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सोमवार, 9 जुलाई 2018

तारा सिंह यह खुलासा करें कि,
गुरुद्वारा बोर्ड कानून का संशोधन रद्द होगा या नहीं ?

रविंदर सिंघ मोदी 
हजूर साहिब, नांदेड़ - गुरुद्वारा तखत सचखंड श्री हजूर साहिब बोर्ड कानून १९५६ में प्रधान तारासिंह ने ता. २७ जून, २०१८ के दिन जबरन संशोधन करवाकर बाहर के छह मेंबर बढ़ाने का निर्णय महाराष्ट्र सरकार के मंत्री मंडल में करवाया है. जिससे हजूर साहिब के स्थानीय सिखों में गहरा रोष जागृत हो उठा है. साध संगत का रोष और मांग के बाद तखत साहब के आदरणीय पंज प्यारे साहिबान द्वारा हालिया निर्णय (अध्यादेश) रद्द करने की अपील की गई. पंज प्यारे साहिबान ने महाराष्ट्र सरकार और तारा सिंह से भी गुहार लगाई कि संशोधन अति शीघ्र रद्द करे. 
उससे पूर्व साधसंगत द्वारा हजूरी विकास मंच के माध्यम से ता. २८ जून, २०१८ को जिलाधीश कार्यालय के सामने धरना और रोष प्रदर्शन किया गया था. जिलाधीश को एक ज्ञापन भी सौंपा गया था. इतना होने के बावजूद भी तारा सिंह नाम का शातिर भाजपा नेता संशोधन के विषय को लेकर ख़ामोशी अपनाए हुए है. उसने अभी तक भी खुलासा नहीं किया है कि ये अध्यादेश रद्द किया जायेगा. पंज प्यारे साहिबान की अपील (आदेश) के बाद तारा सिंह को ये तुरंत घोषित कर देना चाहिए था कि वह संशोधन रद्द करवा देगा. लेकिन नहीं, उसे अभी भी आस है कि उसकी दखनियों के दमन करने की योजना सफल हो जाएगी और उसका परिवार आजीवन गुरुद्वारा बोर्ड पर अपनी हुकूमत चलायेगा. 
तारा सिंह के कुछ समर्थक यह मानकर कि हो सकता हैं छह सीटों में से एक पर उनका नंबर लग जाए, इसलिए संगत की इच्छा के विरुद्ध उसका साथ दे रहे हैं, साथ ही संशोधन ठीक है कहकर हवा बदलने की कोशिश कर रहे हैं. मैं, आश्वस्त करना चाहता हूँ कि हजूरी साध संगत जो केवल श्री गुरु गोबिंद सिंघजी महाराज की वफ़ादार हैं वो यह आंदोलन ठंडा नहीं होने देंगी. यह समस्त हजुरसाहिब वासियों के स्वाभिमान का और भविष्य का सवाल हैं. ये मुम्बईया राजनीति हजूर साहिब की साध संगत से उनका गुरुद्वारा हमेशा के लिए छीनने का षड़यंत्र कर रही है, और उसके मास्टर माइंड तारा सिंह है. यदि ऐसा नहीं है तो तारा सिंह को तुरंत ये घोषणा कर देनी चाहिए कि पंज प्यारे साहिबान का आदेश और हजूरी साध संगत की भावनाओं की वह इज्जत करता हैं अथवा नहीं.
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शनिवार, 7 जुलाई 2018

रविवार को भारी वर्षा होने की चेतावनी जारी 
नांदेड़ - नांदेड़ जिला और आसपास के जिलों में रविवार (८ जुलाई) को भारी बारिश होने की संभावना मौसम विभाग द्वारा जताई गई है. इस सूचना पर नांदेड़ महानगर पालिका द्वारा चेतावनी जारी की गई है कि अधिक बरसात होने से शहर के निचले हिस्सों में बारिश का पानी जमा हो सकता है. ऐसे समय दुर्घटना भी संभव है. इसलिए भारी बारिश में और जमा हुए पानी में से कोई नागरिक न गुजरे. यदि अधिक वर्षा होती है तो नांदेड़ की नदियों और छोटे नालों का जलस्तर बढ़ सकता है. नांदेड़ जिले में सभी  अच्छी बारिश होने  के समाचार मिले हैं. लेकिन रविवार को बड़ी बरसात होने की चेतावनी जारी हुई है. गोदावरी नदी पर स्थित विष्णुपुरी बांध का जलस्तर बढ़ने के भी समाचार है. 
मुंबइया लोगों को भर्ती कर ४० हजार वेतन दिया जायेगा !!
बोर्ड मीटिंग में चर्चा नहीं, लेकिन प्रोसेडिंग में मुद्दा शामिल कैसे हुआ?


रविंदर सिंह मोदी 
हजूरसाहिब - गुरुद्वारा सचखंड बोर्ड के प्रधान तारासिंह कितने दखनी विरोधी विचारधारा से ओतप्रेत हैं उसका जीता-जागता सबूत यह है कि उन्होंने अपने मुंबइया रिश्तेदारों को गुरुद्वारा बोर्ड में सीधी नौकरियां देकर ४० से ६० हजार का वेतन देना तय भी कर लिया है. मार्च २०१८ में मुंबई में हुई गुरुद्वारा बोर्ड की मीटिंग में कोई जिक्र नहीं किया गया लेकिन सिक्योरिटी ऑफिसर और पीआरओ को भर्ती करने का मुद्दा मीटिंग की प्रोसेडिंग में शामिल कर लिया गया. दो लोगों को ४० हजार वेतन पर लेने का निर्णय बाद में शामिल कर लिया गया. इससे पहले सोलह देशों की सैर कर आये करोड़पति रिश्तेदार लाम्बा को सभी सुविधाओं के अतिरिक्त ६० हजार महीना वेतन दिया जा रहा है, ताकि वो अच्छे से म्यूजियम का बजट बढ़ा सके. समाज में तारासिंह की इस नीति का खुला विरोध हो रहा है. हजूर साहिब में इतने बेरोजगार और काबिल लोग रहते हुए भी मुंबई से यहाँ कर्मचारियों की भर्ती के क्या मायने है? क्या मुंबई में बैठकर नौकरियों का भी कारोबार चल रहा है? यदि ऐसा है तो आपके तीन सालों के कामकाज की इन्क्वायरी (चौकशी) होनी चाहिए. तीन सालों में क्या-क्या खर्च किया गया और कर्मचारियों को योग्यतानुसार प्रमोशन नहीं देने के पीछे क्या कारण रहे हैं उन बातों का भी खुलासा होना जरुरी हैं.  और भी ऐसी बातें हो सकती है कि मीटिंग में चर्चा नहीं हुई हो मगर दिल लगाकर खर्चा हुआ हो?
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बुधवार, 4 जुलाई 2018

तारासिंह ने मुख्यमंत्री की दिशाभूल की 
फाइल फोटो 
                                                                      रविंदर सिंघ मोदी 
भारतीय जनता पार्टी के मुलुंड (मुंबई) के विधायक तारासिंह ने नांदेड़ के गुरुद्वारा तखत सचखंड बोर्ड पर हमेशा हमेशा के लिए अपने परिवार और निकटवर्तियों की सत्ता स्थापित करने के मनसूबे के तहत गुरुद्वारा बोर्ड कानून १९५६ में संशोधन करवाने के लिए एक तरह से महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री श्री देवेंद्र फडणवीस का गलत ढंग से उपयोग किया. उन्होंने मुख्यमंत्री की दिशाभूल कर एक कागज़ पर लिखे चार शब्दों से कानून संशोधन करवा लिया.  गुरुद्वारा बोर्ड संस्था में शासन नियुक्त सदस्यों की संख्या बढाकर दो से आठ कर दी गई.  
तारासिंह की बातों में आकर मुख्यमंत्री ने यह भी विचार नहीं किया कि इस कार्य के लिए गुरुद्वारा बोर्ड का स्वतंत्र कानून भी विद्यमान है. कानून संशोधन  के लिए एक प्रक्रिया पूर्ण की जाती है. राजस्वमंत्री ने भी ध्यान नहीं दिया. उस पर श्री मन्नू श्रीवास्तव (राजस्व विभाग मुख्य सचिव) ने भी प्रक्रिया की अनुपालना नहीं की. महाराष्ट्र शासन ने एकतरफा निर्णय लेकर तारासिंह को खुश कर दिया लेकिन हमेशा - हमेशा के लिए तारा सिंह के घर की सत्ता गुरुद्वारा बोर्ड पर स्थापित कर दी. अब तारासिंह के घर मुंबई के लोग कभी भी गुरुद्वारा बोर्ड के मेंबर या प्रधान बन सकते है. और यह सब संभव हुआ है मुख्यमंत्री की विशेष अनुकंपा से. मुख्यमंत्री के इस निर्णय से दक्षिण भारतीय सिखों में भारी रोष है. यह संस्था नांदेड़ के सिखों ने बनाई थी और संस्था संचालन का अधिकार नांदेड़ के सिखों को हैं. नांदेड़ के सिखों से उनकी संस्था छीनने के मनसूबों में सबसे अहम् स्वार्थ यह साधा जा रहा है कि यहाँ की पूजापाठ की शैली जिसे हम हजूरी मर्यादा कहते हैं वो बदल दी जाएं. उत्तर भारतीय सिख और दक्षिण  सिखों के बीच दर्रार डालने के उद्देश्य से ये षड़यंत्र रचा गया है. उस षड़यंत्र को पूर्ण करने के लिए महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस का उपयोग कर लिया गया. मुख्यमंत्री की सत्ता की ताकत के तले नांदेड़ के सिखों का दमन करने की गहरी साजिश रची गई. साम दाम दंड भेद अपनाकर नांदेड़ के सिखों के अधिकार छिन लिए गए हैं. मुख्यमंत्री को चाहिए कि वे तारासिंह से पूर्ण तपशील पूछें. ये पूछें कि जो संशोधन किया गया है वो केवल कोरम पूर्ण करने  किया गया हैं या नांदेड़ के सिखों से दुश्मनी निकलने के लिए किया गया है. 

मंगलवार, 3 जुलाई 2018

सिख कहीं भी सुरक्षित नहीं!!
रविंदर सिंघ मोदी 
अफगानिस्तान के जलालाबाद क्षेत्र में हुए आतंकी हमलें में १३ सिख और ८ हिन्दू भाई शहीद हो गए. इस हमले की जिम्मेदारी कुख्यात आतंकवादी संगठन आईएसआईएस द्वारा ली गई है. हमला निंदनीय भी है और चिंताजनक भी. इस हमले में मुस्लिम-सिख-हिन्दू भाईचारे के लिए विगत २० वर्षों से जूझ रहे सिख नेता अवतारसिंघ खालसा और ऐतहासिक गुरुद्वारा नानक दरबार के प्रधान सरदार रवेल सिंघ को मुख्य निशाना बनाया गया. आतंकियों को जानकारी थी कि सिखों  का प्रतिनिधिमंडल अफगानिस्तान के राष्ट्रपति अशरफ गनी से मुलाकात के लिए जानेवाले है. जिस स्थान पर राष्ट्रपति से भेट होनी थी उस स्थान से एक हजार मीटर की दूरी पर हमले को अंजाम दिया गया.
जानकारी है कि सरदार अवतार सिंघ खालसा अफगानिस्तान में अल्पसंख्यांक के बड़े नेता थे और अक्टूबर २०१८ में होने वाले संसद चुनावों में उनका सांसद बनना लगभग तय लग रहा था. अफगानिस्तान के कट्टरवादी नेताओं को ये बात खटक रही थी. सिख नेतृत्व उभरने से रोकने के लिए इस हमले को अंजाम दिया  गया. सिख नेतृत्व सभी को खटकता है. उसमें सच्चा, प्रामाणिक और सकारात्मक नेतृत्व हो तो अन्य लोगों  के लिए चिंताएं बढ़ जाती हैं. सिख सत्ता में रहे लेकिन बोले नहीं, कोई बात नहीं करे ऐसी व्यवस्था बिछाई जाती है. अक्सर कमजोर और चापलूस मनोवृति के लोग हमारा नेतृत्व करते हैं और चुप्पी या स्वार्थ के कारण समुदाय का नुकसान कर  देते हैं. अवतारसिंह खालसा बोलनेवाले और जान हथेली पर लेकर चलनेवाले नेता थे यह बात बार-बार साबित हुई है. उपर्युक्त घटना दुःखद हैं और संकेत कर रही है कि सिखों के प्रति किस तरह के व्यवहार की मंशा पाली जा रही है.
अगानिस्तान में मारे गए सिख धर्म के सच्चे अनुपालक थे. वो सिख उस मार्ग में बरसों से अपना निवास बनाकर बैठें थे जिस राह से श्री गुरु नानक देव जी महाराज की मक्का-मदीना और अरब राष्ट्रों के लिए उदासी हुई थी. सभी शहीद सिखों और हिन्दू भाइयों की शाहदत ने हमें दुःखी कर दिया हैं. हमारी संवेदना ये अहसास करवा रही हैं कि विश्व में सिख कहीं भी सुरक्षित नहीं है. बाहर देशों में तो क्या हम अपने देश में भी सुरक्षित महसूस नहीं कर रहें हैं. सन १९८४ के सिख विरोधी दंगे हो, ऑपरेशन ब्लू स्टार के बाद निर्दोष सिखों का कत्लेआम हो, छत्तिसिंघपुरा का हत्याकांड हो, सब घटनाएं सिखों की असुरक्षा पर सवाल खड़ा करती हैं.
अमरीका, ऑस्ट्रेलिया, इंग्लैंड, अरब राष्ट्रों में सिखों को लगातार निशाना बनाया जा रहा हैं. पंजाब में गुरुद्वारें भी सुरक्षित नहीं हैं. सिखों के लिए देश में सचमुच दुविधा की स्थिति दिखाई दे रही है. सिखों को अल्पसंख्यक होने का सही स्तर भी प्राप्त नहीं है. ऐसा लग रहा है कि सिख कहीं भी सुरक्षित नहीं है. 

सोमवार, 2 जुलाई 2018

नांदेड़ के सिखों पर 
महाराष्ट्र सरकार की दादागिरी !!
रविंदर सिंघ मोदी
नांदेड़ (हजूर साहिब) सिखों की आस्था भूमि है. यहाँ सिखों के ग्यारहवें गुरु और मानवता के रक्षक श्री गुरु ग्रन्थ साहिब जी का युगोंयुग अटल निवास है. ये भूमि सिखों की प्रथम श्रद्धा भूमि है. विगत तीन सौ सालों से सिख परिवार यहाँ निवास कर रहे हैं. ऐसे पवन भूमि के निवासी सिखों के साथ महाराष्ट्र सरकार सौतेला व्यव्हार कर रही हैं. नांदेड़ बोर्ड पर मुम्बईया राज हमेशा  के लिए स्थापित करने के लिए गुरुद्वारा बोर्ड (मंडल) के प्रधान भारतीय जनता पार्टी के मुलुंड के विधायक तारा सिंघ ने मीटिंग की गणपूर्ति संख्या  (कोरम) मुंबई में पूर्ण हो इस मंशा के साथ केवल एक पत्र मुख्यमंत्री को सौंपा और देवेंद्र फडणवीस नाम के भाजपा मुख्यमंत्री ने बगैर कोई पूछताछ किये, बगैर किसी की राय लिए, बगैर समाचार पत्र में सुचना दिए बोर्ड कानून में संशोधन लादकर सरकार द्वारा मनोनीत सदस्यों की संख्या २ से बढाकर ८ कर दी.
सरकारी सदस्यों संख्या जाने से अब तारासिंह मुंबई में बैठकर कोरम पूर्ण कर पायेगा. उसकी मंशा सरकार ने  पूर्ण कर दी है. मुख्यमंत्री और राजस्वमंत्री ने मिलकर हजुरसाहिब के सिखों सिखों हाथ से उनकी धार्मिक संस्था पूरी तरह से छीनने का काम किया है. तीन साल पहले कानून की धारा ११ में बदलाव कर तारासिंह को बोर्ड का प्रधान बनाया गया. अब बाहर के लोगों को हमारी संस्था में सदस्य बनाने का निर्णय लादा गया. जिसे नागपुर विधानसभा के अधिवेशन में मंजूरी प्रदान करने की नियत से प्रस्तुत किया जा रहा हैं. तारीख ४ जुलाई से नागपुर अधिवेशन शुरू होगा.
महाराष्ट्र सरकार की इस दादागिरी के खिलाफ सिख समुदाय को एकजगह आकर लड़ाई लड़ना जरुरी है. तारासिंह और उसके कुछ समर्थक (चमचे) सरकार से इस तरह के संशोधन करवाकर वे खुश हो रहे है. दूसरी ओर हजुरसाहिब की साधसंगत में गुस्सा और रोष छाया हुआ हैं. हर घटक उस कृति का निषेध कर रहा हैं.
लेकिन तारासिंह इस बात से खुश हो रहा हैं कि दखनी मेम्बरों को उसने हटाकर अपनी खुद की सत्ता स्थापित कर दी है. मुख्यमंत्री को तारासिंह ने गुमराह कर बोर्ड में दो बार संशोधन करवाया है. एक तरह से मुख्यमंत्री से उसने गलत काम करवाया है.
इस काम में जाहिर हैं कि राजस्व (महसूल) विभाग और मुम्बईया चरित्रों की मिलीभगत है. हजूर साहिब की मान मर्यादा और बोर्ड रचना से खिलवाड़ करवाने वाला तारासिंह तनखैया का पत्र है लेकिन क्या करे वो तो अमृतधारी सिख भी नहीं है. इसलिए हजूर साहिब के सभी सिखों को एकजुट होकर तारासिंह की सत्ता हमेशा  हटा देनी चाहिए. साथ ही भाजपा सरकार की दादागिरी का भी प्रतिकार करना चाहिए. कुछ लोग जो तारा सिंह के अहसानों तले दबे हुए है या उसके जरिये आगे पद पाने की लार मुँह से टपकाते घूम रहे हैं उन्हें हजूर साहिब नमक याद करने की जरुरत है.
(इस लेख के नीचे आप अपना निषेध जता सकते हैं.) 

बुधवार, 27 जून 2018

समझ लीजिए,  
दखनी संगत के हाथ से गुरुद्वारा बोर्ड चला गया!

रविंदर सिंह मोदी 
बुधवार,  २७ जून, २०१८ की तारीख अच्छी तरह से याद रख लीजिये दखनी हजूरी साध सांगत जी, क्योंकि यहीं वो तारीख है जिसने गुरुद्वारा बोर्ड की सत्ता हमेशा हमेशा के लिए हमसे छिन ली है. अब केवल गुरुद्वारा दर्शन कीजिये और घर लौट जाइये. जो कर्मचारी हैं , उन्हें तो सीट पर जो बैठा हो उसी की गुलामी करनी है इसलिए अब आगे क्या कहे. 
महाराष्ट्र सरकार ने गुरुद्वारा बोर्ड कानून की धारा ६ (१) में एक बार फिर संशोधन करते हुए अलग - अलग शहरों के प्रतिनिधि बढ़ाने के उद्देश्य से अब मनोनीत संख्या दो से बढाकर आठ कर दी है. हजूरी सिखों के तीन सीटों के चुनाव होंगे.  
सरकार ने ये संशोधन किसके कहने पर किया यह खुलासा होने जरुरी है. गुरुद्वारा बोर्ड के प्रधान कुछ भी कहने के लिए तैयार नहीं है. तारासिंह की चुप्पी में ही बहुत कुछ छुपा हुआ है. सरकार ने हमारा बोर्ड अब मुंबई  बाहर के शहरों के सिखों के नाम कर दिया है. मुख्यमंत्री को ये अधिकार किसने दिया है कि वर्षों पुरानी इस संस्था पर बाहर के लोग लाद दे. हमारे कुछ अपने लोगों ने जो भूमिका निभाई है वो शर्मसार करनेवाली है.  दखनी समाज की सभी कुर्बानियों को आज तिलांजलि मिली हैं. अब आपका गुरुद्वारा आपके हाथ से निकल गया है समझों. अब शौक से लड़िये कोई छुड़ाएगा नहीं. मेंबर बनिए, प्रधान बनिए..... मेरी शुभकामनाएं. 
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मंगलवार, 26 जून 2018

जनम दिन मुबारक !!
हजूर साहिब के व्यावसायिक 
हमारे मित्र 
गुरमीत सिंघजी तबेलेवाले 
को जन्मदिवस के उपलक्ष में हार्दिक शुभकामनाएं. 
: शुभेच्छुक :
रविंदर सिंघ मोदी 

२८ जून को धरना आंदोलन 
क्या चाहते हैं हजुरसाहिब के लोग? 
रविंदर सिंह मोदी 
अजब लोग हैं जिन्हें सामाजिक और सामूहिक लाभ नज़र नहीं आ रहा हैं. समाज से अधिक व्यक्तिगत लाभ पाने की अधिकतर लोगों की मंशा है. वहीं कुछ देखनी भाई गुरुद्वारा बोर्ड के प्रधान तारासिंह के "मिशन अमेंडमेंट" को लाभ पहुंचाने के सारे उद्योग करते दिखाई दे रहे हैं. ऐसे में ता. २८ जून, २०१८ को नांदेड़ के जिलाधीश कार्यालय के सामने हजूरी विकास मंच के धरना कार्यक्रम को प्रभावित करने प्रयास हो सकते हैं. कुछ लोगों ने नासमझी और गैरों के प्रति वफ़ादारी का परिचय देने के लिए तिकड़म लड़ाना शुरू कर दिया है. यदि गुरुद्वारा तखत सचखंड बोर्ड संस्था के कानून में भारतीय जनता पार्टी और शिवसेना की मिली जुली सरकार मिलकर संशोधन करती है, और मुंबई, पुणे, नासिक, नागपुर और औरंगाबाद के सिंघसभा गुरुद्वारों से सदस्य नियुक्ति का निर्णय लिया जाता है तो उसके लिए सीधे तौरपर वही लोग जिम्मेदार होंगे जो तारासिंह के संकेतों पर यहाँ काम कर रहे हैं. कहना न होगा कि, उनकी वफ़ादारी श्री गुरु गोबिंदसिंघजी की नगरी और यहाँ के सिखों के लिए नहीं बल्कि बोर्ड का सरकारीकारण करनेवालों के साथ है. जो लोग आज गुरुद्वारा बोर्ड कानून में सम्भाव्य संशोधन को लेकर गंभीर नहीं है उनके लिए यही कहा जा सकता हैं कि वे संशोधन के पक्षधर है. वो लोग स्वयं चाह रहे हैं कि गुरुद्वारा बोर्ड संस्था पर बाहर के लोग आकर प्रशासन करें. कुछ लोग अभी भी एक नहीं होना चाह रहे हैं. यदि ऐसा नहीं है तो २८ जून को ११. बजे जिलाधीश कार्यालय के सामने जुटकर एक्ट अमेंडमेंट का विरोध दर्ज करें.   

सोमवार, 25 जून 2018

हार्दिक बधाई !!

गुरुद्वारा सचखंड बोर्ड के मैनेजिंग कमिटी के पूर्व सदस्य 
सरदार देवेंद्र सिंघजी मोटरावाले को 
जन्मदिवस के उपलक्ष में हार्दिक शुभकामनाएं. 
: शुभेच्छुक :
रविंदर सिंघ मोदी 
मन की बात में प्रधानमंत्री मोदी ने कहा : 
गुरु नानक देवजी ने भेदभाव मिटाने के लिए कार्य किया 
सिख जगत में नयी चेतना जागी 
प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी 

रविंदर सिंह मोदी 
भारत के प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी ने रेडियो पर "मन की बात" कार्यक्रम में कहा, ' गुरु नानक देव जी ने भेदभाव मिटाने और तमाम मनुष्य जाति को समान स्तर जीने के अधिकारों के लिए कार्य किया था. उन्होंने लंगर सेवा शुरू कर जातिपाति का भेद दूर किया. उनके दर्शाए मार्ग पर चलकर देश में समानता स्थापित की जा सकती है. उन्होंने आगे कहा, वर्ष २०१९ में गुरु नानक देवजी का ५५० वां प्रकाशपर्व मनाया जायेगा. भारत सरकार इस पर्व को मनाएगी.'

प्रधान मंत्री ने साथ ही जलियाँवाला बाग हत्याकांड को वर्ष २०१९ में सौ साल पूर्ण होने की याद में शहीदों के प्रति अपना सम्मान भी व्यक्त किया. मन की बात कार्यक्रम में मोदी जी ने गुरु नानक देव जी के प्रकाश पर्व का जिक्र छेड़कर सिख जगत में एक नयी चेतना का संचार किया. अभी हाल ही में पंजाब के मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह ने प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी से मिलकर श्री गुरु नानक देवजी के ५५० वें प्रकाशपर्व को मानने के लिए  २१४५ करोड़ राशि के पैकेज देने की मांग की थी. साथ ही जलियाँवाला बाग  घटना के सौ साल पूर्ण होने के उपलक्ष में कार्यक्रमों  और विकास के लिए एक सौ करोड़ के राशि की मांग की थी. 
मोदी ने दोनों विषयों पर अपनी भूमिका स्पष्ट कर दी हैं. प्रधानमंत्री ने सिख गुरुओं से संबंधित विषयों पर हमेशा ही सकारात्मक सोच का परिचय दिया हैं. दशम पिता श्री गुरु गोबिंद सिंघजी महाराज के ३५० वें जन्मोत्सव के अवसर पर भी नरेंद्र मोदी ने ५०० करोड़ की राशि का प्रावधान किया था. तखत हरिमंदर साहेब पटना के लिए विकास पैकेज दिया. नांदेड़ के स्वामी रामानंद तीर्थ विश्वविद्यालय अंतर्गत श्री गुरु गोबिंदसिंघजी अध्यासन केंद्र के लिए २५ करोड़ और स्टेडियम के लिए ४२ करोड़ राशि का पैकेज भी प्रदान किया. प्रधानमंत्री की इस सकारात्मकता के पीछे उनके धार्मिक, सामाजिक और सांस्कृतिक अध्यन का भी योगदान है. भारत देश की संस्कृति के लिए, देश की रक्षा के लिए किसने क्या बलिदान दिया हैं उससे प्रधानमंत्री मोदी जी अवगत है. देश में सिखों के इतिहास और बलिदान को लेकर भी मोदी जी अक्सर सकारात्मक सन्देश देते रहे हैं. उन्होंने विदेशों में बसें सिखों को भी बार-बार सिख इतिहास से जुडी घटनाओं जिक्र कर सिखों के आत्मबल और इच्छाशक्ति का उल्लेख किया.
अभी हाल की ही बात है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लंगर सामग्री से जीएसटी हटाने के लिए सकारात्मक कदम उठाया. ये सभी बातें मोदी जी की उस विचारधारा का परिचय देती है जो सिख गुरुओं और उनके इतिहास और बलिदान की क़द्र करती है. मोदी जी का मन हमेशा सिख गुरुओं की विचारधारा से जुड़ा रहे यहीं मनोकामना व्यक्त करता हूँ. मोदी जी को धन्यवाद् और प्रणाम.

रविवार, 24 जून 2018

हजूरी विकास मंच की नयी पहल....!!
रविन्दरसिंघ मोदी 
हजूर साहिब, नांदेड़ के सिखों का सबसे बड़ा दुर्भाग्य उनकी गुटबाजी रहीं है. पिछले ६० से ७० वर्षों में कभी भी समाज एकसंघ नहीं रहा है. विचारधारा का टकराव, आपसी मनमुटाव, व्यक्तिगत स्वार्थ, सत्ता की लालसा, दूसरे के प्रति द्वेष और राजनीतिक हस्ताक्षेप के कारण समाज गुटों - गुटों और खेमों में बँटकर रह गया. आज भी गुटबाजी सहित उपर्युक्त सभी मुद्दे कारणीभूत माने जा रहे हैं. गुरुद्वारा बोर्ड की सत्ता पाने और मेम्बरशिप पर कब्ज़ा करने के लिए सभी हैरान - परेशान हैं. साधसंगत की सेवा करने की प्रामाणिक मंशा किसी की भी लग नहीं रही हैं. सभी को चुनावों की जल्दी है. पर बहुत से ऐसे भी सिख हैं जिन्हे दिल से यह लग रहा हैं कि गुरुद्वारा बोर्ड पर स्वच्छ चरित्र और अभ्यासक वृति के लोग आये. चाहे चुनकर या नियुक्त होकर. वहीँ अधिक संख्या में सिख छह रहें हैं कि हजूर साहिब के लोगों की संस्था पर हजूर साहिब के लोग कायम रहें. ऐसे में हजूरी विकास मंच की रविवार (ता. २४ जून,  २०१८) को हुई बैठक से एक नहीं पहल शुरू होने की आशा पल्लवित हुई है.  सरदार अवतार सिंह पहरेदार ने समाज की बैठक बुलाकर विविध धड़ों और नेताओं को एकत्रित कर गुरुद्वारा बोर्ड में सुधारों को लेकर आंदोलन करने की नीति पर सभी को एकमत करवाया. उनका प्रयास सराहनीय है और वे बधाई के पात्र भी.  जो नेता और कार्यकर्ता बैठक में थे उनमें सरकार के उस निर्णय के प्रति रोष नज़र आया जिसमे सरकार ने गुरुद्वारा बोर्ड अध्यक्ष की नियुक्ति का अधिकार अपने अधीन कर लिया है. सरकार ने मार्च २०१५ में ये निर्णय लिए था लेकिन उससे पूर्व भाजपा विधायक तारा सिंह की मंशा के अनुरूप गुरुद्वारा सचखंड बोर्ड कानून १९५६ की धारा ११ में छेड़छाड़ (संशोधन) कर लिया था. इस तरह महाराष्ट्र सरकार ने हजूर साहिब की संगत के अधिकारों पर वार करते हुए गुरु घर के प्रबंध के सूत्र अपने हाथ ले लिए थे. जिसके बाद ये प्रचलन शुरू हो गया कि सरकार अपनी मर्जी का अध्यक्ष सीधे नियुक्त कर दे भले फिर वो कोई भी क्यों न हो. संस्था नांदेड़ की, गुरुद्वारा नांदेड़ में, लेकिन अध्यक्ष वो, जो सरकार चाहें. ये घातक निर्णय हजूर साहिब के सिखों की स्वतंत्रता छीननेवाला है. गुरुद्वारा बोर्ड के १७ सदस्यों को ये अधिकार जाता हैं कि वें अपना प्रधान, सचिव, उपाध्यक्ष और सभापति स्वय चुनलें, लेकिन ये अधिकार सरकार के अधीन चले गए हैं. हजूरी विकास मंच की बैठक में आंदोलन को लेकर रूपरेखा ठहराई गई. अब ता. २८ जून, २०१८ को जिलाधीश कार्यालय के सामने आंदोलन  जायेगा. धरना धरा जायेगा. समाज के सभी घटक एकत्र आने से आंदोलन मजबूत होगा. ये आंदोलन न हो या कमजोर पड़े इसलिए कुछ राजनीतिक लोग अपने मोहरों को काम पर लगा सकते हैं. या कुछ स्वार्थी लोग जिन्हें स्थानीय सिख समाज के भविष्य से कोई लेना देना नहीं है, केवल मेंबर बनने की मंशा है वे विघ्नसंतोषी धर सकते हैं. इन सब बातों की संभावनाओं के चलते एक नयी पहल की शुरुवात हुई है. मैं इस पहल के लिए मुबारकबाद देता हूँ और अपील करता हूँ कि हजूरी साधसंगत एकजुट होकर आंदोलन में शामिल होकर शांतिपूर्वक समाधान तलाश करे. 
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शनिवार, 23 जून 2018

तीन सिख आईपीएस अधिकारीयों ने 
हजुरसाहिब में मत्था टेका 
सिख आईपीएस अधिकारी धनवंत कौर, अमनजीत कौर और जसमीत सिंघ का सत्कार करते हुए सरदार डी.पी. सिंघ, श्री काकड़े और अन्य। 
हजूर साहिब नांदेड़ 
हजूर साहिब के श्री गुरु गोबिंदसिंघजी हवाई अड्डे पर फ्लाइट्स शुरू होने के बहुत से लाभ सामने आ रहे हैं. जिनमें एक लाभ तो ये है कि समय बचाने के लिए यह सेवा उपयोगी साबित हो रही है. शनिवार (तारीख २३ जून, २०१८) को सिख समाज के तीन होनहार आईपीएस अधिकारीयों ने अमृतसर से नान्देड़ फ्लाइट्स से यात्रा कर गुरुद्वारा तखत सचखंड साहिब के दर्शन किये.
जिनमे अमृतसर की मूल निवासी और बैच वर्ष २००६ की धनप्रीत कौर जो केंद्रीय सामाजिक न्याय मंत्री विजय कुमार सापला की सुरक्षा अधिकारी, पंजाब की निवासी लेकिन गुवाहाटी (आसाम) में पुलिस अधीक्षक अमनजीत कौर और दिल्ली के डीसीपी  रूप में कार्यरत जसमीत सिंघ (आईपीएस) का समावेश था.
नांदेड़ के जिला पुलिस अधीक्षक श्री चंद्रशेखर मीणा ने इन तीनों आईपीएस अधिकारीयों का स्वागतकर उन्हें विशेष वाहन भी मुहैया करवाएं। मिली जानकारी के मुताबिक धनवंत कौर और चंद्रशेखर मीणा एक ही बैच के अधिकारी है.
गुरुद्वारा तखत सचखंड हजूर साहिब में तीनों अधिकारीयों को सिरेपाव देकर सत्कार किया गया. बोर्ड  प्रशासकीय अधिकारी सरदार डी.पी. सिंह और अधीक्षक गुरिंदर सिंह वाधवा ने गुरुद्वारा की प्रतिकृति और तलवार प्रदानकर उनका यथोचित सत्कार किया. गुरुद्वारा दर्शन और लंगर प्रसाद ग्रहण करने के बाद फ्लाइट से ये अधिकारी अमृतसर की ओर रवाना हो गए. उन्हें यहाँ वजीराबाद के निरीक्षक काकड़े, गुरमीत सिंह दफेदार, गोबिंदसिंघ और अन्य पुलिस कर्मचारियों ने सहकार्य किया.
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बोर्ड के चुनाव के साथ-साथ
 गुरुद्वारा बोर्ड कानून में संशोधन होने की आशंका !
रविंदर सिंह मोदी 

हजूर साहिब नांदेड़ 
गुरुद्वारा सचखंड बोर्ड संस्था के तीन सीटों के चुनाव करवाने की मांग लेकर सिख समाज का एक घटक पिछले दिनों हड़ताल पर था. पश्च्यात भूख हड़ताल भी की गई. लेकिन उस हड़ताल का कोई सकारात्मक नतीजा नहीं निकला. सभी बातें सरकार और बोर्ड के वर्तमान अध्यक्ष भाजपा के विधायक तारा सिंह के अनुकूल साबित हुई. दक्षिण भारतीय सिखों की ये संस्था अब सभी के निशाने पर है. हर कोई सरकार की चापलूसी कर गुरुद्वारा बोर्ड का मालिक बनने के प्रयास में है. अब ये भी चर्चा है कि बोर्ड के तीन सीटों के चुनावों के साथ साथ बोर्ड एक्ट १९५६ में फिर से संशोधन कर मुंबई, पुणे, नासिक, औरंगाबाद और नागपुर के सिंघसभा गुरुद्वारों को प्रतिनिधित्व देने की पहल की जा रही हैं. 
ता. १ जून २०१८ से १९ जून २०१८ तक सिख समाज के एक समूह द्वारा जिलाधीश कार्यालय के सामने अनशन किया गया था. जिस समय ये अनशन किया जा रहा था उस समय मुंबई में बैठे कुछ स्वार्थी लोग महाराष्ट्र सरकार और विशेष कर मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस को यह अहसास करवाने में प्रयत्नरत थे कि हजूर साहिब के निवासी एक्ट में बदलाव चाहते है. अनशनकर्ताओं के शिष्टमंडल को भी मुंबई में चर्चा के दौरान एक बड़े महसूल अधिकारी ने कानून में संशोधन की प्रक्रिया शुरू किये जाने की जानकारी दी थी. 
दूसरी बात यह है कि, गुरुद्वारा बोर्ड के अध्यक्ष सरदार तारा सिंह को सरकार को पत्र देने की जरुरत ही क्या थी कि तीन सीटों के चुनाव करवाएं जाएं। उनकी मंशा यही है कि मैं प्रधान पद पर कायम रहते हुए अपनी मर्जी के तीन मेंबर चुनकर आये. ताकि आगे किसी तरह का विरोध न झेलना पड़े. सरदार तारासिंह इलेक्टेड मेम्बरों से खासे परेशान बताये जा रहे हैं.  तारासिंह संशोधन के पूर्ण पक्षधर लग रहे है. 
साथ ही तारा सिंह की ये मंशा भी उजागर हो रही हैं कि वे किसी भी हाल में प्रधानगी से हटना नहीं चाह रहे. वे पद पर बने रहकर चुनाव करवाना छह रहे हैं. शेष बोर्ड उसी तरह रखकर केवल तीन सीटों के चुनाव करवाने से सरकारी गैज़ेट प्रक्रिया में छेड़छाड़ करना होगा. क्या ये जायज होगा. 
रही संशोधन करने की बात तो अब हजूर साहिब बचाने की जिम्मेदारी किसकी बनती है ये तय करना चाहिए. यदि कानून में संशोधन किया जायेगा तो हजूर साहिब की सिखो के हाथों में भविष्य में नौकरियां करना भी नहीं रह जायेगा.  
आज जो लोग पद बचाने के लिए खामोश चल रहे हैं कल उनकी मेम्बरी कहाँ तक सुरक्षित रहेगी ये भी देखनेवाली बात होगी. क्योंकि पूर्व न्यायधीश भाटिया द्वारा पेश की गई कानून संशोधन सम्बन्धी रिपोर्ट का पिटारा अब खुलने की प्रतीक्षा में है. रिपोर्ट में बाहर शहरों के सिंघसभा गुरुद्वारों को प्रतिनिधित्व देने की सिफारिश की गई हैं ऐसी चर्चा हैं, जो  हजूर साहिब के सिखों के लिए बहुत ही नुकसानदायी साबित होगी.
 इसलिए सिख समाज के सभी घटकों को एकत्र होकर पहले एक्ट १९५६ की धारा ११ द्वारा सीधे प्रधान नियुक्ति के विषय को लेकर आवाज उठानी होगी. महाराष्ट्र सरकार द्वारा जबरन विधानसभा में धारा ११ में बदलाव कर अध्यक्ष की सीधी नियुक्ति का निर्णय हमपर लादा गया था. अब बाहर के मेंबर भी लादे जा रहे हैं! 
मोनी बाबा जी की सालाना बरसी २६ जून को 
गुरुद्वारा तपोस्थान साहब में कार्यक्रम 
भव्य लंगर प्रसाद 

हजूर साहिब, नांदेड़ 
तखत सचखंड श्री हजूर साहिब गुरुद्वारा के पूर्व (साबका) जत्थेदार संतबाबा जोगिन्दर सिंघजी मोनी बाबाजी के सालाना बरसी का कार्यक्रम हजूर साहिब में ता. २६ जून, २०१८ को मनाया जा रहा है. 
इस उपलक्ष में बाबाजी के तपस्थान नाम से प्रसिद्ध गुरुद्वारा तपोस्थान साहिब में तखत साहिब के जत्थेदार संत बाबा कुलवंत सिंघजी, मीत जत्थेदार संत बाबा ज्योतिंदर सिंघजी पंजप्यारे साहिबान की सरपरस्ती में और संत बाबा बलविंदर सिंघजी कारसेववाले, संतबाबा प्रेमसिंघजी माता साहेबवाले क्र उपस्थिति में श्रद्धा सहित बरसी का कार्यक्रम संपन्न किया जायेगा. ऐसी जानकारी तपोस्थान साहिब के जत्थेदार बक्षीसिंघजी (बाबाजी) और गुरुद्वारा के प्रधान स. जगिंदर सिंघजी किरोसिनवालों द्वारा दी गई है. 
मंगलवार को सुबह ८ बजे से ही धार्मिक कार्योक्रमों की शुरुवात होगी. आसां दी वार के पाठ, श्री सुखमनी साहिब पाठ, कीर्तन और गुरुबाणी पठन जैसे कार्यक्रम संपन्न होंगे. पाठ समापति और हुकुमनामा कार्यक्रम के बाद अरदास होगी उपरांत भव्य लंगर प्रसाद कार्यक्रम होगा. इस अवसर पर धार्मिक क्षेत्र के लोग, गुरुद्वारा बोर्ड साहिबान, बोर्ड के अधिकारी, सभी गणमान्य और हजूरी साध सांगत उपस्थित होगी.  
गुरुद्वारा तपोस्थान साहिब द्वारा अपील की गई है कि इस अवसर सभी साध सांगत जी धार्मिक कार्यक्रमों में उपस्थित रहकर लंगर प्रसाद ग्रहण कर गुरु महाराज जी की खुशियाँ प्राप्त करें। 
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संत बाबा जोगिन्दर सिंघजी मोनी १०८ 

संत बाबा जोगिंदर सिंघजी मोनी लगभग वर्षों तक गुरु घर में विविध पदों पर सेवा में शामिल रहें थे. उन्होंने २५ सालों तक तखतसाहब के मुख्य जत्थेदार पद संभाला था. एक सेवाभावी व्यक्तित्व होने के साथ साथ उन्होंने बहुत से सामाजिक बदलाव भी करने के प्रयास किये थे. बाबाजी को माननेवाला एक बड़ा समूह है. 
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शुक्रवार, 22 जून 2018

सिख वेलफेयर असोसिएशन द्वारा
कक्षा दसवीं और बारहवीं के गुणवंतों का सत्कार 
ता. १ जुलाई को

हजूर साहिब, नांदेड़
यहाँ की सामाजिक सेवाभावी संस्था सिख वेलफेयर असोसिएशन नांदेड़ के तत्वावधान में आगामी १ जुलाई,  २०१८ की सुबह ११ बजे कक्षा दसवीं और बारहवीं बोर्ड परीक्षा के हजूर साहिब स्थित सभी सिख गुणवंत छात्र-छात्राओं के सत्कार का कार्यक्रम आयोजित किया गया है.
संस्था के अध्यक्ष डॉ. भगवंत सिंह गुलाटी और सचिव स. लड्डूसिंघ महाजन ने यहाँ बताया कि, संस्था द्वारा हर वर्ष की तरह इस वर्ष भी श्री गुरु अंगद देवजी यात्री निवास में होनहार सिख विद्यार्थियों का सत्कार कार्यक्रम तख़्त सचखंड श्री हजूर साहिब के मानयोग जत्थेदार साहिब संत बाबा कुलवंत सिंघजी और गुरुद्वारा लंगर साहिब के संत बाबा बलविंदर सिंघजी (नांदेड़ भूषण) के आशीर्वाद और प्रमुख उपस्थिति में विद्यार्थियों का गौरव किया जायेगा.
इस कार्यक्रम में विद्यार्थियों को प्रोत्साहित करने हेतु अथिति के रूप में शहर के उपविभागीय पुलिस अधिकारी श्री अभिजीत फ़ासके और सुप्रसिद्ध वक्ता डॉ.  राजेंद्र मूंदड़ा उपस्थित होंगे. साथ ही सिख वेलफेयर असोसिएशन के सभी पदाधिकारी और सदस्यों का सानिध्य प्राप्त होगा.
सभी गुणवंत छात्रों से और अभिभावकों से संस्था द्वारा अनुरोध किया गया है कि तारीख २८ जून, २०१८ तक अपनी गुणपत्रिका की झेरॉक्स प्रति सिख वेलफेयर असोसिएशन के कार्यालय बाफना उड़ानपुल - नंदीग्राम सोसाइटी कार्यालय में लेकर जमा करें. अथवा प्राचार्य गुरबचनसिंघ सिलेदार या पत्रकार रविंदरसिंघ मोदी से संपर्क करें ऐसी अपील की गई है.
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गुरुवार, 21 जून 2018

मृत्युशैय्या पर लेटी प्रधानाध्यापिका बलजीत कौर के लिए कुछ करें सिख समाज 

नांदेड़ शहर की जानीमानी शिक्षण संस्था गुजराती हाई स्कूल नांदेड़ की प्रधानाध्यापिका बलजीत कौर सरदार कैंसर रोग से ग्रस्त है और मृत्युशैय्या पर लेटी हुई है. गुजराती हाई स्कूल प्रबंधन द्वारा उन्हें जानबूझकर निलंबित किया गया था. पश्च्यात में जिलापरिषद के शिक्षा विभाग ने उनके निलंबन काल का वेतन नहीं दिया. बीमारी से जूझ रही बलजीत कौर के वैद्यकीय बिलों का भुगतान  जा रहा है. मृत्यु से लड़ रही इस अध्यापिका को कोई साथ नहीं दे रहा है. बात बेबात राजनीतिक कारणों पर उछलनेवाले कार्यकर्ता कहाँ हैं? आंदोलन की भाषा करनेवाले कहाँ हैं. सेवा की गप्पे मारनेवाले कहाँ हैं.?
मेरी अपील है कि सभी घटक एक होकर बलजीत कौर के लिए कुछ करें. होनहार और अच्छी शिक्षिका को एक संस्था ने राजनीति का शिकार बनाया क्योंकि वो एक अल्पसंख्यक समाज से थी. बलजीत कौर ने गुजराती हाई स्कूल का अच्छे से प्रबंधन किया था. आज भी स्कुल के विद्यार्थी और पूर्व विद्यार्थी उन्हें बेहद चाहते हैं. ऐसी शिक्षिका के लिए एकजुटता से कानूनी रूप से कुछ किया जाना चाहिए. इस पोस्ट को ज्यादा से ज्यादा  शेयर कीजिये.

रविंदर सिंह मोदी. 

बुधवार, 20 जून 2018

वजीफ़ा प्राप्त करने के लिए २५ जून तक आवेदन करें - 
गुरिन्दरसिंघ वाधवा 

- हजूर साहिब, नांदेड़ - 
तखत सचखंड गुरुद्वारा बोर्ड कार्यालय द्वारा सिख विद्यार्थियों को वजीफ़ा देने के लिए पंजीयन प्रक्रिया शुरू है. सभी स्कूली विद्यार्थी ता. २५ जून २०१८ तक अपना आवेदन पत्र, मार्कशीट और बोनाफाइड सर्टिफिकेट गुरुद्वारा बोर्ड कार्यालय में जमा करें, ऐसी अपील गुरुद्वारा बोर्ड के अधीक्षक गुरविंदर सिंह वाधवा द्वारा की गई है. 
श्री वाधवा ने यहाँ बताया, गुरुद्वारा बोर्ड कार्यालय के रिकॉर्ड सेक्शन में आवेदन प्रारूप उपलब्ध है. विद्यार्थी उस प्रारूप को भरकर प्रधानाध्यापक अथवा प्राचार्य से दस्तखत करवाकर बोनाफाइड जोड़कर कार्यालय में जमा करे.  उन्होंने आगे बताया कि, गुरुद्वारा बोर्ड कार्यालय द्वारा सिख विधार्थियों को इस बार स्कूल और कॉलेज शुरू होते समय ही वजीफ़ा प्रदान करने का निर्णय किया गया है. पूर्व में विद्यार्थियों को सितम्बर अथवा अक्टुम्बर माह में वजीफा दिया जाता था. जबकि स्कूल जून माह में और कॉलेज जुलाई में शुरू होते हैं. वजीफ़ा समय पर मिलने पर उसका उपयोग टूशन फीस अथवा प्रवेश फीस जैसे कार्यों के लिए हो सकता है. अभिभावकों की मांग अनुसार वजीफा जल्दी प्रदान करने के विषय में गुरुद्वारा सचखंड बोर्ड द्वारा प्रयास किये जा रहे हैं. सभी इस कार्य के लिए सहयोग करें.  
(समाचार और ब्लॉग के संबंध में आपकी राय अथवा सुझाव आप नीचे स्थित टिप्पणी के कॉलम में दर्ज कर सकते हैं. ) 
समाचार  अथवा  शुभकामना  सन्देश देने  संपर्क करे  ravindersinghmodi2015@gmail.com 

मंगलवार, 19 जून 2018

श्री गुरु नानक देवजी के ५५० वें प्रकाशपर्व के लिए 
मुख्यमंत्री अमरिंदर सिंह ने मांगे २१४५ करोड़ 

सदगुरु नानक देव जी 


सिख जगत के लिए यह एक सुखद समाचार है कि पंजाब सरकार श्री गुरु नानक देवजी के ५५० वें प्रकाश पर्व लेकर अभी से गंभीर है. पंजाब  मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह ने प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी से प्रकाशपर्व मनाने के लिए पंजाब प्रदेश को २१४५ करोड़ का विकास पैकेज देने की गुहार लगाई. सोमवार (१८ जून, २०१८) को दिल्ली में कैप्टन अमरिंदर सिंह ने श्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात की और उन्हें वर्ष २०१९ में श्री गुरु नानकदेवजी का प्रकाश पर्व मनाने को लेकर प्रस्तावित योजना पर विचार-विमर्श किया. 

कॅप्टन अमरिंदर सिंह (मुख्यमंत्री)

उल्लेखनीय है कि गुरु नानक देवजी के प्रकाश पर्व को लेकर पंजाब सरकार ने दो वर्ष पूर्व ही तैयारी शुरू कर दी थी. पूर्व मुख्यमंत्री प्रकाशसिंह बादल ने भी प्रधान मंत्री से प्रकाशपर्व के विषय में चर्चा की थी. श्री गुरु नानक देवजी महाराज का ५५० वां जन्मदिवस पंजाब में हर्ष और उत्साह से मनाने की तैयारी में सरकार जुट गई है. लेकिन सरकार और शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमिटी के बीच प्रकाश पर्व मनाने को लेकर अभी तक भी सामंजस्य दिखाई नहीं दे रहा है. अमरिंदर सिंह की पहल सराहनीय है. अब केंद्र सरकार पर निर्भर करता है कि किस तरह से वे विकासराशि का वितरण करते हैं. 

सोमवार, 18 जून 2018

उत्तराखंड पुलिस का निषेध !!

उत्तराखंड पुलिस द्वारा बर्बरता पूर्वक सिखों के पवित्र पावन तीर्थस्थल श्री हेमकुंट साहिब के दर्शनों के लिए जा रहें यात्रियों के वाहनों पर लगे निशान साहेब को उतारा जा रहा हैं. यहीं नहीं निशान साहब के कपड़े को ब्लेड़ से काट दिए जाने की घटनाएं पुलिस द्वारा अंजाम दी जा रही है जिससे सिख धर्मियों की भावनाओं को काफी ठेस पहुँच रही हैं.
( बगैर आदेश केवल द्वेष भावना के चलते ये पीएसआई द्वारा उत्तराखंड में निशान साहब निकालकर यूँ काटा जा रहा है. )

पुलिस द्वारा वाहनों को रोककर उसपर लगे छोटे और बड़े सभी निशान को निकालकर जब्त कर लिया जा रहा है. जबकि वरिष्ठों के ऐसे आदेश नहीं हैं. केवल सिखों के प्रति द्वेष भावना के चलते वहाँ ये सब घटित हो रहा हैं. उत्तराखंड के मुख्य मंत्री को तुरंत इस विषय में पुलिस से स्पष्टीकरण मांगना चाहिए की सिखों के साथ ऐसा सलूक वहाँ क्यों हो रहा हैं.  दिल्ली की साध संगत यदि पीएमओ तक ये शिकायत पहुंचाएं.
इस समय  करीब २२ हजार सिख श्रद्धालु श्री हेमकुंट साहिब की यात्रा पर हैं.  केवल जून से अगस्त माह तक ही हेमकुंट साहिब की यात्रा आयोजित होती हैं. पिछले वर्ष भी पुलिस ने वाहनों को रोककर जबरन पैसे मांगे थे. बाढ़ की त्रासदी के समय केवल सिख समुदाय ही उत्तराखंड में सबसे पहले लंगर (भोजन) लेकर पहुंचता है. उस समय तो पुलिस अपना कर्तव्य भूल जाती है.
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जनम दिवस की हार्दिक शुभकामनाएं 

ज्ञानी अवतार सिंघजी शीतल 

तखत सचखंड श्री हजूर साहिब के मीत ग्रन्थि 
सिंघसहिब ज्ञानी अवतार सिंघजी शीतल को 
जन्मदिवस की हार्दिक शुभकामनाएं। 

: शुभेच्छुक :
स. रविंदर सिंघ मोदी. 

Gurudwara board election strike 18 june

अनशन अभी जारी है। ... 




गुरुद्वारा तखत सचखंड बोर्ड बर्खास्त करने की मांग को लेकर विगत १८ दिनों से महाराष्ट्र के नांदेड़ के जिलाधीश कार्यालय के सामने सिख समाज का एक प्रमुख घटक अनशन पर है.  तारीख १ जून, २०१८ को श्रृंखलाबद्ध सामान्य अनशन शुरू किया गया और तारीख ११ जून को भूख हड़ताल शुरू हुई.  अनशनकर्ताओं  मुख्य मांग  है कि गुरुद्वारा बोर्ड के तीन सदस्यों के पद बर्खास्त कर तीन सीटों पर चुनाव करवाएं जाये. 
इस मांग को गुरुद्वारा बोर्ड अध्यक्ष विधायक तारासिंह ने भी समर्थन देकर तीन सीटों के चुनाव करवाने के लिए राजस्व विभाग को पत्र भेजा है. उधर पद पर असिन तीनों निर्वाचित सदस्यों द्वारा बोर्ड बर्खास्त कर निष्पक्ष चुनाव करवाने की मांग की है. इस घटनाक्रम में अनशन  तक खींचा चला गया. आमरण हड़ताल पर बैठे मनप्रीत सिंह कुँजीवाले और हड़ताल के संयोजक इंदरजीत सिंह गल्लीवाले प्रशासन की चुप्पी पर परेशां है. 
कुँजीवाले की तबियत नासाज़ होने की ओर अग्रसर है. जिलाधीश कार्यालय के सामने का आज १८ वां दिन है. तारीख २० जून को आत्मदहन करने की पूर्व चेतावनी दी जा चुकी है. हड़ताल एक तरह अपने रंग में है लेकिन उसका हश्र किस ओर जा रहा है ये देखकर चिंता हो रही है. सरकार को अथवा प्रशासन को इस विषय पर स्पष्टीकरण दे देना चाहिए. उसी तरह से ये स्पष्ट करना चाहिए कि जब हालात अनुकूल है तब चुनाव प्रक्रिया शुरू करने अथवा बोर्ड बर्खास्त करने में देरी क्यों हो रही है.

रविंदर सिंह मोदी....
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रविवार, 17 जून 2018

आज पितृत्व दिवस है...


२० वीं सदी में फादर्स डे की शुरुवात हुई थी. पिता-पुत्र के रिश्तों में प्यार, स्नेह, आदर और अपनापन उत्पन्न हो. बच्चों में परिवार के प्रति अपनापन जरुरी है. भारत में बच्चें अपने माता - पिता का बहुत आदर करते हैं. ये परंपरा दीर्घकाल चले इसी मंशा के साथ सभी पिता वर्ग को शुभकामनाएं देता हूँ. सभी मनाएं फादर्स डे.


शनिवार, 16 जून 2018

Shahid sartaj guru Arjun Dev ji.

शहीद सरताज गुरु अर्जुन देवजी

( शहीद सरताज श्री गुरु अर्जुन देव जी )
रविवार (ता. १७ जून, २०१८) को सिखों के पंचम गुरु और कौम के पहले शहीद गुरु अर्जुन देवजी का ४१३ वां शहीदी दिवस मनाया जा मनाया जा रहा है. सन १६०४ के ४ अगस्त को श्री हरिमंदर साहिब (सुवर्ण मन्दिर ) के अस्तित्व में आने के बाद मोगल सल्तनत की वक्र दृष्टि उन पर पड़ी. दो वर्ष बाद ही बादशाह जहांगीर ने उन्हें गिरफ्तार कर प्रताड़ित किया. पश्च्यात उन्हें यातनाएं देकर शहीद कर दिया. गुरु अर्जुन देवजी की शहीदी वर्ष १६०६ में जून माह में हुई थी. तिथि अनुसार आज ४१२ वर्ष पूर्ण हो रहें हैं. 
श्री गुरु अर्जुन देव जी की सबसे बड़ी उपलब्धि ये रही कि उन्होंने श्री गुरु नानक देव जी की विरासत संभालकर गुरुबाणी को रागबद्ध करवाकर उसे श्री गुरु ग्रन्थ साहिब जी का स्वरूप प्रदान किया. इसी स्वरुप को श्री हरिमंदर साहिब में प्रकाशित करवाया गया, जिससे उस दौर में जातीय भेदभाव मिटाने की पहल मानी गई. आज हम गुरु अर्जुन देवजी का स्मरण कर उन्हें शत - शत प्रणाम करते हैं. 
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Eid Mubarak ho.

ईद-उल-फ़ित्र के मौके पर 
हार्दिक बधाई !!



रविंदर सिंह मोदी 
भारत ही नहीं बल्कि विश्व के असंख्य देश आज रमजान ईद यानी ईद-उल-फ़ित्र का त्योहार माना रहे हैं. यह त्योहार जीवन में सवाब कमाने का एक सुअवसर माना जाता है. एक माह तक रमजान माह में रोज़ा (उपवास) किया जाता है. रोज़ा शरीर, मन और आत्मा को विकारों से खाली कर उन्हें पाक (पवित्र) करता है. संयम सिखाता है. जिससे मनुष्य को सम्पूर्ण वर्ष परिश्रम करने की ऊर्जा प्राप्त होती है. ईद का संबंध जीवन की खुशहाली और खुशियों से भी जुड़ा है. किसी भी कार्य की शुरुवात  रमजान ईद को सुअवसर माना जाता है. भारत देश में ईद पर बहुत खुशग़वार माहौल हो जाता है. मेरे सभी मुस्लिम भाई मुझसे बहुत ही गर्मजोशी और उत्साह मिलते हैं. उनके दमकतें चेहरों से मुझे भी अनुभूति मिलती है की त्यौहार को किस गहराई से स्वीकार करना चाहिए. भारत एक परम्पराओं वाला, संस्कृति और उत्सवों से लबालब ऐसा देश है. यहाँ मनाएं जानेवाले त्यौहार समस्त विश्व को भाईचारा और सद्धभावना का सन्देश देते हैं. हमें ईद से भी सिखने  बहुत कुछ है. 

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अकबर से महान थे महाराणा प्रतापसिंह जी - योगी 

महाराणा प्रतापसिंह जी
 
उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने मुगल बादशाह अकबर के बजाय राजपूत शासक महाराणा प्रताप को महान महान बताया है. 
उन्होंने उत्तरप्रदेश में  महाराणा प्रतापसिंह जी के जन्मदिन पूर्व संध्या पर कहा कि महाराणा ने उस वक्त की सबसे बड़ी सैन्य ताकत के सामने जिस शौर्य और पराक्रम का परिचय दिया था, उसका उदाहरण बिरले ही मिलता है. विपरीत हालात में और परिस्थितियों से संघर्ष कर उन्होंने मातृभूमि की सेवा की. इसीलिए महाराणा प्रतापसिंह जी अधिक महान प्रतीत होते है. 
तारीख - १६ जून २०१८ को देश में क्षत्रिय स्वाभिमान और महान योद्धा महाराणा प्रताप सिंह जी की जयंती मनाई जा रही है. ऐसे समय में योगी का ये बयान बहुत मायने रखता है. 
(ब्लॉग के बारे में आपकी राय नीचे लिखिए)

शुक्रवार, 15 जून 2018

आयु नहीं, मानिसकता में बदलाव जरुरी है

आयु नहीं, मानिसकता में बदलाव जरुरी है

पंजाब सरकार द्वारा हाल ही में लिया गया निर्णय कि, "गर्ल्स स्कूलों में ५० वर्ष आयु से अधिक ही बतौर अध्यापक पढ़ाएंगे" खासा चर्चाओं में है. अध्यापकों के होश उड़े हुए हैं. शिक्षा क्षेत्र में पुरुष और महिला का लिंगभेद बहुत से शिक्षाविदों के गले नहीं उतर रहा.

पंजाब की पूर्व कैबिनेट मंत्री लक्ष्मीकांता चावला ने मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह को चिट्ठी लिखकर शिक्षा विभाग के उस फैसले पर दोबारा विचार करने के लिए कहा है.

उन्होंने मुख्यमंत्री अमरिंदर सिंह के निर्णय को दुर्भाग्यपूर्ण बताते  उठाया कि पहले सरकार तय करे कि क्या गर्ल्स स्कूलों में पुरुषों को नियुक्ति दी जाये अथवा नहीं. चावला ने सरकार के फैसले पर कड़ी नराजगी जताते हुए गुरू की मर्यादा का हनन बताया है।

उनका कहना है कि, पंजाब सरकार का सद्भावना से लिया गया यह फैसला कि लड़कियों के स्कूलों में 50 वर्ष की आयु से अधिक पुरुष अध्यापक ही पढ़ाएंगे वास्तव में अध्यापकों के सम्मान के विरुद्ध फैसला है। सरकार अपने अध्यापकों पर अविश्वास कर रही है. स्कूलों में विशेषकर गांवों में सह शिक्षा का प्रचलन है. पहली कक्षा से बारहवीं तक लड़के-लड़कियां इकटठे पढ़ सकते है. ऐसे में सरकार का पुरुष अध्यापक लड़कियों के स्कूल में नहीं पढ़ा सकते ये निर्णय यह एक भद्दा मजाक नहीं तो क्या है।

उल्लेखनीय है कि अमृतसर के ही कुछ सीनियर सेकेंडरी स्कूलों के विषय में यह मांग की गई थी कि ये स्कूल लड़के और लड़कियों के लिए अलग अलग कर दिए जाएं. ये स्कूल आज भी अच्छे से चल रहे हैं.

पंजाब सरकार का ये निर्णय विचित्र है और उसमे पिछड़ापन नज़र आ रहा है. महिला छेड़छाड़ का कानून सख़्त होना चाहिए. कॉलेजों में सीसीटीवी कैमरे और सुरक्षा समिति होनी चाहिए. अश्लीलता रोकने हेतु दिशा निर्देश होने चाहिए. साथ ही अभिभावकों द्वारा अपने बच्चों को छेड़छाड़ और अश्लीलता को रोकने के लिए आधार देना चाहिए. बच्चों को ओछी हरकतों के संबंध में शिकायत करने के लिए प्रोत्साहित किया जाना चाहिए.

हर जिला पुलिस मुख्यालय में महिला सुरक्षा समिति नियुक्त होती है, उनकी सहायता ली जा सकती है. प्रदेश में राज्य महिला आयोग भी कार्यरत है उसे भी लड़कियों के साथ स्कूलों में हो रहे दुर्व्यवहार प्रति बताना चाहिए. पुरुष और महिला शिक्षक की आयु से परिणाम नहीं निकलता है बल्कि अश्लील मानसिकता दूर झटकने के लिए क्या विकल्प तलाशें जाएं उस संबंध सरकार को कदम उठाना चाहिए.
रविंदर सिंह मोदी..
(ब्लॉग के प्रति आपकी राय नीचे स्थित टिपण्णी बॉक्स में लिख सकते हैं.)


जन्मदिन की हार्दिक बधाई जी 





भारतीय जनता पार्टी के सक्रिय कार्यकर्ता 
और समाज सेवक 
सरदार जगजीवन सिंघजी रिसालदार को 
जनम दिवस उपलक्ष में 
हार्दिक बधाई और शुभकामनाएं. 

: शुभेच्छुक :
स. रविंदर सिंह मोदी


गुरुवार, 14 जून 2018

सिख विधार्थी वजीफ़ा लेने के लिए आवेदन करें 
गुरुद्वारा बोर्ड कार्यालय इस बार जल्दी देगा वजीफ़ा  


- हजूर साहिब, नांदेड़ - 
तखत सचखंड गुरुद्वारा बोर्ड कार्यालय द्वारा सिख विद्यार्थियों को वजीफ़ा देने हेतु की गई पहल सराहनीय है. प्रशासकीय अधिकारी देवेन्द्रपाल सिंह चावला और अधीक्षक गुरिंदर सिंह वाधवा द्वारा इस निर्णय से अवगत कराया गया कि, गुरुद्वारा बोर्ड कार्यालय द्वारा सिख विधार्थियों को इस बार स्कूल और कॉलेज शुरू होते ही वजीफ़ा प्रदान कर दिया जायेगा. इससे पूर्व में विद्यार्थियों को सितम्बर अथवा अक्टुम्बर माह में वजीफा मिलता रहा था. जबकि स्कूल जून माह में और कॉलेज जुलाई में शुरू हो जाते हैं. अब वजीफ़ा टूशन फीस अथवा प्रवेश फीस जैसे कार्यों के लिए उपयोग में लाया जा सकता है. अभिभावकों की ये मांग थी कि वजीफा जल्दी दिया जाएं. बोर्ड द्वारा मांग पर विचार कर निर्णय लिया गया. 
गुरुद्वारा बोर्ड द्वारा ये सराहनीय पहल करते हुए विद्यार्थियों और अभिभावकों से अपील की गई है कि स्कूल और कॉलेज शुरू होते ही बोनाफाइड, फोटो, मार्क शीट और गुरुद्वारा कार्यालय द्वारा दिया जानेवाला आवेदन पत्र अटेस्टेड करवाकर बोर्ड के रिकॉर्ड कार्यालय में जमा करवाएं। 
(समाचार और ब्लॉग के संबंध में आपकी राय अथवा सुझाव आप नीचे स्थित टिप्पणी के कॉलम में दर्ज कर सकते हैं. ) 
समाचार  अथवा  शुभकामना  सन्देश देने  संपर्क करे  ravindersinghmodi2015@gmail.com 

बुधवार, 13 जून 2018

जनम दिवस की हार्दिक शुभ कामनाएं 

हेड़ ग्रंथी सिंघसहिब भाई कश्मीर सिंघजी 
तखत सचखंड श्री हजुरसाहिब के हेड़ ग्रंथी आदरणीय सिंघसहिब भाई कश्मीर सिंघजी को जनम दिवस के उपलक्ष में हार्दिक बधाई और शुभकामनाएँ. 
रविंदर सिंघ मोदी 
(कृपया आपकी शुभकामनाएं या प्रतिक्रियाएं आप निम्नलिखित स्थान पर दे सकते हैं. )

धारा ११ को लेकर 
गुरुद्वारा बोर्ड सदस्यों में उदासिनता 


रविंदर सिंह मोदी
गुरुद्वारा तखत सचखंड बोर्ड, नांदेड़ संस्था के अध्यक्ष की सीधी नियुक्ति निर्देशित करनेवाली वाली बोर्ड कानून १९५६ की धारा ११ (संशोधित) को लेकर गुरुद्वारा तख़त सचखंड बोर्ड के सदस्यों में गहरी उदासिनता देखने को मिली है. इस धारा में महाराष्ट्र सरकार द्वारा तीन वर्ष (फरवरी २०१५) में संशोधन कर गुरुद्वारा बोर्ड के अध्यक्ष की सरकार द्वारा नियुक्ति की प्रणाली शुरू की थी. इसी संशोधित धारा का सहारा लेकर भारतीय जनता पार्टी के मुलुंड - मुंबई के विधायक तारा सिंह ने गुरुद्वारा बोर्ड अध्यक्ष पद पर कब्ज़ा किया था. शुरुवात में जब संगत द्वारा विरोध हुआ तो तारासिंह ने वायदा किया था की धारा ११ के अध्यादेश को रद्द करवाया जायेगा. तीन सालों में तारासिंह ने अपना वायदा नहीं निभाया. खैर राजनितिक नेता तो अपने स्वार्थ के सामने वायदे करते हैं और परिस्थिति बदलने पर वायदे भूल भी जाते है. फिर तारासिंह को तो गुरुघर में सत्ता करनी थी वो कैसे अपना वायदा निभाते. सत्ता के लिए तो उन्होंने गुरुघर के अध्यक्ष पद का सरकारीकरण कर दिया. उनसे ज्यादा उम्मीद नहीं रख सकते लेकिन अन्य मेंबर साहिबान क्यों अपने जमीर पर तीन वर्षों तक सरकारीकरण का बोझ ढाते रहे और ढा रहे हैं समझ नहीं आता. गुरुघर के सेवक के रूप में अपना परिचय देनेवाले ये लोग अपनी स्वतंत्रता सरकार के अधीन रखें हुए हैं. मेरा सवाल सभी मेंबर साहिबान से है और जो मेंबर बनने के सपने देख रहे हैं उनसे हैं कि, क्या अपने जमीर पर सरकारी नियुक्त अध्यक्ष की गुलामी का बोझ लेकर गुरुघर की सेवा करना चाहते है? गुरुद्वारा बोर्ड के मेंबर साहिबान के अधिकार है कि वे अपना अध्यक्ष खुद चुने. अपने अधिकार छिन जाने का क्या जरा भी मलाल नहीं हो रहा?
इस समय समाज का एक घटक तीन सीटों के चुनावों की मांग लेकर आंदोलन चला रहा है. जो लोग बोर्ड का मेंबर बनने की लालसा लेकर आंदोलन चला रहे हैं, उन्हें कलम ११ को लेकर भी अपनी भूमिका स्पष्ट करनी चाहिए. तीन सालों में किसीने भी इस विषय पर आवाज नहीं उठाई है. क्यों ?

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मंगलवार, 12 जून 2018

गुरुद्वारा लोहगढ़ साहब (लोहा) में : 
भगत धन्ना जी जन्मदिवस उपलक्ष में सालाना जोड़ मेला 
१५ जून को भव्य लंगर प्रसाद कार्यक्रम 
भगत धन्नाजी साधु संतों और भूखों की सेवा करते हुए. 

हजूर साहिब, नांदेड़ - श्री आदि गुरु ग्रन्थ साहिब जी के ३६ गुरुओं में एक गुरु, भगत धन्ना जी के जनम दिवस उपलक्ष्य में गुरुद्वारा लोहगढ़ साहिब (लोहा, लातूर रोड़ ) स्थान पर ता. १३ जून २०१८ से ता. १५ जून २०१८ तक विभिन्न कार्यक्रमों का आयोजन किया जा रहा हैं. 

गुरुद्वारा लंगर साहिब के जत्थेदार संत बाबा नरिंदर सिंघजी कारसेवा वाले और संत बाबा बलविंदर सिंघजी कारसेवा वाले ने यहाँ जानकारी दी कि, भगत धन्ना जी का जनम दिवस हर साल गुरुद्वारा लंगर साहिब द्वारा गुरुद्वारा लोहगढ़ स्थान पर मनाया जाता है. इस साल भी ये तीन दिवसीय समागम बड़ी श्रदा के साथ मनाया जा रहा है.  श्री अखंडपाठ आरंभ होंगे. ता. १५ जून को श्री अखंड पाठ साहिब की समाप्ति की जाएगी. 


इस अवसर पर तखत सचखंड श्री हजूर साहिब के मुख्य जत्थेदार संत बाबा कुलवंत सिंघजी और पंजप्यारे साहिबान की प्रमुख उपस्थिति होगी. साथ ही गुरुद्वारा माता साहिब और श्रोमणि अकाली बुड्ढा दल (९६ करोड़ी ) के  जत्थेदार संत बाबा प्रेम सिंघजी, ज्ञानी और प्रतिष्ठित नागरिक तथा साध सांगत जी उपस्थित होंगे. 
धार्मिक कीर्तन दरबार और लंगर प्रसाद कार्यक्रमों में समूह साध संगतजी और सर्वधर्मिय श्रद्धालुगण उपस्थित रहें ऐसी अपील संत बाबा नरिंदर सिंघजी और संत बाबा बलविंदर सिंघजी कारसेवा वालों द्वारा की गई है. 

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सोमवार, 11 जून 2018

गुरुद्वारा बोर्ड चुनाव की मांग लेकर अब आमरण अनशन शुरू 
सामूहिक आत्मदाह की चेतावनी 
नांदेड़ स्थित गुरुद्वारा बोर्ड के चुनाव करवाने की माँग लेकर सोमवार को जिलाधीश अरुण डोंगरे को ज्ञापन सौंपते हुए सिख समाज के स्थनीय नेता और कार्यकर्ता. 

 हजूर साहिब नांदेड़ - यहाँ के जिलाधीश कार्यालय के सामने गत एक जून से शुरू चकरी अनशन को सोमवार (ता. ११ जून, २०१८) से आमरण अनशन में परिवर्तित कर चुनाव नहीं करवाने की स्थिति में सामूहिक आत्मदाह करने की चेतावनी दी गई.
इन मांगों का एक ज्ञापन नांदेड़ के जिलाधीश श्री अरुण डोंगरे को एक शिष्टमंडल द्वारा सौंपा गया.  जिलाधीश से जल्द चुनाव करवाने की गुहार लगाई गई है.  इस दौरान चकरी अनशन को आमरण अनशन में रूपांतरित कर दिया गया. मनप्रीत सिंह कुंजीवाले ने सोमवार को आमरण अनशन शुरू कर दिया.
नांदेड़ के जिलाधीश के नाम सौंपे गए ज्ञापन में कहा गया है कि गुरुद्वारा बोर्ड चुनाव को लेकर अनशन जारी है. वर्ष २०१२ में बोर्ड के चुनाव हुए थे. तीन साल के बाद चुनाव जरुरी थे. अवधि समाप्त होने के बाद भी महाराष्ट्र सरकार के राजस्व विभाग ने चुनाव करवाए और ना बोर्ड को बर्खास्त किया.

आज धरना अनशन में इंद्रजीत सिंह गल्लीवाले, मोहनसिंह गाड़ीवाले, देवेंद्र सिंह विष्णुपुरिकार, जसपाल सिंह लांगरी, गुरमीत सिंह बेदी, तेजपालसिंह खेड़, बन्दीछोड़सिंघ, शेरसिंघ सिलेदार, मनबीर सिंह ग्रंथि, अवतारसिंह पहरेदार सहित बड़ी संख्या में सिख समुदाय के लोग उपस्थित थे.
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रविवार, 10 जून 2018

अमरीका में पहला गुरुद्वारा 

अमरीका जैसे समृद्ध राष्ट्र में सिख समुदाय द्वारा लगभग एक सौ  तीन वर्ष पूर्व स्टॉकटन शहर (कैलिफ़ोर्निया) में पहले गुरुद्वारा की स्थापना की गई. जिसे अमरीका में सिख टेम्पल के नाम से जाना जाने लगा था.  प्रथम विश्व युद्ध प्रारंभ होने के पश्च्यात इंग्लैंड और अन्य देशों में बसें सिख समुदाय अमरीका में पहुँचने लगे थे. ब्रिटिश फ़ौज में कार्यरत सिख भी युद्ध के लिए अमरीका पहुँच गए. अमरीका में भारत से पहुंचे भारतीयों ने और सिखों ने सैनिक सिखों का आदर किया. नियमित पाठपूजा करनेवाले सिख अब सैनिक सिखों के साथ मिलकर खुले में ही श्री गुरु ग्रन्थ साहिब जी के स्वरुप को प्रकाशमान कर पूजा पाठ और कीर्तन करने लगे. जिसके बाद सभी ने मिलकर वहां गुरुद्वारा शुरू करने पहल शुरू की. जिसे अमरीका सरकार ने तुरंत मान्यता भी प्रदान कर दी.  भीतर ही दो मंजिला गुरुद्वारा की ईमारत का निर्माण हो गया. सिखों की लगन और समर्पित भक्ति के कारण ही आज अमरीका जैसे राष्ट्र में हर शहर में एक गुरुद्वारा दिखाई देता है. 



Please see the link
The first Gurudwara opened in Stockton, California, America.
(In 1915)






https://twitter.com/IndiaHistorypic/status/1005851359948619777
महाराष्ट्र मंत्रिमंडल का विस्तार शीघ्र 
(File photo of Cabinet)

मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस की इच्छा है कि विधानसभा के आगामी बरसाती अधिवेशन से पूर्व महाराष्ट्र मंत्री मंडल का विस्तार दिया जाए. एक सप्ताह पूर्व भाजपा के राष्ट्रिय अध्यक्ष अमित शाह ने मुंबई का दौरा किया था. उस दौरे के दौरान अमित शाह और देवेंद्र फडणवीस में मंत्री मंडल विस्तार  संबंध में विचार विमर्श हुआ. शिवसेना से भी विस्तार को लेकर बात छेड़ी गई थी ऐसी चर्चा है. आगामी लोकसभा और विधानसभा चुनावों को मद्देनजर ये मंत्री मंडल विस्तार का निर्णय लिया गया है. मंत्री मंडल विस्तार के समाचार के साथ ही भाजपा विधायकों में स्फूर्ति छा गई है. कहा जा रहा है कि, नए मंत्रियों की सूचि मुख्यमंत्री की जेब में बनकर तैयार है. अब देखना की डेढ़ वर्ष के लिए किसका भाग्य जागता है. 

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