तखत स्नान त्यौहार का प्रचार प्रसार जरुरी
रविंदरसिंघ मोदी
सिख धर्मियों के देश में पांच 'तखत साहब' विद्यमान हैं। जिनमें से सिर्फ हजुरसाहिब स्थित 'तखत सचखंड श्री हजुर अबचल नगर साहब' स्थान पर सामूहिक रूप से सेवा के माध्यम से 'तखत स्नान' मनाया जाता हैं। दिवाली से पूर्व तखत स्नान की सेवा यह परंपरा से होती आ रहीं है। लेकिन मेरा आकलन है कि तखत स्नान की सेवा सामूहिक रूप से शुरू करने की पहल सन 1840 के बाद ही हुईं होगी। वैसे गोदावरी से जल लाकर अंगीठा साहब को स्नान करवाने की परंपरा तो तीन शताब्दियों से चली आ रहीं हैं।
शेर ए पंजाब महाराजा रणजीतसिंघजी द्वारा तखत साहब की इमारत यानी दरबार साहब का निर्माण शुरू करवाया गया। सन 1838 से 1840 के दरम्यान ही तखत साहब की इमारत बनकर पूर्ण रूप से तैयार हुईं थीं. इमारत निर्माण की सेवा 1831 से 1832 में प्रारंभ होने की बात बताई जाती हैं। यदि तखत स्नान की सामूहिक सेवा सन 1840 के समय शुरू हुईं होगी तब उस घटना को शुरु होकर 184 साल का समय हो रहा हैं। इतने लंबे अरसे तक तखतस्नान सेवा सहभागिता का विस्तारित होता चला जाना अपने आप में एक इतिहास है। तखत साहब की संपूर्ण इमारत को स्वच्छ कर दीपमाला, गुरुतागद्दी श्री गुरु ग्रन्थसाहिब जी और परलोकगमन त्यौहार मनाने का निर्णय क्रान्तिकारी माना जाना चाहिए। उस दौर में जल की बहुत किल्लत भी पेश हुईं होगी।
जल समस्या से निपटने के लिए तखत साहब की इमारत निर्माण से पहले, परिसर में दो से तीन कुएं खुदवाए गए थे। उन्हें बाउली भी कहा जाता हैं। उस समय पानी के लिए वो कुएं प्राकृतिक स्रोत थे। लेकिन कुएं के पानी की क्षमता सीमित होने के कारण तखत स्नान पर्व के लिए साधसंगत जी की सहभागिता सेवा के माध्यम से गोदावरी नदी से पानी लानें का धार्मिक निर्णय अमल में लाया गया। पश्च्यात यह परंपरा बन गईं। जिसकी अनुपालना वर्तमान समय में भी बदस्तूर जारी है।
हजुरसाहिब में मनाये जानेवाले तखत स्नान (इशनान) सेवा का विषय आज तारीख में विश्वभर के सिख श्रद्धांलुओं में चर्चित विषय है। क्योंकि हजुरसाहब के अलावा अन्य किसी तखतसाहब में इस तरह के जोश और उत्साह के साथ इस तरह का कोई पर्व नहीं मनाया जाता। हजुरसाहब में हजारों की संख्या में श्रद्धालु एक साथ सेवा में शामिल होते हैं। तखत साहब से गोदावरी नदी नगीनाघाट आधा किलोमीटर से ज्यादा अंतर पर विद्यमान है। यह ना तो ज्यादा है और ना तो कम है। पैदल चलकर सेवा की जाए उतनी अच्छी दूरी यहाँ उपलब्ध हैं। इस कारण भी इस सेवा में बड़ी संख्या में श्रद्धालु शामिल होते हैं।
तखत स्नान पर्व एक भिन्न और उत्साहपूर्ण त्यौहार है। यहाँ सेवा करते समय श्रद्धालू, तखत साहब की पवित्रता और गोदावरी माता की पवित्रता से जुड़ जाते हैं। एक तरह से दोनों स्थानों के पुण्य वातावरण की अनुभूति श्रद्धालु प्राप्त करता हैं। इस समय, गुरु महाराज जी के ऐतहासिक शस्त्रों के दर्शन करने का एक दुर्लभ अवसर सभी को प्राप्त होता हैं। इमारत की स्वछता करने का भाग्य प्राप्त होता हैं। इस अनूठे पर्व का प्रचार प्रसार बहुत जरुरी है। कहा जाता है कि गोदावरी नदी का नाभिस्थल नांदेड़ में है। नाभि यह आत्मा का केंद्र होता है। एक तरह से गोदावरी माता की आत्मा यहाँ बसती है।
ऐसे पवित्र स्थान पर तखत स्नान जैसा त्यौहार भव्य रूप में मनाया जाता है। वैसे गोदावरी नदी पर इतना विशाल त्यौहार किसी अन्य शहर या घाट पर नहीं मनाया जाता है। त्रम्बकेश्वर में गोदावरी की महाआरती का कार्यक्रम होता है लेकिन वो पर्व भव्य नहीं होता है। नांदेड़ में मनाया जानेवाला तखतस्नान पर्व भव्य त्यौहार है। लेकिन इस संबंध में नांदेड़ जिले के निवासियों को भी अधिक जानकारी नहीं है। इसलिए तखत स्नान पर्व का प्रचार प्रसार करना और जनमानस को इस त्यौहार के साथ जोड़ना समय की मांग है। तखत स्नान पर्व का इतिहास और इस परंपरा की जानकारी नांदेड़ जिला गजेट में शामिल की जानी चाहिए। महाराष्ट्र सरकार और नांदेड़ जिला प्रशासन को इस त्यौहार को लेकर सकारात्मक सोच अपनानी होगी।
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