जम्मू कश्मीर में पंजाबी को स्थान नहीं !
कश्मीरी, डोगरी और हिंदी अब कार्यालयीन भाषा
रविंदरसिंह मोदी
बुधवार को देश की संसद में कश्मीरी, डोंगरी और हिन्दी भाषा को राज्य की कार्यालयीन भाषाओं में शामिल कर लिया गया. जबकि पंजाबी, गुर्जरी और पहाड़ी भाषाओं को सरकारी कामकाज की भाषा के रूप में मान्यता प्रदान नहीं की गईं.
आज भारतीय जनता पार्टी सरकार ने संसद में जम्मू कश्मीर ऑफिसियल लैंग्वेज बिल 2020 को पारित कर दिया. सरकार के भाषा विभाग कामकाज मामलो के राज्य मंत्री श्री जी. किशन रेड्डी ने बताया कि तीनों भाषाओं को बोलने वालों की संख्या और उन भाषाओं के व्यवहार के महत्त्व को देखते हुए प्रस्तावित बिल को आज मंजूरी दी गई. पंजाबी, गुर्जरी और पहाड़ी भाषाओं को फिलहाल सरकारी कामकाज की सूची में शामिल नहीं किया जा सका.
पंजाबी भाषा को जम्मू कश्मीर मे सरकारी भाषा का स्तर दिलवाने के लिए आगे आया शिरोमणि अकाली दल आज बेबस और बैकफुट पर नजर आया. तेजतर्रार नेता सुखबीर सिंह बादल और श्रीमती हरसिमरत कौर बादल आज बहस से दूर ही रहें. पार्टी की ओर से सांसद नरेश कुमार गुजराल ने सरकार के निर्णय पर नाराजी प्रकट की. उन्होंने कहा, जम्मू कश्मीर मे सतरह लाख लोग पंजाबी बोलते हैं. लेकिन सरकार ने इस भाषा को ऑफिसियल लैंग्वेज के रूप अस्वीकार कर दिया. रिपब्लिकन पार्टी के नेता श्री रामदास आठवले ने इस समय कहा, कश्मीरी और डोगरी भाषा को सूची मे शामिल करने का निर्णय ठीक हैं.
बताया जा रहा हैं कि अभी तीन दिन पहले शिरोमणि अकाली दल की नेता हरसिमरतकौर बादल ने कैबिनेट मंत्रिपद का त्यागपत्र सौप दिया था. जिसके चलते भारतीय जनता पार्टी के सभी शीर्ष नेता शिरोमणि अकाली दल से खासे नाराज हो गए थे. इसी नाराजी के चलते जम्मू कश्मीर मे पंजाबी भाषा को आधिकारिक भाषा की सूची में शामिल नहीं किया गया. शिरोमणि अकाली दल के नेताओं की चुप्पी भी संबंधों में बढ़ रहीं दरार की ओर स्पष्ट संकेत कर रहीं हैं.



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