा आंदोलन ठंडा ना पड़ जाए इस बात की गंभीरता अमल में लाकर आंदोलन को जागता रखना चाहिए.  इस बार हम खामोश रहे, या दूसरों पर निर्भर रहें तो हमारा गुरुद्वारा हमेशा हमेशा के लिए मुंबई और नागपुर के लोगों के हाथ में चला जायेगा. बोर्ड का मुख्य कार्यालय भी मुंबई में बन जायेगा और यहाँ हम तालियां बजाते रह जाएंगे. इसलिए जागते रहो और आंदोलन में शामिल हो जाओ. 
संत बाबा नरिंदर सिंघजी कारसेवा वाले 
और संत बाबा बलविंदर सिंघजी कारसेवा वालों 
ने महाराष्ट्र सरकार से मांग की हैं. 

दैनिक सकाळ के १२ जुलाई, २०१८ में छपी है खबर. 
आज के दैनिक सकाळ न्यूज़ पेपर में न्यूज़ है. 


शुक्रवार, 13 जुलाई 2018

दैनिक सकाळ न्यूज़ पेपर में तारीख १३-०७-२०१८  समाचार 
गुरुद्वारा तखत सचखंड श्री हजूर अबचल नगर साहब मण्डल चुनाव सूची 


गुरुवार, 12 जुलाई 2018

बज गया बिगुल गुरुद्वारा चुनावों का 
२० जुलाई से शुरू होगा मतदाता सूची बनाने का काम 

हजूर साहिब, नांदेड़ - आखिर जिलाधीश कार्यालय द्वारा गुरुद्वारा तखत सचखंड श्री हजूर अपचलनगर साहिब मंडल अंतर्गत तीन सदस्यों के चुनाव हेतु मतदाता सूचि बनाने के लिए तारीख २० जुलाई, २०१८ से प्रक्रिया शुरू करने के निर्देश जारी दिए है. तारीख  १८ अगस्त से पूर्व चुनाव सूचि में नाम दर्ज करवाना अनिवार्य है. इस चुनाव के मतदाता वो सिख हो सकते हैं जिनके नाम तारीख १ जुलाई, २०१८ तक के विधान सभा सूची में शामिल है. चार माह लम्बी प्रक्रिया के बाद तारीख ३ नवम्बर, २०१८ तक चलेगी. मतदाता प्रक्रिया शुरू होने से चुनाव लड़ने इच्छुकों में ऊर्जा जाग गई है. लेकिन जहां तक गुरुद्वारा कानून में संशोधन का विषय प्रस्तुत है वहां यह स्पष्ट है कि आंदोलन को तीतर बीतर करने के लिए चुनावों की प्रक्रिया फटाफट शुरू की गई है.
शेष   .......!
Happy Birth Day!!



नांदेड़ वाघाला शहर महानगर पालिका के पहले सिख महापौर 
और श्री गुरु नानक झीरा साहेब बीदर कमेटी के पदाधिकारी 
स. बलवंत सिंघ जी गाड़ीवाले 
को जनम दिवस के उपलक्ष में हार्दिक शुभकामनाएं। 

: शुभेच्छुक :
स. रविंदर सिंघ मोदी 
नांदेड़. 
अत्यंत तातडीचे अर्ज : 
प्रति,
मा. मुख्यमंत्री महोदय,
महाराष्ट्र शासन. 
(अधिवेशन नागपुर महाराष्ट्र)

विषय : अधिवेशन मध्ये गुरुद्वारा सचखंड श्री हजुरसाहिब मंडळ (बोर्ड) कायदा संशोधन रद्द करण्या बाबत
         : नांदेडच्या जनतेत प्रचंड रोष असल्या बाबत. 

मा. महोदय, 

शासनाने नांदेड येथील गुरुद्वारा तखत सचखंड श्री हजुर अबचल नगर साहिब मंडळ (बोर्डच्या) कायदा १९५६ मधील कलम ६, ७ आणि १५ मध्ये संशोधन प्रस्तावित केले आहे. आणि नागपूर येथे सुरु असलेल्या विधान सभा अधिवेशनात मंजुरीसाठी ठेवण्यात आले आहे. त्यावरून नांदेडच्या शीख समाजात प्रचंड रोष व्याप्त झाला आहे. शासन अल्पसंख्यांक शीख समाजाच्या धार्मिक संस्थे मध्ये बळजबरीने कायदा संशोधन करून संस्थेचे "सरकारीकरण" करत असल्याची भावना पसरत आहे. नांदेडच्या शीख समुदायाची संस्था हे "तखत " म्हणजेच धार्मिक पीठ आहे. या पवित्र स्थळाच्या पूजापाठाची विशेष शैली आहे, ज्याला मर्यादा म्हणतात. 

मुंबई आणि बाहेरचे काही काटकारस्थानी व्यक्ती या संस्थेवर आपला कब्जा करून मर्यादा बदलण्याच्या बेतात आहे. मुंबईचे आमदार यांनी अशा प्रवृत्तीचे नेतृत्व स्वीकारले आहे. आमदार तारासिंग आपली दिशाभूल करीत आहेत. त्यामुळे कायदा संशोधनाचा विषय वारंवार मांडला जात आहे. ता. १२ मार्च, २०१५ आणि ता. २७ जून, २०१८ रोजी गुरुद्वारा कायद्यात बदल करून शासनाने एका तखत (धार्मिक स्थळावर) वर राजकारण लादला आहे शिवाय स्थानिक शिखांच्या धार्मिक भावनांना ठेस पोहचवली आहे. भाजपा शासन शीख समाज विरोधी आहे काय असा प्रश्न येथे उपस्थित केला जात आहे. तेव्हा शासनाने गुरुद्वारा कायदयात बदल किंवा संशोधन करू नये तर ता. १२ मार्च, २०१५ रोजी केलेला संशोधन सुद्धा रद्द करावा. हि नम्र विनंती. धन्यवाद.

आपला, 

स. रवींद्र सिंघ मोदी, 
(Activist and News Reporter)
रा. अबचलनगर कॉलोनी, 
भगत सिंघ जी  रोड, 
नांदेड (महाराष्ट्र)
०९४२०६५४५७४. 
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कृपया कळावे हि विनंती. 

बुधवार, 11 जुलाई 2018

एक और षड़यंत्र उजागर !!
सरकारने बेशर्मी की सभी हद्दें पार की 
रविंदर सिंघ मोदी
११ जुलाई, २०१८ को एक और बात उजागर हुई कि महाराष्ट्र सरकार ने गुरुद्वारा तखत सचखंड श्री हजूर अपचल नगर साहिब बोर्ड (मंडल) में छह सीटें बढ़ाने का जो निर्णय लिया है उसमें एक निर्णय यह है कि सरकार द्वारा नियुक्त मनोनीत आठ सदस्यों में एक सदस्य सरकारी अधिकारी या कर्मचारी होगा जो गैर सिख होगा ! यानी गैर सिख को भर्ती करवाना मतलब हमारी संस्था को कब्जे में लेना है. 
है कि नहीं सिखों पर सीधा अत्याचार. अल्पसंख्यांक सिखों पर देवेंद्र फडणवीस सरकार का अन्याय देख लीजिये. इस तरह का निर्णय लेकर महाराष्ट्र सरकार ने सिखों की संस्था का सरकारीकरण करने की योजना पूर्ण कर ली है. कुछ दिनों बाद तो हमारी तीन सीटें (जिस पर चुनकर आते हैं.) और हजूरी खालसा दीवान भी कानून में संशोधन कर ख़ारिज कर दिए जाते शायद. भारतीय जनता पार्टी से सिख कभी इस तरह की उम्मीद नहीं रख सकते कि वो इतना ओछा कदम उठाएगी. 
सरकार ने बेशर्मी की सभी हद्दें लाँघ दी है. और इसके लिए तारासिंह ने मुख्य खलनायक की भूमिका निभाई है. ता. १२ जुलाई,  २०१८ को नागपुर में चल रहे विधान सभा के अधिवेशन सरकार ये निर्णय कर लें. एक धार्मिक सिख संस्था के साथ किया जा रहा यह सलूक बर्दाश्त से बहार हैं. मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस, राजस्वमंत्री चंद्रकांत पाटिल और तारासिंह का निषेध, निषेध, निषेध और निषेध.
   

मंगलवार, 10 जुलाई 2018

अब संतों ने भी गुहार लगाई 
मुख्यमंत्री जी संशोधन पीछे लें 
रविंदर सिंघ मोदी 
हजूर साहिब नांदेड़ में विगत दो सप्ताह से साध संगत में गुरुद्वारा बोर्ड कानून १९५६ में बदलाव किये जाने से असंतोष व्याप्त हैं. साधसंगत ने तो संशोधन को विरोध जताया ही है साथ ही आदरणीय पंजप्यारे साहिबान ने भी उस विषय में संज्ञान लेकर मुख्यमंत्री से कानून संशोधन पीछे लेने की अपील की है.  वहीं गुरुद्वारा लंगर साहिब के मुखी संत बाबा नरिंदरसिंघजी कारसेवा वाले और संत बाबा बलविंदरसिंघजी कारसेववाले द्वारा तारीख १० जुलाई, २०१८ को महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री श्री देवेंद्र फडणवीस को पत्र लिखकर कानून में हुए संशोधन को पीछे लेने की अपील की है. उन्होंने आदरणीय पंजप्यारे साहिबान के पत्र का हवाला लेकर निवेदन में कहा है कि नांदेड़ की शांति कायम रखीं जाए. बेवजह कानून संशोधन करना योग्य नहीं है. निवेदन पत्र की प्रतियां महाराष्ट्र के राजस्व मंत्री चंद्रकांत पाटिल, राजस्व विभाग के प्रधान सचिव, नांदेड़ के जिलाधीश और गुरुद्वारा बोर्ड के प्रधान को भेजी गई हैं. संतों ने भी एक तरह से प्रधान तारासिंह द्वारा किये गए जबरन संशोधन और बाहर के छह सदस्य बढ़ाने के निर्णय का विरोध जताया है. यदि यह देखकर भी तारासिंह संशोधन पीछे लेने की घोषणा जाहिर रूप से नहीं करता है तो उसके जैसा खुरापति और दखनी विरोधी प्रधान कोई और नहीं हुआ है. इतने विरोध के बाद भी तारासिंह का जमीर नहीं जागा और उसने संशोधन पीछे लेने की घोषणा सार्वजनिक नहीं की. पंजप्यारे साहिबान के पत्र और अपील के बाद भी उसने कोई स्पष्टीकरण नहीं दिया और ना प्रेस रिलीज ही जारी करवाया हैं. अब जब हजूर साहिब के दो सेवाभावी संतों ने इस विषय में मांग की है तो क्या तारासिंह का जमीर जागेगा?  क्या तारासिंह समीकरणों से बाहर निकलकर ये घोषणा करेंगा कि वो संतों की अपील की परवाह करता है? यदि तारासिंह द्वारा अगले ४८ घंटों में हजूर साहिब की संगत से माफ़ी मांगकर संशोधन पीछे लेने की स्वयं घोषणा नहीं करता है तो गुरुद्वारा बोर्ड के कार्यालय के सामने मजबूरन आंदोलन शुरू करना पड़ जायेगा. 
गुरुद्वारा बोर्ड चुनाव की प्रक्रिया प्रारंभ : 
चुनाव लड़ने के इच्छुकों की बाँछें खिलीं !

रविंदर सिंघ मोदी 
गुरुद्वारा तखत सचखंड श्री हजूर अबचल नगर साहेब मंडल (बोर्ड) के तीन सीटों पर चुनाव करवाने लिए जिला प्रशासन द्वारा चुनाव प्रक्रिया प्रारंभ कर दी गई है. अभी हाल ही में गुरुद्वारा बोर्ड कार्यालय द्वारा जिलाधीश कार्यालय में पांच लाख की राशि जमा कराकर झटपट तीन सीटों के इलेक्शन करवाने की अपील की थी. तीन सीटों के चुनाव जल्दी घोषित करवाने के पीछे मुख्य मंशा यही है कि अभी हाल में गुरुद्वारा बोर्ड अध्यक्ष तारासिंह द्वारा कानून संशोधन कर बाहर के लोगों  के लिए छह सीटों को बढ़ाने का विषय दखन की संगत भूल जाए. तारासिंह के उस निर्णय का विरोध खत्म हो जाए. यदि यहाँ दबाव कम हुआ तो बाहर के छह सीटें पक्की मानकर चलिए. चुनाव के भूखें लोग शायद यह स्थिति न लाद दें यह सबसे बड़ा डर है. गुरुद्वारा बोर्ड जब तक बर्खास्त नहीं होता तब तक निष्पक्ष चुनाव संभव नहीं है. 
दूसरी मुख्य बात यह कि, जिला प्रशासन ने ऐसे समय चुनाव प्रक्रिया शुरू की है जहां से देखा जाये तो चुनाव दशहरा और दीवाली के बीच मतदान हो सकता है जो कि किसी भी लिहाज से सही नहीं लगता. त्योहारों के बीच चुनाव करवाना किसी भी दृष्टि से योग्य नहीं होगा. चुनावों के लिए सही समय नवंबर का अंतिम सप्ताह या दिसंबर महीना ठीक रहेगा. अक्टूबर महीने में बारिश की संभावना कायम रहती है. ऐसे में चुनाव प्रचार करनेवालों के लिए के बहुत सी परेशानियां खड़ी हो सकती हैं. 
जो नेतागण चुनाव लड़ने  के लिए एक पैर पर खड़े है वें बस आपके बहुत करीब पहुँच गए हैं ऐसा मानकर चलिए. सभी की बांछे ख़िल गई हैं. कुछ समूहों में तेजी दिखाई दे रहीं हैं. कुलमिलाकर ५० एक उमीदवार आज की घड़ी में काम पर लग गए हैं. लेकिन परिपक्वता के अभाव में कहीं गुरुद्वारा बोर्ड पर परतंत्र न लग जाएं?

सोमवार, 9 जुलाई 2018

तारा सिंह यह खुलासा करें कि,
गुरुद्वारा बोर्ड कानून का संशोधन रद्द होगा या नहीं ?

रविंदर सिंघ मोदी 
हजूर साहिब, नांदेड़ - गुरुद्वारा तखत सचखंड श्री हजूर साहिब बोर्ड कानून १९५६ में प्रधान तारासिंह ने ता. २७ जून, २०१८ के दिन जबरन संशोधन करवाकर बाहर के छह मेंबर बढ़ाने का निर्णय महाराष्ट्र सरकार के मंत्री मंडल में करवाया है. जिससे हजूर साहिब के स्थानीय सिखों में गहरा रोष जागृत हो उठा है. साध संगत का रोष और मांग के बाद तखत साहब के आदरणीय पंज प्यारे साहिबान द्वारा हालिया निर्णय (अध्यादेश) रद्द करने की अपील की गई. पंज प्यारे साहिबान ने महाराष्ट्र सरकार और तारा सिंह से भी गुहार लगाई कि संशोधन अति शीघ्र रद्द करे. 
उससे पूर्व साधसंगत द्वारा हजूरी विकास मंच के माध्यम से ता. २८ जून, २०१८ को जिलाधीश कार्यालय के सामने धरना और रोष प्रदर्शन किया गया था. जिलाधीश को एक ज्ञापन भी सौंपा गया था. इतना होने के बावजूद भी तारा सिंह नाम का शातिर भाजपा नेता संशोधन के विषय को लेकर ख़ामोशी अपनाए हुए है. उसने अभी तक भी खुलासा नहीं किया है कि ये अध्यादेश रद्द किया जायेगा. पंज प्यारे साहिबान की अपील (आदेश) के बाद तारा सिंह को ये तुरंत घोषित कर देना चाहिए था कि वह संशोधन रद्द करवा देगा. लेकिन नहीं, उसे अभी भी आस है कि उसकी दखनियों के दमन करने की योजना सफल हो जाएगी और उसका परिवार आजीवन गुरुद्वारा बोर्ड पर अपनी हुकूमत चलायेगा. 
तारा सिंह के कुछ समर्थक यह मानकर कि हो सकता हैं छह सीटों में से एक पर उनका नंबर लग जाए, इसलिए संगत की इच्छा के विरुद्ध उसका साथ दे रहे हैं, साथ ही संशोधन ठीक है कहकर हवा बदलने की कोशिश कर रहे हैं. मैं, आश्वस्त करना चाहता हूँ कि हजूरी साध संगत जो केवल श्री गुरु गोबिंद सिंघजी महाराज की वफ़ादार हैं वो यह आंदोलन ठंडा नहीं होने देंगी. यह समस्त हजुरसाहिब वासियों के स्वाभिमान का और भविष्य का सवाल हैं. ये मुम्बईया राजनीति हजूर साहिब की साध संगत से उनका गुरुद्वारा हमेशा के लिए छीनने का षड़यंत्र कर रही है, और उसके मास्टर माइंड तारा सिंह है. यदि ऐसा नहीं है तो तारा सिंह को तुरंत ये घोषणा कर देनी चाहिए कि पंज प्यारे साहिबान का आदेश और हजूरी साध संगत की भावनाओं की वह इज्जत करता हैं अथवा नहीं.
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शनिवार, 7 जुलाई 2018

रविवार को भारी वर्षा होने की चेतावनी जारी 
नांदेड़ - नांदेड़ जिला और आसपास के जिलों में रविवार (८ जुलाई) को भारी बारिश होने की संभावना मौसम विभाग द्वारा जताई गई है. इस सूचना पर नांदेड़ महानगर पालिका द्वारा चेतावनी जारी की गई है कि अधिक बरसात होने से शहर के निचले हिस्सों में बारिश का पानी जमा हो सकता है. ऐसे समय दुर्घटना भी संभव है. इसलिए भारी बारिश में और जमा हुए पानी में से कोई नागरिक न गुजरे. यदि अधिक वर्षा होती है तो नांदेड़ की नदियों और छोटे नालों का जलस्तर बढ़ सकता है. नांदेड़ जिले में सभी  अच्छी बारिश होने  के समाचार मिले हैं. लेकिन रविवार को बड़ी बरसात होने की चेतावनी जारी हुई है. गोदावरी नदी पर स्थित विष्णुपुरी बांध का जलस्तर बढ़ने के भी समाचार है. 
मुंबइया लोगों को भर्ती कर ४० हजार वेतन दिया जायेगा !!
बोर्ड मीटिंग में चर्चा नहीं, लेकिन प्रोसेडिंग में मुद्दा शामिल कैसे हुआ?


रविंदर सिंह मोदी 
हजूरसाहिब - गुरुद्वारा सचखंड बोर्ड के प्रधान तारासिंह कितने दखनी विरोधी विचारधारा से ओतप्रेत हैं उसका जीता-जागता सबूत यह है कि उन्होंने अपने मुंबइया रिश्तेदारों को गुरुद्वारा बोर्ड में सीधी नौकरियां देकर ४० से ६० हजार का वेतन देना तय भी कर लिया है. मार्च २०१८ में मुंबई में हुई गुरुद्वारा बोर्ड की मीटिंग में कोई जिक्र नहीं किया गया लेकिन सिक्योरिटी ऑफिसर और पीआरओ को भर्ती करने का मुद्दा मीटिंग की प्रोसेडिंग में शामिल कर लिया गया. दो लोगों को ४० हजार वेतन पर लेने का निर्णय बाद में शामिल कर लिया गया. इससे पहले सोलह देशों की सैर कर आये करोड़पति रिश्तेदार लाम्बा को सभी सुविधाओं के अतिरिक्त ६० हजार महीना वेतन दिया जा रहा है, ताकि वो अच्छे से म्यूजियम का बजट बढ़ा सके. समाज में तारासिंह की इस नीति का खुला विरोध हो रहा है. हजूर साहिब में इतने बेरोजगार और काबिल लोग रहते हुए भी मुंबई से यहाँ कर्मचारियों की भर्ती के क्या मायने है? क्या मुंबई में बैठकर नौकरियों का भी कारोबार चल रहा है? यदि ऐसा है तो आपके तीन सालों के कामकाज की इन्क्वायरी (चौकशी) होनी चाहिए. तीन सालों में क्या-क्या खर्च किया गया और कर्मचारियों को योग्यतानुसार प्रमोशन नहीं देने के पीछे क्या कारण रहे हैं उन बातों का भी खुलासा होना जरुरी हैं.  और भी ऐसी बातें हो सकती है कि मीटिंग में चर्चा नहीं हुई हो मगर दिल लगाकर खर्चा हुआ हो?
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बुधवार, 4 जुलाई 2018

तारासिंह ने मुख्यमंत्री की दिशाभूल की 
फाइल फोटो 
                                                                      रविंदर सिंघ मोदी 
भारतीय जनता पार्टी के मुलुंड (मुंबई) के विधायक तारासिंह ने नांदेड़ के गुरुद्वारा तखत सचखंड बोर्ड पर हमेशा हमेशा के लिए अपने परिवार और निकटवर्तियों की सत्ता स्थापित करने के मनसूबे के तहत गुरुद्वारा बोर्ड कानून १९५६ में संशोधन करवाने के लिए एक तरह से महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री श्री देवेंद्र फडणवीस का गलत ढंग से उपयोग किया. उन्होंने मुख्यमंत्री की दिशाभूल कर एक कागज़ पर लिखे चार शब्दों से कानून संशोधन करवा लिया.  गुरुद्वारा बोर्ड संस्था में शासन नियुक्त सदस्यों की संख्या बढाकर दो से आठ कर दी गई.  
तारासिंह की बातों में आकर मुख्यमंत्री ने यह भी विचार नहीं किया कि इस कार्य के लिए गुरुद्वारा बोर्ड का स्वतंत्र कानून भी विद्यमान है. कानून संशोधन  के लिए एक प्रक्रिया पूर्ण की जाती है. राजस्वमंत्री ने भी ध्यान नहीं दिया. उस पर श्री मन्नू श्रीवास्तव (राजस्व विभाग मुख्य सचिव) ने भी प्रक्रिया की अनुपालना नहीं की. महाराष्ट्र शासन ने एकतरफा निर्णय लेकर तारासिंह को खुश कर दिया लेकिन हमेशा - हमेशा के लिए तारा सिंह के घर की सत्ता गुरुद्वारा बोर्ड पर स्थापित कर दी. अब तारासिंह के घर मुंबई के लोग कभी भी गुरुद्वारा बोर्ड के मेंबर या प्रधान बन सकते है. और यह सब संभव हुआ है मुख्यमंत्री की विशेष अनुकंपा से. मुख्यमंत्री के इस निर्णय से दक्षिण भारतीय सिखों में भारी रोष है. यह संस्था नांदेड़ के सिखों ने बनाई थी और संस्था संचालन का अधिकार नांदेड़ के सिखों को हैं. नांदेड़ के सिखों से उनकी संस्था छीनने के मनसूबों में सबसे अहम् स्वार्थ यह साधा जा रहा है कि यहाँ की पूजापाठ की शैली जिसे हम हजूरी मर्यादा कहते हैं वो बदल दी जाएं. उत्तर भारतीय सिख और दक्षिण  सिखों के बीच दर्रार डालने के उद्देश्य से ये षड़यंत्र रचा गया है. उस षड़यंत्र को पूर्ण करने के लिए महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस का उपयोग कर लिया गया. मुख्यमंत्री की सत्ता की ताकत के तले नांदेड़ के सिखों का दमन करने की गहरी साजिश रची गई. साम दाम दंड भेद अपनाकर नांदेड़ के सिखों के अधिकार छिन लिए गए हैं. मुख्यमंत्री को चाहिए कि वे तारासिंह से पूर्ण तपशील पूछें. ये पूछें कि जो संशोधन किया गया है वो केवल कोरम पूर्ण करने  किया गया हैं या नांदेड़ के सिखों से दुश्मनी निकलने के लिए किया गया है. 

मंगलवार, 3 जुलाई 2018

सिख कहीं भी सुरक्षित नहीं!!
रविंदर सिंघ मोदी 
अफगानिस्तान के जलालाबाद क्षेत्र में हुए आतंकी हमलें में १३ सिख और ८ हिन्दू भाई शहीद हो गए. इस हमले की जिम्मेदारी कुख्यात आतंकवादी संगठन आईएसआईएस द्वारा ली गई है. हमला निंदनीय भी है और चिंताजनक भी. इस हमले में मुस्लिम-सिख-हिन्दू भाईचारे के लिए विगत २० वर्षों से जूझ रहे सिख नेता अवतारसिंघ खालसा और ऐतहासिक गुरुद्वारा नानक दरबार के प्रधान सरदार रवेल सिंघ को मुख्य निशाना बनाया गया. आतंकियों को जानकारी थी कि सिखों  का प्रतिनिधिमंडल अफगानिस्तान के राष्ट्रपति अशरफ गनी से मुलाकात के लिए जानेवाले है. जिस स्थान पर राष्ट्रपति से भेट होनी थी उस स्थान से एक हजार मीटर की दूरी पर हमले को अंजाम दिया गया.
जानकारी है कि सरदार अवतार सिंघ खालसा अफगानिस्तान में अल्पसंख्यांक के बड़े नेता थे और अक्टूबर २०१८ में होने वाले संसद चुनावों में उनका सांसद बनना लगभग तय लग रहा था. अफगानिस्तान के कट्टरवादी नेताओं को ये बात खटक रही थी. सिख नेतृत्व उभरने से रोकने के लिए इस हमले को अंजाम दिया  गया. सिख नेतृत्व सभी को खटकता है. उसमें सच्चा, प्रामाणिक और सकारात्मक नेतृत्व हो तो अन्य लोगों  के लिए चिंताएं बढ़ जाती हैं. सिख सत्ता में रहे लेकिन बोले नहीं, कोई बात नहीं करे ऐसी व्यवस्था बिछाई जाती है. अक्सर कमजोर और चापलूस मनोवृति के लोग हमारा नेतृत्व करते हैं और चुप्पी या स्वार्थ के कारण समुदाय का नुकसान कर  देते हैं. अवतारसिंह खालसा बोलनेवाले और जान हथेली पर लेकर चलनेवाले नेता थे यह बात बार-बार साबित हुई है. उपर्युक्त घटना दुःखद हैं और संकेत कर रही है कि सिखों के प्रति किस तरह के व्यवहार की मंशा पाली जा रही है.
अगानिस्तान में मारे गए सिख धर्म के सच्चे अनुपालक थे. वो सिख उस मार्ग में बरसों से अपना निवास बनाकर बैठें थे जिस राह से श्री गुरु नानक देव जी महाराज की मक्का-मदीना और अरब राष्ट्रों के लिए उदासी हुई थी. सभी शहीद सिखों और हिन्दू भाइयों की शाहदत ने हमें दुःखी कर दिया हैं. हमारी संवेदना ये अहसास करवा रही हैं कि विश्व में सिख कहीं भी सुरक्षित नहीं है. बाहर देशों में तो क्या हम अपने देश में भी सुरक्षित महसूस नहीं कर रहें हैं. सन १९८४ के सिख विरोधी दंगे हो, ऑपरेशन ब्लू स्टार के बाद निर्दोष सिखों का कत्लेआम हो, छत्तिसिंघपुरा का हत्याकांड हो, सब घटनाएं सिखों की असुरक्षा पर सवाल खड़ा करती हैं.
अमरीका, ऑस्ट्रेलिया, इंग्लैंड, अरब राष्ट्रों में सिखों को लगातार निशाना बनाया जा रहा हैं. पंजाब में गुरुद्वारें भी सुरक्षित नहीं हैं. सिखों के लिए देश में सचमुच दुविधा की स्थिति दिखाई दे रही है. सिखों को अल्पसंख्यक होने का सही स्तर भी प्राप्त नहीं है. ऐसा लग रहा है कि सिख कहीं भी सुरक्षित नहीं है. 

सोमवार, 2 जुलाई 2018

नांदेड़ के सिखों पर 
महाराष्ट्र सरकार की दादागिरी !!
रविंदर सिंघ मोदी
नांदेड़ (हजूर साहिब) सिखों की आस्था भूमि है. यहाँ सिखों के ग्यारहवें गुरु और मानवता के रक्षक श्री गुरु ग्रन्थ साहिब जी का युगोंयुग अटल निवास है. ये भूमि सिखों की प्रथम श्रद्धा भूमि है. विगत तीन सौ सालों से सिख परिवार यहाँ निवास कर रहे हैं. ऐसे पवन भूमि के निवासी सिखों के साथ महाराष्ट्र सरकार सौतेला व्यव्हार कर रही हैं. नांदेड़ बोर्ड पर मुम्बईया राज हमेशा  के लिए स्थापित करने के लिए गुरुद्वारा बोर्ड (मंडल) के प्रधान भारतीय जनता पार्टी के मुलुंड के विधायक तारा सिंघ ने मीटिंग की गणपूर्ति संख्या  (कोरम) मुंबई में पूर्ण हो इस मंशा के साथ केवल एक पत्र मुख्यमंत्री को सौंपा और देवेंद्र फडणवीस नाम के भाजपा मुख्यमंत्री ने बगैर कोई पूछताछ किये, बगैर किसी की राय लिए, बगैर समाचार पत्र में सुचना दिए बोर्ड कानून में संशोधन लादकर सरकार द्वारा मनोनीत सदस्यों की संख्या २ से बढाकर ८ कर दी.
सरकारी सदस्यों संख्या जाने से अब तारासिंह मुंबई में बैठकर कोरम पूर्ण कर पायेगा. उसकी मंशा सरकार ने  पूर्ण कर दी है. मुख्यमंत्री और राजस्वमंत्री ने मिलकर हजुरसाहिब के सिखों सिखों हाथ से उनकी धार्मिक संस्था पूरी तरह से छीनने का काम किया है. तीन साल पहले कानून की धारा ११ में बदलाव कर तारासिंह को बोर्ड का प्रधान बनाया गया. अब बाहर के लोगों को हमारी संस्था में सदस्य बनाने का निर्णय लादा गया. जिसे नागपुर विधानसभा के अधिवेशन में मंजूरी प्रदान करने की नियत से प्रस्तुत किया जा रहा हैं. तारीख ४ जुलाई से नागपुर अधिवेशन शुरू होगा.
महाराष्ट्र सरकार की इस दादागिरी के खिलाफ सिख समुदाय को एकजगह आकर लड़ाई लड़ना जरुरी है. तारासिंह और उसके कुछ समर्थक (चमचे) सरकार से इस तरह के संशोधन करवाकर वे खुश हो रहे है. दूसरी ओर हजुरसाहिब की साधसंगत में गुस्सा और रोष छाया हुआ हैं. हर घटक उस कृति का निषेध कर रहा हैं.
लेकिन तारासिंह इस बात से खुश हो रहा हैं कि दखनी मेम्बरों को उसने हटाकर अपनी खुद की सत्ता स्थापित कर दी है. मुख्यमंत्री को तारासिंह ने गुमराह कर बोर्ड में दो बार संशोधन करवाया है. एक तरह से मुख्यमंत्री से उसने गलत काम करवाया है.
इस काम में जाहिर हैं कि राजस्व (महसूल) विभाग और मुम्बईया चरित्रों की मिलीभगत है. हजूर साहिब की मान मर्यादा और बोर्ड रचना से खिलवाड़ करवाने वाला तारासिंह तनखैया का पत्र है लेकिन क्या करे वो तो अमृतधारी सिख भी नहीं है. इसलिए हजूर साहिब के सभी सिखों को एकजुट होकर तारासिंह की सत्ता हमेशा  हटा देनी चाहिए. साथ ही भाजपा सरकार की दादागिरी का भी प्रतिकार करना चाहिए. कुछ लोग जो तारा सिंह के अहसानों तले दबे हुए है या उसके जरिये आगे पद पाने की लार मुँह से टपकाते घूम रहे हैं उन्हें हजूर साहिब नमक याद करने की जरुरत है.
(इस लेख के नीचे आप अपना निषेध जता सकते हैं.) 

बुधवार, 27 जून 2018

समझ लीजिए,  
दखनी संगत के हाथ से गुरुद्वारा बोर्ड चला गया!

रविंदर सिंह मोदी 
बुधवार,  २७ जून, २०१८ की तारीख अच्छी तरह से याद रख लीजिये दखनी हजूरी साध सांगत जी, क्योंकि यहीं वो तारीख है जिसने गुरुद्वारा बोर्ड की सत्ता हमेशा हमेशा के लिए हमसे छिन ली है. अब केवल गुरुद्वारा दर्शन कीजिये और घर लौट जाइये. जो कर्मचारी हैं , उन्हें तो सीट पर जो बैठा हो उसी की गुलामी करनी है इसलिए अब आगे क्या कहे. 
महाराष्ट्र सरकार ने गुरुद्वारा बोर्ड कानून की धारा ६ (१) में एक बार फिर संशोधन करते हुए अलग - अलग शहरों के प्रतिनिधि बढ़ाने के उद्देश्य से अब मनोनीत संख्या दो से बढाकर आठ कर दी है. हजूरी सिखों के तीन सीटों के चुनाव होंगे.  
सरकार ने ये संशोधन किसके कहने पर किया यह खुलासा होने जरुरी है. गुरुद्वारा बोर्ड के प्रधान कुछ भी कहने के लिए तैयार नहीं है. तारासिंह की चुप्पी में ही बहुत कुछ छुपा हुआ है. सरकार ने हमारा बोर्ड अब मुंबई  बाहर के शहरों के सिखों के नाम कर दिया है. मुख्यमंत्री को ये अधिकार किसने दिया है कि वर्षों पुरानी इस संस्था पर बाहर के लोग लाद दे. हमारे कुछ अपने लोगों ने जो भूमिका निभाई है वो शर्मसार करनेवाली है.  दखनी समाज की सभी कुर्बानियों को आज तिलांजलि मिली हैं. अब आपका गुरुद्वारा आपके हाथ से निकल गया है समझों. अब शौक से लड़िये कोई छुड़ाएगा नहीं. मेंबर बनिए, प्रधान बनिए..... मेरी शुभकामनाएं. 
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मंगलवार, 26 जून 2018

जनम दिन मुबारक !!
हजूर साहिब के व्यावसायिक 
हमारे मित्र 
गुरमीत सिंघजी तबेलेवाले 
को जन्मदिवस के उपलक्ष में हार्दिक शुभकामनाएं. 
: शुभेच्छुक :
रविंदर सिंघ मोदी 

२८ जून को धरना आंदोलन 
क्या चाहते हैं हजुरसाहिब के लोग? 
रविंदर सिंह मोदी 
अजब लोग हैं जिन्हें सामाजिक और सामूहिक लाभ नज़र नहीं आ रहा हैं. समाज से अधिक व्यक्तिगत लाभ पाने की अधिकतर लोगों की मंशा है. वहीं कुछ देखनी भाई गुरुद्वारा बोर्ड के प्रधान तारासिंह के "मिशन अमेंडमेंट" को लाभ पहुंचाने के सारे उद्योग करते दिखाई दे रहे हैं. ऐसे में ता. २८ जून, २०१८ को नांदेड़ के जिलाधीश कार्यालय के सामने हजूरी विकास मंच के धरना कार्यक्रम को प्रभावित करने प्रयास हो सकते हैं. कुछ लोगों ने नासमझी और गैरों के प्रति वफ़ादारी का परिचय देने के लिए तिकड़म लड़ाना शुरू कर दिया है. यदि गुरुद्वारा तखत सचखंड बोर्ड संस्था के कानून में भारतीय जनता पार्टी और शिवसेना की मिली जुली सरकार मिलकर संशोधन करती है, और मुंबई, पुणे, नासिक, नागपुर और औरंगाबाद के सिंघसभा गुरुद्वारों से सदस्य नियुक्ति का निर्णय लिया जाता है तो उसके लिए सीधे तौरपर वही लोग जिम्मेदार होंगे जो तारासिंह के संकेतों पर यहाँ काम कर रहे हैं. कहना न होगा कि, उनकी वफ़ादारी श्री गुरु गोबिंदसिंघजी की नगरी और यहाँ के सिखों के लिए नहीं बल्कि बोर्ड का सरकारीकारण करनेवालों के साथ है. जो लोग आज गुरुद्वारा बोर्ड कानून में सम्भाव्य संशोधन को लेकर गंभीर नहीं है उनके लिए यही कहा जा सकता हैं कि वे संशोधन के पक्षधर है. वो लोग स्वयं चाह रहे हैं कि गुरुद्वारा बोर्ड संस्था पर बाहर के लोग आकर प्रशासन करें. कुछ लोग अभी भी एक नहीं होना चाह रहे हैं. यदि ऐसा नहीं है तो २८ जून को ११. बजे जिलाधीश कार्यालय के सामने जुटकर एक्ट अमेंडमेंट का विरोध दर्ज करें.   

सोमवार, 25 जून 2018

हार्दिक बधाई !!

गुरुद्वारा सचखंड बोर्ड के मैनेजिंग कमिटी के पूर्व सदस्य 
सरदार देवेंद्र सिंघजी मोटरावाले को 
जन्मदिवस के उपलक्ष में हार्दिक शुभकामनाएं. 
: शुभेच्छुक :
रविंदर सिंघ मोदी 
मन की बात में प्रधानमंत्री मोदी ने कहा : 
गुरु नानक देवजी ने भेदभाव मिटाने के लिए कार्य किया 
सिख जगत में नयी चेतना जागी 
प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी 

रविंदर सिंह मोदी 
भारत के प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी ने रेडियो पर "मन की बात" कार्यक्रम में कहा, ' गुरु नानक देव जी ने भेदभाव मिटाने और तमाम मनुष्य जाति को समान स्तर जीने के अधिकारों के लिए कार्य किया था. उन्होंने लंगर सेवा शुरू कर जातिपाति का भेद दूर किया. उनके दर्शाए मार्ग पर चलकर देश में समानता स्थापित की जा सकती है. उन्होंने आगे कहा, वर्ष २०१९ में गुरु नानक देवजी का ५५० वां प्रकाशपर्व मनाया जायेगा. भारत सरकार इस पर्व को मनाएगी.'

प्रधान मंत्री ने साथ ही जलियाँवाला बाग हत्याकांड को वर्ष २०१९ में सौ साल पूर्ण होने की याद में शहीदों के प्रति अपना सम्मान भी व्यक्त किया. मन की बात कार्यक्रम में मोदी जी ने गुरु नानक देव जी के प्रकाश पर्व का जिक्र छेड़कर सिख जगत में एक नयी चेतना का संचार किया. अभी हाल ही में पंजाब के मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह ने प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी से मिलकर श्री गुरु नानक देवजी के ५५० वें प्रकाशपर्व को मानने के लिए  २१४५ करोड़ राशि के पैकेज देने की मांग की थी. साथ ही जलियाँवाला बाग  घटना के सौ साल पूर्ण होने के उपलक्ष में कार्यक्रमों  और विकास के लिए एक सौ करोड़ के राशि की मांग की थी. 
मोदी ने दोनों विषयों पर अपनी भूमिका स्पष्ट कर दी हैं. प्रधानमंत्री ने सिख गुरुओं से संबंधित विषयों पर हमेशा ही सकारात्मक सोच का परिचय दिया हैं. दशम पिता श्री गुरु गोबिंद सिंघजी महाराज के ३५० वें जन्मोत्सव के अवसर पर भी नरेंद्र मोदी ने ५०० करोड़ की राशि का प्रावधान किया था. तखत हरिमंदर साहेब पटना के लिए विकास पैकेज दिया. नांदेड़ के स्वामी रामानंद तीर्थ विश्वविद्यालय अंतर्गत श्री गुरु गोबिंदसिंघजी अध्यासन केंद्र के लिए २५ करोड़ और स्टेडियम के लिए ४२ करोड़ राशि का पैकेज भी प्रदान किया. प्रधानमंत्री की इस सकारात्मकता के पीछे उनके धार्मिक, सामाजिक और सांस्कृतिक अध्यन का भी योगदान है. भारत देश की संस्कृति के लिए, देश की रक्षा के लिए किसने क्या बलिदान दिया हैं उससे प्रधानमंत्री मोदी जी अवगत है. देश में सिखों के इतिहास और बलिदान को लेकर भी मोदी जी अक्सर सकारात्मक सन्देश देते रहे हैं. उन्होंने विदेशों में बसें सिखों को भी बार-बार सिख इतिहास से जुडी घटनाओं जिक्र कर सिखों के आत्मबल और इच्छाशक्ति का उल्लेख किया.
अभी हाल की ही बात है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लंगर सामग्री से जीएसटी हटाने के लिए सकारात्मक कदम उठाया. ये सभी बातें मोदी जी की उस विचारधारा का परिचय देती है जो सिख गुरुओं और उनके इतिहास और बलिदान की क़द्र करती है. मोदी जी का मन हमेशा सिख गुरुओं की विचारधारा से जुड़ा रहे यहीं मनोकामना व्यक्त करता हूँ. मोदी जी को धन्यवाद् और प्रणाम.

रविवार, 24 जून 2018

हजूरी विकास मंच की नयी पहल....!!
रविन्दरसिंघ मोदी 
हजूर साहिब, नांदेड़ के सिखों का सबसे बड़ा दुर्भाग्य उनकी गुटबाजी रहीं है. पिछले ६० से ७० वर्षों में कभी भी समाज एकसंघ नहीं रहा है. विचारधारा का टकराव, आपसी मनमुटाव, व्यक्तिगत स्वार्थ, सत्ता की लालसा, दूसरे के प्रति द्वेष और राजनीतिक हस्ताक्षेप के कारण समाज गुटों - गुटों और खेमों में बँटकर रह गया. आज भी गुटबाजी सहित उपर्युक्त सभी मुद्दे कारणीभूत माने जा रहे हैं. गुरुद्वारा बोर्ड की सत्ता पाने और मेम्बरशिप पर कब्ज़ा करने के लिए सभी हैरान - परेशान हैं. साधसंगत की सेवा करने की प्रामाणिक मंशा किसी की भी लग नहीं रही हैं. सभी को चुनावों की जल्दी है. पर बहुत से ऐसे भी सिख हैं जिन्हे दिल से यह लग रहा हैं कि गुरुद्वारा बोर्ड पर स्वच्छ चरित्र और अभ्यासक वृति के लोग आये. चाहे चुनकर या नियुक्त होकर. वहीँ अधिक संख्या में सिख छह रहें हैं कि हजूर साहिब के लोगों की संस्था पर हजूर साहिब के लोग कायम रहें. ऐसे में हजूरी विकास मंच की रविवार (ता. २४ जून,  २०१८) को हुई बैठक से एक नहीं पहल शुरू होने की आशा पल्लवित हुई है.  सरदार अवतार सिंह पहरेदार ने समाज की बैठक बुलाकर विविध धड़ों और नेताओं को एकत्रित कर गुरुद्वारा बोर्ड में सुधारों को लेकर आंदोलन करने की नीति पर सभी को एकमत करवाया. उनका प्रयास सराहनीय है और वे बधाई के पात्र भी.  जो नेता और कार्यकर्ता बैठक में थे उनमें सरकार के उस निर्णय के प्रति रोष नज़र आया जिसमे सरकार ने गुरुद्वारा बोर्ड अध्यक्ष की नियुक्ति का अधिकार अपने अधीन कर लिया है. सरकार ने मार्च २०१५ में ये निर्णय लिए था लेकिन उससे पूर्व भाजपा विधायक तारा सिंह की मंशा के अनुरूप गुरुद्वारा सचखंड बोर्ड कानून १९५६ की धारा ११ में छेड़छाड़ (संशोधन) कर लिया था. इस तरह महाराष्ट्र सरकार ने हजूर साहिब की संगत के अधिकारों पर वार करते हुए गुरु घर के प्रबंध के सूत्र अपने हाथ ले लिए थे. जिसके बाद ये प्रचलन शुरू हो गया कि सरकार अपनी मर्जी का अध्यक्ष सीधे नियुक्त कर दे भले फिर वो कोई भी क्यों न हो. संस्था नांदेड़ की, गुरुद्वारा नांदेड़ में, लेकिन अध्यक्ष वो, जो सरकार चाहें. ये घातक निर्णय हजूर साहिब के सिखों की स्वतंत्रता छीननेवाला है. गुरुद्वारा बोर्ड के १७ सदस्यों को ये अधिकार जाता हैं कि वें अपना प्रधान, सचिव, उपाध्यक्ष और सभापति स्वय चुनलें, लेकिन ये अधिकार सरकार के अधीन चले गए हैं. हजूरी विकास मंच की बैठक में आंदोलन को लेकर रूपरेखा ठहराई गई. अब ता. २८ जून, २०१८ को जिलाधीश कार्यालय के सामने आंदोलन  जायेगा. धरना धरा जायेगा. समाज के सभी घटक एकत्र आने से आंदोलन मजबूत होगा. ये आंदोलन न हो या कमजोर पड़े इसलिए कुछ राजनीतिक लोग अपने मोहरों को काम पर लगा सकते हैं. या कुछ स्वार्थी लोग जिन्हें स्थानीय सिख समाज के भविष्य से कोई लेना देना नहीं है, केवल मेंबर बनने की मंशा है वे विघ्नसंतोषी धर सकते हैं. इन सब बातों की संभावनाओं के चलते एक नयी पहल की शुरुवात हुई है. मैं इस पहल के लिए मुबारकबाद देता हूँ और अपील करता हूँ कि हजूरी साधसंगत एकजुट होकर आंदोलन में शामिल होकर शांतिपूर्वक समाधान तलाश करे. 
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शनिवार, 23 जून 2018

तीन सिख आईपीएस अधिकारीयों ने 
हजुरसाहिब में मत्था टेका 
सिख आईपीएस अधिकारी धनवंत कौर, अमनजीत कौर और जसमीत सिंघ का सत्कार करते हुए सरदार डी.पी. सिंघ, श्री काकड़े और अन्य। 
हजूर साहिब नांदेड़ 
हजूर साहिब के श्री गुरु गोबिंदसिंघजी हवाई अड्डे पर फ्लाइट्स शुरू होने के बहुत से लाभ सामने आ रहे हैं. जिनमें एक लाभ तो ये है कि समय बचाने के लिए यह सेवा उपयोगी साबित हो रही है. शनिवार (तारीख २३ जून, २०१८) को सिख समाज के तीन होनहार आईपीएस अधिकारीयों ने अमृतसर से नान्देड़ फ्लाइट्स से यात्रा कर गुरुद्वारा तखत सचखंड साहिब के दर्शन किये.
जिनमे अमृतसर की मूल निवासी और बैच वर्ष २००६ की धनप्रीत कौर जो केंद्रीय सामाजिक न्याय मंत्री विजय कुमार सापला की सुरक्षा अधिकारी, पंजाब की निवासी लेकिन गुवाहाटी (आसाम) में पुलिस अधीक्षक अमनजीत कौर और दिल्ली के डीसीपी  रूप में कार्यरत जसमीत सिंघ (आईपीएस) का समावेश था.
नांदेड़ के जिला पुलिस अधीक्षक श्री चंद्रशेखर मीणा ने इन तीनों आईपीएस अधिकारीयों का स्वागतकर उन्हें विशेष वाहन भी मुहैया करवाएं। मिली जानकारी के मुताबिक धनवंत कौर और चंद्रशेखर मीणा एक ही बैच के अधिकारी है.
गुरुद्वारा तखत सचखंड हजूर साहिब में तीनों अधिकारीयों को सिरेपाव देकर सत्कार किया गया. बोर्ड  प्रशासकीय अधिकारी सरदार डी.पी. सिंह और अधीक्षक गुरिंदर सिंह वाधवा ने गुरुद्वारा की प्रतिकृति और तलवार प्रदानकर उनका यथोचित सत्कार किया. गुरुद्वारा दर्शन और लंगर प्रसाद ग्रहण करने के बाद फ्लाइट से ये अधिकारी अमृतसर की ओर रवाना हो गए. उन्हें यहाँ वजीराबाद के निरीक्षक काकड़े, गुरमीत सिंह दफेदार, गोबिंदसिंघ और अन्य पुलिस कर्मचारियों ने सहकार्य किया.
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बोर्ड के चुनाव के साथ-साथ
 गुरुद्वारा बोर्ड कानून में संशोधन होने की आशंका !
रविंदर सिंह मोदी 

हजूर साहिब नांदेड़ 
गुरुद्वारा सचखंड बोर्ड संस्था के तीन सीटों के चुनाव करवाने की मांग लेकर सिख समाज का एक घटक पिछले दिनों हड़ताल पर था. पश्च्यात भूख हड़ताल भी की गई. लेकिन उस हड़ताल का कोई सकारात्मक नतीजा नहीं निकला. सभी बातें सरकार और बोर्ड के वर्तमान अध्यक्ष भाजपा के विधायक तारा सिंह के अनुकूल साबित हुई. दक्षिण भारतीय सिखों की ये संस्था अब सभी के निशाने पर है. हर कोई सरकार की चापलूसी कर गुरुद्वारा बोर्ड का मालिक बनने के प्रयास में है. अब ये भी चर्चा है कि बोर्ड के तीन सीटों के चुनावों के साथ साथ बोर्ड एक्ट १९५६ में फिर से संशोधन कर मुंबई, पुणे, नासिक, औरंगाबाद और नागपुर के सिंघसभा गुरुद्वारों को प्रतिनिधित्व देने की पहल की जा रही हैं. 
ता. १ जून २०१८ से १९ जून २०१८ तक सिख समाज के एक समूह द्वारा जिलाधीश कार्यालय के सामने अनशन किया गया था. जिस समय ये अनशन किया जा रहा था उस समय मुंबई में बैठे कुछ स्वार्थी लोग महाराष्ट्र सरकार और विशेष कर मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस को यह अहसास करवाने में प्रयत्नरत थे कि हजूर साहिब के निवासी एक्ट में बदलाव चाहते है. अनशनकर्ताओं के शिष्टमंडल को भी मुंबई में चर्चा के दौरान एक बड़े महसूल अधिकारी ने कानून में संशोधन की प्रक्रिया शुरू किये जाने की जानकारी दी थी. 
दूसरी बात यह है कि, गुरुद्वारा बोर्ड के अध्यक्ष सरदार तारा सिंह को सरकार को पत्र देने की जरुरत ही क्या थी कि तीन सीटों के चुनाव करवाएं जाएं। उनकी मंशा यही है कि मैं प्रधान पद पर कायम रहते हुए अपनी मर्जी के तीन मेंबर चुनकर आये. ताकि आगे किसी तरह का विरोध न झेलना पड़े. सरदार तारासिंह इलेक्टेड मेम्बरों से खासे परेशान बताये जा रहे हैं.  तारासिंह संशोधन के पूर्ण पक्षधर लग रहे है. 
साथ ही तारा सिंह की ये मंशा भी उजागर हो रही हैं कि वे किसी भी हाल में प्रधानगी से हटना नहीं चाह रहे. वे पद पर बने रहकर चुनाव करवाना छह रहे हैं. शेष बोर्ड उसी तरह रखकर केवल तीन सीटों के चुनाव करवाने से सरकारी गैज़ेट प्रक्रिया में छेड़छाड़ करना होगा. क्या ये जायज होगा. 
रही संशोधन करने की बात तो अब हजूर साहिब बचाने की जिम्मेदारी किसकी बनती है ये तय करना चाहिए. यदि कानून में संशोधन किया जायेगा तो हजूर साहिब की सिखो के हाथों में भविष्य में नौकरियां करना भी नहीं रह जायेगा.  
आज जो लोग पद बचाने के लिए खामोश चल रहे हैं कल उनकी मेम्बरी कहाँ तक सुरक्षित रहेगी ये भी देखनेवाली बात होगी. क्योंकि पूर्व न्यायधीश भाटिया द्वारा पेश की गई कानून संशोधन सम्बन्धी रिपोर्ट का पिटारा अब खुलने की प्रतीक्षा में है. रिपोर्ट में बाहर शहरों के सिंघसभा गुरुद्वारों को प्रतिनिधित्व देने की सिफारिश की गई हैं ऐसी चर्चा हैं, जो  हजूर साहिब के सिखों के लिए बहुत ही नुकसानदायी साबित होगी.
 इसलिए सिख समाज के सभी घटकों को एकत्र होकर पहले एक्ट १९५६ की धारा ११ द्वारा सीधे प्रधान नियुक्ति के विषय को लेकर आवाज उठानी होगी. महाराष्ट्र सरकार द्वारा जबरन विधानसभा में धारा ११ में बदलाव कर अध्यक्ष की सीधी नियुक्ति का निर्णय हमपर लादा गया था. अब बाहर के मेंबर भी लादे जा रहे हैं! 
मोनी बाबा जी की सालाना बरसी २६ जून को 
गुरुद्वारा तपोस्थान साहब में कार्यक्रम 
भव्य लंगर प्रसाद 

हजूर साहिब, नांदेड़ 
तखत सचखंड श्री हजूर साहिब गुरुद्वारा के पूर्व (साबका) जत्थेदार संतबाबा जोगिन्दर सिंघजी मोनी बाबाजी के सालाना बरसी का कार्यक्रम हजूर साहिब में ता. २६ जून, २०१८ को मनाया जा रहा है. 
इस उपलक्ष में बाबाजी के तपस्थान नाम से प्रसिद्ध गुरुद्वारा तपोस्थान साहिब में तखत साहिब के जत्थेदार संत बाबा कुलवंत सिंघजी, मीत जत्थेदार संत बाबा ज्योतिंदर सिंघजी पंजप्यारे साहिबान की सरपरस्ती में और संत बाबा बलविंदर सिंघजी कारसेववाले, संतबाबा प्रेमसिंघजी माता साहेबवाले क्र उपस्थिति में श्रद्धा सहित बरसी का कार्यक्रम संपन्न किया जायेगा. ऐसी जानकारी तपोस्थान साहिब के जत्थेदार बक्षीसिंघजी (बाबाजी) और गुरुद्वारा के प्रधान स. जगिंदर सिंघजी किरोसिनवालों द्वारा दी गई है. 
मंगलवार को सुबह ८ बजे से ही धार्मिक कार्योक्रमों की शुरुवात होगी. आसां दी वार के पाठ, श्री सुखमनी साहिब पाठ, कीर्तन और गुरुबाणी पठन जैसे कार्यक्रम संपन्न होंगे. पाठ समापति और हुकुमनामा कार्यक्रम के बाद अरदास होगी उपरांत भव्य लंगर प्रसाद कार्यक्रम होगा. इस अवसर पर धार्मिक क्षेत्र के लोग, गुरुद्वारा बोर्ड साहिबान, बोर्ड के अधिकारी, सभी गणमान्य और हजूरी साध सांगत उपस्थित होगी.  
गुरुद्वारा तपोस्थान साहिब द्वारा अपील की गई है कि इस अवसर सभी साध सांगत जी धार्मिक कार्यक्रमों में उपस्थित रहकर लंगर प्रसाद ग्रहण कर गुरु महाराज जी की खुशियाँ प्राप्त करें। 
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संत बाबा जोगिन्दर सिंघजी मोनी १०८ 

संत बाबा जोगिंदर सिंघजी मोनी लगभग वर्षों तक गुरु घर में विविध पदों पर सेवा में शामिल रहें थे. उन्होंने २५ सालों तक तखतसाहब के मुख्य जत्थेदार पद संभाला था. एक सेवाभावी व्यक्तित्व होने के साथ साथ उन्होंने बहुत से सामाजिक बदलाव भी करने के प्रयास किये थे. बाबाजी को माननेवाला एक बड़ा समूह है. 
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शुक्रवार, 22 जून 2018

सिख वेलफेयर असोसिएशन द्वारा
कक्षा दसवीं और बारहवीं के गुणवंतों का सत्कार 
ता. १ जुलाई को

हजूर साहिब, नांदेड़
यहाँ की सामाजिक सेवाभावी संस्था सिख वेलफेयर असोसिएशन नांदेड़ के तत्वावधान में आगामी १ जुलाई,  २०१८ की सुबह ११ बजे कक्षा दसवीं और बारहवीं बोर्ड परीक्षा के हजूर साहिब स्थित सभी सिख गुणवंत छात्र-छात्राओं के सत्कार का कार्यक्रम आयोजित किया गया है.
संस्था के अध्यक्ष डॉ. भगवंत सिंह गुलाटी और सचिव स. लड्डूसिंघ महाजन ने यहाँ बताया कि, संस्था द्वारा हर वर्ष की तरह इस वर्ष भी श्री गुरु अंगद देवजी यात्री निवास में होनहार सिख विद्यार्थियों का सत्कार कार्यक्रम तख़्त सचखंड श्री हजूर साहिब के मानयोग जत्थेदार साहिब संत बाबा कुलवंत सिंघजी और गुरुद्वारा लंगर साहिब के संत बाबा बलविंदर सिंघजी (नांदेड़ भूषण) के आशीर्वाद और प्रमुख उपस्थिति में विद्यार्थियों का गौरव किया जायेगा.
इस कार्यक्रम में विद्यार्थियों को प्रोत्साहित करने हेतु अथिति के रूप में शहर के उपविभागीय पुलिस अधिकारी श्री अभिजीत फ़ासके और सुप्रसिद्ध वक्ता डॉ.  राजेंद्र मूंदड़ा उपस्थित होंगे. साथ ही सिख वेलफेयर असोसिएशन के सभी पदाधिकारी और सदस्यों का सानिध्य प्राप्त होगा.
सभी गुणवंत छात्रों से और अभिभावकों से संस्था द्वारा अनुरोध किया गया है कि तारीख २८ जून, २०१८ तक अपनी गुणपत्रिका की झेरॉक्स प्रति सिख वेलफेयर असोसिएशन के कार्यालय बाफना उड़ानपुल - नंदीग्राम सोसाइटी कार्यालय में लेकर जमा करें. अथवा प्राचार्य गुरबचनसिंघ सिलेदार या पत्रकार रविंदरसिंघ मोदी से संपर्क करें ऐसी अपील की गई है.
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गुरुवार, 21 जून 2018

मृत्युशैय्या पर लेटी प्रधानाध्यापिका बलजीत कौर के लिए कुछ करें सिख समाज 

नांदेड़ शहर की जानीमानी शिक्षण संस्था गुजराती हाई स्कूल नांदेड़ की प्रधानाध्यापिका बलजीत कौर सरदार कैंसर रोग से ग्रस्त है और मृत्युशैय्या पर लेटी हुई है. गुजराती हाई स्कूल प्रबंधन द्वारा उन्हें जानबूझकर निलंबित किया गया था. पश्च्यात में जिलापरिषद के शिक्षा विभाग ने उनके निलंबन काल का वेतन नहीं दिया. बीमारी से जूझ रही बलजीत कौर के वैद्यकीय बिलों का भुगतान  जा रहा है. मृत्यु से लड़ रही इस अध्यापिका को कोई साथ नहीं दे रहा है. बात बेबात राजनीतिक कारणों पर उछलनेवाले कार्यकर्ता कहाँ हैं? आंदोलन की भाषा करनेवाले कहाँ हैं. सेवा की गप्पे मारनेवाले कहाँ हैं.?
मेरी अपील है कि सभी घटक एक होकर बलजीत कौर के लिए कुछ करें. होनहार और अच्छी शिक्षिका को एक संस्था ने राजनीति का शिकार बनाया क्योंकि वो एक अल्पसंख्यक समाज से थी. बलजीत कौर ने गुजराती हाई स्कूल का अच्छे से प्रबंधन किया था. आज भी स्कुल के विद्यार्थी और पूर्व विद्यार्थी उन्हें बेहद चाहते हैं. ऐसी शिक्षिका के लिए एकजुटता से कानूनी रूप से कुछ किया जाना चाहिए. इस पोस्ट को ज्यादा से ज्यादा  शेयर कीजिये.

रविंदर सिंह मोदी. 

बुधवार, 20 जून 2018

वजीफ़ा प्राप्त करने के लिए २५ जून तक आवेदन करें - 
गुरिन्दरसिंघ वाधवा 

- हजूर साहिब, नांदेड़ - 
तखत सचखंड गुरुद्वारा बोर्ड कार्यालय द्वारा सिख विद्यार्थियों को वजीफ़ा देने के लिए पंजीयन प्रक्रिया शुरू है. सभी स्कूली विद्यार्थी ता. २५ जून २०१८ तक अपना आवेदन पत्र, मार्कशीट और बोनाफाइड सर्टिफिकेट गुरुद्वारा बोर्ड कार्यालय में जमा करें, ऐसी अपील गुरुद्वारा बोर्ड के अधीक्षक गुरविंदर सिंह वाधवा द्वारा की गई है. 
श्री वाधवा ने यहाँ बताया, गुरुद्वारा बोर्ड कार्यालय के रिकॉर्ड सेक्शन में आवेदन प्रारूप उपलब्ध है. विद्यार्थी उस प्रारूप को भरकर प्रधानाध्यापक अथवा प्राचार्य से दस्तखत करवाकर बोनाफाइड जोड़कर कार्यालय में जमा करे.  उन्होंने आगे बताया कि, गुरुद्वारा बोर्ड कार्यालय द्वारा सिख विधार्थियों को इस बार स्कूल और कॉलेज शुरू होते समय ही वजीफ़ा प्रदान करने का निर्णय किया गया है. पूर्व में विद्यार्थियों को सितम्बर अथवा अक्टुम्बर माह में वजीफा दिया जाता था. जबकि स्कूल जून माह में और कॉलेज जुलाई में शुरू होते हैं. वजीफ़ा समय पर मिलने पर उसका उपयोग टूशन फीस अथवा प्रवेश फीस जैसे कार्यों के लिए हो सकता है. अभिभावकों की मांग अनुसार वजीफा जल्दी प्रदान करने के विषय में गुरुद्वारा सचखंड बोर्ड द्वारा प्रयास किये जा रहे हैं. सभी इस कार्य के लिए सहयोग करें.  
(समाचार और ब्लॉग के संबंध में आपकी राय अथवा सुझाव आप नीचे स्थित टिप्पणी के कॉलम में दर्ज कर सकते हैं. ) 
समाचार  अथवा  शुभकामना  सन्देश देने  संपर्क करे  ravindersinghmodi2015@gmail.com 

मंगलवार, 19 जून 2018

श्री गुरु नानक देवजी के ५५० वें प्रकाशपर्व के लिए 
मुख्यमंत्री अमरिंदर सिंह ने मांगे २१४५ करोड़ 

सदगुरु नानक देव जी 


सिख जगत के लिए यह एक सुखद समाचार है कि पंजाब सरकार श्री गुरु नानक देवजी के ५५० वें प्रकाश पर्व लेकर अभी से गंभीर है. पंजाब  मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह ने प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी से प्रकाशपर्व मनाने के लिए पंजाब प्रदेश को २१४५ करोड़ का विकास पैकेज देने की गुहार लगाई. सोमवार (१८ जून, २०१८) को दिल्ली में कैप्टन अमरिंदर सिंह ने श्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात की और उन्हें वर्ष २०१९ में श्री गुरु नानकदेवजी का प्रकाश पर्व मनाने को लेकर प्रस्तावित योजना पर विचार-विमर्श किया. 

कॅप्टन अमरिंदर सिंह (मुख्यमंत्री)

उल्लेखनीय है कि गुरु नानक देवजी के प्रकाश पर्व को लेकर पंजाब सरकार ने दो वर्ष पूर्व ही तैयारी शुरू कर दी थी. पूर्व मुख्यमंत्री प्रकाशसिंह बादल ने भी प्रधान मंत्री से प्रकाशपर्व के विषय में चर्चा की थी. श्री गुरु नानक देवजी महाराज का ५५० वां जन्मदिवस पंजाब में हर्ष और उत्साह से मनाने की तैयारी में सरकार जुट गई है. लेकिन सरकार और शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमिटी के बीच प्रकाश पर्व मनाने को लेकर अभी तक भी सामंजस्य दिखाई नहीं दे रहा है. अमरिंदर सिंह की पहल सराहनीय है. अब केंद्र सरकार पर निर्भर करता है कि किस तरह से वे विकासराशि का वितरण करते हैं. 

सोमवार, 18 जून 2018

उत्तराखंड पुलिस का निषेध !!

उत्तराखंड पुलिस द्वारा बर्बरता पूर्वक सिखों के पवित्र पावन तीर्थस्थल श्री हेमकुंट साहिब के दर्शनों के लिए जा रहें यात्रियों के वाहनों पर लगे निशान साहेब को उतारा जा रहा हैं. यहीं नहीं निशान साहब के कपड़े को ब्लेड़ से काट दिए जाने की घटनाएं पुलिस द्वारा अंजाम दी जा रही है जिससे सिख धर्मियों की भावनाओं को काफी ठेस पहुँच रही हैं.
( बगैर आदेश केवल द्वेष भावना के चलते ये पीएसआई द्वारा उत्तराखंड में निशान साहब निकालकर यूँ काटा जा रहा है. )

पुलिस द्वारा वाहनों को रोककर उसपर लगे छोटे और बड़े सभी निशान को निकालकर जब्त कर लिया जा रहा है. जबकि वरिष्ठों के ऐसे आदेश नहीं हैं. केवल सिखों के प्रति द्वेष भावना के चलते वहाँ ये सब घटित हो रहा हैं. उत्तराखंड के मुख्य मंत्री को तुरंत इस विषय में पुलिस से स्पष्टीकरण मांगना चाहिए की सिखों के साथ ऐसा सलूक वहाँ क्यों हो रहा हैं.  दिल्ली की साध संगत यदि पीएमओ तक ये शिकायत पहुंचाएं.
इस समय  करीब २२ हजार सिख श्रद्धालु श्री हेमकुंट साहिब की यात्रा पर हैं.  केवल जून से अगस्त माह तक ही हेमकुंट साहिब की यात्रा आयोजित होती हैं. पिछले वर्ष भी पुलिस ने वाहनों को रोककर जबरन पैसे मांगे थे. बाढ़ की त्रासदी के समय केवल सिख समुदाय ही उत्तराखंड में सबसे पहले लंगर (भोजन) लेकर पहुंचता है. उस समय तो पुलिस अपना कर्तव्य भूल जाती है.
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जनम दिवस की हार्दिक शुभकामनाएं 

ज्ञानी अवतार सिंघजी शीतल 

तखत सचखंड श्री हजूर साहिब के मीत ग्रन्थि 
सिंघसहिब ज्ञानी अवतार सिंघजी शीतल को 
जन्मदिवस की हार्दिक शुभकामनाएं। 

: शुभेच्छुक :
स. रविंदर सिंघ मोदी. 

Gurudwara board election strike 18 june

अनशन अभी जारी है। ... 




गुरुद्वारा तखत सचखंड बोर्ड बर्खास्त करने की मांग को लेकर विगत १८ दिनों से महाराष्ट्र के नांदेड़ के जिलाधीश कार्यालय के सामने सिख समाज का एक प्रमुख घटक अनशन पर है.  तारीख १ जून, २०१८ को श्रृंखलाबद्ध सामान्य अनशन शुरू किया गया और तारीख ११ जून को भूख हड़ताल शुरू हुई.  अनशनकर्ताओं  मुख्य मांग  है कि गुरुद्वारा बोर्ड के तीन सदस्यों के पद बर्खास्त कर तीन सीटों पर चुनाव करवाएं जाये. 
इस मांग को गुरुद्वारा बोर्ड अध्यक्ष विधायक तारासिंह ने भी समर्थन देकर तीन सीटों के चुनाव करवाने के लिए राजस्व विभाग को पत्र भेजा है. उधर पद पर असिन तीनों निर्वाचित सदस्यों द्वारा बोर्ड बर्खास्त कर निष्पक्ष चुनाव करवाने की मांग की है. इस घटनाक्रम में अनशन  तक खींचा चला गया. आमरण हड़ताल पर बैठे मनप्रीत सिंह कुँजीवाले और हड़ताल के संयोजक इंदरजीत सिंह गल्लीवाले प्रशासन की चुप्पी पर परेशां है. 
कुँजीवाले की तबियत नासाज़ होने की ओर अग्रसर है. जिलाधीश कार्यालय के सामने का आज १८ वां दिन है. तारीख २० जून को आत्मदहन करने की पूर्व चेतावनी दी जा चुकी है. हड़ताल एक तरह अपने रंग में है लेकिन उसका हश्र किस ओर जा रहा है ये देखकर चिंता हो रही है. सरकार को अथवा प्रशासन को इस विषय पर स्पष्टीकरण दे देना चाहिए. उसी तरह से ये स्पष्ट करना चाहिए कि जब हालात अनुकूल है तब चुनाव प्रक्रिया शुरू करने अथवा बोर्ड बर्खास्त करने में देरी क्यों हो रही है.

रविंदर सिंह मोदी....
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रविवार, 17 जून 2018

आज पितृत्व दिवस है...


२० वीं सदी में फादर्स डे की शुरुवात हुई थी. पिता-पुत्र के रिश्तों में प्यार, स्नेह, आदर और अपनापन उत्पन्न हो. बच्चों में परिवार के प्रति अपनापन जरुरी है. भारत में बच्चें अपने माता - पिता का बहुत आदर करते हैं. ये परंपरा दीर्घकाल चले इसी मंशा के साथ सभी पिता वर्ग को शुभकामनाएं देता हूँ. सभी मनाएं फादर्स डे.


शनिवार, 16 जून 2018

Shahid sartaj guru Arjun Dev ji.

शहीद सरताज गुरु अर्जुन देवजी

( शहीद सरताज श्री गुरु अर्जुन देव जी )
रविवार (ता. १७ जून, २०१८) को सिखों के पंचम गुरु और कौम के पहले शहीद गुरु अर्जुन देवजी का ४१३ वां शहीदी दिवस मनाया जा मनाया जा रहा है. सन १६०४ के ४ अगस्त को श्री हरिमंदर साहिब (सुवर्ण मन्दिर ) के अस्तित्व में आने के बाद मोगल सल्तनत की वक्र दृष्टि उन पर पड़ी. दो वर्ष बाद ही बादशाह जहांगीर ने उन्हें गिरफ्तार कर प्रताड़ित किया. पश्च्यात उन्हें यातनाएं देकर शहीद कर दिया. गुरु अर्जुन देवजी की शहीदी वर्ष १६०६ में जून माह में हुई थी. तिथि अनुसार आज ४१२ वर्ष पूर्ण हो रहें हैं. 
श्री गुरु अर्जुन देव जी की सबसे बड़ी उपलब्धि ये रही कि उन्होंने श्री गुरु नानक देव जी की विरासत संभालकर गुरुबाणी को रागबद्ध करवाकर उसे श्री गुरु ग्रन्थ साहिब जी का स्वरूप प्रदान किया. इसी स्वरुप को श्री हरिमंदर साहिब में प्रकाशित करवाया गया, जिससे उस दौर में जातीय भेदभाव मिटाने की पहल मानी गई. आज हम गुरु अर्जुन देवजी का स्मरण कर उन्हें शत - शत प्रणाम करते हैं. 
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