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शुक्रवार, 23 अक्टूबर 2020

दशहरा हल्ला महल्ला यात्रा को 

उच्च न्यायालय की सशर्त अनुमति!

रविंदरसिंघ मोदी  

 
(तखत सचखंड श्री हजूर अबचल नगर साहिब नांदेड़)

सिखों के पावन पवित्र धार्मिक स्थल तखत सचखंड श्री हजूर अबचल नगर साहिब के तत्वावधान में पारंपरिक दशहरा हल्ला महिला यात्रा के आयोजन को मुंबई उच्च न्यायालय की औरंगाबाद खंडपीठ द्वारा सशर्त अनुमति प्रदान की गई इस निर्णय के बाद स्थानीय सिख समाज में उत्साह का वातावरण बन गया है. न्यायालय निर्णय के बाद निर्धारित दशहरा के दिन हल्ला महल्ला नगर कीर्तन यात्रा ता. 25-10-2020 निकाली जायेगी. 


( दशहरा हल्ला महल्ला यात्रा का दृश्य )

शुक्रवार तारीख 23 अक्टूबर 2020 के दिन दोपहर औरंगाबाद उच्च न्यायालय खंडपीठ में माननीय न्यायाधीश श्री एस. वी. गंगापुर कर और माननीय न्यायाधीश एस.डी. कुलकर्णी की विशेष बेंच द्वारा गुरुद्वारा तखत सचखंड बोर्ड संस्था द्वारा प्रस्तुत याचिका पर कार्रवाई शुरू की गई. इस समय गुरुद्वारा तखत सचखंड बोर्ड सचिव सरदार रविंद्रसिंह बुंगई बोर्ड के याचिकाकर्ता के रूप में उच्च न्यायालय में उपस्थित थे. गुरुद्वारा बोर्ड के प्रधान स. भूपिंदरसिंघ मनहास द्वारा इस मामले में करवाई हेतु स. रविंदरसिंघ बुंगई को नियुक्त किया गया था. गुरुद्वारा तखत सचखंड बोर्ड के वकील के रूप में सुप्रसिद्ध अधिवक्ता श्री राजेंद्र देशमुख ने मजबूती के साथ अपना पक्ष प्रस्तुत किया. उनको अधिवक्ता श्री देवांग ने सहायता की. 

श्री राजेंद्र देशमुख द्वारा अपने अनुभव का उपयोग कर कार्रवाई के दौरान सभी तथ्य प्रस्तुत किये. न्यायालय द्वारा दशहरा हल्ला नगरकीर्तन यात्रा के लिए सशर्त अनुमति देने का निर्णय दिया गया जिसके नियम बहुत ही सख्त होंगे. महाराष्ट्र सरकार ने पहले अनुमति को सिरे से नकार दिया था. न्यायालय द्वारा क्या शर्ते रखीं गई इसका खुलासा नहीं हुआ है क्योंकि निर्णय (जजमेंट) की कॉपी प्राप्त नहीं हो पाई है. इसलिए खुलासा अगले पोस्ट में विस्तार से किया जायेगा. यात्रा में शामिल होने वालों के लिए कोरोना कोविड जाँच अनिवार्य की गई ऐसी प्राथमिक जानकारी मिली है. 

यात्रा के लिए केवल दो ट्रक वाहनों का उपयोग होगा जिस पर यात्रा विराजमान होगी. कोई पैदल नहीं चलेगा ऐसा भी निर्देश दिया गया ऐसी चर्चा हैं. यात्रा मार्ग संक्षिप्त होगा जिसका अंतर डेढ़ किलो मीटर से कुछ ज्यादा होगा. गुरुद्वारा मीठी बाउली साहब के पास से यह यात्रा पंजाब भवन यात्री निवास रोड से गुरुद्वारा साहब की ओर अग्रसर होगी ऐसा कहा जा रहा हैं. जजमेंट कॉपी पढ़ने के बाद ही सत्य परिस्थिति पता चलेगी.

यह विषय धार्मिक आस्था से जुड़ा होने के कारण इस मामले सभी पहलुओं पर विचार किया गया. साथ ही कोरोना संक्रमण के हालात का जिक्र इसमें किया गया. सभी तरह की स्वस्थ सेवाओं और सुरक्षा को लेकर भी न्यायलय द्वारा निर्देश दिए गए ऐसी जानकारी गुरुद्वारा बोर्ड के सचिव स. रविंदरसिंघ बुंगाई द्वारा दी गई. 

गुरुद्वारा सचखंड बोर्ड द्वारा दशहरा महल्ला से संबंधित सभी ऐतहासिक दस्तावेजों की पूर्ततः की गई. जिसका लाभ न्यायालय में याचिका करवाई संचालन के दौरान देखने को मिला. पक्ष सुनने के बाद और ऐतिहासिक प्रमाणों की पुष्टि के बाद खंडपीठ द्वारा अपना निर्णय सुनाया गया. निर्णय में सशर्त अनुमति देने की बात मा. न्यायाधीश के पैनल द्वारा की गई.

स. परमज्योतसिंघ चाहल ने बताया कि, इस याचिका के कार्यान्वयन में गुरुद्वारा बोर्ड के प्रधान स. भूपिंदरसिंघ मनहास का मुख्य मार्गदर्शन था. श्री मनहास ने भी इस सफलता पर प्रसन्नता व्यक्त की. दशहरा की परंपरा अखंडित रखने का हमारा प्रयास सफल रहा ऐसी बात उन्होंने कहकर लगातार प्रयास के लिए परमज्योतसिंघ चाहल और रविंदरसिंघ बुंगाई की उन्होंने सराहना की. 



हमारे देश पर कोरोना की आफत मुफ्त में आई है..! 

वोटों के लिए कोरोना टीके का वास्ता दिया जाए, ये तो ठीक नहीं !!

रविन्दरसिंह मोदी 

(प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी बिहार चुनाव अंगर्गत सासाराम विधानसभा में प्रचार रैली में )

 भारतीय जनता पार्टी और केंद्र सरकार के लिए बिहार विधानसभा चुनाव कितने महत्वपूर्ण हैं इसका अंदाजा इस बात से हो जाता है कि, भाजपा ने अपने चुनाव घोषणा पत्र में कोरोना संक्रमण टीका (वैक्सीन) मुफ्त में उपलब्ध करवाने का मुद्दा शामिल किया. क्या कोरोना बीमारी का भी राजनीतिकरण करना योग्य हैं? क्या भारत की जनता को मुफ्त टीका नहीं मिलेगा? क्या टीका पाने के लिए भाजपा को वोट देना जरुरी हैं? चुनावी सभाओं में कोरोना और रोकथाम टीके की बातें कहकर सहानुभूति बटोरनेवाली राजनीतिक पार्टियों को यह तो विचार करना चाहिए कि, भारत की जनता को तो कोरोना कोवीड १९ संक्रमण तो मुफ्त में मिला हैं! यह बीमारी पाने के लिए किसी भी भारतीय नागरिक ने वोट नहीं दिया था! जब बीमारी मुफ्त में मिली है तो टीका भी मुफ्त में ही मिलना चाहिए ना? केंद्र सरकार की कोरोना संक्रमण को लेकर "वोट के बदले वैक्सीन" का चुनावी घोषणा पत्र जारी करते समय सरकार ने क्या केवल भावनाओं की असंवेदनाओं की हद्दें नहीं लांघी? क्या सरकार ने सरकारी दायित्व को ही चुनावी मुद्दे के रूप में शामिल नहीं किया? 

(भारतीय पार्टी का बिहार चुनावी घोषणा पात्र जारी करते समय नेतागण)

शुक्रवार, ता. २३ अक्टूबर २०२० को प्रधानमंत्री ने बिहार के सासाराम चुनावी सभा के माध्यम से बिहार की जनता को संबोधित किया. उन्होंने बिहार में कोरोना संक्रमण से लड़ रही नितीश कुमार सरकार की सराहना करने में कोई कसर नहीं छोड़ी. मुख्यमंत्री नितीश कुमार ने कोरोना काल में सरकार के कार्यों का जिक्र कर अपने सरकार  केंद्र सरकार की पीठ थपथपाली. ऐसे समय प्रधानमंत्री भूल गए कि देश में कोरोना से किस राज्य की जनता सबसे अधिक पीड़ित और त्रस्त हैं. देश में कोरोना संक्रमितों की संख्या ७७ लाख ६२ हजार से अधिक हो गईं हैं. देश में अब तक कोरोना संक्रमण से एक लाख १७ हजार ३०६ मौतें दर्ज हो चुकी हैं. जिन्होंने प्राण गंवाएं हैं उन्होंने तो मुफ्त में ही गंवाएं. इन मौतों की जिम्मेदारी कौन लेगा? क्या केंद्र सरकार ने कोरोना से मरने वालों के परिवारों को कोई आर्थिक सहायता प्रदान की ? क्या संक्रमित मरीजों को फिर से उबरने के लिए मुफ्त दवाइयां या कोरोंटीन समय का वेतन अदा किया? नहीं! अब वैक्सीन मुफ्त में देकर केंद्र सरकार क्या सन्देश देना चाह रहीं हैं? 

(प्रधानमंत्री ने अभी तक कोई वैक्सीन को अधिकृत नहीं किया हैं. फिर घोषणापत्र में उसे शामिल क्यों किया गया है?)

वर्तमान समय में महाराष्ट्र कोरोना संक्रमण के हालात अकथनीय हैं. केंद्र सरकार ने कभी महाराष्ट्र के कोरोना हालातों की समीक्षा नहीं की हैं. प्रदेश में कोरोना संक्रमितों की संख्या १६ लाख २५ हजार से अधिक हैं. पिछले २४ घंटों में ७ हजार ५३९ नए मामले दर्ज हुए हैं वही चौबीस घंटों में १९८ लोगों ने जान भी गंवाई हैं. आइसीएमआर के निर्देशों के तहत वैक्सीन का कार्य जारी हैं लेकिन प्रभावशाली वैक्सीन कब उपलब्ध होगी उस संबंध कोई ठोस जानकारी अभी उपलब्ध नहीं हैं. केंद्र सरकार ने भी वैक्सीन को लेकर तिथि घोषित नहीं की हैं कि कब वैक्सीन उपचार का हिस्सा बनेगी. वैक्सीन तो उपलब्ध नहीं है फिर वो विषय घोषणापत्र का हिस्सा क्यों? इसीलिए की मतदाता कोरोना संक्रमण का भय भूलकर घरों से बाहर निकल आये. यदि मतदाता घरों से बाहर नहीं निकलेंगे तो सरकार कैसे बनेगी? 

(अब विपक्ष इस तरह से भाजपा को आड़े हाथों ले रहा हैं) 

गुरुवार, 22 अक्टूबर 2020

उच्च न्यायालय में याचिका दाखिल 

शुक्रवार को दशहरा हल्ला महल्ला आयोजन पर निर्णय 

रविन्दरसिंघ मोदी 

 ( तखत सचखंड श्री हजुरसाहब दशहरा महल्ला )

सिखों के पवित्र पावन स्थान तखत सचखंड श्री हजुरसाहब की पुरानी परंपरा के तहत यहां दशहरा हल्ला महल्ला नगरकीर्तन यात्रा के आयोजन को अनुमति देने के संबंध गुरुद्वारा तखत सचखंड बोर्ड द्वारा गुरुवार, ता. २२ अक्टूबर २०२० को मुंबई उच्च न्यायालय की औरंगाबाद खंडपीठ में याचिका प्रस्तुत की गई. जिसे न्यायालय द्वारा स्वीकार कर लिया गया. गुरुद्वारा सचखंड बोर्ड के सचिव स. रविंदर सिंघ बुंगाई ने यह याचिका गुरुद्वारा बोर्ड के याचिकाकर्ता  के रूप में प्रस्तुत की. जिस पर न्यायालय द्वारा शुक्रवार ता. २३ अक्टूबर २०२० के दिन सुनवाई होगी. 

 गुरुद्वारा सचखंड बोर्ड की ओर से विधितज्ञ एडवोकेट श्री राजेंद्र देशमुख याचिका पर अपना पक्ष रख रहें हैं. संभवतः शुक्रवार को दशहरा हल्ला महल्ला यात्रा को सशर्त अनुमति मिलने की उम्मीद हैं. लेकिन इस विषय में महाराष्ट्र सरकार किस तरह से पक्ष रखती है उस पर बहुत कुछ निर्भर होगा. स्वाभाविक हैं कि इस विषय में नांदेड़ के जिल्हाधिकारी और नांदेड़ महानगर पालिका को भी उच्च न्यायालय द्वारा प्रश्न किया जायेगा. महाराष्ट्र सरकार ने सर्वोच्च न्यायालय में अपना पक्ष रखते हुए अनुमति देने के लिए असमर्थता व्यक्त की थीं.

 
(औरंगाबाद उच्च न्यायालय खंडपीठ)

 उल्लेखनीय है कि बुधवार, ता. २१ अक्टूबर को मुंबई मंत्रालय के आपत्ति व्यवस्थापन मंत्रालय द्वारा कोरोना कोवीड १९ के हालातों का जिक्र कर अनुमति देने से इंकार कर दिया था. जिसके बाद गुरुद्वारा बोर्ड ने आज सर्वोच्च न्यायालय नियमों अंतर्गत मुंबई उच्च न्यायालय के औरंगाबाद खंडपीठ में याचिका प्रस्तुत की. यह याचिका फास्टट्रैक कोर्ट के विशेष कक्ष में सुनी जाएगी और २३ अक्टूबर को दोपहर तक कोई नतीजा निकलकर सामने आएगा. स. रविन्दरसिंघ बुंगाई ने फ़ोन पर जानकारी देते हुए आशा जताई कि कल सारी परिस्थिति अनुकूल हो और दशहरा हल्ला महल्ला की परंपरा के तहत  नगरकीर्तन यात्रा को अनुमति मिल जाये. दूसरी ओर हजुरसाहब की साधसंगत की निगाह भी अनुमति की ओर लगी हुई हैं.

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बुधवार, 21 अक्टूबर 2020

मंत्रालय से दशहरा हल्ला महल्ला को अनुमति नहीं !!

मुंबई उच्चन्यायालय से उम्मीद 

रविंदरसिंघ मोदी 

(दशहरा महोत्सव फाइल फोटो)

तखत सचखंड श्री हजुरसाहब के तत्वावधान में आयोजित होनेवाले पारंपरिक दशहरा हल्ला महल्ला नगरकीर्तन यात्रा को अनुमति देने के विषय में महाराष्ट्र सरकार के आपत्ति व्यवस्थान विभाग (मंत्रालय) ने बुधवार, ता. 21-10-2020 को अपील को ख़ारिज कर दिया. कोरोना संक्रमण अनियंत्रित अवस्था में होने का हवाला देकर यह अनुमति नकार दी है. जिसके बाद अब इस विषय को लेकर मुंबई उच्चन्यायालय में आशाएं पल्लवित है. 

उपर्युक्त संबंध में गुरुद्वारा सचखंड बोर्ड के समन्वयक सदस्य, पूर्व न्यायाधीश स. परमज्योतसिंघ चाहल ने इस बात का स्पष्टीकरण दिया कि, महाराष्ट्र सरकार के डिजास्टर मैनेजमेंट विभाग (मंत्रालय) ने गुरुद्वारा सचखंड बोर्ड का पक्ष सुनने के बाद महाराष्ट्र सरकार की निर्धारित भूमिका के तहत नगरकीर्तन यात्रा आयोजन को अनुमति नकार दी है. 


उल्लेखनीय है कि, गत दिनों गुरुद्वारा सचखंड बोर्ड नांदेड़ द्वारा देश के सर्वोच्च न्यायालय में एक याचिका दायर कर 'दशहरा हल्ला महल्ला नगरकीर्तन यात्रा' के आयोजन को अनुमति प्रदान करने की अपील की थीं. यह विषय धार्मिक भावना और मर्यादा अंतर्गत होने के कारण सर्वोच्च न्यायालय द्वारा गुरुद्वारा बोर्ड की अपील पर पूरा ध्यान दिया गया. लेकिन महाराष्ट्र में कोविड 19 कोरोना संक्रमण के हालात को लेकर अंतिम निर्णय महाराष्ट्र सरकार और राज्य के उच्च न्यायालय की सोच पर निर्धारित कर दिया गया. 

जिसके तहत संबंधित विषय को लेकर गुरुद्वारा बोर्ड द्वारा मुंबई मंत्रालय अंतर्गत आपत्ति व्यवस्थापन विभाग के सामने अनुमति को लेकर विषय प्रस्तुत किया गया था. विभाग के प्रमुख संचालक अधिकारी श्री किशोर निंबालकर द्वारा उनके न्यायिक कक्ष में गुरुद्वारा बोर्ड का पक्ष सुना गया. स. परमज्योतसिंघ चाहल ने गुरुद्वारा बोर्ड का पक्ष प्रस्तुत करते हुए तखत सचखंड श्री हजूर साहब की मर्यादा और परंपराओं का हवाला देकर सरकार द्वारा दशहरा हल्ला महल्ला यात्रा को अनुमति देने की अपील की. श्री निंबालकर ने अपने निर्णय में कहा कि, महाराष्ट्र में कोरोना संक्रमण के हालात अनियंत्रित है जिसके कारण सरकार इस तरह की अनुमति प्रदान करने में असमर्थ है. महाराष्ट्र में किसी भी तरह के धार्मिक आयोजन को फिलहाल अनुमति देना मुनासिब नहीं होगा. श्री निंबालकर ने आपत्ति व्यवस्थापन कानून २००५ की धाराओं के तहत अपना निर्णय स्पष्ट किया. जिसमे कहा गया है कि किसी भी धार्मिक, सामाजिक कार्यक्रम को अभी अनुमति नहीं दी जा सकती. तारीख ३० सितंबर २०२० को सरकार ने आदेश जारी किया हुआ है जिसमे महाराष्ट्र में ३१ अक्टूबर २०२० तक लॉकडाउन घोषित किया हुआ हैं.

श्री चाहल ने इस संदर्भ में बताया कि, अभी हमारे सामने मुंबई उच्चन्यायालय का विकल्प शेष है. सुप्रीम कोर्ट द्वारा अपने निर्णय मे उच्चन्यायालय का विकल्प निर्देशित किया हुआ है. गुरुद्वारा बोर्ड इस विकल्प को भी आजमाएगा. गौरतलब है कि दशहरा हल्ला महल्ला के आयोजन को लेकर सिख समाज उत्साही हैं. सभी की भावनाएं हैं कि दशहरा हल्ला महल्ला का आयोजन किया जाए. अब उच्चन्यायालय पर सभी की आशाएं केंद्रित होना स्वाभाविक हैं. 

मंत्रालय के निर्णय की प्रतियां..... पढियेगा. 









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मंगलवार, 20 अक्टूबर 2020

 संतबाबा प्रेमसिंघजी का व्यक्तित्व प्रेरणास्त्रोत : संतबाबा कुलवंतसिंघजी 

पहली बरसी कार्यक्रम संपन्न !

(गुरुद्वारा माता साहेबदेवाजी बरसी कार्यक्रम)

 हजूर साहब 20 अक्टूबर 2020

तखत सचखंड श्री हजुरसाहब के जत्थेदार संतबाबा कुलवंतसिंघजी ने मंगळवार, ता. 20 अक्टूबर को गुरुद्वारा मातासाहब देवाजी में आयोजित संतबाबा प्रेमसिंघजी की पहली बरसी कार्यक्रम के दौरान उपस्थित साधसंगत को संबोधित करते हुए कहा कि, संतबाबा प्रेमसिंघजी एक सामान्य सेवक से गुरुद्वारा मातासाहिब देवाजी गुरुद्वारा के जत्थेदार बनें और आगे चलकर उन्होंने बूढा दल के जत्थेदार पद को प्राप्त किया. लगभग चालीस वर्षों के संघर्ष, सेवा और समर्पण के कारण उनका व्यक्तित्व उभरकर सामने आया. बाबाजी का व्यक्तित्व सही मायने में प्रेरणास्त्रोत था.

उन्होंने आगे कहा, संतबाबा प्रेमसिंघ जी ने धार्मिक क्षेत्र में अपना मकाम कायम किया. बाबाजी ने नाम सिमरन, बाणी पठन और सेवा को ध्यान में रखा. उन्होंने सदा सभी का आदर सत्कार किया. हजूर साहब में उन्होंने अन्य संतों के साथ अच्छा व्यवहार स्थापित किया था. उनकी तरह ही मातासाहब इस स्थान की सेवा बाबा तेजासिंघजी भी निभाएंगे ऐसी पूरी उम्मीद है. 

कार्यक्रम में संतबाबा बलविंदरसिंघजी कारसेवावाले ने भी संबोधित किया. साधसंगत को नाम जपाने के बाद बाबाजी ने कहा, सेवा एक जिम्मेदारी होती है. सभी संत अपने सामर्थ्य के हिसाब से सेवा निभाते है. संतबाबा प्रेमसिंघ जी ने मातासाहब के लिए पूरा जीवन समर्पित कर दिया. आज उनकी बरसी के मौके पर उनको याद कर हर कोई धन्यता महसूस कर रहा है.


इस अवसर पर गुरुद्वारा मातासाहब देवाजी स्थान पर बरसी कार्यक्रम में तखत सचखंड हजूर साहब के मीत जत्थेदार संतबाबा ज्योतिंदरसिंघजी, हेडग्रंथी भाई कश्मीरसिंघजी, मीतग्रंथी भाई गुरमीतसिंघजी, पंजप्यारे भाई जगिंदरसिंघजी, ज्ञानी भाई अवतारसिंघजी शीतल, संतबाबा बलविंदरसिंघजी कारसेवावाले, जत्थेदार संत बाबा तेजासिंघजी मातासाहेबवाले, ज्ञानी हरदीपसिंघ कथाकार, ज्ञानी बक्षीसिंघ कथाकार, गुरुद्वारा बोर्ड सदस्य गुरमीतसिंघ महाजन, मनप्रीतसिंघ कुंजीवाले, राजिंदरसिंघ पुजारी,  गुरमीतसिंघ बेदी, हरजिंदरसिंघ, गुलाबसिंघ, भारतसिंघ,  जसबीरसिंघ बुंगाई, राजसिंघ रामगढ़िया सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित थे. 

बरसी अवसर पर श्री गुरु ग्रन्थसाहब जी के पाठ की समाप्ति, कीर्तन दरबार, कथा और अरदास कार्यक्रम हुए. उल्लेखनीय है कि, संतबाबा प्रेमसिंघजी ता. 19-10-2019 के दिन एक सड़क हादसे का शिकार हो गये थे, जिसमें उन्होंने संसार को अलविदा कह दिया था. बाबा जी की पहली बरसी ता. 20-10-2020 को मनाई गई






शनिवार, 17 अक्टूबर 2020

 हजूर साहब में दशहरा महात्म पर्व प्रारंभ 

तखत साहब में "श्री चंडी साहब पाठ" शुरू 

श्री हजूर साहब में परंपरागत दशहरा महात्म और हल्ला महल्ला पर्व की शुरुआत हो गई है. शनिवार, ता. 17 अक्टूबर 2020 से लेकर ता. 25 अक्टूबर 2020 तक यह पारंपरिक त्यौहार चलेगा. ता. 25 अक्टूबर को दशहरा त्यौहार मनाया जायेगा. 

(तखत सचखंड श्री हजुरसाहब में दशहरा महात्म श्री चण्डीसाहब पाठ प्रारंभ हुए )

वरात्रि की पहली तिथि पर तखत सचखंड श्री हजूर साहब में "श्री चंडी साहब" के पाठ आरंभ हुए. श्री दशम ग्रन्थ साहब अंतर्गत वीर रस पर आधारित चुनिंदा बाणियों का संच "दशहरा महात्म" के उल्लेख से जाना जाता है. दशहरा के अवसर पर तखत सचखंड और यहां के परिसर में श्री चंडी साहब के पाठ प्रथा के तहत आयोजित होते हैं. यह कई वर्ष पुरानी प्रथा और तखत साहब की मर्यादा भी है. 

(तखत सचखंड श्री हजूर साहब, नांदेड़)

(तखत सचखंड श्री हजूर साहब, नांदेड़)

तखत सचखंड श्री हजूर साहब गुरुद्वारा के अतिरिक्त शहर में अन्य स्थानों पर भी पाठ शुरू हुए. जिनमें गुरुद्वारा सिख छावनी नगिनाघाट, गुरुद्वारा मातासाहब देवाजी, गुरुद्वारा बाबा भुजंग सिंघ शहीदपूरा, भाई संतोखसिंघ जी विद्यालय अबचल नगर, बुंगा बंजरगाह बंजारा आश्रम,  गुरु नानक नगर नंदीग्राम सोसाइटी और अन्य निजी स्थानों पर पाठ की शुरुआत हुई. इन पाठ का समापन दशहरा के दिन दोपहर के समय होगा. 

(भाई संतोखसिंघजी विद्यालय, अबचल नगर, नांदेड़)

(बुंगा बंजरगाह, परशनसिंघ महंत)


(श्री गुरु नानक नगर, नंदीग्राम सोसायटी, नांदेड़)
 

शुक्रवार, 16 अक्टूबर 2020

 दशहरा हल्ला महल्ला की पहल देशव्यापी हो तो सफलता !

दिल्ली की साधसंगत भी करें सरकार से मांग 

रविंदरसिंघ मोदी

(हजुरसाहब के परंपरागत दशहरा हल्ला महल्ला की फाइल फोटो)

तखत सचखंड श्री हजूर अबचल नगर साहब इस धार्मिक स्थल पर मनाये जानेवाले परंपरागत हल्ला महल्ला नगरकीर्तन यात्रा का विषय अब देश की सर्वोच्च अदालत यानी सुप्रीम कोर्ट में प्रस्तुत हैं. इस याचिका को स्वीकृत कर न्यायालय क्या निर्णय करेगा अभी हम कुछ कह नहीं सकते. कुलमिलाकर यह विषय अब संविधानिक दायरे में चला गया हैं. सर्वोच्च न्यायालय के पास प्रस्तुत विषय, धार्मिक तथ्य, अखंड परंपरा, श्रद्धा-भावना, इतिहास, जनभावना और अल्पसंख्यक धार्मिक अधिकार यह सिख पंथ का प्रबल पक्ष होना चाहिए. यूँ कहा जाए तो अनुचित ना महसूस किया जाए, कि यह बात एक तरह से श्री हजूर साहब की यह दो - तीन सौ वर्षों की अखंड मर्यादा, परंपरा और सांस्कृतिक योगदान के कसौटी की यह घड़ी हैं. 

ऐसे समय में सिख पंथ को चाहिए कि धार्मिक अधिकारों के निर्वहन की स्वतंत्रता हेतु संविधानिक मूल्यों की प्रदत्तता प्राप्त हो इसलिए सर्वधर्मीय समर्थन जुटाया जाए. जब तक हमारी परंपराओं, मर्यादा, इतिहास, जीवनशैली, सामाजिक योगदान, राष्ट्रभक्ति और सामाजिक सदभावयुक्त आचरण का देश के कोने - कोने तक सक्षम रूप से प्रचार - प्रसार नहीं हो जाता तब तक हमारी धार्मिक भावनाओं को ना स्वीकृति मिल सकती हैं और ना सम्मान. दशहरा हल्ला महल्ला यात्रा परंपरागत होने का विषय महाराष्ट्र, तेलंगाना, पंजाब और कुछ राज्यों के सिखों तक ही विस्तारित हैं. अन्य धर्म या केंद्र सरकार हमारी परंपराओं से अनभिज्ञ हैं यह सबसे बड़ा वास्तव हैं. हमारे प्रचार - प्रसार का तंग दायरा सर्वथा इसके लिए सबसे बड़ा कारण हैं. हमारे सोशल मीडिया का उपयोग भी संकुचित और व्यक्तिगत धारणाओं तक सीमित हैं यह भी एक कड़वी सच्चाई हैं. हमारा प्रचार - प्रसार केवल अपने लिए या निश्चित समूह के लिए हैं. देश की एक सौ तीस करोड़ जनता को दो प्रतिशत जनसंख्यावाले किसी धर्म, पंथ या समूह की धार्मिक आस्थाओं में क्या दिलचस्पी हो सकती हैं? राजनीतिक पार्टियां भी वहीं अपनी दिलचस्पी प्रदर्शित करती हैं जहां मतों का समीकरण हो. अन्य धर्म, जाति, समूह की संलिप्तता भी उन पंथ और समूहों के प्रति कम हो जाती हैं जिनकी जनसंख्या आंदोलन के रूप में प्रभाव नहीं डालती. मेरी व्यक्तिगत सोच पर आधारित यह कुछ बातें आज की अटल सच्चाई हैं की ओर संकेत करती हो. हो सकता हैं कि आपकी सोच अलग हो. मैं अन्य सभी की व्यक्तिगत भावनाओं को भी सम्मानपूर्वक स्वीकार करता हूँ कि इस विषय में जानकर लोग मंथन करें. 

(दशहरा हल्ला महल्ला की फाइल फोटो)

कहने का तात्पर्य यहीं हैं कि तखत सचखंड श्री हजूर साहब की मर्यादा, परंपरा, इतिहास और जीवनशैली को वैश्विक रूप से प्रस्तुत करने का यह सही समय आ गया हैं. यह विषय सर्वोच्च न्यायालय की परिधि में अंतर्भूत हो जाने के कारण हमें भी हमारे धार्मिक तथ्यों के साथ तैयार रहना होगा. वैसे तो इस विषय का निराकरण महाराष्ट्र सरकार के संज्ञान में प्रथम प्रस्तुत करना योग्य होता. महाराष्ट्र में कोरोना संक्रमण के हालात बेकाबू होने का हवाला देकर सरकार द्वारा आनेवाली तिथि 31-10-2020 तक लॉकडाउन अमल में रखा गया हैं. राज्य में धार्मिक स्थल और कुछ अन्य क्षेत्र प्रतिबंधित आदेश अंतर्गत हैं. कुछ राजनीतिक पार्टियों ने धार्मिक स्थल खोले जाने को लेकर अभी - अभी प्रदेश में बड़ा आंदोलन भी किया था. मंदिर, मस्जिद, चर्च आदि के प्रतिनिधि भी आंदोलन में शामिल हुए थे. इस आंदोलन से सिख पंथ नदारद रहा!! सिख पंथ की मांग महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री तक प्रस्तुत होनी चाहिए थी जिसके लिए पिछले दिनों हुआ आंदोलन एक मंच साबित हो सकता था. आज जब दशहरा हल्ला महल्ला यात्रा निकाले जाने की बात हैं, सिख पंथ सबसे अलग - थलग खड़ा दिखाई दें रहा है. कारण तलाशें जाए ! 


 

दिल्ली की साधसंगत संज्ञान लें :

यदि आज दशहरा हल्ला महल्ला की परंपरा अखंडित रखनी हो तो देश भर की सिख संगत, श्री गुरु नानक नामलेवा संगत और सिख धर्म में आस्था रखनेवाले सभी धर्मों और जातीय समूहों के समर्थन की भी आवश्यकता हैं. हमारे सिख सांसद, सिख विधायक और जनप्रतिनिधि भी विषय की प्रस्तुति को लेकर आगे आये. विषेश रूप से दिल्ली के हमारे सिख नेतागण और धार्मिक आगू भी सर्वोच्च न्यायालय के संज्ञान में धार्मिक तथ्य परोसने के लिए अग्रसर हो जाए. सर्वोच्च न्यायालय में प्रैक्टिस कर रहें सिख अधिवक्ता (वकील) भी पंथ के प्रति मर्यादा का अहसास रखकर स्वयं इच्छा से अपना पक्ष रखने हेतु आगे आये. तभी इस मामले में पूर्ण सफलता अर्जित हो सकती हैं. हमारा न्यायिक पक्ष सक्षम होना अनिवार्य हैं. तभी संविधानिक संस्थाएं हमारी मान्यताओं पर मुहर लगाएगी.  दिल्ली की साधसंगत यदि वहां की मीडिया में दशहरा हल्ला महल्ला के परंपरागत इतिहास  मर्यादा का विषय मीडिया में प्रचारित करती हैं तब केंद्र सरकार और संविधानिक संस्थानों तक हजुरसाहब के सिखों की मांग पहुंचेगी. यदि विनम्रता और संयमी भूमिका के तहत यह विषय उठाया जाये तो निश्चित ही परंपरागत दशहरा हल्ला महल्ला निकालने जाने को सफलता प्राप्त हो सकती हैं.

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बुधवार, 14 अक्टूबर 2020

 

दशहरा हल्ला महल्ला यात्रा को अनुमति देने की मांग !

सुप्रीम कोर्ट में याचिका हुई प्रस्तुत 

रविन्दरसिंह मोदी 
 

( दशहरा महल्ला यात्रा की फाइल फोटो )


महाराष्ट्र के पवित्र शहर नांदेड़ स्थित तखत सचखंड श्री हजुरसाहब के तत्वावधान में हर वर्ष मनाये जानेवाले पारंपरिक दशहरा हल्ला महल्ला यात्रा के आयोजन को अनुमति पाने के उद्देश्य से तिथि १४ अक्टूबर २०२० को देश के सर्वोच्च न्यायालय में याचिका प्रस्तुत की गई. सर्वोच्च न्यायालय द्वारा शीघ्र इस याचिका पर अगली सुनवाई होने की सम्भावना हैं.

इस संबंध में याचिकाकर्ता गुरुद्वारा सचखंड बोर्ड के सेक्रेटरी स. रविंदर सिंघ बुंगाई ने फोन पर दिल्ली से जानकारी दी कि, सर्वोच्च न्यायालय में आज दोपहर याचिका को प्रस्तुत किया गया है. अधिवक्ता एडवोकेट प्रवीण चतुर्वेदी ने न्यायालय में याचिकाकर्ता का पक्ष रखा. सर्वोच्च न्यायालय में आज की तिथि में याचिका प्रस्तुत की गई. अगली तारीख शीघ्र मिल जाएगी. 


याचिका में यह विषय प्रस्तुत किया गया कि, महाराष्ट्र के नांदेड़ शहर जिसे हजुरसाहब के नाम से धार्मिक पहचान प्राप्त हैं, यहां हर वर्ष दशहरा का त्यौहार पारंपरिक रूप से मनाने की प्रथा है. जिस तरह से उड़ीसा के जगन्नाथ पुरी इस धार्मिक स्थल पर रथयात्रा निकालने की प्रथा है, उसी तरह सिखों के पवित्र स्थान तखत सचखंड श्री हजुरसाहब में दशहरा अवसर पर हल्ला महल्ला यात्रा निकालने विगत तीन सौ वर्षों की पुरानी परंपरा कायम हैं. कोविड १९ कोरोना संक्रमण के चलते महाराष्ट्र सरकार द्वारा तिथि ३१ अक्टूबर २०२० तक लॉकडाउन अमल में लाया गया हैं. जिसके चलते जिल्हा प्रशासन द्वारा दशहरा हल्ला महल्ला यात्रा को अनुमति देने से इंकार कर दिया गया हैं. जबकि लाखों श्रद्धालुओं की यह इच्छा हैं कि धार्मिक मर्यादा (प्रथा) की अनुपालना हो. स्थानीय लोगों द्वारा भी यह मांग प्रस्तुत की जा रही हैं. गुरुद्वारा तखत सचखंड श्री हजुरसाहब के पंजप्यारे साहिबान ने भी यात्रा निकाले जाने के संबंध में सकारात्मक निर्णय लिया हैं. सबकी भावनाओं को विचाराधीन रखते हुए यह याचिका प्रस्तुत की जा रही हैं. 

रविन्दरसिंघ बुंगाई आगे बताया कि इस धार्मिक यात्रा के आयोजन को अनुमति मिले इसलिए गुरुद्वारा बोर्ड द्वारा याचिका को सक्षमरित्या प्रस्तुत किया गया हैं.

उल्लेखनीय है कि तखत सचखंड श्री हजुरसाहब इस स्थान पर हर वर्ष परंपरागत रूप से दशहरा हल्ला महल्ला का आयोजन किया जाता हैं. इस वर्ष दशहरा हल्ला महल्ला आयोजन की तिथि २५ अक्टूबर २०२० को होनी हैं. दशहरा की इस यात्रा में शामिल होने के लिए पंजाब, हरियाणा, दिल्ली, मध्यप्रदेश, तेलंगाना और महाराष्ट्र से बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं पहुँचते हैं. लेकिन अबके कोविड १९ कोरोना वायरस संक्रमण के चलते पंजाब और अन्य प्रदेशों से यात्री कम ही आने की उम्मीद हैं. लेकिन यदि इस यात्रा को अनुमति मिलती है तो स्थानीय श्रद्धालु और निहंग सिंघों के दल उसमें शामिल हो सकते हैं. हर वर्ष दसहरा के अवसर पर निहंग सिंघों के पांच से छह दल शिरकत करते हैं. 
 
(दशहरा हल्ला महल्ला file photo)

यह स्थान श्री गुरु गोबिंदसिंघजी महाराज का अंतिम स्थान हैं. इस स्थानपर श्री गुरु ग्रंथसाहब को गुरुगद्दी प्रदान की हुई हैं. यहां मनाये जानेवाले सभी त्यौहार परंपरागत और धार्मिक मर्यादा के तहत होते हैं. 
गुरुद्वारा तखत सचखंड बोर्ड नांदेड़ के सचिव स. रविन्दरसिंघ बुंगाई याचिका प्रस्तुत करने के समय सर्वोच्च न्यायालय के सामने दस्तावेज प्रदर्शित करते हुए.
 

हैदराबाद में बारिश से तबाही!!

 हैदराबाद में बारिश से तबाही!!

आठ  लोगों ने जानें गंवाई

 महाराष्ट्र और तेलंगाना में अगले दो दिन बरसात की संभावना  

रविन्दरसिंघ मोदी 

तेलंगाना और महाराष्ट्र  में भारी बारिश जारी हैं. पिछले चौबीस घंटों में बारिश के चलते आठ लोंगो ने अपनी जानें गंवाईं हैं. दो तीन दिन पूर्व मौसम विभाग द्वारा बड़ी बरसात की चेतावनी जारी की थीं. चेतावनी सही साबित हुईं. महाराष्ट्र के पूर्वी छोर पर बरसात हुई जिसका असर नांदेड़, यवतमाल, हिंगोली, लातूर, औरंगाबाद  जिलों में देखने को मिला. दूसरी ओर तेलंगाना के हैदराबाद क्षेत्र  में भारी बारिश  के चलते तबाही के दृश्य सामने आए हैं. खबर हैं कि, पिछले २४ घण्टों में लगातार बारिश के चलते ८ लोगों  की मौत हो गई हैं. हैदराबाद महानगर की  कोई भी सड़क या गलीं ऐसी नहीं बची जो दो से तीन फुट पानी में गुम नहीं हुईं हो. सभी सड़कों पर बरसात का पानी किसी नदी की तरह बह रहा हैं. सड़कों पर बहतें पानी में हजारों की संख्या में वाहन तैरते नजर आ रहे हैं. साथ ही रिहाइशी इलाकों में हजारों मकानों में बरसात का पानी भर आया हैं. बारिश से लाखों लोगों का जनजीवन अस्त-व्यस्त होता दिखाई दे रहा हैं. खबर हैं कि, इस बारिश के कारण करोड़ों की क्षति पहुंची हैं. व्यापारियों को बारिश के कारण बहुत नुक्सान उठाना पड़ रहा हैं. पुलिस प्रशासन रास्तों पर उतरकर कार्य कर रहा हैं. दमकल विभाग भी चौबीस घंटों से आपत्ति सहायता में जुटा हुआ हैं. बारिश के चलते सड़क और रेल यातायात ठप्प हैं. हवाई यात्रा पर भी बड़ा असर पहुँचने के समाचार हैं.


(हैदराबाद  शहर की सड़कें और बाज़ारों में  जलकहर का दृश्य !)



 महाराष्ट्र और तेलंगाना में अगले दो दिनों तक बड़ी बरसात की सम्भावना बनीं हुईं हैं. लाम्बी दूरी की यात्रा के लिए अगले दो दिन प्रतिकूल असर कर सकते हैं. हालाँकि बरसात का मौसम अपनी अवधि पूरी कर चूका हैं।  बीतें समय में महाराष्ट्र में पूरा मौसम टूटकर बरसां हैं. प्रदेश में कुलमिलाकर १०९ प्रतिशत बारिश होने के समाचार मिले हैं. इस समय बरसात का रूद्र रूप देखकर यही कहा जा सकता हैं कि, कोई भी नागरिक अनावश्यक रूप से यात्रा ना करें. नदिया  उफान हैं. सड़कें डूबी हुई हैं. कोई भी  दुर्घटना घटित हो सकती हैं. 

 

 

 

 

 

मंगलवार, 13 अक्टूबर 2020

दशहरा हल्ला महल्ला निकालने की मांग

 दशहरा हल्ला महल्ला निकालने की मांग 

सुप्रीम कोर्ट से अनुमति प्राप्त करने के लिए प्रयास !

रविंदरसिंह मोदी 

 (तखत सचखंड श्री हजुरसाहब : दशहरा हल्ला महल्ला की फाइल फोटो.)

जूर साहब  :  तखत सचखंड श्री हजूर साहब गुरुद्वारा के तत्वावधान में हर वर्ष आयोजित होनेवाला ऐतहासिक और पारंपरिक "दशहरा हल्ला महल्ला" यात्रा के इस वर्ष के आयोजन को कोरोना कोविड - 19 संक्रमण लॉकडाउन के चलते जिला प्रशासन से अनुमति नहीं मिल पाई है. महाराष्ट्र में आगामी 31अक्टूबर 2020 तक लॉकडाउन अमल में रहेगा. इसलिए स्थानीय गुरुद्वारा सचखंड बोर्ड प्रशासन द्वारा अनुमति के लिए सुप्रीम कोर्ट में याचिका प्रस्तुत करने के प्रयास किये जा रहें हैं. 

उपर्युक्त विषय में अधिक जानकारी यह है कि, तखत सचखंड श्री हजूरसाहब के तत्वावधान में आनेवाली तारीख 25-10-2020 को दशहरा का पारंपरिक त्यौहार मनाया जायेगा. सिख धर्म में दशहरा त्यौहार मनाने की परंपरा पुरानी है. दशहरा से पूर्व नौ दिन श्री चंडी साहब का पाठ करवाया जाता है. दशहरावाले दिन पाठ की समाप्ति उपरांत दशहरा हल्ला महल्ला यात्रा का आयोजन किया जाता है. श्री हजूर साहब में दशहरा हल्ला महल्ला का पारंपरिक महत्त्व होने के कारण यहां यह त्यौहार मनाने हेतु निहंग सिंघों के सशस्त्र दल पहुँचते हैं. हजारों लाखों की संख्या में यहां श्रद्धालु भी पहुँचते हैं. यह त्यौहार परंपरागत होने के कारण वर्षों से चली आ रहीं परंपरा खंडित हो ऐसी भावना स्थानीय सिख समाज द्वारा व्यक्त हो रहीं है. 

इस वर्ष कोरोना कोविड 19 वाइरस के संक्रमण के चलते शायद श्रद्धालु अनुपस्थित हो सकते हैं. या उनकी संख्या कम हो सकती हैं. दूसरी ओर स्थानीय साधसंगत में हल्ला महल्ला के आयोजन को लेकर गुरुद्वारा प्रशासन से मांग की जा रहीं है. आनेवाले दशहरा हल्ला महल्ला यात्रा के आयोजन के लिए जिला प्रशासन द्वारा अनुमति प्रदान नहीं की गई जिससे स्थानीय सिख समाज द्वारा नाराजी व्यक्त हो रहीं हैं. इस नाराजी को देखते हुए गुरुद्वारा बोर्ड प्रशासन ने अब सुप्रीम कोर्ट में अनुमति याचिका प्रस्तुत करने के लिए प्रयास शुरू कर दिए हैं. लेकिन समय की कमी की दिक्कत यहां स्पष्ट रूप से दिखाई दें रहीं है इसमें संदेह नहीं है. गुरुद्वारा बोर्ड द्वारा याचिका प्रस्तुत करने हेतु वकीलों से संपर्क साधा जा रहा हैं. आनेवाला समय ही तय करेगा कि इस विषय में याचिका प्रस्तुत हो पायेगी या नहीं. 

उल्लेखनीय हैं कि, सुप्रीम कोर्ट में विषय प्रस्तुत कर ओड़िसा की सुप्रसिद्ध जगन्नाथ पुरी रथयात्रा के तर्ज पर नांदेड़ की दशहरा यात्रा को अनुमति मिले यह प्रयास किये जा रहे हैं. यदि इस मुद्दे का आधार लिया जाता है तब कुछ शर्तों पर सर्वोच्च न्यायालय अनुमति प्रदान कर सकता हैं. 



बुधवार, 23 सितंबर 2020

जम्मू कश्मीर में पंजाबी को स्थान नहीं !

 जम्मू कश्मीर में पंजाबी को स्थान नहीं !

कश्मीरी, डोगरी और हिंदी अब कार्यालयीन भाषा 

रविंदरसिंह मोदी 

बुधवार को देश की संसद में कश्मीरी, डोंगरी और हिन्दी भाषा को राज्य की कार्यालयीन भाषाओं में शामिल कर लिया गया. जबकि पंजाबी, गुर्जरी और पहाड़ी भाषाओं को सरकारी कामकाज की भाषा के रूप में मान्यता प्रदान नहीं की गईं. 

आज भारतीय जनता पार्टी सरकार ने संसद में जम्मू कश्मीर ऑफिसियल लैंग्वेज बिल 2020 को पारित कर दिया. सरकार के भाषा विभाग कामकाज मामलो के राज्य मंत्री श्री जी. किशन रेड्डी ने बताया कि तीनों भाषाओं को बोलने वालों की संख्या और उन भाषाओं के व्यवहार के महत्त्व को देखते हुए प्रस्तावित बिल को आज मंजूरी दी गई. पंजाबी, गुर्जरी और पहाड़ी भाषाओं को फिलहाल सरकारी कामकाज की सूची में शामिल नहीं किया जा सका. 

पंजाबी भाषा को जम्मू कश्मीर मे सरकारी भाषा का स्तर दिलवाने के लिए आगे आया शिरोमणि अकाली दल आज बेबस और बैकफुट पर नजर आया. तेजतर्रार नेता सुखबीर सिंह बादल और श्रीमती हरसिमरत कौर बादल आज बहस से दूर ही रहें. पार्टी की ओर से सांसद नरेश कुमार गुजराल ने सरकार के निर्णय पर नाराजी प्रकट की. उन्होंने कहा, जम्मू कश्मीर मे सतरह लाख लोग पंजाबी बोलते हैं. लेकिन सरकार ने इस भाषा को ऑफिसियल लैंग्वेज के रूप अस्वीकार कर दिया. रिपब्लिकन पार्टी के नेता श्री रामदास आठवले ने इस समय कहा, कश्मीरी और डोगरी भाषा को सूची मे शामिल करने का निर्णय ठीक हैं. 

बताया जा रहा हैं कि अभी तीन दिन पहले शिरोमणि अकाली दल की नेता हरसिमरतकौर बादल ने कैबिनेट मंत्रिपद का त्यागपत्र सौप दिया था. जिसके चलते भारतीय जनता पार्टी के सभी शीर्ष नेता शिरोमणि अकाली दल से खासे नाराज हो गए थे. इसी नाराजी के चलते जम्मू कश्मीर मे पंजाबी भाषा को आधिकारिक भाषा की सूची में शामिल नहीं किया गया. शिरोमणि अकाली दल के नेताओं की चुप्पी भी संबंधों में बढ़ रहीं दरार की ओर स्पष्ट संकेत कर रहीं हैं. 



शनिवार, 19 सितंबर 2020

सरदार तारा सिंह नहीं रहे !!

सरदार तारासिंह ने दुनिया को अलविदा कहा!

मुलुंड मुंबई क्षेत्र के पूर्व विधायक और भारतीय जनता पार्टी नेता सरदार तारासिंह जी ने तिथि 19-09-2020 की सुबह 8 बजे, मुंबई के लीलावती अस्पताल में अंतिम सांस लीं. अंतिम समय उनकी आयु 81वर्ष थी. वें गुरुद्वारा तखत सचखंड बोर्ड नांदेड़ संस्था के प्रधान के रूप में भी अपनी सेवाएं प्रदान कर चूके हैं. उनके निधन की वार्ता से हजूर साहब, नांदेड़ में भी दुःख प्रकट किया गया. 


(स. तारासिंह पूर्व विधायक)

सरदार तारासिंह जी बीस वर्षों तक पार्षद थे. वहीं तीन बार वें जनता में से विधायक निर्वाचित हुए थे. विधानसभा में उनके कामकाज की शैली सबसे अलग थी. भारतीय जनता पार्टी में उनको उच्चस्तर का नेता माना जाता था. पार्टी की स्थापना के साथ ही वें भाजपा से जुड़े थे. उनके निधन से भाजपा को भी क्षति पहुंची हैं. 

महाराष्ट्र सरकार ने उन्हें वर्ष 2015 में गुरुद्वारा सचखंड बोर्ड का अध्यक्ष नियुक्त किया था. साढे तीन वर्षों तक वें प्रधान बने रहें थे. 2019 के महाराष्ट्र विधानसभा चुनावों में उन्हें टिकिट नकारा गया. जिसके कारण वें राजनीति में थोड़ा पिछड़ गए. लेकिन वें अंतिम समय में भी गुरुद्वारा बोर्ड के सदस्य थे. 

तारासिंह का स्वाभाव मित्रतापूर्ण था और सभी को स्नेह से जोड़ लेना का उनमें हुनर था. नांदेड़ से उनके परिवार का पुराना संबंध था. सभी राजनीतिक पार्टियों के शीर्ष नेताओं के साथ उनके सुदृढ़ संबंध थे. उनके निधन पर सभी ओर से दुःख प्रकट किया जा रहा हैं. 

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गुरुवार, 17 सितंबर 2020

हरसिमरत के इस्तीफे की घोषणा

 हरसिमरत बादल ने इस्तीफा सौंपा  !

सुखबीरसिंह बादल : किसान विरोधी विधेयक का विरोध 

रविंदरसिंघ मोदी 

 

केंद्र सरकार अंतर्गत एन. डी. ए. का पुराना सहयोगी घटक दल शिरोमणि अकाली दल ने आज भाजपा सरकार द्वारा प्रस्तुत किसान विधेयक (आर्डिनेंस) को किसान विरोधी विधेयक कहकर विरोध जताया साथ ही केंद्रीय मंत्री हरसिमरत कौर बादल ने अपने मंत्री पद से इस्तीफा देने का एलान कर दिया. हालाँकि अकाली दल ने एन. डी. ए. से नाता नहीं तोड़ा हैं. शिरोमणि अकाली दल अपनी पार्टी की बैठक में राजनीतिक हालातों की समीक्षा करेगा. उसके बाद ही एन. डी. ए. से अलग होने अथवा साथ रहने का फैसला करेगा. सुखबीरसिंघ बादल ने भाजपा सरकार का विधेयक पास करने के विषय में कहा कि, ये निर्णय किसान विरोधी हैं. इसका विरोध जारी रखेंगे. हरसिमरत बादल के इस्तीफे पर पंजाब भाजपा ने बयान जारी कर कहा कि, शिरोमणि अकाली दल की अपनी मजबूरी हो सकती हैं. उधर दूसरी ओर, इस कदम के पीछे सन 2022 में होनेवाले पंजाब विधानसभा चुनावों की सोची समझी रणनीति से जोड़कर देखा जा रहा हैं. कल ही शिरोमणि अकाली दल के सर्वोसर्वा स. प्रकाशसिंह बादल ने प्रस्तुत विधेयक की सराहना कर उसे किसानों का हितकारी बताया था. लेकिन आज लोकसभा और राजयसभा में अकाली दल के नेताओं ने विधेयक का विरोध कर दिया. हरसिमरतकौर बादल ने सदन समाप्त होने के पश्च्यात पत्रकारों को जानकारी दी कि, उन्होंने लिखित स्वरुप में अपना त्यागपत्र दे दिया हैं. हालांकि केंद्र सरकार ने अभी तक उसे मंजूर नहीं किया हैं. यह इस्तीफा मामला पंजाब में नई राजनीतिक सरगर्मियां पैदा करने के लिए पर्याप्त है. मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदरसिंह ने देरी से उठाया गया एक छोटा सा कदम बताया है. उन्होंने कहा, कांग्रेस तो पहले ही इस बिल का विरोध कर चूकी है. 


महाराष्ट्र सरकार के खिलाफ शिरोमणि अकाली दल मैदान में !!

महाराष्ट्र सरकार के खिलाफ उतरा शिरोमणि अकाली दल !

सिरसा ने कंगना का खुलकर समर्थन किया

 

उड़ता बॉलीवुड !!

रविंदरसिंघ मोदी 

बॉलीवुड में ड्रग के प्रचलन की बात लेकर शिरोमणि अकाली दल बादल के नेता और दिल्ली गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी के अध्यक्ष मनजिंदरसिंह सिरसा ने महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री, महाराष्ट्र सरकार और महाराष्ट्र पुलिस को कटघरे में लाकर खड़ा कर दिया. वहीं नैशनल चैनल्स पर कंगना राणावत का खुलकर समर्थक भी किया. 

श्री सिरसा ने बॉलीवुड में नशे की बात का प्रचलन होने का आरोप लगाकर कहा कि, मैंने महाराष्ट्र पुलिस को एक साल पहले एक वीडियो पेशकर उसमें पार्टी कर रहें बॉलीवुड कलाकारों के खिलाफ नशा प्रतिबंध कानून के तहत करवाई करने की मांग की थी. लेकिन मुंबई पुलिस ने कोई करवाई नहीं की. सिरसा ने करण जोहर, शहीद कपूर और अन्य बॉलीवुड हस्तियों के खिलाफ भी आरोप जड़े कि उन्होंने "उड़ता पंजाब" मूवी बनाकर पंजाब की बदनामी की. 

श्री सिरसा ने कहा, हकीकत में तो उड़ता बॉलीवुड का नजारा देश देख रहा हैं. शिवसेना की सरकार एक महिला (कंगना) का ड्रग्स मामले मे बयान लेना चाह रहीं हैं. इस सरकार में मर्दानगी वाली बात नहीं नजर आ रहीं. आजतक न्यूज़ चैनल पर बृहस्पति वार को हुए दंगल इस चर्चा सत्र में भी सिरसा ने आक्रामक तेवर अपनाते शिवसेना प्रवक्ता श्री किशोर तिवारी को उकसाते हुए कहा, क्या एक महिला के पीछे पड़े हो. तुम (शिवसेना) क्या कर लेगी. रास्ते पर उतर कर दिखाओ ! 

उल्लेखनीय है कि, शिरोमणि अकाली दल, केंद्र सरकार में भागीदार है. उड़ता पंजाब फिल्म प्रदर्शित होने के बाद शिरोमणि अकाली दल के पंजाब, दिल्ली और महाराष्ट्र के नेताओं ने बॉलीवुड के खिलाफ प्रदर्शन किया था. लेकिन उस समय महाराष्ट्र में भाजपा की सरकार थी और श्री देवेंद्र फडणवीस मुख्यमंत्री थे. इसलिए अकाली नेताओं का प्रदर्शन सिमित ही रहा था. पंजाब में फिल्म की रिलीज पर असर हुआ था लेकिन उड़ता पंजाब ने विदेशो में बड़ी कमाई की थी. ये भी एक संयोग है कि शिवसेना के मुखपत्र सामना ने भी उड़ता पंजाब फिल्म के शीर्षक पर आलोचना की थी. एक तरह से शिवसेना की भूमिका उस समय शिरोमणि अकाली दल के समर्थन में दिखाई दी थी. लेकिन आज की उत्पन्न परिस्थिति में शिरोमणि अकाली दल ने शिवसेना के खिलाफ ही मोर्चा खोल दिया हैं. 

मनजिंदरसिंह सिरसा का बयान लगभग सभी समाचार चैनल्स ने मुख्य समाचार के रूप में दिखाया. सभी बड़े चैनल्स ने उन्हें बहस के लिए आमंत्रित किया. जाहिर इसके पीछे किस शक्ति का हाथ हैं ! सिरसा के बयान और उनकी शिवसेना को लेकर भाषा देखकर यह अंदाजा लगाया जा सकता हैं कि शिरोमणि अकाली दल केंद्र की किस तरह से सेवा कर रहा हैं. यह ड्रग्स का विषय बॉलीवुड के लिए समस्या तो बना हुआ हैं लेकिन शिरोमणि अकाली दल इस बात से भी असहमति नहीं जता सकता कि पंजाब में नशे का प्रचलन और कारोबार खत्म हो गया हैं. 




मंगलवार, 15 सितंबर 2020

जम्मू - कश्मीर में "पंजाबी" को सरकारी भाषा का सम्मान मिलना चाहिए

 जम्मू - कश्मीर में "पंजाबी" को सरकारी भाषा का सम्मान मिलना चाहिए 

रविंदरसिंघ मोदी 


इन दिनों जम्मू - कश्मीर में कार्यालयीन भाषा के रूप में पंजाबी भाषा (गुरुमुखी लिपि) को मान्यता देने की व्यापक मांग हो रहीं हैं. पहले जम्मू से उठीं मांग धीरे धीरे पंजाब, हरियाणा होते हुए दिल्ली पहूंच गईं. ता. 2 सितंबर 20 के दिन जम्मू कश्मीर कैबिनेट में भाषा आर्डिनेंस प्रस्तुत हुआ जिसमें प्रदेश के कार्यालयीन सरकारी भाषा के तौर पर कश्मीरी, डोंगरी और हिन्दी को मान्यता प्रदान की गईं. इससे पूर्व वहाँ उर्दू, अंग्रेजी को कामकाज की भाषा के रूप में अधिक प्रयोग में लाया जाता रहा था. यह भाषा आर्डिनेंस (bill) मंजूरी के लिए सांसद में प्रस्तुत किया गया. 

जम्मू - कश्मीर में उपर्युक्त सरकारी भाषाओं में पंजाबी भाषा को शामिल करने की मांग बहुत जोर पकड़ रहीं हैं. शिरोमणि अकाली दल के नेता सुखबीरसिंह बादल ने भी उपर्युक्त विषय में अपना पक्ष प्रस्तुत किया. डॉ. फारुख अब्दुल्लाह ने भी अपनी ख़ामोशी में एक तरह से एनओसी प्रदान कर दी. अब मामला प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के हाथ हैं. भारतीय संविधान में अध्याय 17 अंतर्गत धारा 343 से 351 तक राष्ट्रीय भाषा और प्रादेशिक भाषाओं की रचना, अस्तित्व, उपयोगी और व्यवहार का समायोजन अधिकार प्रस्तुत किये गये हैं. धारा 345 द्वारा प्रस्तुत अधिकारों के वर्णन के मुताबिक धारा 346 और 347 के प्रभाव में प्रदेश (state) की आधिकारिक भाषा प्रस्तावित करने के पूर्ण अधिकार राज्यों को सौपें गए हैं. 

देश में अभी तक 22 भाषाओं को मुख्य भाषा के रूप में चुना गया हैं जिनका किसी भी राज्य में वहाँ की सरकार इच्छित भाषा को सरकारी कामकाज के लिए स्वीकार कर सकती हैं. लेकिन उसके लिए संसद में विशेष ऑर्डिनेंस पास करवाना जरुरी है. उस ऑर्डनेन्स को महामहिम राष्ट्रपति जी द्वारा भी मान्यता प्रदान करना आवश्यक है.  पंजाबी भाषा का शुमार देश की 22 भाषाओं में होने के कारण जम्मू कश्मीर राज्य में उसे आधिकारिक सरकारी भाषा के रूप में मान्यता प्रदान हो सकती है.

पंजाबी भाषा उत्तर पश्चिम में विस्तारित बोली भाषा के रूप में कई सदियों से प्रचलित थीं और आज भी है. पंजाब, हरियाणा, हिमाचल प्रदेश, जम्मू कश्मीर, पाकिस्तान अंतर्गत पंजाब, अफगानिस्तान तक पंजाबी बोली भाषा व्यवहार में प्रस्तुत थीं. साढ़े पांच सौ वर्षों में इस बोली भाषा को गुरुमुखी लिपि भी उपलब्ध हो गईं. पंजाब और हरियाणा राज्यों में पंजाबी को आधिकारिक सरकारी भाषा का स्तर प्रदान हैं. पूर्व में कश्मीर राज्य पर सिख राजा महाराजा हरी सिंघ का साम्राज्य था. जिन्होंने कश्मीर का विलय स्वतंत्रता पश्च्यात भारत गणराज्य में करवाया था. उनके समय में वहाँ पंजाबी भाषा प्रचलित थीं और व्यवहार का हिस्सा थीं. सिखों के षष्ठ गुरु, श्री हरिगोबिन्द साहिब की कर्मभूमि बहुत समय तक कश्मीर रहीं थीं. उससे भी सक्षम पहलु यह माना जाना चाहिए कि, कश्मीरी पंडितों के धर्म को बचाने के लिए सिखों के नवम गुरु श्री तेगबहादुर जी ने अपने शीश का बलिदान दिया था. क्या यह ऐतिहासिक पहलु वर्तमान केंद्र सरकार नजर अंदाज कर सकती हैं?  

आज पंजाब से लेकर दिल्ली तक पंजाबी भाषा प्रचलन में हैं. पूर्व में महाराजा रणजीतसिंघजी के साम्राज्य काल में पंजाबी भाषा अफगानिस्तान तक विस्तारित हुईं थीं. 1960 तक अफगानिस्तान और पाकिस्तान में पंजाबी भाषा और गुरुमुखी लिपि का प्रचलन था. लेकिन बाद में वहाँ के राजनीतिक हालात में परिवर्तन होने के बाद भाषा भी सिमटकर रह गईं. लेकिन कश्मीर के बहाने अब पंजाबी भाषा को विस्तारित करने का एक अवसर उपलब्ध हो रहा हैं. अगस्त 2019 में जम्मू कश्मीर दो राज्यों में विभाजित कर उसमें से लद्दाख को अलग राज्य बनाया गया. जिसके कारण कश्मीर में दुबारा से राज्य की आधिकारिक भाषा की पुनर्रचना हो रहीं हैं. पंजाबी भाषा को कश्मीर और जम्मू में आधिकारिक भाषा का स्तर मिलना न्यायोचित होगा. 





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