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मंगलवार, 20 अक्टूबर 2020

 संतबाबा प्रेमसिंघजी का व्यक्तित्व प्रेरणास्त्रोत : संतबाबा कुलवंतसिंघजी 

पहली बरसी कार्यक्रम संपन्न !

(गुरुद्वारा माता साहेबदेवाजी बरसी कार्यक्रम)

 हजूर साहब 20 अक्टूबर 2020

तखत सचखंड श्री हजुरसाहब के जत्थेदार संतबाबा कुलवंतसिंघजी ने मंगळवार, ता. 20 अक्टूबर को गुरुद्वारा मातासाहब देवाजी में आयोजित संतबाबा प्रेमसिंघजी की पहली बरसी कार्यक्रम के दौरान उपस्थित साधसंगत को संबोधित करते हुए कहा कि, संतबाबा प्रेमसिंघजी एक सामान्य सेवक से गुरुद्वारा मातासाहिब देवाजी गुरुद्वारा के जत्थेदार बनें और आगे चलकर उन्होंने बूढा दल के जत्थेदार पद को प्राप्त किया. लगभग चालीस वर्षों के संघर्ष, सेवा और समर्पण के कारण उनका व्यक्तित्व उभरकर सामने आया. बाबाजी का व्यक्तित्व सही मायने में प्रेरणास्त्रोत था.

उन्होंने आगे कहा, संतबाबा प्रेमसिंघ जी ने धार्मिक क्षेत्र में अपना मकाम कायम किया. बाबाजी ने नाम सिमरन, बाणी पठन और सेवा को ध्यान में रखा. उन्होंने सदा सभी का आदर सत्कार किया. हजूर साहब में उन्होंने अन्य संतों के साथ अच्छा व्यवहार स्थापित किया था. उनकी तरह ही मातासाहब इस स्थान की सेवा बाबा तेजासिंघजी भी निभाएंगे ऐसी पूरी उम्मीद है. 

कार्यक्रम में संतबाबा बलविंदरसिंघजी कारसेवावाले ने भी संबोधित किया. साधसंगत को नाम जपाने के बाद बाबाजी ने कहा, सेवा एक जिम्मेदारी होती है. सभी संत अपने सामर्थ्य के हिसाब से सेवा निभाते है. संतबाबा प्रेमसिंघ जी ने मातासाहब के लिए पूरा जीवन समर्पित कर दिया. आज उनकी बरसी के मौके पर उनको याद कर हर कोई धन्यता महसूस कर रहा है.


इस अवसर पर गुरुद्वारा मातासाहब देवाजी स्थान पर बरसी कार्यक्रम में तखत सचखंड हजूर साहब के मीत जत्थेदार संतबाबा ज्योतिंदरसिंघजी, हेडग्रंथी भाई कश्मीरसिंघजी, मीतग्रंथी भाई गुरमीतसिंघजी, पंजप्यारे भाई जगिंदरसिंघजी, ज्ञानी भाई अवतारसिंघजी शीतल, संतबाबा बलविंदरसिंघजी कारसेवावाले, जत्थेदार संत बाबा तेजासिंघजी मातासाहेबवाले, ज्ञानी हरदीपसिंघ कथाकार, ज्ञानी बक्षीसिंघ कथाकार, गुरुद्वारा बोर्ड सदस्य गुरमीतसिंघ महाजन, मनप्रीतसिंघ कुंजीवाले, राजिंदरसिंघ पुजारी,  गुरमीतसिंघ बेदी, हरजिंदरसिंघ, गुलाबसिंघ, भारतसिंघ,  जसबीरसिंघ बुंगाई, राजसिंघ रामगढ़िया सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित थे. 

बरसी अवसर पर श्री गुरु ग्रन्थसाहब जी के पाठ की समाप्ति, कीर्तन दरबार, कथा और अरदास कार्यक्रम हुए. उल्लेखनीय है कि, संतबाबा प्रेमसिंघजी ता. 19-10-2019 के दिन एक सड़क हादसे का शिकार हो गये थे, जिसमें उन्होंने संसार को अलविदा कह दिया था. बाबा जी की पहली बरसी ता. 20-10-2020 को मनाई गई






शनिवार, 17 अक्टूबर 2020

 हजूर साहब में दशहरा महात्म पर्व प्रारंभ 

तखत साहब में "श्री चंडी साहब पाठ" शुरू 

श्री हजूर साहब में परंपरागत दशहरा महात्म और हल्ला महल्ला पर्व की शुरुआत हो गई है. शनिवार, ता. 17 अक्टूबर 2020 से लेकर ता. 25 अक्टूबर 2020 तक यह पारंपरिक त्यौहार चलेगा. ता. 25 अक्टूबर को दशहरा त्यौहार मनाया जायेगा. 

(तखत सचखंड श्री हजुरसाहब में दशहरा महात्म श्री चण्डीसाहब पाठ प्रारंभ हुए )

वरात्रि की पहली तिथि पर तखत सचखंड श्री हजूर साहब में "श्री चंडी साहब" के पाठ आरंभ हुए. श्री दशम ग्रन्थ साहब अंतर्गत वीर रस पर आधारित चुनिंदा बाणियों का संच "दशहरा महात्म" के उल्लेख से जाना जाता है. दशहरा के अवसर पर तखत सचखंड और यहां के परिसर में श्री चंडी साहब के पाठ प्रथा के तहत आयोजित होते हैं. यह कई वर्ष पुरानी प्रथा और तखत साहब की मर्यादा भी है. 

(तखत सचखंड श्री हजूर साहब, नांदेड़)

(तखत सचखंड श्री हजूर साहब, नांदेड़)

तखत सचखंड श्री हजूर साहब गुरुद्वारा के अतिरिक्त शहर में अन्य स्थानों पर भी पाठ शुरू हुए. जिनमें गुरुद्वारा सिख छावनी नगिनाघाट, गुरुद्वारा मातासाहब देवाजी, गुरुद्वारा बाबा भुजंग सिंघ शहीदपूरा, भाई संतोखसिंघ जी विद्यालय अबचल नगर, बुंगा बंजरगाह बंजारा आश्रम,  गुरु नानक नगर नंदीग्राम सोसाइटी और अन्य निजी स्थानों पर पाठ की शुरुआत हुई. इन पाठ का समापन दशहरा के दिन दोपहर के समय होगा. 

(भाई संतोखसिंघजी विद्यालय, अबचल नगर, नांदेड़)

(बुंगा बंजरगाह, परशनसिंघ महंत)


(श्री गुरु नानक नगर, नंदीग्राम सोसायटी, नांदेड़)
 

शुक्रवार, 16 अक्टूबर 2020

 दशहरा हल्ला महल्ला की पहल देशव्यापी हो तो सफलता !

दिल्ली की साधसंगत भी करें सरकार से मांग 

रविंदरसिंघ मोदी

(हजुरसाहब के परंपरागत दशहरा हल्ला महल्ला की फाइल फोटो)

तखत सचखंड श्री हजूर अबचल नगर साहब इस धार्मिक स्थल पर मनाये जानेवाले परंपरागत हल्ला महल्ला नगरकीर्तन यात्रा का विषय अब देश की सर्वोच्च अदालत यानी सुप्रीम कोर्ट में प्रस्तुत हैं. इस याचिका को स्वीकृत कर न्यायालय क्या निर्णय करेगा अभी हम कुछ कह नहीं सकते. कुलमिलाकर यह विषय अब संविधानिक दायरे में चला गया हैं. सर्वोच्च न्यायालय के पास प्रस्तुत विषय, धार्मिक तथ्य, अखंड परंपरा, श्रद्धा-भावना, इतिहास, जनभावना और अल्पसंख्यक धार्मिक अधिकार यह सिख पंथ का प्रबल पक्ष होना चाहिए. यूँ कहा जाए तो अनुचित ना महसूस किया जाए, कि यह बात एक तरह से श्री हजूर साहब की यह दो - तीन सौ वर्षों की अखंड मर्यादा, परंपरा और सांस्कृतिक योगदान के कसौटी की यह घड़ी हैं. 

ऐसे समय में सिख पंथ को चाहिए कि धार्मिक अधिकारों के निर्वहन की स्वतंत्रता हेतु संविधानिक मूल्यों की प्रदत्तता प्राप्त हो इसलिए सर्वधर्मीय समर्थन जुटाया जाए. जब तक हमारी परंपराओं, मर्यादा, इतिहास, जीवनशैली, सामाजिक योगदान, राष्ट्रभक्ति और सामाजिक सदभावयुक्त आचरण का देश के कोने - कोने तक सक्षम रूप से प्रचार - प्रसार नहीं हो जाता तब तक हमारी धार्मिक भावनाओं को ना स्वीकृति मिल सकती हैं और ना सम्मान. दशहरा हल्ला महल्ला यात्रा परंपरागत होने का विषय महाराष्ट्र, तेलंगाना, पंजाब और कुछ राज्यों के सिखों तक ही विस्तारित हैं. अन्य धर्म या केंद्र सरकार हमारी परंपराओं से अनभिज्ञ हैं यह सबसे बड़ा वास्तव हैं. हमारे प्रचार - प्रसार का तंग दायरा सर्वथा इसके लिए सबसे बड़ा कारण हैं. हमारे सोशल मीडिया का उपयोग भी संकुचित और व्यक्तिगत धारणाओं तक सीमित हैं यह भी एक कड़वी सच्चाई हैं. हमारा प्रचार - प्रसार केवल अपने लिए या निश्चित समूह के लिए हैं. देश की एक सौ तीस करोड़ जनता को दो प्रतिशत जनसंख्यावाले किसी धर्म, पंथ या समूह की धार्मिक आस्थाओं में क्या दिलचस्पी हो सकती हैं? राजनीतिक पार्टियां भी वहीं अपनी दिलचस्पी प्रदर्शित करती हैं जहां मतों का समीकरण हो. अन्य धर्म, जाति, समूह की संलिप्तता भी उन पंथ और समूहों के प्रति कम हो जाती हैं जिनकी जनसंख्या आंदोलन के रूप में प्रभाव नहीं डालती. मेरी व्यक्तिगत सोच पर आधारित यह कुछ बातें आज की अटल सच्चाई हैं की ओर संकेत करती हो. हो सकता हैं कि आपकी सोच अलग हो. मैं अन्य सभी की व्यक्तिगत भावनाओं को भी सम्मानपूर्वक स्वीकार करता हूँ कि इस विषय में जानकर लोग मंथन करें. 

(दशहरा हल्ला महल्ला की फाइल फोटो)

कहने का तात्पर्य यहीं हैं कि तखत सचखंड श्री हजूर साहब की मर्यादा, परंपरा, इतिहास और जीवनशैली को वैश्विक रूप से प्रस्तुत करने का यह सही समय आ गया हैं. यह विषय सर्वोच्च न्यायालय की परिधि में अंतर्भूत हो जाने के कारण हमें भी हमारे धार्मिक तथ्यों के साथ तैयार रहना होगा. वैसे तो इस विषय का निराकरण महाराष्ट्र सरकार के संज्ञान में प्रथम प्रस्तुत करना योग्य होता. महाराष्ट्र में कोरोना संक्रमण के हालात बेकाबू होने का हवाला देकर सरकार द्वारा आनेवाली तिथि 31-10-2020 तक लॉकडाउन अमल में रखा गया हैं. राज्य में धार्मिक स्थल और कुछ अन्य क्षेत्र प्रतिबंधित आदेश अंतर्गत हैं. कुछ राजनीतिक पार्टियों ने धार्मिक स्थल खोले जाने को लेकर अभी - अभी प्रदेश में बड़ा आंदोलन भी किया था. मंदिर, मस्जिद, चर्च आदि के प्रतिनिधि भी आंदोलन में शामिल हुए थे. इस आंदोलन से सिख पंथ नदारद रहा!! सिख पंथ की मांग महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री तक प्रस्तुत होनी चाहिए थी जिसके लिए पिछले दिनों हुआ आंदोलन एक मंच साबित हो सकता था. आज जब दशहरा हल्ला महल्ला यात्रा निकाले जाने की बात हैं, सिख पंथ सबसे अलग - थलग खड़ा दिखाई दें रहा है. कारण तलाशें जाए ! 


 

दिल्ली की साधसंगत संज्ञान लें :

यदि आज दशहरा हल्ला महल्ला की परंपरा अखंडित रखनी हो तो देश भर की सिख संगत, श्री गुरु नानक नामलेवा संगत और सिख धर्म में आस्था रखनेवाले सभी धर्मों और जातीय समूहों के समर्थन की भी आवश्यकता हैं. हमारे सिख सांसद, सिख विधायक और जनप्रतिनिधि भी विषय की प्रस्तुति को लेकर आगे आये. विषेश रूप से दिल्ली के हमारे सिख नेतागण और धार्मिक आगू भी सर्वोच्च न्यायालय के संज्ञान में धार्मिक तथ्य परोसने के लिए अग्रसर हो जाए. सर्वोच्च न्यायालय में प्रैक्टिस कर रहें सिख अधिवक्ता (वकील) भी पंथ के प्रति मर्यादा का अहसास रखकर स्वयं इच्छा से अपना पक्ष रखने हेतु आगे आये. तभी इस मामले में पूर्ण सफलता अर्जित हो सकती हैं. हमारा न्यायिक पक्ष सक्षम होना अनिवार्य हैं. तभी संविधानिक संस्थाएं हमारी मान्यताओं पर मुहर लगाएगी.  दिल्ली की साधसंगत यदि वहां की मीडिया में दशहरा हल्ला महल्ला के परंपरागत इतिहास  मर्यादा का विषय मीडिया में प्रचारित करती हैं तब केंद्र सरकार और संविधानिक संस्थानों तक हजुरसाहब के सिखों की मांग पहुंचेगी. यदि विनम्रता और संयमी भूमिका के तहत यह विषय उठाया जाये तो निश्चित ही परंपरागत दशहरा हल्ला महल्ला निकालने जाने को सफलता प्राप्त हो सकती हैं.

(इसे अधिक से अधिक शेयर कीजिए। दिल्ली के जान पहचानवालों को जरूर भेजिए )


बुधवार, 14 अक्टूबर 2020

 

दशहरा हल्ला महल्ला यात्रा को अनुमति देने की मांग !

सुप्रीम कोर्ट में याचिका हुई प्रस्तुत 

रविन्दरसिंह मोदी 
 

( दशहरा महल्ला यात्रा की फाइल फोटो )


महाराष्ट्र के पवित्र शहर नांदेड़ स्थित तखत सचखंड श्री हजुरसाहब के तत्वावधान में हर वर्ष मनाये जानेवाले पारंपरिक दशहरा हल्ला महल्ला यात्रा के आयोजन को अनुमति पाने के उद्देश्य से तिथि १४ अक्टूबर २०२० को देश के सर्वोच्च न्यायालय में याचिका प्रस्तुत की गई. सर्वोच्च न्यायालय द्वारा शीघ्र इस याचिका पर अगली सुनवाई होने की सम्भावना हैं.

इस संबंध में याचिकाकर्ता गुरुद्वारा सचखंड बोर्ड के सेक्रेटरी स. रविंदर सिंघ बुंगाई ने फोन पर दिल्ली से जानकारी दी कि, सर्वोच्च न्यायालय में आज दोपहर याचिका को प्रस्तुत किया गया है. अधिवक्ता एडवोकेट प्रवीण चतुर्वेदी ने न्यायालय में याचिकाकर्ता का पक्ष रखा. सर्वोच्च न्यायालय में आज की तिथि में याचिका प्रस्तुत की गई. अगली तारीख शीघ्र मिल जाएगी. 


याचिका में यह विषय प्रस्तुत किया गया कि, महाराष्ट्र के नांदेड़ शहर जिसे हजुरसाहब के नाम से धार्मिक पहचान प्राप्त हैं, यहां हर वर्ष दशहरा का त्यौहार पारंपरिक रूप से मनाने की प्रथा है. जिस तरह से उड़ीसा के जगन्नाथ पुरी इस धार्मिक स्थल पर रथयात्रा निकालने की प्रथा है, उसी तरह सिखों के पवित्र स्थान तखत सचखंड श्री हजुरसाहब में दशहरा अवसर पर हल्ला महल्ला यात्रा निकालने विगत तीन सौ वर्षों की पुरानी परंपरा कायम हैं. कोविड १९ कोरोना संक्रमण के चलते महाराष्ट्र सरकार द्वारा तिथि ३१ अक्टूबर २०२० तक लॉकडाउन अमल में लाया गया हैं. जिसके चलते जिल्हा प्रशासन द्वारा दशहरा हल्ला महल्ला यात्रा को अनुमति देने से इंकार कर दिया गया हैं. जबकि लाखों श्रद्धालुओं की यह इच्छा हैं कि धार्मिक मर्यादा (प्रथा) की अनुपालना हो. स्थानीय लोगों द्वारा भी यह मांग प्रस्तुत की जा रही हैं. गुरुद्वारा तखत सचखंड श्री हजुरसाहब के पंजप्यारे साहिबान ने भी यात्रा निकाले जाने के संबंध में सकारात्मक निर्णय लिया हैं. सबकी भावनाओं को विचाराधीन रखते हुए यह याचिका प्रस्तुत की जा रही हैं. 

रविन्दरसिंघ बुंगाई आगे बताया कि इस धार्मिक यात्रा के आयोजन को अनुमति मिले इसलिए गुरुद्वारा बोर्ड द्वारा याचिका को सक्षमरित्या प्रस्तुत किया गया हैं.

उल्लेखनीय है कि तखत सचखंड श्री हजुरसाहब इस स्थान पर हर वर्ष परंपरागत रूप से दशहरा हल्ला महल्ला का आयोजन किया जाता हैं. इस वर्ष दशहरा हल्ला महल्ला आयोजन की तिथि २५ अक्टूबर २०२० को होनी हैं. दशहरा की इस यात्रा में शामिल होने के लिए पंजाब, हरियाणा, दिल्ली, मध्यप्रदेश, तेलंगाना और महाराष्ट्र से बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं पहुँचते हैं. लेकिन अबके कोविड १९ कोरोना वायरस संक्रमण के चलते पंजाब और अन्य प्रदेशों से यात्री कम ही आने की उम्मीद हैं. लेकिन यदि इस यात्रा को अनुमति मिलती है तो स्थानीय श्रद्धालु और निहंग सिंघों के दल उसमें शामिल हो सकते हैं. हर वर्ष दसहरा के अवसर पर निहंग सिंघों के पांच से छह दल शिरकत करते हैं. 
 
(दशहरा हल्ला महल्ला file photo)

यह स्थान श्री गुरु गोबिंदसिंघजी महाराज का अंतिम स्थान हैं. इस स्थानपर श्री गुरु ग्रंथसाहब को गुरुगद्दी प्रदान की हुई हैं. यहां मनाये जानेवाले सभी त्यौहार परंपरागत और धार्मिक मर्यादा के तहत होते हैं. 
गुरुद्वारा तखत सचखंड बोर्ड नांदेड़ के सचिव स. रविन्दरसिंघ बुंगाई याचिका प्रस्तुत करने के समय सर्वोच्च न्यायालय के सामने दस्तावेज प्रदर्शित करते हुए.
 

हैदराबाद में बारिश से तबाही!!

 हैदराबाद में बारिश से तबाही!!

आठ  लोगों ने जानें गंवाई

 महाराष्ट्र और तेलंगाना में अगले दो दिन बरसात की संभावना  

रविन्दरसिंघ मोदी 

तेलंगाना और महाराष्ट्र  में भारी बारिश जारी हैं. पिछले चौबीस घंटों में बारिश के चलते आठ लोंगो ने अपनी जानें गंवाईं हैं. दो तीन दिन पूर्व मौसम विभाग द्वारा बड़ी बरसात की चेतावनी जारी की थीं. चेतावनी सही साबित हुईं. महाराष्ट्र के पूर्वी छोर पर बरसात हुई जिसका असर नांदेड़, यवतमाल, हिंगोली, लातूर, औरंगाबाद  जिलों में देखने को मिला. दूसरी ओर तेलंगाना के हैदराबाद क्षेत्र  में भारी बारिश  के चलते तबाही के दृश्य सामने आए हैं. खबर हैं कि, पिछले २४ घण्टों में लगातार बारिश के चलते ८ लोगों  की मौत हो गई हैं. हैदराबाद महानगर की  कोई भी सड़क या गलीं ऐसी नहीं बची जो दो से तीन फुट पानी में गुम नहीं हुईं हो. सभी सड़कों पर बरसात का पानी किसी नदी की तरह बह रहा हैं. सड़कों पर बहतें पानी में हजारों की संख्या में वाहन तैरते नजर आ रहे हैं. साथ ही रिहाइशी इलाकों में हजारों मकानों में बरसात का पानी भर आया हैं. बारिश से लाखों लोगों का जनजीवन अस्त-व्यस्त होता दिखाई दे रहा हैं. खबर हैं कि, इस बारिश के कारण करोड़ों की क्षति पहुंची हैं. व्यापारियों को बारिश के कारण बहुत नुक्सान उठाना पड़ रहा हैं. पुलिस प्रशासन रास्तों पर उतरकर कार्य कर रहा हैं. दमकल विभाग भी चौबीस घंटों से आपत्ति सहायता में जुटा हुआ हैं. बारिश के चलते सड़क और रेल यातायात ठप्प हैं. हवाई यात्रा पर भी बड़ा असर पहुँचने के समाचार हैं.


(हैदराबाद  शहर की सड़कें और बाज़ारों में  जलकहर का दृश्य !)



 महाराष्ट्र और तेलंगाना में अगले दो दिनों तक बड़ी बरसात की सम्भावना बनीं हुईं हैं. लाम्बी दूरी की यात्रा के लिए अगले दो दिन प्रतिकूल असर कर सकते हैं. हालाँकि बरसात का मौसम अपनी अवधि पूरी कर चूका हैं।  बीतें समय में महाराष्ट्र में पूरा मौसम टूटकर बरसां हैं. प्रदेश में कुलमिलाकर १०९ प्रतिशत बारिश होने के समाचार मिले हैं. इस समय बरसात का रूद्र रूप देखकर यही कहा जा सकता हैं कि, कोई भी नागरिक अनावश्यक रूप से यात्रा ना करें. नदिया  उफान हैं. सड़कें डूबी हुई हैं. कोई भी  दुर्घटना घटित हो सकती हैं. 

 

 

 

 

 

मंगलवार, 13 अक्टूबर 2020

दशहरा हल्ला महल्ला निकालने की मांग

 दशहरा हल्ला महल्ला निकालने की मांग 

सुप्रीम कोर्ट से अनुमति प्राप्त करने के लिए प्रयास !

रविंदरसिंह मोदी 

 (तखत सचखंड श्री हजुरसाहब : दशहरा हल्ला महल्ला की फाइल फोटो.)

जूर साहब  :  तखत सचखंड श्री हजूर साहब गुरुद्वारा के तत्वावधान में हर वर्ष आयोजित होनेवाला ऐतहासिक और पारंपरिक "दशहरा हल्ला महल्ला" यात्रा के इस वर्ष के आयोजन को कोरोना कोविड - 19 संक्रमण लॉकडाउन के चलते जिला प्रशासन से अनुमति नहीं मिल पाई है. महाराष्ट्र में आगामी 31अक्टूबर 2020 तक लॉकडाउन अमल में रहेगा. इसलिए स्थानीय गुरुद्वारा सचखंड बोर्ड प्रशासन द्वारा अनुमति के लिए सुप्रीम कोर्ट में याचिका प्रस्तुत करने के प्रयास किये जा रहें हैं. 

उपर्युक्त विषय में अधिक जानकारी यह है कि, तखत सचखंड श्री हजूरसाहब के तत्वावधान में आनेवाली तारीख 25-10-2020 को दशहरा का पारंपरिक त्यौहार मनाया जायेगा. सिख धर्म में दशहरा त्यौहार मनाने की परंपरा पुरानी है. दशहरा से पूर्व नौ दिन श्री चंडी साहब का पाठ करवाया जाता है. दशहरावाले दिन पाठ की समाप्ति उपरांत दशहरा हल्ला महल्ला यात्रा का आयोजन किया जाता है. श्री हजूर साहब में दशहरा हल्ला महल्ला का पारंपरिक महत्त्व होने के कारण यहां यह त्यौहार मनाने हेतु निहंग सिंघों के सशस्त्र दल पहुँचते हैं. हजारों लाखों की संख्या में यहां श्रद्धालु भी पहुँचते हैं. यह त्यौहार परंपरागत होने के कारण वर्षों से चली आ रहीं परंपरा खंडित हो ऐसी भावना स्थानीय सिख समाज द्वारा व्यक्त हो रहीं है. 

इस वर्ष कोरोना कोविड 19 वाइरस के संक्रमण के चलते शायद श्रद्धालु अनुपस्थित हो सकते हैं. या उनकी संख्या कम हो सकती हैं. दूसरी ओर स्थानीय साधसंगत में हल्ला महल्ला के आयोजन को लेकर गुरुद्वारा प्रशासन से मांग की जा रहीं है. आनेवाले दशहरा हल्ला महल्ला यात्रा के आयोजन के लिए जिला प्रशासन द्वारा अनुमति प्रदान नहीं की गई जिससे स्थानीय सिख समाज द्वारा नाराजी व्यक्त हो रहीं हैं. इस नाराजी को देखते हुए गुरुद्वारा बोर्ड प्रशासन ने अब सुप्रीम कोर्ट में अनुमति याचिका प्रस्तुत करने के लिए प्रयास शुरू कर दिए हैं. लेकिन समय की कमी की दिक्कत यहां स्पष्ट रूप से दिखाई दें रहीं है इसमें संदेह नहीं है. गुरुद्वारा बोर्ड द्वारा याचिका प्रस्तुत करने हेतु वकीलों से संपर्क साधा जा रहा हैं. आनेवाला समय ही तय करेगा कि इस विषय में याचिका प्रस्तुत हो पायेगी या नहीं. 

उल्लेखनीय हैं कि, सुप्रीम कोर्ट में विषय प्रस्तुत कर ओड़िसा की सुप्रसिद्ध जगन्नाथ पुरी रथयात्रा के तर्ज पर नांदेड़ की दशहरा यात्रा को अनुमति मिले यह प्रयास किये जा रहे हैं. यदि इस मुद्दे का आधार लिया जाता है तब कुछ शर्तों पर सर्वोच्च न्यायालय अनुमति प्रदान कर सकता हैं. 



बुधवार, 23 सितंबर 2020

जम्मू कश्मीर में पंजाबी को स्थान नहीं !

 जम्मू कश्मीर में पंजाबी को स्थान नहीं !

कश्मीरी, डोगरी और हिंदी अब कार्यालयीन भाषा 

रविंदरसिंह मोदी 

बुधवार को देश की संसद में कश्मीरी, डोंगरी और हिन्दी भाषा को राज्य की कार्यालयीन भाषाओं में शामिल कर लिया गया. जबकि पंजाबी, गुर्जरी और पहाड़ी भाषाओं को सरकारी कामकाज की भाषा के रूप में मान्यता प्रदान नहीं की गईं. 

आज भारतीय जनता पार्टी सरकार ने संसद में जम्मू कश्मीर ऑफिसियल लैंग्वेज बिल 2020 को पारित कर दिया. सरकार के भाषा विभाग कामकाज मामलो के राज्य मंत्री श्री जी. किशन रेड्डी ने बताया कि तीनों भाषाओं को बोलने वालों की संख्या और उन भाषाओं के व्यवहार के महत्त्व को देखते हुए प्रस्तावित बिल को आज मंजूरी दी गई. पंजाबी, गुर्जरी और पहाड़ी भाषाओं को फिलहाल सरकारी कामकाज की सूची में शामिल नहीं किया जा सका. 

पंजाबी भाषा को जम्मू कश्मीर मे सरकारी भाषा का स्तर दिलवाने के लिए आगे आया शिरोमणि अकाली दल आज बेबस और बैकफुट पर नजर आया. तेजतर्रार नेता सुखबीर सिंह बादल और श्रीमती हरसिमरत कौर बादल आज बहस से दूर ही रहें. पार्टी की ओर से सांसद नरेश कुमार गुजराल ने सरकार के निर्णय पर नाराजी प्रकट की. उन्होंने कहा, जम्मू कश्मीर मे सतरह लाख लोग पंजाबी बोलते हैं. लेकिन सरकार ने इस भाषा को ऑफिसियल लैंग्वेज के रूप अस्वीकार कर दिया. रिपब्लिकन पार्टी के नेता श्री रामदास आठवले ने इस समय कहा, कश्मीरी और डोगरी भाषा को सूची मे शामिल करने का निर्णय ठीक हैं. 

बताया जा रहा हैं कि अभी तीन दिन पहले शिरोमणि अकाली दल की नेता हरसिमरतकौर बादल ने कैबिनेट मंत्रिपद का त्यागपत्र सौप दिया था. जिसके चलते भारतीय जनता पार्टी के सभी शीर्ष नेता शिरोमणि अकाली दल से खासे नाराज हो गए थे. इसी नाराजी के चलते जम्मू कश्मीर मे पंजाबी भाषा को आधिकारिक भाषा की सूची में शामिल नहीं किया गया. शिरोमणि अकाली दल के नेताओं की चुप्पी भी संबंधों में बढ़ रहीं दरार की ओर स्पष्ट संकेत कर रहीं हैं. 



शनिवार, 19 सितंबर 2020

सरदार तारा सिंह नहीं रहे !!

सरदार तारासिंह ने दुनिया को अलविदा कहा!

मुलुंड मुंबई क्षेत्र के पूर्व विधायक और भारतीय जनता पार्टी नेता सरदार तारासिंह जी ने तिथि 19-09-2020 की सुबह 8 बजे, मुंबई के लीलावती अस्पताल में अंतिम सांस लीं. अंतिम समय उनकी आयु 81वर्ष थी. वें गुरुद्वारा तखत सचखंड बोर्ड नांदेड़ संस्था के प्रधान के रूप में भी अपनी सेवाएं प्रदान कर चूके हैं. उनके निधन की वार्ता से हजूर साहब, नांदेड़ में भी दुःख प्रकट किया गया. 


(स. तारासिंह पूर्व विधायक)

सरदार तारासिंह जी बीस वर्षों तक पार्षद थे. वहीं तीन बार वें जनता में से विधायक निर्वाचित हुए थे. विधानसभा में उनके कामकाज की शैली सबसे अलग थी. भारतीय जनता पार्टी में उनको उच्चस्तर का नेता माना जाता था. पार्टी की स्थापना के साथ ही वें भाजपा से जुड़े थे. उनके निधन से भाजपा को भी क्षति पहुंची हैं. 

महाराष्ट्र सरकार ने उन्हें वर्ष 2015 में गुरुद्वारा सचखंड बोर्ड का अध्यक्ष नियुक्त किया था. साढे तीन वर्षों तक वें प्रधान बने रहें थे. 2019 के महाराष्ट्र विधानसभा चुनावों में उन्हें टिकिट नकारा गया. जिसके कारण वें राजनीति में थोड़ा पिछड़ गए. लेकिन वें अंतिम समय में भी गुरुद्वारा बोर्ड के सदस्य थे. 

तारासिंह का स्वाभाव मित्रतापूर्ण था और सभी को स्नेह से जोड़ लेना का उनमें हुनर था. नांदेड़ से उनके परिवार का पुराना संबंध था. सभी राजनीतिक पार्टियों के शीर्ष नेताओं के साथ उनके सुदृढ़ संबंध थे. उनके निधन पर सभी ओर से दुःख प्रकट किया जा रहा हैं. 

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गुरुवार, 17 सितंबर 2020

हरसिमरत के इस्तीफे की घोषणा

 हरसिमरत बादल ने इस्तीफा सौंपा  !

सुखबीरसिंह बादल : किसान विरोधी विधेयक का विरोध 

रविंदरसिंघ मोदी 

 

केंद्र सरकार अंतर्गत एन. डी. ए. का पुराना सहयोगी घटक दल शिरोमणि अकाली दल ने आज भाजपा सरकार द्वारा प्रस्तुत किसान विधेयक (आर्डिनेंस) को किसान विरोधी विधेयक कहकर विरोध जताया साथ ही केंद्रीय मंत्री हरसिमरत कौर बादल ने अपने मंत्री पद से इस्तीफा देने का एलान कर दिया. हालाँकि अकाली दल ने एन. डी. ए. से नाता नहीं तोड़ा हैं. शिरोमणि अकाली दल अपनी पार्टी की बैठक में राजनीतिक हालातों की समीक्षा करेगा. उसके बाद ही एन. डी. ए. से अलग होने अथवा साथ रहने का फैसला करेगा. सुखबीरसिंघ बादल ने भाजपा सरकार का विधेयक पास करने के विषय में कहा कि, ये निर्णय किसान विरोधी हैं. इसका विरोध जारी रखेंगे. हरसिमरत बादल के इस्तीफे पर पंजाब भाजपा ने बयान जारी कर कहा कि, शिरोमणि अकाली दल की अपनी मजबूरी हो सकती हैं. उधर दूसरी ओर, इस कदम के पीछे सन 2022 में होनेवाले पंजाब विधानसभा चुनावों की सोची समझी रणनीति से जोड़कर देखा जा रहा हैं. कल ही शिरोमणि अकाली दल के सर्वोसर्वा स. प्रकाशसिंह बादल ने प्रस्तुत विधेयक की सराहना कर उसे किसानों का हितकारी बताया था. लेकिन आज लोकसभा और राजयसभा में अकाली दल के नेताओं ने विधेयक का विरोध कर दिया. हरसिमरतकौर बादल ने सदन समाप्त होने के पश्च्यात पत्रकारों को जानकारी दी कि, उन्होंने लिखित स्वरुप में अपना त्यागपत्र दे दिया हैं. हालांकि केंद्र सरकार ने अभी तक उसे मंजूर नहीं किया हैं. यह इस्तीफा मामला पंजाब में नई राजनीतिक सरगर्मियां पैदा करने के लिए पर्याप्त है. मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदरसिंह ने देरी से उठाया गया एक छोटा सा कदम बताया है. उन्होंने कहा, कांग्रेस तो पहले ही इस बिल का विरोध कर चूकी है. 


महाराष्ट्र सरकार के खिलाफ शिरोमणि अकाली दल मैदान में !!

महाराष्ट्र सरकार के खिलाफ उतरा शिरोमणि अकाली दल !

सिरसा ने कंगना का खुलकर समर्थन किया

 

उड़ता बॉलीवुड !!

रविंदरसिंघ मोदी 

बॉलीवुड में ड्रग के प्रचलन की बात लेकर शिरोमणि अकाली दल बादल के नेता और दिल्ली गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी के अध्यक्ष मनजिंदरसिंह सिरसा ने महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री, महाराष्ट्र सरकार और महाराष्ट्र पुलिस को कटघरे में लाकर खड़ा कर दिया. वहीं नैशनल चैनल्स पर कंगना राणावत का खुलकर समर्थक भी किया. 

श्री सिरसा ने बॉलीवुड में नशे की बात का प्रचलन होने का आरोप लगाकर कहा कि, मैंने महाराष्ट्र पुलिस को एक साल पहले एक वीडियो पेशकर उसमें पार्टी कर रहें बॉलीवुड कलाकारों के खिलाफ नशा प्रतिबंध कानून के तहत करवाई करने की मांग की थी. लेकिन मुंबई पुलिस ने कोई करवाई नहीं की. सिरसा ने करण जोहर, शहीद कपूर और अन्य बॉलीवुड हस्तियों के खिलाफ भी आरोप जड़े कि उन्होंने "उड़ता पंजाब" मूवी बनाकर पंजाब की बदनामी की. 

श्री सिरसा ने कहा, हकीकत में तो उड़ता बॉलीवुड का नजारा देश देख रहा हैं. शिवसेना की सरकार एक महिला (कंगना) का ड्रग्स मामले मे बयान लेना चाह रहीं हैं. इस सरकार में मर्दानगी वाली बात नहीं नजर आ रहीं. आजतक न्यूज़ चैनल पर बृहस्पति वार को हुए दंगल इस चर्चा सत्र में भी सिरसा ने आक्रामक तेवर अपनाते शिवसेना प्रवक्ता श्री किशोर तिवारी को उकसाते हुए कहा, क्या एक महिला के पीछे पड़े हो. तुम (शिवसेना) क्या कर लेगी. रास्ते पर उतर कर दिखाओ ! 

उल्लेखनीय है कि, शिरोमणि अकाली दल, केंद्र सरकार में भागीदार है. उड़ता पंजाब फिल्म प्रदर्शित होने के बाद शिरोमणि अकाली दल के पंजाब, दिल्ली और महाराष्ट्र के नेताओं ने बॉलीवुड के खिलाफ प्रदर्शन किया था. लेकिन उस समय महाराष्ट्र में भाजपा की सरकार थी और श्री देवेंद्र फडणवीस मुख्यमंत्री थे. इसलिए अकाली नेताओं का प्रदर्शन सिमित ही रहा था. पंजाब में फिल्म की रिलीज पर असर हुआ था लेकिन उड़ता पंजाब ने विदेशो में बड़ी कमाई की थी. ये भी एक संयोग है कि शिवसेना के मुखपत्र सामना ने भी उड़ता पंजाब फिल्म के शीर्षक पर आलोचना की थी. एक तरह से शिवसेना की भूमिका उस समय शिरोमणि अकाली दल के समर्थन में दिखाई दी थी. लेकिन आज की उत्पन्न परिस्थिति में शिरोमणि अकाली दल ने शिवसेना के खिलाफ ही मोर्चा खोल दिया हैं. 

मनजिंदरसिंह सिरसा का बयान लगभग सभी समाचार चैनल्स ने मुख्य समाचार के रूप में दिखाया. सभी बड़े चैनल्स ने उन्हें बहस के लिए आमंत्रित किया. जाहिर इसके पीछे किस शक्ति का हाथ हैं ! सिरसा के बयान और उनकी शिवसेना को लेकर भाषा देखकर यह अंदाजा लगाया जा सकता हैं कि शिरोमणि अकाली दल केंद्र की किस तरह से सेवा कर रहा हैं. यह ड्रग्स का विषय बॉलीवुड के लिए समस्या तो बना हुआ हैं लेकिन शिरोमणि अकाली दल इस बात से भी असहमति नहीं जता सकता कि पंजाब में नशे का प्रचलन और कारोबार खत्म हो गया हैं. 




मंगलवार, 15 सितंबर 2020

जम्मू - कश्मीर में "पंजाबी" को सरकारी भाषा का सम्मान मिलना चाहिए

 जम्मू - कश्मीर में "पंजाबी" को सरकारी भाषा का सम्मान मिलना चाहिए 

रविंदरसिंघ मोदी 


इन दिनों जम्मू - कश्मीर में कार्यालयीन भाषा के रूप में पंजाबी भाषा (गुरुमुखी लिपि) को मान्यता देने की व्यापक मांग हो रहीं हैं. पहले जम्मू से उठीं मांग धीरे धीरे पंजाब, हरियाणा होते हुए दिल्ली पहूंच गईं. ता. 2 सितंबर 20 के दिन जम्मू कश्मीर कैबिनेट में भाषा आर्डिनेंस प्रस्तुत हुआ जिसमें प्रदेश के कार्यालयीन सरकारी भाषा के तौर पर कश्मीरी, डोंगरी और हिन्दी को मान्यता प्रदान की गईं. इससे पूर्व वहाँ उर्दू, अंग्रेजी को कामकाज की भाषा के रूप में अधिक प्रयोग में लाया जाता रहा था. यह भाषा आर्डिनेंस (bill) मंजूरी के लिए सांसद में प्रस्तुत किया गया. 

जम्मू - कश्मीर में उपर्युक्त सरकारी भाषाओं में पंजाबी भाषा को शामिल करने की मांग बहुत जोर पकड़ रहीं हैं. शिरोमणि अकाली दल के नेता सुखबीरसिंह बादल ने भी उपर्युक्त विषय में अपना पक्ष प्रस्तुत किया. डॉ. फारुख अब्दुल्लाह ने भी अपनी ख़ामोशी में एक तरह से एनओसी प्रदान कर दी. अब मामला प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के हाथ हैं. भारतीय संविधान में अध्याय 17 अंतर्गत धारा 343 से 351 तक राष्ट्रीय भाषा और प्रादेशिक भाषाओं की रचना, अस्तित्व, उपयोगी और व्यवहार का समायोजन अधिकार प्रस्तुत किये गये हैं. धारा 345 द्वारा प्रस्तुत अधिकारों के वर्णन के मुताबिक धारा 346 और 347 के प्रभाव में प्रदेश (state) की आधिकारिक भाषा प्रस्तावित करने के पूर्ण अधिकार राज्यों को सौपें गए हैं. 

देश में अभी तक 22 भाषाओं को मुख्य भाषा के रूप में चुना गया हैं जिनका किसी भी राज्य में वहाँ की सरकार इच्छित भाषा को सरकारी कामकाज के लिए स्वीकार कर सकती हैं. लेकिन उसके लिए संसद में विशेष ऑर्डिनेंस पास करवाना जरुरी है. उस ऑर्डनेन्स को महामहिम राष्ट्रपति जी द्वारा भी मान्यता प्रदान करना आवश्यक है.  पंजाबी भाषा का शुमार देश की 22 भाषाओं में होने के कारण जम्मू कश्मीर राज्य में उसे आधिकारिक सरकारी भाषा के रूप में मान्यता प्रदान हो सकती है.

पंजाबी भाषा उत्तर पश्चिम में विस्तारित बोली भाषा के रूप में कई सदियों से प्रचलित थीं और आज भी है. पंजाब, हरियाणा, हिमाचल प्रदेश, जम्मू कश्मीर, पाकिस्तान अंतर्गत पंजाब, अफगानिस्तान तक पंजाबी बोली भाषा व्यवहार में प्रस्तुत थीं. साढ़े पांच सौ वर्षों में इस बोली भाषा को गुरुमुखी लिपि भी उपलब्ध हो गईं. पंजाब और हरियाणा राज्यों में पंजाबी को आधिकारिक सरकारी भाषा का स्तर प्रदान हैं. पूर्व में कश्मीर राज्य पर सिख राजा महाराजा हरी सिंघ का साम्राज्य था. जिन्होंने कश्मीर का विलय स्वतंत्रता पश्च्यात भारत गणराज्य में करवाया था. उनके समय में वहाँ पंजाबी भाषा प्रचलित थीं और व्यवहार का हिस्सा थीं. सिखों के षष्ठ गुरु, श्री हरिगोबिन्द साहिब की कर्मभूमि बहुत समय तक कश्मीर रहीं थीं. उससे भी सक्षम पहलु यह माना जाना चाहिए कि, कश्मीरी पंडितों के धर्म को बचाने के लिए सिखों के नवम गुरु श्री तेगबहादुर जी ने अपने शीश का बलिदान दिया था. क्या यह ऐतिहासिक पहलु वर्तमान केंद्र सरकार नजर अंदाज कर सकती हैं?  

आज पंजाब से लेकर दिल्ली तक पंजाबी भाषा प्रचलन में हैं. पूर्व में महाराजा रणजीतसिंघजी के साम्राज्य काल में पंजाबी भाषा अफगानिस्तान तक विस्तारित हुईं थीं. 1960 तक अफगानिस्तान और पाकिस्तान में पंजाबी भाषा और गुरुमुखी लिपि का प्रचलन था. लेकिन बाद में वहाँ के राजनीतिक हालात में परिवर्तन होने के बाद भाषा भी सिमटकर रह गईं. लेकिन कश्मीर के बहाने अब पंजाबी भाषा को विस्तारित करने का एक अवसर उपलब्ध हो रहा हैं. अगस्त 2019 में जम्मू कश्मीर दो राज्यों में विभाजित कर उसमें से लद्दाख को अलग राज्य बनाया गया. जिसके कारण कश्मीर में दुबारा से राज्य की आधिकारिक भाषा की पुनर्रचना हो रहीं हैं. पंजाबी भाषा को कश्मीर और जम्मू में आधिकारिक भाषा का स्तर मिलना न्यायोचित होगा. 





एसजीपीसी टॉस्क फोर्स द्वारा धरना दे रहें जत्थेबंदियों की पिटाई !

 एसजीपीसी टॉस्क फोर्स द्वारा धरना दे रहें जत्थेबंदियों की पिटाई !

मीडिया कर्मियों के साथ हाथापाई 

रविंदरसिंघ मोदी 

अमृतसर श्री दरबार साहब परिसर से सलग्न श्रोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी कार्यालय के बाहर आज एसजीपीसी टॉस्क फ़ोर्स द्वारा वहाँ धरने पर बैठें जत्थेबंदियों पर हमला कर उनकी पिटाई कर देने का एक मामला सामने आया हैं. टॉस्क फ़ोर्स कर्मियों द्वारा पत्रकारों और मीडिया कर्मियों की भी पिटाई कर दी गईं. इस मारपीट घटना को लेकर जहाँ एसजीपीसी के प्रधान भाई गोबिंदसिंघ लोंगोवाल को लेकर रोष का वातावरण बन गया है वहीं घटना के पीछे शिरोमणि अकाली दल के नेताओं की साजिश होने के भी आरोप लगाएं जा रहें हैं. 

उल्लेखनीय है कि, विगत कुछ दिनों से श्री गुरु ग्रंथसाहब जी के 328 बीड साहब के गायब (चोरी) होने का मामला सुर्खियों में हैं. इस विषय में सिख जत्थेबंदियों द्वारा एसजीपीसी से सवाल किये जा रहें हैं. उक्त मामले को लेकर सिख जत्थेबंदियां धरना धरे बैठीं हैं. घटना की गंभीरता देखकर एसजीपीसी कार्यालय के बाहर टॉस्क फोर्स को तैनात कर दिया गया. सोमवार ता. 14 सितंबर को जत्थेबंदियों द्वारा प्रधान भाई गोबिंदसिंघ लोंगोवाल को एक ज्ञापन भी सौंपा गया था. उस समय तनाव का वातावरण बन गया था. 

लेकिन मंगलवार ता. 15 सितंबर की दोपहर के समय अचानक से टॉस्क फोर्स द्वारा धरने पर बैठे लोगों को उठाने का प्रयास किया. जिसके बाद मामला दो गुटों में झड़प और मारपीट तक पहूंच गया. टॉस्क फोर्स द्वारा इस समय घटना का कवरेज कर रहें मीडिया कर्मियों पर भी हमला कर उनकी पिटाई कर दी गईं. पत्रकारों के साथ की गईं हाथापाई की घटना के बाद एसजीपीसी के खिलाफ रोष व्यक्त हो रहा हैं. 

दूसरी ओर श्री गुरु ग्रंथसाहिब के पावन स्वरूपों की चोरी मामले में एसजीपीसी की चुप्पी रहस्य बढ़ा रहीं हैं. आरोप लगाएं जा रहें हैं कि, आज धरना दे रहें जत्थेबंदियों के साथ किये गए दुर्व्यवहार के पीछे शिरोमणि अकाली दल के शीर्ष नेताओं का हाथ हैं. आज हुईं झड़प और मारपीट मामले में भाई गोबिंदसिंघ लोंगोवाल की छवि पर भी सवाल उठ रहें हैं. 

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सोमवार, 14 सितंबर 2020

हिन्दी समृद्धि की ओर

 लेख : हिन्दी दिवस 

उपराष्ट्रपति जी का वो हिंदी में दिया गया संस्मरणीय भाषण !!

भाषा के प्रति सोच में बदलाव जरुरी 

हिंदी समृद्धि की ओर !

रविंदरसिंह मोदी 


बात वर्ष 2017 की है. मैं, हैदराबाद स्थित दक्षिण भारत हिंदी प्रचारसभा  (विश्वविद्यालय) द्वारा खैरताबाद के श्री सत्यसाई ऑडिटोरियम में आयोजित दीक्षांत समारोह में पत्रकार दीर्घा में आमंत्रित पत्रकार अतिथि के रूप में उपस्थित था.  दीक्षांत समारोह को महामहिम उपराष्ट्रपति श्री व्यंकय्या नायडू संबोधित कर रहे थे. उनका हिंदी में दिया गया भाषण सुन कर मैं तो क्या वहाँ उपस्थित हर कोई अभिभूत हो उठा. 

लगभग सौ वर्ष पूर्व महात्मा गांधीजी द्वारा स्थापित संस्था दक्षिण भारत हिंदी प्रचार सभा का यह सोलहवां दीक्षांत समारोह था. कार्यक्रम में आंध्रप्रदेश, तेलंगाना, कर्नाटक, तमिलनाडु, महाराष्ट्र और अन्य स्थानों से प्रतिनिधि, विद्यार्थी और शिक्षा क्षेत्र की बड़ी बड़ी हस्तियां उपस्थित थीं. उपराष्ट्रपति वेंकैया नायडू की उपस्थिति उस कार्यक्रम की गरिमा बढ़ा रहीं थीं. दक्षिण भारत हिंदी प्रचार सभा के पूर्व कुलपति एवं पूर्व राज्य सभा सांसद श्री एच. हनुमंत्तपा, तेलंगाना प्रदेश के उप मुख्यमंत्री श्री महमूद अली, खैरताबाद के विधायक श्री चिन्तल रेड्डी,  द.भा.हि.प्र. सभा के समकुलपति श्री आर.आफ. निरलकट्टी, द.भा.हि.प्र. सभा के तेलंगाना और आंध्र प्रदेश के अध्यक्ष श्री पी. ओबय्या, जनरल सेक्रेटरी एस.जयराम, द.भा.हि.प्र. सभा के सचिव सी.यस. होसगौडर ने मंच साँझा कर हिंदी भाषा की समृद्धि और विकास को लेकर अपनी भावनाएं व्यक्त की थीं. जो हिन्दी भाषा के प्रचार को समर्पित प्रतीत हुईं. 

लेकिन उस भव्य सभा में उपराष्ट्रपति नायडू द्वारा हिंदी में दिया अभिभाषण सुनना मेरे लिए सचमुच जीवन का एक संस्मरणीय समय रहा. उस कार्यक्रम में तेलगु, तमिल भाषा और हिंदी भाषा के जानकर उपस्थित थे जो अपनी जगह सतर्क होकर उनका अभिभाषण सुन रहें थे. श्री नायडू ने अपने संबोधन में निष्पक्ष और प्रामाणिक विचार रखते हुए कहा था, 'दक्षिण भारत के कुछ प्रदेशों में हिंदी भाषा को लेकर आज भी अनावश्यक रूप से विरोध दर्शाया जा रहा हैं. हिंदी भाषा का विरोध करनेवाले, क्यों नहीं समझते कि, हिंदी भाषा में ही वो सामर्थ्य है कि भारत जैसे बहुभाषी छवि वाले देश की संपर्क भाषा के रूप में अंतर्राष्ट्रीयस्तर पर नेतृत्व करें. हिंदी ही एक ऐसी भाषा है जो देश और विदेशों में एक तरल और सरल भाषा बनकर सभी का पक्ष प्रस्तुत कर सकें. हिंदी भाषा परिपूर्ण और संवाद के लिए आसान जान पड़ती है.इसलिए, वास्तविकता यह है कि हिंदी भाषा में विश्व नेतृत्व करने की पूर्ण क्षमता व्याप्त है.' 

श्री नायडू ने अपने बचपन का प्रसंग स्मरण करते हुए उसे सुनाया था जो दक्षिण भारतीय राज्यों में हिंदी को लेकर किये गए विरोध का चित्रण था. नायडू सुना रहे थे, 'जिस समय हमारे पास (दक्षिण) हिंदी का विरोध शुरू हुआ था तब उस आंदोलन में मैं भी शामिल हो गया था. मैं,  आंध्रप्रदेश के नेल्लूर जिले के चावतापलेम गांव में पढ़ाई कर रहा था. पता नहीं कैसे हिंदी विरोधी आंदोलन की तीव्रता हमारे उस छोटे से गांव तक आ पहुंची और हम सब उसमें शामिल हो गए. हमें पता नहीं था कि गांव-गांव हिंदी का विरोध क्यों किया जा रहा था. हम उत्सुकता के प्रवाह में कहिए, उस आंदोलन में कूद पड़े. हमने पता किया कि हिंदी को लेकर हमारे गांव में कहां-कहां कार्य हो रहे हैं. खोजबीन की तो पाया कि, हमारे गांव में केवल दो स्थानों पर ही हिंदी भाषा में लिखीं हुई तख्तियां उपलब्ध थीं. एक तख्ती डाकघर लगी हुई थी और दूसरी रेलवे स्थानक पर. उन तख्तियों पर हिंदी में गांव और स्टेशन के नाम लिखें हुए थें. हमने उस समय आंदोलन कर हिंदी भाषा में लिखीं उन दो तख्तियों पर कालिख मल दी. लेकिन उस घटना पर मन ही मन अफ़सोस उस समय हुआ, जब मैंने सक्रिय राजनीति में कदम रखा. मुझे आज वो सोचकर बहुत अफ़सोस होता है की मैं उस आंदोलन का हिस्सा क्यों बना था. आज लगता है मैंने उन तख्तियों पर नहीं बल्कि अपने ही मुँह पर कालिख मल दी थी शायद.'  

वेंकैया नायडू ने जब प्रमाणिकता से उपर्युक्त बात स्वीकार की, तब उस ऑडिटोरियम में एक अजीब सी शांति छा गई थी. सब लोग टकटकी लगाएं श्री नायडू को देख रहे थे. नायडू भी कुछ गंभीर भाव से सदन को निहार रहे थे. दो पल मौन रहकर श्री नायडू ने अपनी बात आगे बढ़ाई और बोले, 'मैं, आगे चलकर राजनीति में सक्रिय हो गया. राजनीति क्षेत्र में कार्य करते समय मैं यह देखकर हैरान रह गया कि देश में हर स्थान पर हिंदी भाषा का कितना महत्व है. पश्च्यात हिंदी भाषा के प्रति मन में व्याप्त मेरी भावनाएं भी बदलने लगीं. भाषा द्वेष को लेकर मेरी सोच बदल गई. उसके बाद मैंने हिंदी सीखना आरंभ कर दिया. १९९३ के बाद मैंने अच्छे से हिंदी भाषा का अध्ययन शुरू कर दिया. अच्छी हिन्दी सिखने के कारण ही भारतीय जनता पार्टी ने मुझे देश के कई राज्यों में महत्वपूर्ण जिम्मेदारियाँ प्रदान की. आगे चलकर मैं, भारतीय जनता पार्टी का राष्ट्रीय अध्यक्ष भी बनाया गया.'

श्री नायडू ने उस भाषण में , हिंदी भाषा के प्रति प्रचलित गलतफहमियां को लेकर चिंता भी जताई थीं. उन्होंने कहा था, 'हमें 'भाषा विरोध' के बजाय अन्य भाषा सिखने के प्रयास करने चाहिए. देशवासियों को तमिल, मराठी, तेलगु, बंगाली, कन्नड़, उड़िया जैसी भाषाएँ भी सीखनी चाहिए. क्योंकि हमारा देश बहु संस्कृतियों से लबालब है. हमें दो से तीन प्रादेशिक भाषाएँ भी आनी जरुरी हैं. मैं अंग्रेजी का समर्थक नहीं हूँ लेकिन एक भाषा के महत्व और अस्तित्व को समझता हूँ. इसलिए कहूंगा कि, अंग्रेजी से परहेज करने के बजाय अंग्रेजी मानसिकता से परहेज करना बेहतर होगा. 

उपराष्ट्रपति श्री व्यंकय्या नायडू ने एक महत्वपूर्ण बात कही थी जो मेरे संस्मरण में है. उन्होंने कहा था, "मैं जीवन में चार बातों को बहुत महत्व देता हूँ, एक माँ, दूसरी जन्मभूमि, तीसरी मातृभाषा और चौथी बात मातृदेश. यह बातें उच्चारी जाये तो भीतर से आवाज निकलती है. जबकि मम्मी-डैडी जैसे शब्द होठों के सहायता से बोले जाते हैं. हमें सबसे पहले अपनी माँ से प्रेम करना चाहिए, उसका सम्मान करना चाहिए, बाद में मातृभाषा से प्रेम करन चाहिए. यह बातें हमें देशभक्ति सिखाते हैं. मैं, इस विषय में सरकार से भी बात करूँगा कि यू.पी.एस. सी. और बैंकों की परीक्षाएं अलग-अलग राज्यों में उनकी मातृभाषाओं में भी हो. हमारे प्रधानमंत्री हिंदी भाषा के प्रचार प्रसार के लिए दिन-रात प्रयत्न करते रहते हैं. हिंदी के प्रचार - प्रसार के लिए जो आवश्यक होगा वो जरूर किया जायेगा. हमें महात्मा गाँधी और दिनदयाल उपाध्याय जैसे लोग, जिन्होंने हिंदी के लिए काम किया हैं उनके विचार भी पढ़ने चाहिए."

श्री नायडू द्वारा अभिव्यक्त वो भाषण, हिंदी भाषा, संस्कृति, देशभक्ति और चरित्र का प्रामाणिक स्पष्टीकरण प्रतीत हुआ था. उनके द्वारा दिया भाषण हिंदी भाषा के प्रचार - प्रसार के लिए बहुत उपयोगी प्रतीत होता है और एक उदाहरण भी कि हिंदी भाषा के समर्थन में मानसिकता में परिवर्तन भी संभव हैं. सन 1918 में महात्मा गांधी द्वारा इंदौर में पहली बार हिंदी भाषा को राष्ट्रीय भाषा बनाने की दिशा में पहल शुरू की गईं थीं. उसी समय हैदराबाद संस्थान में भी प्रचंड विरोध के बावजूद दक्षिण भारत हिंदी प्रचार सभा का कार्य महात्मा गांधी द्वारा प्रोत्साहित किया गया था. देश स्वतंत्र होने के बाद तिथि 14 सितंबर 1949 को हिंदी को राष्ट्रभाषा के रूप में संविधान सभा ने स्वीकार किया लेकिन पहली बार हिंदी दिवस मनाने की प्रथा सन 1953 से प्रारंभ हुई जो आज भी जारी हैं. 

देश और विदेशो में हिंदी भाषा विस्तारित हो रहीं हैं. आज विश्व की दस सशक्त भाषाओं में हिंदी का भी समावेश माना जा रहा हैं. सन 2001 के भाषा सर्वेक्षण के मुताबिक विश्व में हिंदी बोलने वालों का प्रमाण 41.03 प्रतिशत था, जो सन 2011 के सर्वेक्षण में 43.63 प्रतिशत पाया गया. विगत नौ वर्षों में यह प्रमाण 50 प्रतिशत होने की संभावना मानी जा रहीं हैं लेकिन इसका स्पस्टीकरण वर्ष 2021 में ही घोषित होगा. इसमें कोई दोराय नहीं कि हिंदी भाषा का प्रचलन विश्व में बढ़ रहा हैं. हिंदी अब व्यवहार, व्यापार और सरकार की भाषा बन गई हैं. हमारे प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी जब अमरीका में हजारों, लाखों लोगों को हिंदी में सम्बोधित करते हैं, तब विदेश की धरती पर हिंदी भाषा की समृद्धि का अपने आप सूत्रपात हो ही जाता हैं. इसलिए हिंदी भाषा की समृद्धि, विस्तार और विकास के लिए देश के प्रत्येक नागरिक को सकारात्मक होना जरुरी हैं. उपराष्ट्रपति महामहिम श्री व्यंकय्या नायडू ने जिस तरह से हिंदी भाषा को लेकर सकारात्मक सोच अपनाई हैं वो देश के नागरिकों के सामने एक सक्षम उदाहरण है. 

स. रविंदरसिंह मोदी 
नांदेड़ (महाराष्ट्र)

रविवार, 13 सितंबर 2020

मेरी ख़ामोशी को मेरी कमजोरी ना समझें - उद्धव ठाकरे

 मेरी ख़ामोशी को, मेरी कमजोरी ना समझें - उद्धव ठाकरे

कोविड की दूसरी लहर !

(श्री उद्धव ठाकरे, मुख्यमंत्री)

रविंदरसिंघ मोदी 

महाराष्ट्र में बढ़ती जा रहीं राजनीतिक गतिविधियों और विपक्ष के तेज होते हमलों को जवाब देते हुए मुख्यमंत्री श्री उद्धव ठाकरे ने चुप्पी तोड़ते हुए कहा कि कुछ लोग राजनीति की हद पार कर महाराष्ट्र सरकार और महाराष्ट्र प्रदेश को बदनाम कर रहें हैं. उन्हें अपनी राजनीति से बाज़ आ जाना चाहिए. ये सब बर्दाश्त नहीं किया जायेगा. मेरी ख़ामोशी को कोई मेरी कमजोरी कह कर ना आंके. उद्धव ठाकरे रविवार की दोपहर टेलीविजन मीडिया पर सभी नागरिकों को संबोधित कर रहें थे. उद्धव ठाकरे ने मराठा आरक्षण को लेकर अपनी भूमिका भी स्पष्ट की. बहुत दिनों बाद उद्धव ने आज महाराष्ट्र की जनता और मीडिया का सामना किया. उनका स्वागत है. 

जाहिर हैं कि उद्धव ने अपनी बात रखते हुए इशारों इशारों में दिल्ली में शतरंज की बाजी सजाये बैठें राजनीति के पासेबाजो को भी सीधी चेतावनी दे डाली. दूसरी ओर महाराष्ट्र में राजनीति कर रहें स्थानीय नेताओं को भी अपनी भूमिका से अवगत करवा दिया. विगत दो - तीन माह से महाराष्ट्र राजनीतिक पटल पर अशांत हैं. अभिनेता सुशांतसिंह राजपूत की आत्महत्या मामला, अभिनेत्री रेहा चक्रवर्ती की सी. बी. आई. जाँच का मामला, फिल्म अभिनेत्री कंगना राणावत द्वारा प्रस्तुत की जा रहीं राजनीतिक चुनौतियों का ताजा मामला, विपक्ष की आक्रामकता, अधिवेशन के संसदीय कामकाज का तनाव, सरकार में शामिल मित्र दलों का रवैय्या और मीडिया पर उछाली जा रहीं शिवसेना की छवि जैसे मुद्दों से मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे चिंता में हैं. 

ऐसे में अभी मुंबई में शिवसैनिकों द्वारा एक पूर्व नेवी अधिकार की गई पिटाई का मामला भी शिवसेना को क्षति पहुंचा गया. मराठा आरक्षण भी विषय सरकार के खिलाफ माहौल दिखाई दे रहा हैं.  गली से लेकर दिल्ली तक शिवसेना को आहत करने का प्रयास हो रहा हैं. ऐसे हालातों में शिवसेना प्रवक्ता संजय राउत अकेले ही बोले जा रहे हैं. उद्धव ठाकरे उपर्युक्त विषयों पर चुप्पी साधे बैठें थे. 

आज उद्धव ठाकरे को अपनी उपस्थिति दर्ज करानी पड़ गई कि, है, मैं भी हूँ राजनीति में. मैं भी सवालों का जवाब दे सकता हूँ. सही समय पर उद्धव ठाकरे ने अपनी बात कही. जिसका एक असर तो राज्यपाल महामहिम से मिलने पहुंची कंगना राणावत के व्यवहार में भी देखने को मिला. राज्यपाल से मिलने के कंगना राणावत ने यह कहा कि, मैं एक नागरिक की हैसियत से महामहिम राज्यपाल से मिलने आई थी. उनसे मिलकर मैंने अपने घर पर हुईं बी.एम. सी. की करवाई की शिकायत की हैं. कंगना द्वारा कोई अन्य राजनीतिक बयान नहीं दिया गया. उद्धव के मीडिया में सक्रिय होने का इसे परिणाम कहा जा सकता हैं. 

श्री ठाकरे ने आज महाराष्ट्र में व्याप्त कोरोना संक्रमण के हालातों पर चिंता जताई. उन्होंने कहा कि कोरोना की यह दूसरी लहर लौट आई है और नागरिक इससे सुरक्षित रहे. उन्होंने अस्पतालों में साहित्य सामग्री उपलब्ध करवाने और कोविड संक्रमण का डटकर सामना करने का आश्वासन दिया. महाराष्ट्र में हालात चिंताजनक होने की बात उन्होंने स्वीकार की. प्रदेश के इन हालातों में कुछ लोग सत्ता का खेल, खेलकर महाराष्ट्र में सत्ता परिवर्तन का दांव लगा रहे हैं. इसके लिए बाहर से मोहरे आयात किये जा रहे हैं. 

सुशांतसिंह राजपूत की मौत महाराष्ट्र की सरकार पर प्रहार करने और बिहार के चुनाव अपने पक्ष में प्रभावित करने का अच्छा खेल शुरू हैं. विपक्ष के नेता अपने राज्य से अधिक दिल्ली से अधिक लगाव रखते हैं यह अलग से कहने की बात तो नहीं हैं. लेकिन मुख्यमंत्री और शिवसेना प्रमुख के रूप में उद्धव ठाकरे की मीडिया में वापसी जरुरी हो गई थी. यदि उद्धव ठाकरे इस बात का अहसास नहीं करवाएंगे कि शिवसेना एक आक्रामक राजनीतिक पार्टी है, तो विपक्ष प्रति पल शिवसेना को नोचता रहेगा इसमें संदेह नहीं है. ख़ामोशी में अक्सर बहुत से सवालों के जवाब दबकर रह जाते हैं. फब्तियां कसने वाले ऐसे समय राजनीतिक भड़ास निकाल लेते हैं. उद्धव ठाकरे को अपनी "पुरानी शिवसेना छवि" जागृत करनी होगी. अन्यथा पार्टी का राजनीतिक आधार घट जायेगा. इसलिए इस वापसी का संज्ञान उन लोगों को भी लेना चाहिए जो अपने घर बैठकर शल मीडिया को हथियार बनाने में लगे हुए हैं. शिवसेना पार्टी को पिछले 60 वर्षों का इतिहास हैं. पार्टी का कार्य महाराष्ट्र की बुनियादी मुद्दों से सलग्न हैं. विचलन, संकट और विरोधाभास में भी स्वर्गीय बालासाहब ठाकरे ने शिवसेना की आक्रामकता कम नहीं होने दी थीं यह इतिहास अलग से अवगत करवाने की आवश्यकता नहीं हैं. 


शुक्रवार, 11 सितंबर 2020

महाराष्ट्र में कोरोना संक्रमण चरम पर

 महाराष्ट्र में कोरोना चरम पर 

पॉजिटिव मरीजों की संख्या 10 लाख पार !

रविंदरसिंघ मोदी 

कोरोना संक्रमितों की संख्या को लेकर महाराष्ट्र अब विश्व में पांचवें स्थान पर पहूंच गया है. महाराष्ट्र प्रदेश में 11सितंबर 20 के दिन संक्रमितों की संख्या दस लाख को पार कर गईं. वहीं विगत छह माह से उत्पन्न इस त्रासदी में राज्य में जान गंवा चूके लोगों का आकड़ा 28, 282 हो गया हैं. आज 448 लोगों की जानें चली गईं. वहीं नये मरीजों की आज की संख्या 23446 बताई जा रही हैं. कुलमिलाकर महाराष्ट्र प्रदेश कोरोना के संक्रमण से सराबोर हो चला हैं. 

दूसरी ओर भारत (देश) में शुक्रवार को संक्रमित मरीजों का आकड़ा 46 लाख 46 हजार से अधिक हो चला हैं. सबसे अधिक चिंतावाली बात यह हैं कि एक दिन में 86 हजार 344 केसेस सकारात्मक पाए गए. एक दिन में देश में 1052 मौतें हुई और छह माह की इस त्रासदी में मरनेवालों का अंक 77 हजार 336 पर पहूंच गया. यह चित्र देखने के बाद देश में महाराष्ट्र की स्थिति किस तरह से गंभीर हो गईं हैं उसका अंदाजा लगाया जा सकता हैं. सितंबर का यह माह गंभीर परिणाम दे रहा हैं. इसलिए सभी से यह अपेक्षा की जा सकती हैं कि जितना अधिक समय आप घर पर रहोगे, उतना सुरक्षित रहोगे. 

दूसरी ओर अमरीका में कोरोना संक्रमितों का आकड़ा 65 लाख 98 हजार से अधिक हैं. अमरीका में पॉजिटिव केसेस अब घटने लगे हैं. भले ही वहां मरनेवालों का आकड़ा 1 लाख 96 हजार 470 हैं लेकिन आज के दिन 24 घंटों में मौतों का अंक 152 तक नियंत्रित करने में उन्हें सफलता अर्जित हुई हैं. अमरीका आज कोरोना केसेस में भले एक नंबर पर हैं, लेकिन कोरोना संक्रमण का डटकर मुकाबला किया जा रहा हैं. भारत दूसरे स्थान पर हैं. वहीं तीसरे स्थान पर ब्राजील और चौथे स्थान पर रूस हैं. 

पेरू, कोलम्बिया, दक्षिण अफ्रीका, फ्रांस, स्पेन आदि देशों ने कोरोना संक्रमितों में मरनेवालों का आकड़ा शून्य पर लाया हैं. भारत में भी अन्य देशो की तरह उपाय योजना आवश्यक हैं. विशेषकर महाराष्ट्र की बिगड़ती चली जा रहीं परिस्थिति को नियंत्रित किया जाना जरुरी हैं. 

श्री दशम ग्रन्थ साहब की कथा का विरोध क्यों?

 श्री दशम ग्रन्थ साहब की कथा का विरोध क्यों? 

रविंदरसिंघ मोदी 

तिथि 1/09/2020 से 8/09/2020 के दरम्यान गुरुद्वारा श्री बंगलासाहब, दिल्ली में श्री दशम ग्रंथसाहब अंतर्गत दशमेश पिता श्री गुरु गोबिंदसिंघजी महाराज की आत्मकथा पर आधारित कथा करवाई गईं. दिल्ली सिख गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी द्वारा यह कथा दरबार आयोजित करवाया गया था. इसलिए इस धार्मिक संस्था की सराहना होनी चाहिए, इस कार्य के लिए संस्था के अध्यक्ष विधायक मनजिंदर सिंघ सिरसा भी बधाई के पात्र है. 

श्री गुरु गोबिंदसिंघजी महाराज खालसा पंथ के सृजनहार है. उन्होंने अमृत की दात के साथ पांच ककार अंगीकृत एक विशेष पहरावा भी प्रदान किया. जिसके कारण आज भीड़ में खड़ा सिख (खालसा) आसानी से पहचाना जा सकता है. ऐसे गुरु के आत्मचरित्र 'बचित्र नाटक' की कथा का विरोध तखत श्री दमदमा साहब के पूर्व जत्थेदार (विज्ञानी) भाई केवलसिंघजी द्वारा किया गया है. अखबारों में बयान जारी कर इस कथा का विरोध और श्री दशम ग्रन्थ साहब का विरोध उन्होंने शुरू किया है. वें पंत के विद्धवान माने जाते है ! मुझे लगता है, उनका विरोध संकुचित बुद्धि का उदाहरण माना जाना चाहिए. 

तखत दमदमा साहब वो स्थान है जहाँ श्री गुरु गोबिंदसिंघ जी महाराज ने श्री आदि गुरु ग्रंथसाहब की दुबारा से संपादन करवाई थीं. गुरु जी दमदमा साहब में लगभग चार वर्ष का समय लगाकर गुरूजी ने दुबारा से श्री आदि गुरु ग्रन्थ साहब जी का स्वरुप पूर्ण करवाया था. कहा जाता है कि वहां तैयार की गईं प्रतियों में से एक मुख्य स्वरुप को गुरूजी अपने साथ लेकर श्री हजुरसाहब पहुंचे थे जिस पर महाराज के दस्तखत भी मौजूद थे. तखत दमदमा साहब का इतिहास बहुत कुछ कहता है लेकिन वहां के जत्थेदार रह चूके भाई केवलसिंघ जी उस इतिहास को सुनना नहीं चाहते. लग गए अपने ही गुरु की आत्मकथा का विरोध करने! 

श्री दशम ग्रन्थ साहब सिखों के अमर इतिहास की सबसे बड़ी साक्ष्य है. यह सिख इतिहास का सबसे प्रामाणिक संदर्भ ग्रन्थ है. इससे प्रामाणिक विरासत कोई दूसरी नहीं हो सकती. अपने अंतिम समय में श्री गुरु गोबिंदसिंघ जी महाराज ने श्री आदि गुरु ग्रन्थ साहब को गुरुता प्रदान कर सिखों को आदेश दिया था "अगिया भई अकाल की तबै चलायो पंथ, सभ सिखन को हुकूम हैं गुरु मानियो ग्रन्थ "

यह संदर्भ जाँच लीजिए भाई केवलसिंघ जी ! गुरु जी ने कहीं भी यह नहीं कहा कि श्री दशम ग्रन्थ को "गुरु" का संबोधन दिया जाये. ग्यारहवें गुरु तो वहीं है जिनका चयन गुरु जी ने गुरुतागद्दी के लिए कहा था. हम सब भी वहीं आदेश मानते हैं. लेकिन गुरु जी ने यह भी नहीं कहा कि उनके द्वारा रचे गए श्री दशम ग्रन्थ का तिरस्कार करो. गुरु जी द्वारा बहुत परिश्रम के साथ श्री दशम ग्रन्थ साहब की रचना की गईं जिसमें 1428 पृष्ठ शामिल हैं. इस अद्धभुत ग्रन्थ में सभी धर्मो की जानकारी प्रदान की गईं हैं. गुरूजी के जीवन काल के समय में अध्यात्म क्षेत्र में जितने अवतार और धार्मिक कथाएं प्रचलित थीं, उनको गुरूजी ने अध्यन कर सिखों के लिए इस ग्रन्थ के माध्यम से प्रस्तुत की जो साहित्य का अद्धभुत और बहुगुणी उद्धारहण माना जाना चाहिए. 

खालसा पंथ की दीक्षा में जो अमृतपान करवाया जाता हैं, वो अमृत पांच बाणियों के मंथन से सृजित करने की प्रथा हैं. उन पांच बाणियों से श्री दशम ग्रन्थ साहब की तीन बाणिया भी शामिल हैं, जहाँ तक श्री हजूर साहब की अमृतपान शैली का समावेश हैं. भाई केवलसिंघजी को अमृत की दात प्राप्त करते समय ही विचार करना चाहिए था कि खालसा जीवन शैली का बुनियादी मापदंड श्री दशम ग्रन्थ साहब की नींव पर निर्भर हैं. अब इस उम्र में, क्या सिक्खी त्यागोगे? 


बुधवार, 9 सितंबर 2020

आज मेरा घर टूटा है..

आज मेरा घर टूटा है, 

कल तुम्हारा घमंड टूटेगा!

मुंबई बनीं राजनीति की युद्धभूमि 

रविंदरसिंघ मोदी 


फिल्म अभिनेत्री कंगना राणावत का मुंबई पहुँचने के बाद जारी किया गया बयान बहुत मार्मिक है. कंगना ने अपने बयान में महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री का नाम लिए बगैर कहा, "आज मेरा घर टूटा है, कल तेरा घमंड टूटेगा. जो हुआ अच्छा ही हुआ है मुझे कश्मीरी पड़ितों के दर्द का पता तो चला. मै, अब कश्मीर पर भी एक फिल्म बनाउंगी. " 

जाहिर है कि जिसका मकान टूटता है, उसे तो दर्द होता ही है. शिवसेना सरकार द्वारा कंगना के खिलाफ उठाया गया कदम एक तरह से उसे सहानुभूति प्रदान कर गया. हालांकि बीएमसी ने मकान का कुछ हिस्सा ही ढाया है, लेकिन कंगना को उस करवाई से शोहरत और सहानुभूति मिल गईं. अब कंगना केवल फिल्म अभिनेत्री नहीं बल्कि एक नेता और एक्टिविस्ट के रूप जाने जानी लगी है. इस घटना से कंगना के दिल्ली (गुजरात) कनेक्शन मजबूत हो गए हैं. 


कंगना विषय में शिवसेना पार्टी अब प्रदेश में भी अलग थलग होती नजर आ रही हैं. बीएमसी की करवाई से राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के सुप्रीमो श्री शरद पवार भी नाराज दिखाई दे रहे हैं. वहीं कांग्रेस पार्टी मौन धारण किये हुए है. मुंबई में राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय मीडिया डेरा डाले हुए हैं. एक तरह से मुंबई युद्धभूमि बनीं हुई हैं. आगे क्या होगा इस बात की उत्कंठा सभी को हैं. 

कंगना की बेछूट बयानबाजी ने शिवसेना को आहत कर रखा हैं. मुंबई पहुँचने के बाद पहले बयान में ही उसने उद्धव ठाकरे का नाम लिए बगैर "घमंडी" करार दिया. साथ ही चुनौती भी पेश की कि, आनेवाला कल तुम्हारे लिए ठीक नहीं होगा. कंगना ने आज ही "बाबर " और "बाबर की सेना" जैसे शब्द प्रयोग किये थे. जिससे यदि कोई आहत हुआ होगा तो निश्चित ही श्री उद्धव ठाकरे और उनके निकटतम सहयोगी श्री संजय राउत का नाम अग्रणी हैं. अब कंगना मुंबई पहुँच चुकी हैं तो निश्चित ही मुंबई में उनकी सुरक्षा को लेकर सारी जिम्मेदारी भी महाराष्ट्र सरकार की ही होगी. इसलिए जब तक कंगना मुंबई में रहेगी, तब तक मुंबई राजनीति की युद्धभूमि बनीं रहेगी इसमें कोई दोराय नहीं हैं. 


चल गया हथौड़ा... !

 चल गया हथौड़ा.... !!

रविंदरसिंघ मोदी 

मराठी में एक कहावत बहुत प्रसिद्ध है, "सत्ते पुढे शहाणपण चालत नाही. ". सत्ता जब हाथ हो तो सारे नियम, कानून, कार्यालय, पुलिस और प्रशासन सब कुछ अपने हाथ ! देखिए कंगना राणावत के मुंबई पहुंचने से पहले ही उनके मुंबई के पाली हिल स्थित कार्यालय (बंगले) पर महानगर पालिका ने हथौड़ा चला दिया. अवैध निर्माण और निश्चित लेआउट में बदलाव कर निर्माण कार्य करने के आरोप में यह करवाई की गई हैं ऐसा प्रथमदृश्यनी मामला सामने आया है अथवा लाया गया है. 

जैसे कि विगत कुछ दिनों से कंगना राणावत और महाराष्ट्र सरकार के बीच आरोप - प्रत्यारोप का दौर जारी हैं. इस दरम्यान तिथि 9 सितंबर को कंगना राणावत मुंबई पहुँचने वाली थीं. महाराष्ट्र की तुलना पीओके से करने और मुंबई पुलिस की तुलना बाबर सेना से करने के बाद कंगना ने बुधवार की सुबह चंडीगढ़ से फ्लाइट पकड़ने के बाद इधर मुंबई बीएमसी द्वारा उनके बंगले पर दल - बल के साथ पहुंचकर बुलडोजरयुक्त हथौड़ा चला दिया. 


बीएमसी का कहना हैं कि, कंगना ने बीएमसी में प्रस्तुत निश्चित लेआउट में बदलाव करते हुए निर्माण कार्य किया. जिसकी जानकारी कंगना द्वारा बीएमसी को प्रस्तुत नहीं की गईं. कल अवैध निर्माण कार्य के लिए बीएमसी द्वारा कंगना के कार्यालय पर नोटिस चिपकाई गईं थीं. इससे पहले कि कंगना मुंबई पहुंचती अथवा उनके वकील मुंबई न्यायलय पहुँच पाते, बीएमसी द्वारा करवाई को अंजाम देते हुए अवैध निर्माण के खिलाफ हथौड़ा चला दिया गया. 

बीएमसी की करवाई पर कंगना द्वारा "ऑफिस वहीं बनायेंगे" की बात कही गईं. शिवसेना की तिकड़ी सरकार द्वारा नियोजित रूप से करवाई को अंजाम दिया गया इसमें संदेह नहीं हैं. कंगना ने अवैध निर्माण की बात से साफ इंकार किया हैं. दूसरी ओर महाराष्ट्र सरकार इसे बीएमसी की करवाई बता कर पल्ला झाड़ रहीं हैं. लेकिन जाहिर हैं कि बगैर सरकारी बल के यह सबकुछ संभव नहीं हैं. 

भाजपा नेता आशीष शेलार ने बीएमसी की करवाई पर आक्षेप प्रकट करते हुए मांग की कि, मुंबई के अवैध निर्माण वाले सभी इमारतों की सूची बीएमसी को प्रस्तुत की जाएगी. उन सभी स्थानों पर तुरंत करवाई की जानी चाहिए. भाजपा अब प्रतिदिन अवैध निर्माण के सन्दर्भ में सूचनाएं और सूची बीएमसी को सौंपी जाएगी. नेता प्रवीण दरेकर ने भी शहर के सभी अवैध निर्माण कार्यों पर करवाई करने की मांग की. दूसरी ओर शिवसेना प्रवक्ताओं ने मामले पर मौन धर लिया हैं. 

मंगलवार, 8 सितंबर 2020

"अर्नब" के बहाने "सामना" पर निशाना !

 "अर्नब" के बहाने "सामना" पर निशाना !

रविंदरसिंघ मोदी 

रिपब्लिकन भारत चैनल के सर्वोसर्वा अर्नब गोस्वामी के तेवर इन दिनों देखने योग्य हैं. उनकी भाषा की दबंगई और स्वर में ललकार हैं. ये किसी आम इंसान के लिए नहीं बल्कि महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री और शिवसेना के सुप्रीमो श्री उद्धव ठाकरे के लिए प्रयोग हो रहीं हैं. ये भाषा, यह दबंगई प्रदेश के गृहमंत्री श्री अनिल देशमुख के खिलाफ उपयोग में लाई जा रहीं हैं. 

पत्रकारिता के शीर्ष पर पहुंचकर अर्नब गोस्वामी का महाराष्ट्र के नेताओं के प्रति यह ढ़ीठ रवैय्या स्पष्ट संकेत कर रहा हैं कि यह बोल किसी ने अर्नब गोस्वामी को उधार में दिए हैं. वहीं महाराष्ट्र विधानसभा अधिवेशन में आज नेता विपक्ष श्री देवेंद्र फडणवीस द्वारा यह कहकर अर्नब गोस्वामी का बचाव करना कि, दैनिक सामना में भी प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के खिलाफ अपमानित भाषा का प्रयोग किया जाता हैं ! यह सुनकर बात स्पष्ट हो जाती है कि "अर्नब' को वहीं से बल मिल रहा है, जहाँ से कंगना को "वाई" सिक्योरिटी मिली हैं. 

माजरा स्पष्ट हैं कि दैनिक सामना पर निशाना साधने के लिए अर्नब गोस्वामी के 'बोल' को हथियार बनाया गया हैं. भाजपा के पास महाराष्ट्र की तिकड़ी सरकार को घेरने के लिए एक हाथ में 'अर्नब' तो दूसरे हाथ में 'कंगना' हैं. ये भी तय लग रहा हैं कि 'अर्नब' और 'कंगना' को कमसे कम राज्यसभा का टिकट तो पक्का हो गया हैं. यह दोनों हथियार महाराष्ट्र की वर्तमान सरकार को जितना "डैमेज" करेंगे, उतना दिल्ली में बैठे मोटा भाई खुश हो जायेंगे. मानना पड़ेगा कि मोटा भाई गजब की राजनीति खेल रहे हैं. 


महाराष्ट्र सरकार ने आज अर्नब के खिलाफ विधानसभा में "हक्कभंग" प्रस्ताव पास किया. वहीं कंगना को रोकने के लिए भी कदम उठाये हैं. कल (9 सितम्बर ) को कंगना मुंबई पहुँच रहीं हैं. यदि कंगना मुंबई यात्रा पर पहुँचती हैं तो राजनीतिक उथल पुथल संभव हैं. कल का दिन सामना के संपादक संजय राउत के लिए बहुत अहम हैं. करो अथवा मरो जैसे हालात उनके सामने हैं. देखना होगा कि अब संजय राउत हालात का मुकाबला करने के लिए किस किस हथियार का प्रयोग करते हैं. 

लेकिन यहाँ महाराष्ट्र सरकार कुछ घिरी हुई नजर आ रहीं हैं. पत्रकारों के खिलाफ सरकारीस्तर से दबावतंत्र का प्रयोग होने के आरोप दिल्ली का मीडिया लगा रहा हैं. देश के अन्य हिस्सों से भी यहीं सवाल उठ रहे हैं. ऐसे में मुख्यमंत्री श्री उद्धव ठाकरे अब क्या तिकड़म भिड़ाते हैं देखना होगा. दिल्ली वालों का दांव तो चल गया है. कल क्या होनेवाला है वो भी विशेष ही होगा !

रविंदरसिंघ मोदी 

फिर एक नई शुरुआत

 फिर एक नई शुरुआत..!


विगत एक वर्ष में मैं, पत्रकारिता कार्य में कुछ अलिप्त सा रहा. कुछ लेख लिखने के अलावा पत्रकारिता क्षेत्र में ज्यादा कुछ योगदान नहीं कर पाया. वजह थीं, सितंबर 2019 से अगस्त 2020 तक मैं गुरुद्वारा सचखंड बोर्ड नांदेड़ (श्री हजूरसाहब) इस धार्मिक संस्था में मानद पद पर 'मीडिया एडवाइजर' की भूमिका निभा रहा था. जिसके चलते पूर्ण एक वर्ष जैसे एक्टिव पत्रकारिता को मैंने विराम सा दे दिया था. अब जबकि मै, मीडिया एडवाइज़र की जिम्मेदारी से मुक्त होकर फिर से पत्रकारिता में प्रवेश कर रहा हूँ, तब सभी के साथ और सहकार्य की पूर्ण अपेक्षा कर रहा हूँ.


दशमेश पिता श्री गुरु गोबिंदसिंघजी महाराज के परम आशीर्वाद से मै अपने आप में एक नई चेतना महसूस कर रहा हूँ. इस पावन भूमि के स्पर्श और संतों के आशीर्वाद से मै, अपने पुराने क्षेत्र में कार्य शुरू कर रहा हूँ. सन 1993 से लेकर आज तक लगभग 27 वर्षों की प्रदीर्घ पत्रकारिता में कायम रहना एक कसौटी मानी जानी चाहिए. यह सब गुरु महाराज के आशीर्वाद और संतों के आशीर्वाद से पूर्ण हुआ हैं. आगे भी मेरा भविष्य उन्हीं के आशीर्वाद पर निर्भर रहेगा इसका मुझे अहसास हैं.

आज के दौर में पत्रकारिता क्षेत्र में कार्य करना जीवन का सबसे बड़ा संघर्ष माना जा रहा हैं. कोरोना कोविड - 19 के संक्रमण से समस्त विश्व त्रस्त हैं. आज नौकरियां नहीं मिल रहीं हैं. प्रदेश में लगभग डेढ़ हजार अख़बार इस कोरोना संघर्ष काल में बंद हो चुके हैं. बड़ी संख्या में पत्रकारों ने अपनी नौकरियां गंवाई हैं. प्रिंट मीडिया के प्रचलन पर भी आंच आई हैं. संक्रमण काल में 'ई - पेपर' समाचार पत्र प्रसार प्रणाली को बढ़ावा मिला हैं. ब्लॉग, बुलेटेन, यूट्यूब चॅनेल्स की चलती हो गई. 

इस दौर में मैं भी आज आम पत्रकारों की तरह संघर्षरत हूँ यह कहने में परहेज नहीं करूँगा. लेकिन संतोष इस बात का हैं कि मेरे पास अभी काम उपलब्ध हैं. मराठी, हिंदी और पंजाबी समाचार पत्रों के लिए कार्य आरंभ कर दिया हैं. साथ ही मेरा अपना यू - ट्यूब चैनल "hazursahib today" को भी संचालित कर दिया हैं. आज से ब्लॉग लेखन भी शुरू कर दिया हैं. इसलिए सभी संपादक साहब, वरिष्ठ पत्रकार, मेरे सभी पत्रकार सहकारी, पत्रकार संगठन के पदाधिकारी और सदस्यों के साथ फिर एक नई शुरुआत करते हुए सभी से सहकार्य की अपील करता हूँ. 

बीते एक वर्ष में कुछ लोगों ने मेरी पत्रकारिता की प्रमाणिकता पर अप्रत्यक्षरूप से सवाल उठाये थे. उन्हें यहीं कहना चाहूंगा कि पिछले  एक वर्ष मैं पत्रकारिता कार्य से अलिप्त था. क्योंकि मै एक धार्मिक संस्था में, एक महत्वपूर्ण पद की जिम्मेदारी निभा रहा था. उस पद पर बैठकर बयानबाजी करना मैंने टाल रखा था. क्योंकि उस पद की गरिमा बनाये रखना एक जिम्मेदार और प्रामाणिक अधिकारी का फ़र्ज था. लेकिन अब पुन्हा पत्रकारिता और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता उपलब्ध हैं. ऐसे में अपने क्षेत्र, अपने प्रदेश और सामाजिक एवं विकासात्मक मुद्दों को लेकर मेरी पत्रकारिता जारी रहेगी. पुन्हा आप सबसे सहकार्य की अपील कर नया लेखन प्रारंभ कर रहा हूँ. 

धन्यवाद !"

स. रविंदरसिंघ मोदी, हजुरसाहब. 

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