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शुक्रवार, 23 अक्टूबर 2020

हमारे देश पर कोरोना की आफत मुफ्त में आई है..! 

वोटों के लिए कोरोना टीके का वास्ता दिया जाए, ये तो ठीक नहीं !!

रविन्दरसिंह मोदी 

(प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी बिहार चुनाव अंगर्गत सासाराम विधानसभा में प्रचार रैली में )

 भारतीय जनता पार्टी और केंद्र सरकार के लिए बिहार विधानसभा चुनाव कितने महत्वपूर्ण हैं इसका अंदाजा इस बात से हो जाता है कि, भाजपा ने अपने चुनाव घोषणा पत्र में कोरोना संक्रमण टीका (वैक्सीन) मुफ्त में उपलब्ध करवाने का मुद्दा शामिल किया. क्या कोरोना बीमारी का भी राजनीतिकरण करना योग्य हैं? क्या भारत की जनता को मुफ्त टीका नहीं मिलेगा? क्या टीका पाने के लिए भाजपा को वोट देना जरुरी हैं? चुनावी सभाओं में कोरोना और रोकथाम टीके की बातें कहकर सहानुभूति बटोरनेवाली राजनीतिक पार्टियों को यह तो विचार करना चाहिए कि, भारत की जनता को तो कोरोना कोवीड १९ संक्रमण तो मुफ्त में मिला हैं! यह बीमारी पाने के लिए किसी भी भारतीय नागरिक ने वोट नहीं दिया था! जब बीमारी मुफ्त में मिली है तो टीका भी मुफ्त में ही मिलना चाहिए ना? केंद्र सरकार की कोरोना संक्रमण को लेकर "वोट के बदले वैक्सीन" का चुनावी घोषणा पत्र जारी करते समय सरकार ने क्या केवल भावनाओं की असंवेदनाओं की हद्दें नहीं लांघी? क्या सरकार ने सरकारी दायित्व को ही चुनावी मुद्दे के रूप में शामिल नहीं किया? 

(भारतीय पार्टी का बिहार चुनावी घोषणा पात्र जारी करते समय नेतागण)

शुक्रवार, ता. २३ अक्टूबर २०२० को प्रधानमंत्री ने बिहार के सासाराम चुनावी सभा के माध्यम से बिहार की जनता को संबोधित किया. उन्होंने बिहार में कोरोना संक्रमण से लड़ रही नितीश कुमार सरकार की सराहना करने में कोई कसर नहीं छोड़ी. मुख्यमंत्री नितीश कुमार ने कोरोना काल में सरकार के कार्यों का जिक्र कर अपने सरकार  केंद्र सरकार की पीठ थपथपाली. ऐसे समय प्रधानमंत्री भूल गए कि देश में कोरोना से किस राज्य की जनता सबसे अधिक पीड़ित और त्रस्त हैं. देश में कोरोना संक्रमितों की संख्या ७७ लाख ६२ हजार से अधिक हो गईं हैं. देश में अब तक कोरोना संक्रमण से एक लाख १७ हजार ३०६ मौतें दर्ज हो चुकी हैं. जिन्होंने प्राण गंवाएं हैं उन्होंने तो मुफ्त में ही गंवाएं. इन मौतों की जिम्मेदारी कौन लेगा? क्या केंद्र सरकार ने कोरोना से मरने वालों के परिवारों को कोई आर्थिक सहायता प्रदान की ? क्या संक्रमित मरीजों को फिर से उबरने के लिए मुफ्त दवाइयां या कोरोंटीन समय का वेतन अदा किया? नहीं! अब वैक्सीन मुफ्त में देकर केंद्र सरकार क्या सन्देश देना चाह रहीं हैं? 

(प्रधानमंत्री ने अभी तक कोई वैक्सीन को अधिकृत नहीं किया हैं. फिर घोषणापत्र में उसे शामिल क्यों किया गया है?)

वर्तमान समय में महाराष्ट्र कोरोना संक्रमण के हालात अकथनीय हैं. केंद्र सरकार ने कभी महाराष्ट्र के कोरोना हालातों की समीक्षा नहीं की हैं. प्रदेश में कोरोना संक्रमितों की संख्या १६ लाख २५ हजार से अधिक हैं. पिछले २४ घंटों में ७ हजार ५३९ नए मामले दर्ज हुए हैं वही चौबीस घंटों में १९८ लोगों ने जान भी गंवाई हैं. आइसीएमआर के निर्देशों के तहत वैक्सीन का कार्य जारी हैं लेकिन प्रभावशाली वैक्सीन कब उपलब्ध होगी उस संबंध कोई ठोस जानकारी अभी उपलब्ध नहीं हैं. केंद्र सरकार ने भी वैक्सीन को लेकर तिथि घोषित नहीं की हैं कि कब वैक्सीन उपचार का हिस्सा बनेगी. वैक्सीन तो उपलब्ध नहीं है फिर वो विषय घोषणापत्र का हिस्सा क्यों? इसीलिए की मतदाता कोरोना संक्रमण का भय भूलकर घरों से बाहर निकल आये. यदि मतदाता घरों से बाहर नहीं निकलेंगे तो सरकार कैसे बनेगी? 

(अब विपक्ष इस तरह से भाजपा को आड़े हाथों ले रहा हैं) 

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