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गुरुवार, 27 जुलाई 2023

 रविंदरसिंघ मोदी 'नैशनल इंटीग्रेशन एक्सेलेंस अवार्ड 2023 से सम्मानित 

दिल्ली में नैशनल इंटीग्रेशन एक्सेलेंस अवार्ड 2023 से रविंदर सिंघ मोदी को सम्मानित करते हुए सुप्रीम कोर्ट के अधिवक्ता डॉ रोमेश गौतम, ह्यूमन राइट्स कौंसिल के चेयरमैन संजय सिन्हा, राष्ट्रीय संयोजक अरुण बर्मन. 

दिल्ली में सम्पन्न हुआ समारोह 

महाराष्ट्र के नांदेड़ जिले में कार्यरत जानेमाने पत्रकार स. रविंदरसिंघ मोदी को हाल ही में देश की राजधानी दिल्ली में इंटरनेशनल ह्यूमन राइट्स सोशल कौंसिल के तत्वाधान में राष्ट्रीयस्तरीय 'इंटीग्रेशन एक्सेलेंस अवार्ड 2023' प्रदान किया गया. रविंदरसिंघ मोदी को उनके द्वारा विगत 30 वर्षों से हिंदी, मराठी, पंजाबी और तेलगु समाचार पत्रों के लिए की गईं उल्लेखनीय पत्रकारिता और साथ - साथ सामाजिक सेवा तथा शिक्षा क्षेत्र में दिए गए योगदान के लिए पुरस्कृत किया गया. महाराष्ट्र से वें अकेले चयनित किये गए. 

पदमश्री स. जितेंदरसिंघ शंटी, श्रेया राठौर के साथ समारोह में. 

दिल्ली स्थित गांधी पीस फाउंडेशन सभागृह में (ता. 22 जुलाई की शाम) संपन्न उक्त कार्यक्रम में जानेमाने समाजसेवक पदमश्री स. जितेंदरसिंघ शंटी, रोप जंप एथलीट स. जोरावरसिंघ, पुलिस अधिकारी प्रशांत नेमा, सुप्रीम कोर्ट के अधिवक्ता डॉ रोमेश गौतम, समाजसेवी राज गौतम, अभिनेता वरून सूरी, शायर इमरान अहमद, गायक समीर नियाजी, पत्रकार योगेश कौशिक, रेडियो जॉकी राहूल माकिन, कवियत्री काव्यमणि बोरा (आसाम), मनीष सांखला, रमेश जुगरान, लोकेश वर्मा, मुनींद्रनाथ कलिता, श्रेया राठौर, रूपम मुख़र्जी, निधी सिंह को भी राष्ट्रीय पुरस्कार से सम्मानित किया गया. सन्मानार्थियों को सत्कार स्वरुप मोमेंटो, प्रमाण पत्र, बुके और तिरंगापट्टी प्रदान किए गए. 

इस अवसर पर स. जितेंदरसिंघ शंटी ने कहा कि, देशवासियों को एकजुटता की ओर ध्यान देना चाहिए. हम परस्पर सहयोग से देश की सेवा को अंजाम दिया जा सकता हैं. पुरस्कार मिलने पर सेवा करने की प्रेरणा मिलती हैं. उन्होंने कोविड संक्रमण काल में उनके द्वारा दीं गईं सेवाओं का उल्लेख भी किया. पत्रकार रविंदरसिंघ मोदी द्वारा किये गए निवेदन पर श्री शंटी ने कहा कि हजुरसाहिब नांदेड़ में कार्यक्रम रखियेगा मैं जरुर शिरकत करूंगा. डॉ रोमेश गौतम, पंकज कुमार शर्मा ने भी अपने विचार व्यक्त कर पुरस्कार विजेताओं को बधाई दीं. पुरस्कार स्वीकारने के पश्च्यात पत्रकार रविंदरसिंघ मोदी ने आयोजकों के प्रति आभार प्रकट किया. 

कार्यक्रम में जितेंदर सिंघ शंटी को हजुरसाहिब आने का प्रस्ताव देते हुए रविंदर सिंघ मोदी. साथ है टीवी एंकर निधी सिंह 

गौरतलब है कि स. रविंदरसिंघ मोदी विगत 30 वर्षों से हिंदी, मराठी, पंजाबी और तेलगु समाचार पत्रों के लिए अपनी सेवाएं प्रदान कर रहें हैं. पत्रकारिता के साथ साथ उन्होंने सामाजिक सेवा और शिक्षा क्षेत्र में भी योगदान दिया हैं. अनेक उपक्रमों और आंदोलनों में उनका प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष सहभाग रहा हैं. उन्हें पुरस्कार प्रदान होने पर स्थानीय सिख समाज द्वारा उनका अभिनन्दन किया जा रहा हैं. साथ ही मराठवाड़ा के पत्रकार, मित्र परिवार  द्वारा भी अभिनन्दन किया गया. इससे पूर्व भी रविंदरसिंघ मोदी को 'कृष्णाई पत्रकारिता पुरस्कार', तिरंगा एकता पुरस्कार, आल इंडिया एंटी करप्शन सेल का कोरोना वारियर, आदर्श पत्रकार जैसे पुरस्कार प्राप्त हुए हैं. 

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(कार्यक्रम ता. 22 जुलाई, 2023 की संध्या दिल्ली के गांधी पीस फाउंडेशन में संपन्न हुआ )

गुरुवार, 13 जुलाई 2023

 स. रविंदरसिंघ मोदी को राष्ट्रीय पुरस्कार घोषित 

नैशनल इंटीग्रेशन एक्सेलेंसी अवार्ड 2023

मानवाधिकार संगठन की एक सार्थक पहल


नई दिल्ली 13 जुलाई : देश में विभिन्न क्षेत्रों में सराहनीय कार्य करते हुए राष्ट्रीय सद्भाव की मिसाल कायम करने वाले विभूतियों को नेशनल इंटीग्रेशन एक्सीलेंस अवार्ड 2023, सीजन 3 से विभूषित किया जाएगा, ताकि उनका हौसला बड़े और इस दिशा में वह और भी बेहतर कार्य कर सकें। मीडिया पर्सनैलिटी और इंटरनेशनल इक्विटेबल ह्यूमन राइट्स सोशल काउंसिल के चेयरमैन संजय सिन्हा ने संवाददाताओं से बातचीत में बताया कि ' देश के मौजूदा माहौल को देखते हुए यह कदम उठाया जा रहा है, ताकि देश की एकता और अखंडता को खंडित करने वाली ताकतों को मुंहतोड़ जवाब मिल सके। 

ज्ञात हो कि 22 जुलाई, 2023 को नई दिल्ली के दीन दयाल उपाध्याय मार्ग स्थित गांधी पीस फाउंडेशन के प्रेक्षागृह में यह आयोजन होने जा रहा है, जिसमें दिल्ली सहित देश के कई हिस्सों से कई विभूतियां हिस्सा लेने आ रही हैं। उन्हें सम्मानित भी किया जाएगा। कोविड महामारी के दौरान अपनी जान जोखिम में डालकर सैकड़ों लावारिस लाशों का दाह संस्कार करने वाले जितेंद्र सिंह शंटी, भारतीय रोप जंप एथलीट जोरावर सिंह, सीनियर न्यूज एंकर निदा अहमद, आरजे राहुल मकीन, पारा एथलीट दिव्या गोयल, योगा इंस्ट्रक्टर, मॉडल श्रेया राठौर देव, ग्लोबल एजुकेटर रूपम मुखर्जी, स्पोर्ट्स पर्सन एवं स्पोर्ट्स एक्टिविस्ट बालेंद्र मोहन चक्रवर्ती, पत्रकार रवींद्र सिंह मोदी (नांदेड़ महाराष्ट्र), समाज सेवी मुनींद्र नाथ, मधुसूदन मेदी आदि विभूतियां नेशनल इंटीग्रेशन अवार्ड से विभूषित की जाएंगी। 

गौरतलब है कि इंटरनेशनल इक्विटेबल ह्यूमन राइट्स सोशल काउंसिल अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर मानव अधिकारों के प्रति लोगों को जागरूक करने का अभियान चला रहा है। भारत के कई राज्यों में भी तेजी से इसका विस्तार हो रहा है।संस्था के राष्ट्रीय संयोजक और "प्रज्ञा मेल" समाचार पत्र के संपादक अरुण बर्मन भी इस कार्यक्रम को लेकर बेहद उत्साहित हैं। 

महाराष्ट्र के नांदेड़ शहर से विगत तीस वर्षों से हिंदी, मराठी और पंजाबी भाषा में पत्रकारिता कर रहें  स. रवींद्रसिंघ मोदी को उनके पत्रकारिता में दिए गए योगदान और उल्लेखनीय समाज कार्यों के लिए पुरस्कार से सम्मानित किया जायेगा. नांदेड़ शहर में सिख धर्म का पवित्र पावन तखत सचखंड हजुरसाहिब गुरुद्वारा विद्यमान है. इस स्थान से विगत तीस वर्षों से रवींद्रसिंह मोदी समाजाभिमुख पत्रकारिता कर रहें हैं. 

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मंगलवार, 28 फ़रवरी 2023

 डी.पी. सिंघ चावला बनें हरियाणा गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी के सी.ई.ओ. 

सरदार डी. पी. सिंघ चावला,
नवनियुक्त सी.ई.ओ., हरियाणा गुरुद्वारा प्रबंधन समिति

गुरुद्वारा तखत सचखंड श्री हजुरसाहिब बोर्ड कार्यालय के पूर्व अधीक्षक एवं पूर्व ओ.एस.डी. सरदार देवेंद्रपालसिंघ चावला (डी. पी. सिंघ) की हाल ही में नियुक्ति दी हरियाणा गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी अंतर्गत सी. ई. ओ. (जनरल मैनेजर) के पद पर की गईं. हरियाणा की गुरुद्वारा कमेटी के निर्वाचित प्रधान महंत बाबा करमसिंघजी, मीत प्रधान सरदार गुरविंदरसिंघजी धमीजा द्वारा यह जिम्मेदारी सौंपी गईं. 

हरियाणा गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी अंतर्गत 70 से ज्यादा ऐतिहासिक गुरुद्वारों का समावेश है. राज्यस्तर पर कार्यरत इस बोर्ड के प्रबंधन का कार्य बहुत बड़ी चुनौतीभरा है. सरदार डी. पी. सिंघ चावला पूर्व में तखत सचखंड श्री हजुरसाहिब बोर्ड अंतर्गत सुपरिन्टेन्डेन्ट (अधीक्षक) पद की जिम्मेदारी संभाल चूके हैं. उन्होंने पश्च्यात में हज़ूर साहिब बोर्ड में ओ. एस. डी. पद पर भी जिम्मेदारी निभाई थीं. उससे पूर्व डी.पी. सिंघ पंजाब एंड सिंध बैंक के विभागीय प्रबंधक भी रह चूके हैं. 

( हरियाणा गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी )

इस नियुक्ति उपरांत सरदार डी. पी. सिंघ चावला को देश और विदेशों से शुभकामनायें और बधाइयाँ मिल रहीं है. हजुरसाहिब में भी उनकी नियुक्ति पर प्रसन्नता व्यक्त की गईं. एक अनुभवी और अनुशासित अधिकारी के रूप में परिचित स. डी. पी. सिंघ हरियाणा राज्य अंतर्गत ऐतिहासिक गुरुधामों का प्रबंधन और रखरखाव बेहतर बनाएंगे इसमें कोई दो राय नहीं है. हरियाणा गुरद्वारा प्रबंधक कमेटी का गठन कुछ वर्ष पूर्व ही हुआ है. इससे पूर्व हरियाणा राज्य के सभी गुरुद्वारा एसजीपीसी अमृतसर पंजाब अंतर्गत थे. हरियाणा राज्य में 70 से अधिक ऐतिहासिक गुरुद्वारा साहिब विद्यमान है. आशा है डी. पी. सिंघ यहाँ उल्लेखनीय सेवा दर्ज करेंगे. 

सरदार डी. पी. सिंघ ने अपनी नियुक्ति पर हर्ष व्यक्त करते हुए कहा कि, तखत सचखंड श्री हजुरसाहिब में सेवा करने के कारण ही मुझे हरियाणा गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी की सेवा का अवसर और जिम्मेदारी प्राप्त हुई हैं. श्री गुरु गोबिंदसिंघजी महाराज के आशीर्वाद से यह नियुक्ति मिली है. हजुरसाहिब की साधसंगत की शुभकामनायें मेरे साथ हैं जिस कारण एक बड़े पद की सेवा निभाने का अवसर मुझे मिल रहा है. 

रविंदरसिंघ मोदी.. 

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सोमवार, 6 फ़रवरी 2023

"रेलवे इंजन" टक्कर नहीं लें पाया "जीप" से

आंदोलन से पहले ही हिरासत में लिए गए पदाधिकारी !

मनसे पदाधिकारी चिखलवाड़ी चौराहा स्थान से
बीआरएस की सभा की ओर जाते समय 

रविंदरसिंघ मोदी 

बीआरएस पार्टी की सभा उलटने की चेतावनी देनेवाले महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना के जिलास्तरीय पदाधिकारियों को वजीराबाद पुलिस द्वारा सभा से पूर्व ही गिरफ्तार हिरासत में रखा गया था. माना जा रहा था कि, राज ठाकरे की पार्टी मनसे बड़ा विरोध प्रदर्शन करेगी. लेकिन पुलिस ने वक़्त रहते मनसे के पदाधिकारियों पर अंकुश कस दिया. जिसके बाद बीआरएस पार्टी की भव्य सभा मुख्यमंत्री के. चंद्रशेखरराव की प्रमुख उपस्थिति में सम्पन्न हो गईं. 

वजीराबाद पुलिस ने मनसे का रस्ता रोका 

गौरतलब है कि महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना के नांदेड़ जिला इकाई अध्यक्ष मोंटीसिंघ जहागीरदार ने एक प्रेस विज्ञप्ति जारी कर भारत राष्ट्र समिति (बीआरएस) की ता. 5 फरवरी की सभा उलट देने का वक्तव्य जारी किया था. प्रेस विज्ञप्ति में कहा गया था कि तेलंगाना राज्य द्वारा गोदावरी नदी के जल बटवारा में महाराष्ट्र के हिस्से का पानी महाराष्ट्र को नहीं मिले इसलिए जल बटवारा करार को लेकर गुमराह किया है. वहीं बाभली बांध को लेकर भी महाराष्ट्र के साथ सौतेला व्यवहार किया है. महाराष्ट्र की जनता और किसानों के बारे में द्वेष रखनेवाली पार्टी बीआरएस की सभा महाराष्ट्र में नहीं होनी चाहिए. 


बीआरएस पार्टी का चुनाव चिन्ह "जीप"

मनसे की इस चेतावनी का बीआरएस पार्टी के नांदेड़ कार्यक्रम पर कोई असर होता दिखाई नहीं पड़ा. यदि इस विषय को लेकर मनसे प्रमुख राज ठाकरे कोई बयान जारी करते तो संभव होता कि मुख्यमंत्री के.सी.आर. भी कोई भाष्य करते. श्री राव ने इस विरोध पर कोई भाव प्रदर्शित नहीं किया. जिसके बाद यहाँ राजनीतिक गलियारे में कहा जा रहा है कि, मनसे का रेलवे इंजन ठीक से बीआरएस की "जीप" से टक्कर नहीं लें पाया. यह टक्कर कमजोर होने की दो वजह बताई जा रहीं है कि, एक तो बीआरएस पार्टी का "मैनेजमेंट" बढ़िया था और उन्होंने हर पहलु पर पहले ही विचार कर छोड़ा हुआ था. दूसरा कारण यह भी हो सकता है कि, नांदेड़ जिले में महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना की ताकत भी कम है. मुंबई और नासिक शहरों में मनसे की ताकत अधिक है. इस कारण नांदेड़ में मनसे की चेतावनी का खासा असर हो नहीं पाया है. स्थानीय वजीराबाद पुलिस ने मनसे जिलाध्यक्ष मोंटीसिंघ जहागीरदार और अन्य पदाधिकारियों को रास्तें में ही रोककर गिरफ्तार कर लिया. सभा के बाद उन्हें रिहा कर दिया गया. 

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 बीआरएस का आगाज़ तो अच्छा हुआ...!

के. सी. आर. ने भाजपा और कांग्रेस की नाकामियां गिनवाई 

श्री के. चंद्रशेखरराव, मुख्यमंत्री - बीआरएस पार्टी प्रमुख 

रविंदरसिंघ मोदी

भारत राष्ट्र समिति (बीआरएस) की महाराष्ट्र की नांदेड़, महाराष्ट्र में संपन्न ता. 5 फरवरी 2023 की सभा राजनीतिक गलियारों में चर्चाओं का विषय बनीं हुई है. बीआरएस चीफ एवं तेलंगाना राज्य के मुख्यमंत्री श्री के. चंद्रशेखरराव संपूर्ण विषयों के अभ्यास के साथ नांदेड़ में दाखिल हुए थे. उन्होंने जहाँ, प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के वर्तमान प्रशासन पर कई तरह के आक्षेप प्रस्तुत किये वहीं कांग्रेस पार्टी के 55 सालों की सत्ता के दौरान देश को विकासवंचित रखें जाने के कटाक्ष करने से वें पीछे नहीं रहे. बहरहाल, महाराष्ट्र में पहली 'पब्लिक मीटिंग' का आयोजन भव्यता के साथ कर के. चन्द्रशेखरराव ने महाराष्ट्र की जनता को पार्टी में शामिल होने का खुला न्यौता दें दिया. वहीं राजनीति क्षेत्र में कार्यरत कुछ चिरपरिचित चेहरों को बीआरएस में शामिल कर लिया. कुलमिलाकर की इस सभा से बीआरएस पार्टी का आगाज तो बेहतर हुआ है.

श्री राव ने तेलगु भाषिक नेता गोपाल गोरियंटल को
पार्टी में शामिल किया

विशाल मंडप में सभा के दौरान बीआरएस प्रमुख के. चंद्रशेखरराव ने भारतीय जनता पार्टी के मौजूदा केंद्रीय प्रशासन की कामकाज की शैली पर निशाना साधा. उन्होंने कहा, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी हर सरकारी इकाई का निजीकरण करने के पीछे पड़ गए है. एलआईसी इकाई को भी उन्होंने प्रभावित कर देश की जनता को चिंता में डाल दिया है. केंद्र सरकार यदि हर इकाई का निजीकरण करेगी तब सरकार के पास प्रशासकीय काम क्या शेष रह जायेगा. सरकार का "मेक इन इंडिया नहीं, जोक इन इंडिया" चल रहा है. उन्होंने आरोप किया कि, प्रधानमंत्री को अडाणी से नहीं बल्कि किसानों से प्रेम करना चाहिए. 

विदर्भ नेता श्री प्रकाश पोहरे भी बीआरएस में शामिल हुए.

उन्होंने आगे कहा, देश की नदियों में पानी का योग्य संतुलन कायम है. लेकिन उपलब्धता के प्रमाण में पानी का उपयोग सही तरह से उपयोग करने में केंद्र सरकार नाकाम साबित हो रहीं है. हमारे देश में बरसात के दौरान कुल 140 टीएमसी पानी नदियों से बहकर समुद्र में चला जाता है. उस पानी का उपयोग करने की सरकार के पास कोई व्यवस्था ही नहीं है. यदि ठीक से जल नियोजन किया जाए तब आनेवाले सौ सालों तक देश में जल की किल्लत प्रस्तुत नहीं होगी. 

बैठक में उपस्थित बीआरएस के नेतागण 

श्री राव ने महाराष्ट्र का उल्लेख कर कहा कि, महाराष्ट्र में नदियों की संख्या अधिक है. यदि यहाँ की नदियों के पानी का ठीक से सदुपयोग किया जाए तो किसानों के लिए बहुत उपयोगी साबित होगा. यहाँ नदियों पर सिचाई परियोजनाओं को विकसित किया जाना चाहिए. यदि पर्याप्त जल उपलब्ध होगा तब किसान आत्महत्या नहीं करेंगे. यवतमाल जिले में किसानों की सर्वाधिक आत्महत्याएं हुई है. 

नांदेड़ की सभा में उपस्थित
बीआरएस पार्टी पदाधिकारी और कार्यकर्ता 

तेलंगाना में हमने किसानों की समृद्धि को लेकर काम शुरू कर दिया है. तेलंगाना में किसानों सहित जनता को मुफ्त बिजली दीं जा रहीं हैं. हमारे देश में कोयला बड़ी मात्रा में उपलब्ध है लेकिन बिजली उत्पाद में पिछड़े हुए है. आनेवाले सौ वर्षों तक कोयला उपलब्ध हो इस मात्रा में हमारे पास कोयला होकर भी देश में बिजली का उत्पादन नहीं हो पा रहा है. अभी दो लाख 15 हजार मेगावॉट बिजली उत्पाद की क्षमता को 4 लाख मेगावॉट तक बढ़ाया जा सकता है. यदि आनेवाले समय में बीआरएस सत्ता में आई तो किसान और महिलाओं के लिए सुकर शासन स्थापित करेंगे. बीआरएस महिलाओं को भी सत्ता में 33 % भागीदारी प्रदान करेगी.

तेलंगाना की बिजली उत्पादन और सिचाई की
महत्वकांक्षी परियोजना 'कालेश्वरम

उन्होंने कांग्रेस पार्टी को भी आड़े हाथों लेकर कहा कि देश में कांग्रेस पार्टी की 54 वर्षों तक सत्ता थी. कांग्रेस पार्टी ने देश को विकास से वंचित रखा. कांग्रेस की गलत नीतियों के कारण ही आज देश में समस्याएं व्याप्त है. कांग्रेस की नीतियां विकास विरोधी थी. जाहिर है कि नांदेड़ जिला कांग्रेस पार्टी का गढ माना जाता है. इस जिले ने महाराष्ट्र को दो मुख्यमंत्री दिए वहीं केंद्र की राजनीति को भी खासा प्रभावित किया, इस स्थान पर कांग्रेस की आलोचना कर श्री राव ने एक तरह से अप्रत्याशित रूप से नांदेड़ के कांग्रेस नेताओं पर ही निशाना साधा है. 

मुख्यमंत्री केसीआर की सभा को लेकर नांदेड़ शहर में विगत एक माह से उनके पदाधिकारी तैयारी में मशगूल थे. सभा के लिए शहर के हर हिस्से को खंगाला गया था. इस सभा के लिए उचित स्थान बीआरएस को नहीं उपलब्ध हो पा रहा था. कुछ स्थानों पर बीआरएस की सभा के लिए जगह नहीं दिए जाने का विषय भी सामने आया था. आखिर गुरुद्वारा बोर्ड संस्था की जमीन इस सभा के लिए उपलब्ध हो गईं. रविवार की सभा में तेलंगाना, विदर्भ और आसपास के जिलों से हजारों की संख्या में कार्यकर्ता उपस्थित थे. 

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रविवार, 5 फ़रवरी 2023

 इंदरजीतसिंघ गल्लीवाले युग का अंत ! 

भावभीनी श्रद्धांजलि 

इंदरजीतसिंघ गल्लीवाले पूर्व उपाध्यक्ष
गुरुद्वारा सचखंड बोर्ड नांदेड़ 

रविंदरसिंघ मोदी 

रविवार, ता. 5 फरवरी, 2023 की सुबह 7.30 बजे हजुरसाहिब नांदेड़ के स्थानीय नेता स. इंदरजीतसिंघजी गल्लीवाले ने अंतिम साँस लीं और दुनिया से विदा हो गए. उनके देहावसान के साथ ही "गल्लीवाले" नाम के सक्रिय राजनीतिक युग का भी अंत हो गया. सिख समाज ने 74 वर्षीय इस नेता को खो दिया जिसकी शोकसंवेदना सामाजिक परिवेश में प्रसारित हो गई है. रविवार की शाम ही उन्हें पंचतत्व में विलीन किया जायेगा. 

स्व. इंदरजीतसिंघ पिता स्व. रतनसिंघ गल्लीवाले यह नाम हजुरसाहिब की स्थानीय राजनीति में विगत 50 वर्षों से चिरपरिचित रहा है. उन्होंने गुरुद्वारा सचखंड बोर्ड संस्था के चुनाव में जीत हासिल कर बोर्ड के मीत प्रधान के रूप में लंबे समय तक कार्य किया था. सन 1991 से हजुरसाहिब की राजनीति में परिवर्तन आना प्रारंभ हो गया था. उस समय इंदरजीतसिंघ गल्लीवाले ने गुरुद्वारा सचखंड बोर्ड के पूर्व प्रधान स्व. दलबीरसिंघ जाबिंदा के साथ मिलकर उन्होंने समाज में नया राजनीतिक प्रवाह शुरू किया था. उन्होंने सिख समाज की बेरोजगारी दूर करने में सकारात्मक भूमिका अदा की थी. उनकी एक पहचान यह भी थी कि वें किसी विषय पर अपनी बेबाक राय परचे (पॉम्पलेट) जारी कर बयांन कर देते थे. उनकी यह शैली समाज में काफी चर्चित रहीं थी. वहीं बहुत बार उन्हें आलोचनाओं का भी सामना करना पड़ जाता था. 

स्व. इंदरजीतसिंघजी गल्लीवाले युवा आवस्था में पूर्व केंद्रीय गृहमंत्री स्व. शंकरराव चव्हाण के निकटम कार्यकर्ता के रूप में जाने जाते थे. उन्होंने कांग्रेस पार्टी के नांदेड़ शहर अध्यक्ष पद की जिम्मेदारी भी निभाई थी. वहीं उन्होंने महानगर पालिका चुनाव जीतकर पार्षद के रूप में भी कार्य किया था. गोदावरी शुद्धिकरण का विषय उन्होंने लंबे समय तक उठाए रखा था. उनके साथ मुझे भी गोदावरी शुद्धिकरण विषय का अभ्यास करने का अवसर प्राप्त हुआ था. 

जिस समय उन्हें महानगर पालिका चुनावों में कांग्रेस पार्टी द्वारा टिकट नहीं दिया गया, उस समय समाज में सक्रिय रहने वाले स. इंदरजीतसिंघ गल्लीवाले कुछ समय तक जनता दल और राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के साथ भी सक्रिय रहे थे. उन्होंने निर्दलीय के रूप में चुनाव लड़ा था. लगभग 50 वर्षों तक राजनीतिक क्षेत्र में उन्होंने अपने आपको व्यस्त रखा था. उनके साथ बहुत से युवकों ने भी राजनीति क्षेत्र में कदम रखा था और उपोषण और मोर्चो में शामिल हुए. 

पिछले कुछ समय से उन्हें स्वास्थ्य की समस्या से त्रासदी थी. हैदराबाद और अन्य स्थानों पर भी उन उपचार जारी था. आखिर उन्होंने जग से विदा होने का निर्णय लें लिया. उनके निधन पर अपनी ओर से गहरी शोकसंवेदना व्यक्त करता हूँ. 

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शनिवार, 4 फ़रवरी 2023

 क्या बीआरएस के मार्ग में रोड़ा अटकाएगी मनसे? 

बीआरएस की सभा उलटने की चेतावनी जारी!

रविंदरसिंघ मोदी

महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (मनसे) ने भारत राष्ट्र समिति पार्टी की पहली पहल में रोड़ा अटकाने की धमकी जारी की है! राज ठाकरे की पार्टी मनसे द्वारा गोदावरी जल बटवारे में मराठवाड़ा की जनता के साथ अन्याय किये जाने का मुद्दा उठाकर तेलंगाना के मुख्यमंत्री के. चंद्रशेखरराव की सभा उलटने की चेतावनी जारी की गई है. जिसके बाद बीआरएस पार्टी की ता. 5 फरवरी को होने वाली सभा को लेकर अशांति का बिगुल बजना शुरू हो गया है. 

मोंटीसिंघ जहागीरदार, मनसे जिलाध्यक्ष नांदेड़

महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना के नांदेड़ अध्यक्ष मोंटीसिंघ जहागीरदार द्वारा हाल ही में एक प्रेस विज्ञप्ति जारी की गई. जिसमें कहा गया है कि, तेलंगाना की भारत राष्ट्र समिति यानी बीआरएस पार्टी द्वारा नांदेड़ में ता. 5 फरवरी 2023 को एक सभा का आयोजन किया जा रहा है. लोकलुभावने मुद्दों को आगे रखकर तेलंगाना की यह पार्टी महाराष्ट्र की राजनीति में पैर रखने का प्रयास कर रहीं है. लेकिन वास्तव में तेलंगाना इस पार्टी की नीतियां सदैव महाराष्ट्र की जनभावनाओं के खिलाफ रहीं हैं. 

राज ठाकरे, मनसे पार्टी प्रमुख महाराष्ट्र 

प्रेस विज्ञप्ति में मोंटीसिंघ जहागीरदार ने आगे कहा कि, गोदावरी नदी का हिस्सा क्षेत्रफलानुसार महाराष्ट्र में व्याप्त है. महाराष्ट्र में गोदावरी का 49 % प्रमाण व्याप्त है जबकि तेलंगाना की भूमि पर केवल 31 % हिस्सा क्षेत्रफलानुसार विद्यमान है. लेकिन तेलंगाना सरकार द्वारा जल बटवारे को लेकर गलत तथ्य प्रस्तुत किये गए. इस तरह गुमराह किये जाने से तेलंगाना को अधिक पानी का हिस्सा मिल रहा है. सन 1980 में पूर्व न्यायाधीश श्री बच्छाव समिति द्वारा भी इस विषय को अधोरेखित किया था कि गोदावरी नदी के क्षेत्रफल के अनुसार महाराष्ट्र को जल प्राप्ति का अधिकारी मिलना योग्य होगा. लेकिन तेलंगाना (तत्कालीन आंध्रप्रदेश) ने इस विषय में महाराष्ट्र के साथ अन्याय किया. जिससे महाराष्ट्र के किसानों को बार - बार पानी के लिए तरसना पड़ा. इस विषय में नांदेड़ जिले के नेतागण क्यों खामोश है ऐसा प्रश्न भी विज्ञप्ति में उठाया गया है. 

: मनसे की चेतावनी :

महाराष्ट्र की जनता के स्थानीय मुद्दों को लेकर राज ठाकरे की महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना पार्टी अक्सर आक्रमक राजनीति का प्रदर्शन करती रहती है. परप्रांतियों के महाराष्ट्र में अतिक्रमण को लेकर राज ठाकरे ने मराठी जनता के अधिकारों की आवाज़ उठाए रखीं है. अब तेलंगाना में स्थापित बीआरएस पार्टी उनके निशाने पर हैं. मनसे के नांदेड़ जिलाध्यक्ष द्वारा चेतावनी जारी की गईं है कि बीआरएस चीफ मुख्यमंत्री केसीआर को सभा के लिए नांदेड़ पहुँचने पर विरोध किया जायेगा. रविवार को होनेवाली यह सभा उलट दिए जाने की भी चेतावनी जारी की गई है जिसके बाद बीआरएस की होनेवाली सभा को लेकर राजनीतिक गलियारे में प्रश्न उठने लगें है. नांदेड़ शहर के बीचोबीच हिंगोलीगेट के पास गुरुद्वारा के मैदान में यह सभा रखीं गई है. सभा के लिए करोड़ों का भव्य मंडप सजाया गया है. सभा में करीब 20 हजार लोगों के बैठने की व्यवस्था की गईं हैं. इस सभा के लिए तेलंगाना के 31 जिलों से बीआरएस के पदाधिकारी उपस्थित हो रहे हैं ऐसी भी प्राथमिक जानकारी है. यदि सभास्थल पर मनसे पार्टी विरोध प्रदर्शन करने में सफल हो जाती है, तब बीआरएस पार्टी के पहले ही कदम पर अपशकुन प्रभावित हो सकता है ऐसी चर्चा यहाँ जारी है. आनेवाला समय ही बताएगा की मनसे की चेतावनी में कितना प्रभाव है. 

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 कांग्रेस पार्टी से प्रणीतकौर हुई निष्काषित! 

भाजपा में शामिल होने की घोषणा संभव!

सांसद श्रीमती प्रणीत कौर (पटियाला)

रविंदरसिंघ मोदी

पंजाब की राजनीति में एक बार फिर गर्माहट का माहौल बन गया है. कांग्रेस पार्टी द्वारा आखिर पटियाला (पंजाब) की सांसद (कांग्रेस) एवं कैप्टन अमरिंदरसिंह की धर्मपत्नी श्रीमती प्रणीतकौर को पार्टी से निष्काषित करने की अधिकृत घोषणा कर दीं गईं. पार्टी विरोधी कार्रवाइयों को अंजाम देने के "आरोपों" के बाद और "कारण दिखाओ" नोटिस का तसल्लीबक्श जवाब नहीं मिलने के बाद कांग्रेस पार्टी द्वारा मीडिया के नाम प्रसिद्धी पत्रक जारी कर सांसद प्रणीतकौर के निष्काषण की घोषणा कर दीं गईं. 

सांसद प्रणितकौर !

वैसे कांग्रेस पार्टी को यह कदम पहले ही उठाना चाहिए था जब नवंबर 2022 महीने में प्रणीतकौर द्वारा प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी की प्रशंसायुक्त ट्वीट किये गए थे. लेकिन उस समय कांग्रेस नेता श्री राहुल गांधी द्वारा "भारत जोड़ो यात्रा" का आगाज़ किया गया था. अब जबकि आगामी लोकसभा चुनावों के लिए 15 महीनों से भी कम का समय शेष है ऐसे समय कांग्रेस पार्टी का यह निर्णय सोचीसमझी राजनीति का हिस्सा हो सकता है. प्रणितकौर ने कांग्रेस पार्टी द्वारा उठाए गए निष्काषण के निर्णय पर कोई आपत्ती व्यक्त नहीं की है. बल्कि कांग्रेस पार्टी के दायित्व से मुक्त होने का उन्होंने समाधान व्यक्त करना शुरू कर दिया है. जिसका सीधा मतलब यहीं हो सकता है कि आनेवाले सप्ताहभर में श्रीमती भारतीय जनता पार्टी में शामिल होने की घोषणा कर सकती है. 


कांग्रेस पार्टी द्वारा जारी की गईं प्रेस विज्ञप्ति !

कैप्टन अमरिंदरसिंह पिछले वर्ष भारतीय जनता पार्टी में शामिल हुए थे. उनके द्वारा शुरु की गईं "पंजाब लोक कांग्रेस" पार्टी का विलय भी भाजपा में कर दिया गया था. विगत एक सप्ताह से यह भी समाचार सुर्खियों में छाया हुआ है कि कैप्टन अमरिंदरसिंह को महाराष्ट्र का राजयपाल नियुक्त किया जा रहा हैं. इस लिहाज से प्रणीतकौर का भाजपा प्रवेश जल्द हो जाना जायज साबित होगा. आनेवाले 2024 के लोकसभा चुनाव को देखते कैप्टन अमरिंदरसिंह राज्यपाल पद को लेकर गंभीर नहीं है. लेकिन पंजाब में आगामी लोकसभा चुनावों के लिए प्रणितकौर बड़ी भूमिका अदा कर सकती है. 

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रविवार, 29 जनवरी 2023

 बीआरएस किस की नींद उड़ाएगी नांदेड़ में?  

मुख्यमंत्री केसीआर की भव्य सभा की तैयारियां जारी!

रविंदरसिंघ मोदी 

बीआरएस के संस्थापक तेलंगाना के मुख्यमंत्री
श्री चंद्रशेखर राव ! 

भारत की राष्ट्रीय राजनीति में विगत कुछ दिनों से सक्रिय हुईं "भारत राष्ट्रीय समिति" पार्टी अब महाराष्ट्र में पैर पसारने जा रहीं हैं. आनेवाली ता. 5 फरवरी 2023 को तेलंगाना के मुख्यमंत्री एवं बीआरएस पार्टी के संस्थापक श्री चंद्रशेखरराव के नेतृत्व में नांदेड़ की धरती पर एक भव्य सभा का आयोजन किया जा रहा है. जिसकी तैयारियां अंतिम चरण में है. बीआरएस की आगामी सभा को लेकर नांदेड़ के नेताओं में उलझन और विचलन दिखाई दें रहा है. 

नांदेड़ में सभा मैदान में रूप रेखा पर चर्चा करते हुए बीआरएस पार्टी के नेतागण दिखाई दें रहे हैं. 

मुख्यमंत्री केसीआर की आगामी सभा को लेकर महाराष्ट्र की विविध राजनीतिक पार्टियां भी सतर्क हो उठीं हैं. उसी तरह से तेलंगाना की सीमा से सटे नांदेड़ जिले के बड़े बड़े नेता भी इस समय "बीआरएस पार्टी की सभा से बिफरे हुए नज़र आ रहे हैं. दूसरी ओर इस विचलन के संबंध में राजनीतिक पंडित अंकों की जोड़ - तोड़ में जुटे हुए हैं कि बीआरएस पार्टी के आगाज से मराठवाड़ा की राजनीति में क्या परिवर्तन आएगा! बीआरएस किस पार्टी का यहाँ खेल बिगाड़ेगी? 


नांदेड़ जिले पर विगत 70 वर्षों में भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस पार्टी (कांग्रेस) का प्रभाव रहा है. लेकिन भारतीय जनता पार्टी ने भी यहाँ की राजनीति प्रभावित कर छोड़ी हैं. पिछले लोकसभा के नतीजे उसका उदाहरण माने जा सकते हैं. सोलह तहसीलों के बड़े जिले में कांग्रेस, राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी, भारतीय जनता पार्टी, शिवसेना (दोनों धड़े), वंचित अघाड़ी जैसी पार्टियां मतदाताओं में बटीं हुईं हैं. हैदराबाद की एआईएमआयएम पार्टी भी राजनीतिक उलटफेर का कभी - कभी हिस्सा बनती देखीं जाती हैं. वहीं राष्ट्रीयस्तर पर उत्तर भारत में सक्रिय आमआदमी पार्टी के यहाँ पैर नहीं जम पाए हैं. 

तेलंगाना नागरिक आपूर्ति निगम के चेयरमैन स. रविंदरसिंघ 
(करीमनगर) और धर्माबाद के ग्रामीण नेता श्री बाबूराव
जिन्होंने एक माह पूर्व से नांदेड़ जिले में बीआरएस
पार्टी की सभा की तैयारी आरंभ की थी.

बीआरएस पार्टी को महाराष्ट्र में पैर पसारने के लिए कहीं ना कहीं से शुरुआत करनी ही थी. जिसके लिए मुख्यमंत्री केसीआर ने नांदेड़ पर दांव खेला हैं. सवाल यह है कि क्या मुख्यमंत्री केसीआर नांदेड़ के स्थापित राजनेताओं को चुनौती दें पाएंगे? नांदेड़ जिले के सीमावर्ती क्षेत्र के लगभग सौ से अधिक गांवों में बीआरएस को लेकर आकर्षण का वातावरण है. तेलंगाना सरकार द्वारा प्रजा को प्रदान की जा रहीं सुविधाओं के प्रचार - प्रसार से नांदेड़ जिले के सीमावर्ती क्षेत्र के निवासी खासे प्रभावित हैं. 

एक माह पहले की बात है. नांदेड़ के सीमावर्ती जिले के कुछ गांवों की जनता ने जोरशोर से यह मांग उठाई थी कि उनके गांव तेलंगाना राज्य में शामिल कर दिए जाए क्योंकि नांदेड़ जिले में उन्हें पिछड़ा रखा गया हैं. उन्हें अच्छी नागरिक सुविधाओं की पूर्ति नहीं हो पा रहीं हैं. महाराष्ट्र की तुलना में तेलंगाना राज्य में अधिक सुविधाएं मिल रहीं हैं. इसलिए लगभग सौ की संख्या में गांव तेलंगाना में शामिल होना चाहते हैं. किनवट, भोकर, हिमायतनगर, उमरी, धर्माबाद, देगलूर और मुखेड तहसीलों के अनेक ग्रामों की जनता तेलंगाना में जाने के लिए व्याकुल सी दिखाई दीं इसमें कोई संदेह नहीं है. 

यह भी आश्चर्य ही माना जाए कि पूर्व मुख्यमंत्री श्री अशोकराव चव्हाण के निर्वाचन क्षेत्र भोकर के भी कुछ गांव तेलंगाना में जाने को उत्सुक दिखाई दिए. हालांकि भोकर विधानसभा ने महाराष्ट्र को दो मुख्यमंत्री दिए जिनमें श्री अशोकराव चव्हाण और दूसरे उनके पिता स्व. शंकरराव चव्हाण के नाम दर्ज है. ऐसे स्थान पर विकास की दुहाई देकर जनता (मतदाता) जिला ही नहीं बल्कि राज्य छोड़ने की नौबत पर उतर आये तो उसे बड़ी शोकांतिका कहनी चाहिए. यह बात भारतीय जनता पार्टी के सांसद श्री प्रतापराव पाटिल पर और शिवसेना के हिंगोली (नांदेड़ ) लोकसभा के सांसद श्री हेमंत पाटिल के लिए भी एक तरह से चुनौती ही हैं कि उनके निर्वाचन क्षेत्र में मतदाता राज्य सरकार के प्रति असंतोष का भंडा फोड़ने पर उतारू दिखाई दें रहे हैं. 

आनेवाली 5 फरवरी के दिन नांदेड़ शहर के हिंगोलीगेट मैदान में बीआरएस पार्टी की भव्य सभा का आयोजन किया जा रहा है. इस सभा के माध्यम से बीआरएस पार्टी एक साथ कांग्रेस, भाजपा और एआईएमआईएम पार्टी को सीधे चुनौती पेश करेंगी. यदि आगामी 2024 के लोकसभा चुनावों में बीआरएस पार्टी शिरकत करती है तब कांग्रेस और भाजपा के लिए परेशानी खड़ी हो सकती है इसमें कोई दो राय नहीं है. लेकिन देखना यह होगा कि नांदेड़ जिले में बीआरएस पार्टी में कितने लोग शामिल होते हैं. नांदेड़ के शीर्ष नेतृत्व से सीधा लोहा लें ऐसे नेतृत्व बीआरएस में शामिल होंगे क्या. जरूर भारत राष्ट्रीय समिति का इरादा नांदेड़ सहित महाराष्ट्र के नेताओं की नींद उड़ाना होगा. देखना है इस मिशन में मुख्यमंत्री केसीआर कितना सफल होते हैं. 

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शनिवार, 28 जनवरी 2023

 कैप्टन बन सकते है महाराष्ट्र के राज्यपाल!

बेहतर विकल्प 


 रविंदरसिंघ मोदी 

पंजाब के पूर्व मुख्यमंत्री एवं भारतीय जनता पार्टी के सबसे सक्षम प्रभावी नेता कैप्टन अमरिंदरसिंघ महाराष्ट्र के राज्यपाल बनाएं जा सकते है. वर्तमान राज्यपाल महामहीम श्री भगतसिंह कोशियारी द्वारा राजभवन से लौटने की इच्छा जताये जाने के बाद भाजपा नेतृत्व महाराष्ट्र के नये राज्यपाल की खोज में जुट गया था. अब यह विषय सुर्खियों में छाया हुआ है कि अनुभवी नेता कैप्टन अमरिंदरसिंघ को यह जिम्मेदारी सौंपी जा सकती हैं. 


राजनीति में वरिष्ठ और अनुभवी नेता कैप्टन अमरिंदरसिंघ वर्ष 2021 में भारतीय जनता पार्टी में शामिल हुए थे. विगत दो वर्षों से कैप्टन एकतरह से राजनीति की मुख्यधारा से बाहर है. भारतीय जनता पार्टी भी उनके राजनीतिक कद का लाभ लेने में नाकाम रहीं है. लेकिन जैसे ही यह बात चल पड़ी कि राज्यपाल श्रीमान भगतसिंह कोशियारी राजभवन से लौटने का आग्रह कर रहे, वैसे ही यह समाचार भी सुर्खियों में छा गया कि भाजपा नेतृत्व कैप्टन को शीघ्र ही महाराष्ट्र की जिम्मेदारी सौंप सकता है. 

कैप्टन हर दृष्टि से योग्य : 

उल्लेखनीय है कि, स्थानीय पत्रकार स. रविंदरसिंघ मोदी ने तीन माह पूर्व, नवंबर 2022 में ही कैप्टन अमरिंदरसिंह को महाराष्ट्र का राज्यपाल मनोनीत करने की मांग प्रस्तुत की थी. इस आशय के ट्वीट भी जारी किये थे. साथ ही महाराष्ट्र के समाचार पत्रों में भी यह मांग उठाई गई थी.  


यह बेहतर विकल्प है !
कैप्टन अमरिंदरसिंह महाराष्ट्र के राज्यपाल पद के लिए सबसे उपयुक्त व्यक्तित्व है. इस समय 80 वर्ष की आयु में वें पंजाब की राजनीति में कहाँ तक सक्रिय रह पाएंगे. क्योंकि आनेवाले पांच वर्षों में पंजाब की बहुमत वाली आम आदमी पार्टी की सरकार कार्यरत रहेगी. बढ़ती आयु के करण संभवतः पांच वर्ष बाद अमरिंदरसिंह के पास शायद पंजाब का मुख्यमंत्री बनने का अवसर उपलब्ध नहीं हो. भाजपा में 80 वर्ष के बाद नेताओं को राजनीति में अवसर कम ही दिए जाते हैं यह कड़वा सच है. इस दृष्टि से कैप्टन अमरिंदरसिंह को महाराष्ट्र के राज्यपाल पद की चुनौति स्वीकार कर लेनी चाहिए ऐसी चर्चा राजनीतिक गलियारों में चल पड़ी है. 



संभावना व्यक्त हो रहीं है कि आनेवाले एक सप्ताह के भीतर कैप्टन अमरिंदरसिंघ को महाराष्ट्र का राजयपाल बनाया जा सकता है. कैप्टन की संभाव्य नई पारी को लेकर राजनीतिक गलियारे में काफी उत्सुकता छाई हुईं है. 

शुक्रवार, 11 मार्च 2022

अभिनन्दन और शुक्रिया

कर्मचारी भाई - बहन और उनके परिवारों के चेहरों पर खिल गईं मुस्कान!

रविंदरसिंघ मोदी 

श्री हजूरसाहिब बोर्ड के इतिहास में 10 मार्च, 2022 की तिथि संस्मरणीय रूप से अंकित हो गईं है. गुरुद्वारा सचखंड बोर्ड संस्था में कार्यरत 369 डेलीवेजस कर्मचारियों को सेवा में स्थाई करने के निर्णय के तहत उन्हें "सेवा कायम अनुबंध" पत्र सौंपें गए. इन अनुबंध पत्रों का वितरण 10 मार्च, 2022 की शाम गहमागहमी के वातावरण में संपन्न हुआ. जिसके साथ ही अस्थाईत्व से स्थाईत्व सेवा के संभाव्य लाभ को पाने की मंशा से कर्मचारी और उनके परिवारों के चेहरें खुशियों से दमक उठें. कर्मचारियों के चेहरों पर खिलीं उन मुस्कानों का वर्णन बहुत सुखद था. पिछले कुछ वर्षों से बोर्ड अंतर्गत राजनीति से कुद हो चलें कर्मचारी भाई और बहन एक अवसाद के आलम में घिरे हुए थे. कोविड संक्रमण काल की त्रासदी और अन्य स्वास्थ्य समस्याओं से निराशा और असुरक्षा के भाव से कुंठित हुए जा रहें थे वहीं उनके सामने आर्थिक किल्लत की समस्या विकट रूप लें रहीं थीं. बोर्ड में कार्यरत 369 इन कर्मचारियों में बड़ी संख्या में कर्मचारी सेवादार पद के ओहदे पर सेवाएं दें रहें हैं. पश्च्यात में बॉडीगार्ड, क्लार्क, टीचर, टेक्निकल और अन्य पद आते हैं. जिन्हें सेवा करते दो वर्ष पूर्ण हो रहें थे उन्हें गुरुद्वारा बोर्ड के पिछले नियमों के तहत सेवा में कायम करने का निर्णय लिया गया. बल्कि निर्णय के साथ ही तुरंत सेवाकायम अनुबंध पत्र भी सौंप दिए गए. इस तरह का निर्णय अब तक के बोर्ड इतिहास में सर्वथा अनूठा रहा है. 

इस आंदोलन को संतों के आशीर्वाद और समर्थन का स्पर्श भी प्राप्त हुआ. दो से तीन महीनों का संघर्ष संस्मरणीय रहा. अंततः जद्दोजहद और राजनीतिक खींचतान के बीच गुरुद्वारा बोर्ड के तीनों इलेक्टेड सदस्यों और हजूरी खालसा दीवान के नुमाइंदों (सदस्यों) के सामूहिक प्रयासों के चलते कर्मचारियों को सेवा में कायम करने हेतु साहसी निर्णय लिया गया जिसका स्वतंत्र मूल्यांकन करना योग्य ही होगा. इस विशेष कार्य के लिए बोर्ड के प्रधान साहब स. भूपिंदरसिंघ मिनहास को धन्यवाद. साथ ही बोर्ड के तीनों इलेक्टेड सदस्य स. रविंदरसिंघ बुंगाई (सचिव), स. गुरमीतसिंघ महाजन और स. मनप्रीतसिंघ कुंजीवाले तथा सचखंड हजूरी खालसा दीवान के सन्दर्भ से जुड़े (सदस्य) स. गुरचरनसिंघ घडीसाज, स. शेरसिंघ फौजी, स. सुरिंदरसिंघ मेंबर और स. सुरजीतसिंघ फौजी के सामूहिक प्रयत्नों की भरपूर सराहना होनी चाहिए. जिन्होंने इस निर्णय के कार्यान्वयन में भूमिका निभाई. बोर्ड सदस्यों के अलावा भी समाज के कुछ सक्रिय व्यक्तित्व हैं जिन्होंने नियमित रूप से इस विषय का प्रस्तुतीकरण बोर्ड के समक्ष किया. गुरुद्वारा बोर्ड के अधीक्षक स. गुरविंदरसिंघ वाधवा विशेष रूप से बधाई के पात्र हैं. 

साध संगत और गुरुद्वारा के डैलीवेजस एवं बिलमुक्ता कर्मचारी बार-बार सेवा में पक्का करने की मांग कर रहें थे. गुरुद्वारा बोर्ड गठन से ही प्रधान साहब और मेंबर साहिबान से मांग की जा रहीं थीं. सामाजिक कार्यकर्ता स. लखनसिंघ लांगरी पिछले दो वर्षों से इस मांग का पीछा कर रहें थे. उनके तीन से चार निवेदन तो मेरे साथ चर्चा करने के उपरांत तैयार किये और समय समय पर सौपें भी गए. इस समय आक्रमक तेवर लेकर सक्रिय दिखाई दें रहें स. रणजीतसिंघ गिल भी विषय के साथ अंत तक तटस्थ रहें. आंदोलन के अंतिम सोपान में बोर्ड के माजी सचिव स. रणजीतसिंघ कामठेकर, स. लड्डूसिंघ काटगर, स. गुरमीतसिंघ टमाना, युवा कार्यकर्ता "तेजू बादशाह', माजी सदस्य स. राजेंद्रसिंघ पुजारी, स. जसबीरसिंघ बुंगाई, स. मनबीरसिंघ ग्रंथी, स. सरताजसिंघ सुखमनी और नवयुवकों की भरपूर सक्रियता दिखाई पड़ीं. कर्मचारियों में स. संजू सिंघ सिलेदार की सराहना की जानी चाहिए जिसने कर्मचारियों की मांग लेकर संघर्ष किया. कर्मचारियों और मेंबर साहिबान में समन्वय बढ़ाया. मुझसे मिलने के लिए और भी बड़ी संख्या में कर्मचारी भाई आते रहें हैं उनका नाम यहाँ इसलिए अंकित नहीं कर रहा हूँ कि कहीं वें अनिष्ठों की नजरों में खटकने ना लगें. खैर! एक व्यापक सामाजिक मुहीम को शीर्ष पर लें जाने के लिए जिन लोगों ने प्रयास किये हैं उन सभी का बहुत बहुत धन्यवाद. यह सामूहिक प्रयत्न था और सभी का सहयोग और सहभागिता सामान रहीं. मेरे द्वारा कर्मचारियों को न्याय दिलवाने के प्रयास के चलते हजुरसाहिब टुडे ब्लॉग पर कुछ पोस्ट लिखें गए थे, जिनका आशय किसी को व्यक्तिगत रूप से टारगेट करना नहीं था. मेरा लेखन मात्र जागरूकता और न्याय - अधिकार से संबंधित एक संप्रेषण था. यदि उसे पढ़कर किसी की भावनाएं व्यथित हुईं हो तो मैं विनम्रतापूर्वक माफी मांगता हूँ. समाज का एक सामान्य घटक जानकर मुझे माफ कर दें. अंत में एक बार गुरुद्वारा सचखंड बोर्ड के प्रधान साहब, सभी पदाधिकारी, सभी सदस्यों का आभार और धन्यवाद. जो वर्ग, व्यक्ति विशेष इस मांग के समर्थन में नहीं उतरे लेकिन उनकी मौन स्वीकृति रहीं उनका भी धन्यवाद. जो लोग निर्णय के खिलाफ रहें और हैं उनसे निवेदन है कि वें अपना मत परिवर्तन कर सहकार्य करें. सभी कर्मचारियों भाइयों से हाथ जोड़कर निवेदन हैं कि अब तन मन धन से श्री गुरु गोबिंदसिंघ जी महाराज जी के दरबार की सेवा करें. आपके व्यवहार, सेवाभाव और आठ घंटों की सेवा समर्पण से गुरु घर की गुल्लक में इजाफा होना चाहिए. सभी नौजवान कर्मचारी हैं, निश्चित ही दिनरात अच्छी सेवाएं देकर गुरु महाराज जी से ईमानदारी बरतेंगे इसमें कोई दो राय नहीं होनी चाहिए. भूलचूक के लिए दोनों हाथ जोड़कर माफी मांगता हूँ. धन्यवाद !





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मंगलवार, 8 मार्च 2022

गुरुद्वारा बोर्ड बजट में पर्मनन्ट विषय में करें आर्थिक प्रावधान !

रविंदरसिंघ मोदी 

एक एप्रिल की तिथि का प्रसंगावधान बड़ा विचित्र माना जाता हैं. संपूर्ण विश्व में यह तारीख कहीं हास्यास्पद तो कहीं सांसत में चर्चित रहती हैं. इस दिवस को महामूर्ख दिवस के रूप में भी मनाने का प्रचलन है. लेकिन क्या कीजिएगा कि हमारा आर्थिक वर्ष इसी तिथि से प्रारंभ करने की एक प्रथा कार्यरत है. एक एप्रिल तारीख से बजट (आर्थिक प्रावधान प्रकिया) प्रारंभ की जाती है. इसलिए आर्थिक प्रावधान पर सभी की निगाहें टिकी हुईं होती है कि हमें क्या मिलेगा ! निश्चित ही गुरुद्वारा सचखंड बोर्ड कर्मचारियों की निगाहें भी उनके हितों के निर्णय पर टिकी हुईं होगी इसमें कोई दो राय नहीं हैं. 

( फाइल फोटो )

अब कहीं से अंदरूनी रूप इस ख़बर का सूत्रपात हो रहा है कि गुरुद्वारा सचखंड बोर्ड संस्था में कार्यरत डेलीवेजस कर्मचारियों को सेवा में पक्का (परमानेंट) करने के विषय में बोर्ड पदाधिकारियों और सदस्यों में समन्वय प्रस्थापित हो रहा हैं. खबर सकारात्मक हैं. पचास प्रतिशत मेंबर साहिबान परमानेंट के विषय में सकारात्मक हैं. पिछले एक डेढ़ माह से हजुरसाहिब ब्लॉग पर मेरे द्वारा जो भाव व्यक्त हो रहें हैं, उनको लेकर मुझे सैकड़ों लोगों की प्रतिक्रियाएं प्राप्त हो रहीं हैं. कर्मचारी ही नहीं आपितु कर्मचारियों के परिवार और साधसंगत में भी डेलीवेजस कर्मचारियों को सेवा में पक्का करने के विषय में चर्चा जारी हैं. कुछ लोग साल भर से यह मांग लेकर बोर्ड से गुहार लगा रहें हैं. कुछ लोग आनेवाले चुनाव पर निगाहें टीकाकार अब कर्मचारियों की बगल में स्थान बनाना चाह रहें हैं. ठीक हैं चुनाव के लिए सब जायज हैं! बेबस कर्मचारियों को सहयोग करना बेहद जरुरी हैं, इसलिए पिछले कुछ समय से इस विषय में मैं, स्पष्ट मत व्यक्त कर रहा हूँ कि डेलीवेजस कर्मचारियों को पक्का कर राहत दी जानी चाहिए. जिन्हें चाहिए वें श्रेय रख लें, पर गरीब कर्मचारी वर्ग का नुकसान ना करें. यदि कुछ करना हो तो तीन से चार दिनों के समय में कीजिये. कलम ग्यारह का विषय अब नतीजे पर आने वाला हैं. अधिवेशन में कानून संशोधन का विषय रंग ला सकता हैं. उससे पूर्व सन्मानीय बोर्ड सदस्यगण आपस में समन्वय प्रस्थापित कर मा. प्रधान साहब को इस विषय पर राजी करें तो बात बन जाएगी. 

( फाइल फोटो )

इसलिए मैं, हमारे तीनों इलेक्टेड मेंबर साहिबान और सचखंड हजूरी खालसा दीवान के मेंबर साहिबान से हाथ जोड़ कर विनम्र प्रार्थना कर रहा हूँ कि आपकी दस्तखतयुक्त एक "कॉमन नोट" बनाकर कर्मचारियों को सेवा में पक्का करने के विषय में आनेवाले आर्थिक वर्ष 2022 - 2023 के आर्थिक प्रारूप बजट में रखकर संभाव्य राशि का प्रावधान करवाएं. निकट भविष्य में बोर्ड की बजट मीटिंग का होना संभव नहीं लग रहा हैं. बोर्ड के प्रधान साहब द्वारा बजट मीटिंग के आयोजन को लेकर कोई पहल नहीं की जा रहीं है. इसलिए हो सकता है कि बोर्ड का बजट इस बार या तो जिलाधीश साहब की अनुमति से पास किया जाए अथवा नया बोर्ड या कमेटी द्वारा ही मान्यता दीं जाए ! बोर्ड के आर्थिक प्रावधान का भविष्यकालीन प्रभाव देखते हुए, समझते हुए और चिंतन करते हुए कर्मचारियों के विषय में प्रलंबित विषय भी नियमानुसार "विशेष कॉमन नोट" की सहायता से प्रधान साहब अथवा कलेक्टर साहब के पास प्रस्तुत किया जाए. यह खुशखबरी होली से पहले कर्मचारियों को मिल जाए तो निश्चित ही बोर्ड के पदाधिकारी और मेंबर साहिबान सत्कार के पात्र होंगे. अन्यथा एक एप्रिल वाली "प्रथा" की बात लागु हो जायेगी. 


बुधवार, 2 मार्च 2022

 क्या होगा 8 मार्च को?

क्यों मची हैं भागदौड़!

रविंदरसिंघ मोदी 

नांदेड़ से लेकर मुंबई और मुंबई से लेकर अमृतसर तक हलचल मचीं हुईं हैं. कोई उत्सुक हैं तो कोई संदेहास्पद! सबकी निगाहें आनेवाली एक विशिष्ट तारीख को लेकर प्रश्न कर रहीं है. क्या होगा? गुरुद्वारा बोर्ड के प्रधान साहब अस्वस्थ और अनभिज्ञ! मीत प्रधान साहब व्यूहरचना में मशगूल! सेक्रेटरी साहब हैरान - हैरान! समन्वयक साहब जुगाड़ और भागदौड़ में व्यस्त! बोर्ड मेंबर साहिबान इधर - उधर की उधेड़बून में! मैनेजिंग मेंबर साहब की निगाहें कोर्ट कचहरी के अगले इम्तिहान का तोड़ तलाशने में समर्पित! "जो होने वाला हैं" वो "ना हो" इसलिए प्रचंड शक्ति से प्रयास जारी हैं! सबके चेहरे और ऑंखें संभाव्य मामले की गंभीरता को दर्शा रहें हैं. मुंबई और अमृतसर के बीच फोन कॉल्स और कॉल पर कॉल का सिलसिला! सबके दिलों में हलचल तेज कि "सरकार  का अगला कदम क्या हो सकता है गुरुद्वारा बोर्ड के विषय में?"

आने वाली 8 मार्च, 2022 की तारीख गुरुद्वारा सचखंड बोर्ड संस्था के विषय में पता नहीं क्या नया संदेश लेकर आए. गुरुद्वारा सचखंड बोर्ड के पिछले गठन की घटना (ता. 8 मार्च, 2019) को तीन वर्ष पूर्ण हो रहें हैं. नांदेड़ की साधसंगत में उपर्युक्त विषय को लेकर यह उत्सुकता छाईं हुईं हैं आनेवाली ता. 8 मार्च को क्या घटित होने वाला हैं? क्या गुरुद्वारा सचखंड बोर्ड बर्खास्त कर दिया जायेगा? क्या गुरुद्वारा बोर्ड पर नये प्रधान की नियुक्ति की जायेगी? अथवा नया ऐडमिनिस्ट्रेटर बिठाकर "नई समिति" घोषित कर दीं जायेगी? इस ख्याल और सवाल से चेहरों पर हवाइयां उड़ी हुईं.

जैसे कि "बोर्ड कार्यकाल की पूर्ति" पूर्ण हो रहीं है, इसलिए महाराष्ट्र सरकार सीधे - सीधे इच्छित निर्णय ले सकती हैं. बोर्ड पर सरकारी नियंत्रण होने से अब यह बोर्ड कभी भी बर्खास्त किया जाना संभव है. यदि मध्य कार्यकाल में बोर्ड बर्खास्त अथवा सस्पेंड किया जाना हो सरकार को चाहिए कि एक माह पहले औपचारिक सूचना जारी करें. जैसे कि स. भूपिंदरसिंघ मिनहास सरकार द्वारा नियुक्त प्रधान है, इस कारण सरकार को अधिकार प्राप्त है कि प्रधान अथवा प्रधान के अंतर्गत संचालित बोर्ड को बर्खास्त करें. वैसे भी कार्यकाल समाप्त होने के बाद नैतिक रूप से "बोर्ड" बर्खास्त होना ही चाहिए. क्योंकि एक्ट का प्रभाव यहीं कहता है. कानून माननेवालों के लिए यह स्वीकार्य तत्वं भी है. लेकिन बोर्ड की सत्ता में बैठें लोग चाह रहें हैं कि अभी बोर्ड बर्खास्त ना किया जाए. बोर्ड का कोई सदस्य यह नहीं चाहेगा कि बोर्ड बर्खास्त हो, क्योंकि उनका कार्यकाल समाप्त जो हो रहा हैं! 

एक तरफ, बोर्ड में बैठें कुछ लोग यह भी कोशिशें कर रहें हैं कि सरकार उन्हें बोर्ड का "प्रधान" नियुक्त करें! यह भी कोशिश कर रहे हैं कि नये बोर्ड अथवा समिति में उन्हें स्थान मिल जाए. मिनहास बोर्ड को सहयोग करने वाले लोग (नांदेड़ के महारती) बड़ी संख्या में मा. मंत्री महोदय और मंत्रालय के चक्कर काट रहें हैं! खैर! ता. 3 मार्च से महाराष्ट्र विधानसभा का अधिवेशन शुरू हो रहा हैं. चर्चा हैं कि गुरुद्वारा बोर्ड की सत्ता काबिज रखने के लिए मुंबई में जोरशोर से प्रयास जारी हैं कि गुरुद्वारा बोर्ड एक्ट कलम ग्यारह संशोधन रद्द का विषय अधिवेशन में ना प्रस्तुत होने पाए. संशोधन के विषय में राजस्व विभाग की एक्ट संशोधन कमेटी का ड्राफ्ट तैयार हैं लेकिन संदेह है कि वह "ड्राफ्ट" अधिवेशन में पहूंच पायेगा कि नहीं! यदि आगामी अधिवेशन में सरकार द्वारा किया गया पिछला, वर्ष 2015 का संशोधन रद्द करने का निर्णय हो जाता हैं तब बोर्ड में प्रधान को चुनने का अधिकार हमारे सदस्यों को प्राप्त हो जायेगा. शायद हजूरी प्रधान बनाने का सपना साकार हो जाए! एक्ट संशोधन विषय के साथ संभव हैं कि बोर्ड बर्खास्त हो जाए अथवा नई कमेटी की नियुक्ति हो जाए! यह भी संभव है कि इस बोर्ड को एक माह का समय मिल जाए. सरकार चाहे तो इस दौरान जिल्हाधारी साहब का अभिप्राय भी मंगवा सकती है. 

अब उपर्युक्त विषय को लेकर नांदेड़, मुंबई और अमृतसर में तरह - तरह के आशावाद उभरते चलें जा रहें हैं. बोर्ड बचाने के लिए भागदौड़ मची हुईं हैं. 60 पार के लोगों के ब्रेन तेजी से काम कर रहें हैं. यह चर्चा भी जोर पकड़े हुए हैं कि इस समय बोर्ड के कुछ लोगों द्वारा की जा रहीं जद्दोजहद के विषय में बोर्ड के प्रधान साहब को कोई जानकारी तक नहीं हैं! स. भूपिंदरसिंघ मिनहास अस्वस्थ हैं और उपचाराधीन हैं. दूसरी ओर, मुंबई में बैठें एसजीपीसी के लोग गुरुद्वारा बोर्ड को बर्खास्ती से बचाने के लिए पंजाब और दिल्ली से एसजीपीसी और शिरोमणि अकाली दल के नेता मुंबई कूच कराने की तैयारी में जुटें हुए हैं. पहले भी शिरोमणि अकाली दल के नेता बोर्ड बचाने के लिए और कलम ग्यारह को राजनीतिक पेच में फंसने के लिए मुंबई आते रहें हैं. देखें इस बार कौन नया चेहरा अपनी चलाखी दिखाने मुंबई का रुख करता हैं! मुंबईया साहब लोग! इतना सब किसलिए? हजुरसाहिब को लेकर इतनी राजनीतिक जदोजहद और तिकड़मबाजी! कार्यकाल समाप्त होने का सच स्वीकार करना ही चाहिए ना! क्या नये लोगों के अवसर भी खा जाने की सोंच हैं आपकी? 

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शनिवार, 19 फ़रवरी 2022

संतों को आश्वासन देकर मुकर गए गुरुद्वारा बोर्ड के प्रधान!

लेटर तैयार हैं तो देते क्यों नहीं?

स. रविंदरसिंघ मोदी 

(तारीख 18 जनवरी, 2022 के दिन कर्मचारियों के शिष्ट को संतबाबा कुलवंतसिंघ जी और संतबाबा बलविंदरसिंघ जी कारसेवा प्रधान साहब से हुईं बातचित का संदेश प्रेषित करते हुए. - स. रविंदरसिंघ मोदी)

तारीखें बहुत बार, खुद गवाह बन जाती हैं. आनेवाले समय में यही तारीखें गुरुद्वारा सचखंड बोर्ड के प्रधान स. भूपिंदरसिंघ मिनहास से जवाब मांगेंगी. डेलीवेजस कर्मचारियों को सेवा में पक्का करने के विषय में बोर्ड के प्रधान मिनहास द्वारा तखत साहब के जत्थेदार साहिब संतबाबा कुलवंतसिंघजी और श्री लंगर साहिब के मुखी संतबाबा बलविंदरसिंघ जी कारसेवावाले द्वारा डेलीवेजस कर्मचारियों को सेवा में कायम करने संबंध में किये गए संयुक्त आग्रह को एक तरीके से ठुकरा दिया गया हैं. बोर्ड का कार्यकाल समाप्त होने में अब एक महीने से भी कम समय रह गया हैं. अब ना 'बोर्ड मीटिंग' होने की कोई संभावना बन रहीं और ना ही "मिनहास बोर्ड" का कार्यकाल बढ़ने की ही कोई गुंजाईश दिखाई दें रहीं हैं. कहा जा रहा है कि रिकविजिशन फंडा भी नाकाम हुआ है. जिसका अर्थ यही हुआ कि गुरुद्वारा बोर्ड के प्रधान स. भूपिंदरसिंघ मिनहास अपनी कूटनीति में पूरी तरह सफल रहे है. संतों के साथ वायदाखिलाफ़ी कर कर्मचारियों की मांगों को हाशिये पर रखने की उनकी "योजना" सफल हो गईं. काश! राजनीतिक सोच त्यागकर इन डेलीवेजस और बील मुक्ता कर्मचारियों की परेशानियां, उनकी समस्याएं ये "सरकारी प्रधान", मीत प्रधान, बोर्ड के सेक्रेटरी और मेंबर साहिबान समझ पाते ! इन कर्मचारियों के परिवार के दुःखों और उनकी आर्थिक परेशानियों को वें ठीक से समझ पाते. केवल सत्ता के दांवपेच, कोर्ट - कचहरी और आपसी झगड़ों में तीन साल व्यर्थ करने वाले इस वीआईपी कल्चर के "मिनहास बोर्ड" का इतिहास किस स्याही से लिखा जाए यह यह प्रश्न उपस्थित हो रहा हैं. लेकिन मिनहास साहब और उनका बोर्ड सनद रखें कि तारीखें अपना काम कर गईं हैं. आप सभी को साबित कर गईं हैं ! 

(फाइल फोटो 18 -01-2022)

वाकिया आज से ठीक एक महीना पहले, तारीख 18 जनवरी 2022 का है. इस तारीख को डेलीवेजस कर्मचारी भाई - बहन एक शिष्टमंडल के रूप में अपनी फरियाद और मुराद लेकर संतबाबा कुलवंतसिंघ जी और संतबाबा बलविंदरसिंघजी के पास पहुँचे थे कि वें गुरुद्वारा बोर्ड के प्रधान स. भूपिंदरसिंघ मिनहास से दरखास्त करें कि उन्हें (कर्मचारियों) सेवा में कायम किया जाए. कर्मचारियों की प्रार्थना पर जत्थेदार साहब और संतबाबा बलविंदरसिंघजी कारसेवा वाले ने उदार मन से "प्रस्तुत विषय" पर गुरुद्वारा सचखंड बोर्ड के प्रधान स. भूपिंदरसिंघ मिनहास को फोन लगाकर कर्मचारियों की मांगों के संबंध में विस्तार से चर्चा की थीं. जिसके जवाब में श्री मिनहास ने दोनों संतों को फोन पर आश्वासन दिया था कि फ़रवरी 2022 के पहले सप्ताह में "वें" स्वयं नांदेड़ पहुंचकर डेलीवेजस कर्मचारियों की यह मांग पूर्ण करेंगे. बातचीत के बाद मानयोग जत्थेदार जी और संतबाबा कुलवंतसिंघजी द्वारा कर्मचारियों के शिष्टमंडल को यह जानकारी सुनाई गईं. जिसके बाद कर्मचारी भाई - बहन खुश होकर घर लौटें थे. संतबाबा बलविंदरसिंघजी ने भी ख़ुश होकर सभी आशावान कर्मचारियों को आशीषें दीं कि सेवा में पक्का होने का कार्य जल्द जल्द पूर्ण हो जाए.  

(फाइल फोटो 18-01-2022)

फरवरी 2022 का वह 'पहला सप्ताह' गुजर गया! लेकिन प्रधान साहब (मिनहास साहब) ने नांदेड़ का रुख नहीं किया. 5 फरवरी, 6 फरवरी और 7 फरवरी की तारीखें एक के बाद एक कर बीत गईं. दौरा टल गया या टाला गया यह चर्चा चल पड़ी. स्वाभाविक हैं कि कर्मचारियों को खुशियों की सौगात लेकर आने वाले प्रधान साहब का दौरा टल जाने से सभी आशावान कर्मचारियों में बेचैनी बढ़ गईं. बीच - बीच में यह भी चर्चा सुनाई पड़ रहीं थीं कि "साहब" इस बात से ही नाराज हो गए कि कर्मचारियों का शिष्टमंडल यह मांगें लेकर जत्थेदार साहब और संतबाबा बलविंदरसिंघजी के पास प्रस्तुत क्यों हुआ? वर्तमान बोर्ड के कुछ मेंबर साहब भी यहीं सोच रहे थे कि यह निर्णय बोर्ड के प्रधान और मेंबर साहब के अधीन हैं और इसमें बाबाजी कर क्या सकते हैं? उनकी यह सोच भी सही हैं. लेकिन जिस बोर्ड का प्रधान (कार्य प्रमुख) साल भर नांदेड़ नहीं पहुंचता हो और ना संस्था के कर्मचारियों की सुध ही लेता हो, जो हजूरसाहब के लोगों के फोन भी स्वीकार नहीं करता हो, उन महाशय से संपर्क करें तो कैसे? बोर्ड का मीत प्रधान दो साल से अधिक समय नांदेड़ नहीं आया हैं फिर किसी से क्या आस रखीं जाए? चर्चा हैं, प्रधान साहब और मीत प्रधान साहब के नुमाइंदे के रूप में बोर्ड में कार्यरत सेक्रेटरी साहब यह दावा करते हैं कि कर्मचारियों को सेवा में पक्का करने के लिए उनके पास "लेटर" बनकर तैयार हैं. यदि ऐसा है तो पता नहीं किस मुहूर्त का इंतजार किया जा रहा हैं? 

पहली बात तो यह हैं कि तीन सालों से जो लोग कर्मचारियों को सेवा में पक्का करने के लिए झांसें दिए जा रहे हैं, उनके प्रति क्या कर्मचारियों को नाराज होने का भी स्वातंत्र्य नहीं हैं? क्या यह लोग गुलामों की श्रेणी में आते हैं कि उन्हें अपने अधिकार और हक के मामले में आवाज़ उठाने की आजादी नहीं हैं. बोर्ड कर्मचारियों में एक मनोवैज्ञानिक डर व्याप्त हैं कि कहीं उन्हें सेवा से निलंबित तो नहीं कर दिया जाएगा? कहीं उन्हें सेवा से बर्खास्त तो नहीं कर दिया जायेगा? इस तरह का असुरक्षित माहौल इस संस्था में पैदा कैसे हो गया? तबादलों की राजनीति क्यों अक्सर चर्चाओं में रहती हैं !

सत्ता में बैठें मूकदर्शक "साहब" लोगों से हमारा सीधा सवाल है कि वें बताएं कि इन बेबस कर्मचारियों को अपनी मांगें लेकर किसके पास जाना चाहिए था? उन्हें क्या कदम उठाना चाहिए था? क्या कर्मचारी,  प्रधान साहब के ठिकाने ढूंढ़ते हुए मुंबई और औरंगाबाद में धरना देने जातें? क्योंकि वें तो नांदेड़ आ नहीं रहे हैं. बताएं कि, क्या यह डेलीवेजस कर्मचारी, अपनी मांगें लेकर सेक्रेटरी साहब और मेंबर साहिबान के पास नहीं गए थे ? यदि साहब लोग, सोशल मीडिया पर फोटो डलवाकर भूल गए तो कर्मचारियों की क्या खता? बोर्ड में बैठें माई - बाप बताएं कि इन कर्मचारियों को अपनी मांगें लेकर हमारे पूज्य संतों के पास नहीं जाकर, क्या स्वामी बाबा रामदेव के पास जाना चाहिए था? 

मिनहास साहब ! आपके बोर्ड कार्यकाल में बोर्ड की बैठकें नहीं हो रहीं उसके लिए कर्मचारी वर्ग जिम्मेदार हैं क्या? आपके बोर्ड में बगैर मीटिंग के बहुत सारे काम हुए हैं और अभी भी हो रहे हैं. बगैर मीटिंग के कर्मचारियों को ग्रेड दिए गए ऐसे भी उदाहरण हैं. प्रमोशन भी? महंगाई भत्ते भी? बगैर मीटिंग के हर महीने किसी न किसी काम या खरीदी के टेंडर भी जारी हो रहे हैं? प्रधान साहब और मीत प्रधान साहब, बोर्ड संचालन कार्य में किस तारीख को क्या हुआ हैं वो तो बोर्ड में ही दर्ज हैं. सुपरिन्टेन्डेन्ट साहब के पास सब लेखा-जोखा तो होगा ही. फिर इन कर्मचारियों को सेवा में पक्का करने के विषय में पिछले तीन सालों से टालमटोल क्यों चल रहा हैं ? आपको सीधा सा उत्तर देना हैं कि इन कर्मचारियों की मांग आप पूर्ण करेंगे या नहीं? ताकि कर्मचारी वर्ग झूठी आस में ना रहें. कर्मचारियों के हिस्से में बार - बार हताशा ना आने पाए, इस विषय की जिम्मेदारी प्रधान साहब की हैं, सिर्फ प्रधान साहब की. जो काम सात मेंबर साहब की दस्तखत से पूर्ण होता हो उसके लिए अतिरिक्त भूमिका की आवश्यकता नहीं रह जातीं. बोर्ड मीटिंग की आस पर फार्मूला के तहत सुपरिन्टेन्डेन्ट साहब कर्मचारियों को पक्का करने का आदेश पत्र जारी कर, विषय को आनेवाले बोर्ड की मीटिंग के लिए प्रस्तावित कर सकते है. मन में करने की इच्छाशक्ति हो तो सब संभव है "साहब", पहल तो कीजिये !

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गुरुवार, 17 फ़रवरी 2022

तेलंगाना में सिख नाबालिगा के साथ हैवानियत !

दुष्कर्मी हत्यारों को फांसी दो !

रविंदरसिंघ मोदी 

(हजूरसाहब, नांदेड़ में हजूरी साधसंगत घटना के प्रति रोषप्रदर्शन करते हुए?!)


हैदराबाद, तेलंगाना स्थित सुभाष नगर में 14 फरवरी की रात एक सतरह वर्षीय लड़की (नाबालिगा) के साथ दुष्कर्म कर उसकी निर्ममता के साथ हत्या कर दी गई. सिख समाज (सिखलीगर) समाज की इस युवती के साथ सामूहिक रूप से बलात्कार की घटना अमानवीय हैं. घटना के 48 घंटे बीत जाने पर भी अपराधी पुलिस गिरफ्त से बाहर हैं. लेकिन इस घटना का संज्ञान अभी तक ना गृह मंत्रालय ने लिया हैं और ना ही महिला आयोग ही जागा हैं. सबसे आश्चर्यकारक बात यह है कि मीडिया में भी यह घटना कहीं सुर्खियों में दिखाई नहीं पड़ रहीं हैं. 

नांदेड़ स्थित जिल्हाधिकारी कार्यालय के सामने रोषप्रदर्शन में शामिल महिला और पुरुष)

उपर्युक्त घटना को लेकर नांदेड़ (महाराष्ट्र) में स्थित सिख समुदाय में रोष का वातावरण बना हुआ हैं. हजूरी सिख संगत के माध्यम से नांदेड़ के जिल्हाधिकारी के नाम ज्ञापन प्रस्तुत कर घटना लिप्त आरोपियों के खिलाफ सख्त करवाई करने की मांग की गई. इस विषय में जिल्हाधिकारी कार्यालय के सामने रोष प्रकट किया गया. इस रोष प्रदर्शन के समय महिला, पुरुष और बच्चें भी शामिल थे. 

जिल्हाधिकारी कार्यालय में निवासी उपजिलाधिकारी को ज्ञापन प्रस्तुत करते हुए साधसंगत)

इस रोष प्रदर्शन का नेतृत्व कर रहे ज्ञानी तेगासिंघजी ने सुभाष नगर निवासी नाबालिगा की मौत से जुड़े कईं पहलुओं पर प्रश्नं उपस्थित किये. उन्होंने कहा कि एक नाबालिगा का अपहरण कर उसके साथ दुष्कर्म किया गया, उसे निर्ममता के साथ मौत के घाट उतारा गया  लेकिन हैदराबाद पुलिस द्वारा मामले की सुध नहीं लीं गईं. इस घटना में शामिल सभी आरोपियों को गिरफ्तार कर उन्हें फांसी की सजा दीं जानी चाहिए. स. सचिंदरसिंघ शाहू ने भी प्रस्तुत ज्ञापन पर संयुक्त रूप से प्रश्न को प्रस्तुत किया. स. करणसिंघ चंदन ने अपनी भावनाएं व्यक्त करते हुए कहा कि, पुलिस चाहे तो एक घंटे में जाँच पूर्ण कर आरोपियों को दबोच सकती हैं. लेकिन एक अल्पसंख्यक समुदाय की बेटी की मौत पर अन्याय किया जा रहा हैं. इसलिए सिखों के रास्तों पर उतरने की प्रतीक्षा ना करें और तुरंत आरोपियों को गिरफ्तार कर न्याय दिया जाए. स. कश्मीरसिंघ भट्टी ने घटना में शामिल आरोपियों को गिरफ्तार कर उन्हें फांसी की सज़ा देने की मांग की. 

तखत सचखंड श्री हजूर साहब गुरुद्वारा के सामने हुए रोष प्रदर्शन के  अवसर पर स. लड्डूसिंघ काटगर, स. कश्मीरसिंघ भट्टी, स. लखनसिंघ लांगरी, जसबीरसिंघ मल्ली, राजासिंघ बावरी, निरंजनसिंघ कलानी, मीराकौर टाक, सतनामकौर बावरी, गुरविंदरसिंघ रंधावा, हरबंस सिंघ मल्ली, सतबीरकौर गाड़ीवाले, बेबीकौर सिद्धू, पुरबकौर सहित बड़ी संख्या में महिला और पुरुष उपस्थित थे. 

सोनू कौर को न्याय मिलना चाहिए : रविंदरसिंघ मोदी


मृतक सोनुकौर जिस दरिंदगी का शिकार हुईं हैं उसे शब्दों में बयान करने में दिक्कत हो रहीं हैं. अल्पसंख्यक सिख सिखलीगर समुदाय की इस नाबालिग बेटी को इंसाफ दिलाने में मीडिया, समाचार पत्र और सामाजिक संघठन अलिप्त रह गए. हैदराबाद, सिकंदराबाद, आर. आर. जिल्हा सहित तेलंगाना में सिखों की आबादी महज 20 हजार के आसपास हैं. जातीय जनसंख्या का आंकड़ा कमजोर दिखाई देने के कारण और जिस स्थान पर यह घटना घटित हुईं हैं उस परिसर में बाहुबलियों के राजनीतिक प्रभाव के आगे सोनूकौर की मौत केवल एक प्रदर्शन बनकर रह गईं हैं. इस विषय को राष्ट्रीयस्तर पर प्रस्तुत करने के लिए व्यापक जनांदोलन की आवश्यकता हैं. देश में वर्ष 2012 में निर्भया कांड हुआ था. उस समय सारा देश एकजुट हुआ था. तेलंगाना में भी एक वर्ष पूर्व एक डॉक्टर युवती के साथ दुष्कर्म की घटना के बाद देश दहल गया था. लेकिन सोनुकौर की मौत की घटना पर कोई नहीं जागा. महिला संघटन, महिला आयोग, गृह मंत्रालय, अल्पसंख्यक आयोग ने भी कोई भाव प्रदर्शित नहीं किये हैं. तेलंगाना की साधसंगत के प्रयास सराहनीय हैं कि वें संघर्ष को उठाये रखें हुए हैं. यह विषय न्याय तक पहुँचे यहीं हमारी सभी की सामूहिक मांग हैं. 

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