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बुधवार, 2 मार्च 2022

 क्या होगा 8 मार्च को?

क्यों मची हैं भागदौड़!

रविंदरसिंघ मोदी 

नांदेड़ से लेकर मुंबई और मुंबई से लेकर अमृतसर तक हलचल मचीं हुईं हैं. कोई उत्सुक हैं तो कोई संदेहास्पद! सबकी निगाहें आनेवाली एक विशिष्ट तारीख को लेकर प्रश्न कर रहीं है. क्या होगा? गुरुद्वारा बोर्ड के प्रधान साहब अस्वस्थ और अनभिज्ञ! मीत प्रधान साहब व्यूहरचना में मशगूल! सेक्रेटरी साहब हैरान - हैरान! समन्वयक साहब जुगाड़ और भागदौड़ में व्यस्त! बोर्ड मेंबर साहिबान इधर - उधर की उधेड़बून में! मैनेजिंग मेंबर साहब की निगाहें कोर्ट कचहरी के अगले इम्तिहान का तोड़ तलाशने में समर्पित! "जो होने वाला हैं" वो "ना हो" इसलिए प्रचंड शक्ति से प्रयास जारी हैं! सबके चेहरे और ऑंखें संभाव्य मामले की गंभीरता को दर्शा रहें हैं. मुंबई और अमृतसर के बीच फोन कॉल्स और कॉल पर कॉल का सिलसिला! सबके दिलों में हलचल तेज कि "सरकार  का अगला कदम क्या हो सकता है गुरुद्वारा बोर्ड के विषय में?"

आने वाली 8 मार्च, 2022 की तारीख गुरुद्वारा सचखंड बोर्ड संस्था के विषय में पता नहीं क्या नया संदेश लेकर आए. गुरुद्वारा सचखंड बोर्ड के पिछले गठन की घटना (ता. 8 मार्च, 2019) को तीन वर्ष पूर्ण हो रहें हैं. नांदेड़ की साधसंगत में उपर्युक्त विषय को लेकर यह उत्सुकता छाईं हुईं हैं आनेवाली ता. 8 मार्च को क्या घटित होने वाला हैं? क्या गुरुद्वारा सचखंड बोर्ड बर्खास्त कर दिया जायेगा? क्या गुरुद्वारा बोर्ड पर नये प्रधान की नियुक्ति की जायेगी? अथवा नया ऐडमिनिस्ट्रेटर बिठाकर "नई समिति" घोषित कर दीं जायेगी? इस ख्याल और सवाल से चेहरों पर हवाइयां उड़ी हुईं.

जैसे कि "बोर्ड कार्यकाल की पूर्ति" पूर्ण हो रहीं है, इसलिए महाराष्ट्र सरकार सीधे - सीधे इच्छित निर्णय ले सकती हैं. बोर्ड पर सरकारी नियंत्रण होने से अब यह बोर्ड कभी भी बर्खास्त किया जाना संभव है. यदि मध्य कार्यकाल में बोर्ड बर्खास्त अथवा सस्पेंड किया जाना हो सरकार को चाहिए कि एक माह पहले औपचारिक सूचना जारी करें. जैसे कि स. भूपिंदरसिंघ मिनहास सरकार द्वारा नियुक्त प्रधान है, इस कारण सरकार को अधिकार प्राप्त है कि प्रधान अथवा प्रधान के अंतर्गत संचालित बोर्ड को बर्खास्त करें. वैसे भी कार्यकाल समाप्त होने के बाद नैतिक रूप से "बोर्ड" बर्खास्त होना ही चाहिए. क्योंकि एक्ट का प्रभाव यहीं कहता है. कानून माननेवालों के लिए यह स्वीकार्य तत्वं भी है. लेकिन बोर्ड की सत्ता में बैठें लोग चाह रहें हैं कि अभी बोर्ड बर्खास्त ना किया जाए. बोर्ड का कोई सदस्य यह नहीं चाहेगा कि बोर्ड बर्खास्त हो, क्योंकि उनका कार्यकाल समाप्त जो हो रहा हैं! 

एक तरफ, बोर्ड में बैठें कुछ लोग यह भी कोशिशें कर रहें हैं कि सरकार उन्हें बोर्ड का "प्रधान" नियुक्त करें! यह भी कोशिश कर रहे हैं कि नये बोर्ड अथवा समिति में उन्हें स्थान मिल जाए. मिनहास बोर्ड को सहयोग करने वाले लोग (नांदेड़ के महारती) बड़ी संख्या में मा. मंत्री महोदय और मंत्रालय के चक्कर काट रहें हैं! खैर! ता. 3 मार्च से महाराष्ट्र विधानसभा का अधिवेशन शुरू हो रहा हैं. चर्चा हैं कि गुरुद्वारा बोर्ड की सत्ता काबिज रखने के लिए मुंबई में जोरशोर से प्रयास जारी हैं कि गुरुद्वारा बोर्ड एक्ट कलम ग्यारह संशोधन रद्द का विषय अधिवेशन में ना प्रस्तुत होने पाए. संशोधन के विषय में राजस्व विभाग की एक्ट संशोधन कमेटी का ड्राफ्ट तैयार हैं लेकिन संदेह है कि वह "ड्राफ्ट" अधिवेशन में पहूंच पायेगा कि नहीं! यदि आगामी अधिवेशन में सरकार द्वारा किया गया पिछला, वर्ष 2015 का संशोधन रद्द करने का निर्णय हो जाता हैं तब बोर्ड में प्रधान को चुनने का अधिकार हमारे सदस्यों को प्राप्त हो जायेगा. शायद हजूरी प्रधान बनाने का सपना साकार हो जाए! एक्ट संशोधन विषय के साथ संभव हैं कि बोर्ड बर्खास्त हो जाए अथवा नई कमेटी की नियुक्ति हो जाए! यह भी संभव है कि इस बोर्ड को एक माह का समय मिल जाए. सरकार चाहे तो इस दौरान जिल्हाधारी साहब का अभिप्राय भी मंगवा सकती है. 

अब उपर्युक्त विषय को लेकर नांदेड़, मुंबई और अमृतसर में तरह - तरह के आशावाद उभरते चलें जा रहें हैं. बोर्ड बचाने के लिए भागदौड़ मची हुईं हैं. 60 पार के लोगों के ब्रेन तेजी से काम कर रहें हैं. यह चर्चा भी जोर पकड़े हुए हैं कि इस समय बोर्ड के कुछ लोगों द्वारा की जा रहीं जद्दोजहद के विषय में बोर्ड के प्रधान साहब को कोई जानकारी तक नहीं हैं! स. भूपिंदरसिंघ मिनहास अस्वस्थ हैं और उपचाराधीन हैं. दूसरी ओर, मुंबई में बैठें एसजीपीसी के लोग गुरुद्वारा बोर्ड को बर्खास्ती से बचाने के लिए पंजाब और दिल्ली से एसजीपीसी और शिरोमणि अकाली दल के नेता मुंबई कूच कराने की तैयारी में जुटें हुए हैं. पहले भी शिरोमणि अकाली दल के नेता बोर्ड बचाने के लिए और कलम ग्यारह को राजनीतिक पेच में फंसने के लिए मुंबई आते रहें हैं. देखें इस बार कौन नया चेहरा अपनी चलाखी दिखाने मुंबई का रुख करता हैं! मुंबईया साहब लोग! इतना सब किसलिए? हजुरसाहिब को लेकर इतनी राजनीतिक जदोजहद और तिकड़मबाजी! कार्यकाल समाप्त होने का सच स्वीकार करना ही चाहिए ना! क्या नये लोगों के अवसर भी खा जाने की सोंच हैं आपकी? 

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